एक राज्य स्तरीय टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खानपुर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) हरिगढ़ का औचक निरीक्षण किया। इस टीम में डॉ. राकेश गोचर (डिप्टी डायरेक्टर), जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश नागर, डॉ. आदिल और गिरीश कुमार (एनओ) जैसे सदस्य शामिल थे, जिन्होंने दोनों स्वास्थ्य संस्थाओं की व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान, टीम ने लेबर रूम, वार्ड, ऑपरेशन थियेटर (ओटी), स्टोर, डिलीवरी डाटा सेंटर (डीडीसी), प्रयोगशाला (लैब) और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (एमसीएचएन) गतिविधियों की जांच की। उन्होंने संस्थानों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, साफ-सफाई, रिकॉर्ड संधारण, दवा उपलब्धता और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की। टीम ने स्वास्थ्य संस्थाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने, रिकॉर्ड संधारण को अद्यतन रखने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य कार्मिकों को आमजन को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया गया। राज्य स्तरीय टीम ने संचालित विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन कर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए और सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार करने पर बल दिया।
एक राज्य स्तरीय टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खानपुर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) हरिगढ़ का औचक निरीक्षण किया। इस टीम में डॉ. राकेश गोचर (डिप्टी डायरेक्टर), जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश नागर, डॉ. आदिल और गिरीश कुमार (एनओ) जैसे सदस्य शामिल
थे, जिन्होंने दोनों स्वास्थ्य संस्थाओं की व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान, टीम ने लेबर रूम, वार्ड, ऑपरेशन थियेटर (ओटी), स्टोर, डिलीवरी डाटा सेंटर (डीडीसी), प्रयोगशाला (लैब) और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (एमसीएचएन) गतिविधियों की जांच की। उन्होंने संस्थानों में उपलब्ध स्वास्थ्य
सेवाओं, साफ-सफाई, रिकॉर्ड संधारण, दवा उपलब्धता और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की। टीम ने स्वास्थ्य संस्थाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने, रिकॉर्ड संधारण को अद्यतन रखने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। इसके
अतिरिक्त, स्वास्थ्य कार्मिकों को आमजन को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया गया। राज्य स्तरीय टीम ने संचालित विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन कर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए और सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार करने पर बल दिया।
- सूमेर कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे अचानक मौसम का मिजाज बदला और तेज बारिश शुरू हो गई। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे लोगों को इस अप्रत्याशित बरसात से भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली। ठंडी हवाओं के साथ हुई इस बारिश ने पूरे मौसम को सुहावना बना दिया, जिससे आमजन और पशु-पक्षियों दोनों को सुकून मिला। लंबे अंतराल के बाद हुई इस बारिश से क्षेत्र में खुशी का माहौल बन गया है। खेतों में पर्याप्त नमी आने से किसानों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू होने की उम्मीद जगी है, और वे अब खेतों की तैयारी में जुट सकते हैं। इस बारिश को कृषि कार्यों के लिए एक अत्यंत शुभ संकेत माना जा रहा है, जिसने किसानों के मन में नई आशा का संचार किया है। क्षेत्र में लंबे समय बाद हुई इस अच्छी बारिश ने नई उम्मीद जगा दी है और किसान अब अच्छी फसल की कामना कर रहे हैं।3
- राजस्थान के झालावाड़ जिले के खानपुर थाना क्षेत्र स्थित गोलाना गांव में शुक्रवार को प्लॉट के एक विवाद ने खूनी मोड़ ले लिया, जहाँ एक भतीजे ने अपने चाचा नेमीचंद रेगर (पुत्र किशनलाल) पर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल नेमीचंद को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतक नेमीचंद के पिता किशनलाल ने अपने ही पोते पर हत्या का आरोप लगाते हुए बताया कि प्लॉट को लेकर परिवार में काफी दिनों से विवाद और कहासुनी चल रही थी। इस मामले को परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने कई बार समझाने और शांत कराने का प्रयास किया था, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ और आखिरकार एक हिंसक घटना में बदल गया। नेमीचंद अपने परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे, और उनके पीछे उनकी पत्नी, दो बेटे और तीन बेटियां हैं। परिजनों के अनुसार, उनका एक बेटा पैरालाइज्ड है, जबकि एक बेटी न बोल सकती है और न ही सुन सकती है। इस दुखद घटना से परिवार का सहारा छिन गया है, जिससे उनके सामने एक गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो गया है। जमीन के इस विवाद ने रिश्तों को भी शर्मसार कर दिया है। फिलहाल, खानपुर थाना पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और आरोपी की तलाश में जुटी है।1
- किसानों को खाद्य सामग्री लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जहाँ उन्हें एक कट्टे खाद्य के साथ एक अटैचमेंट भी लेना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण किसान विवश महसूस कर रहे हैं।1
- छीपाबड़ौद में शहीदे कर्बला हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिये निकाले गए।1
- झालावाड़ में हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुस्लिम समुदाय द्वारा मातमी त्यौहार मुहर्रम मनाया गया। इस अवसर पर जिला मुख्यालय झालावाड़ और झालरापाटन शहर में दर्जनों की संख्या में ताजिए निकाले गए, जिन्हें देखने के लिए लोगों का भारी हुजूम उमड़ा। त्योहार के दौरान पूरे जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त किए। शहर के विभिन्न इलाकों से निकले ये ताजिए बड़ा बाजार स्थित सीमेंट रोड पर पहुंचे, जहाँ मातमी धुन पर लोगों ने हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने ताजियों के नीचे से गुजरकर मन्नतें मांगी और अपनी अकीदत के फूल पेश किए। दोपहर बाद, कड़ी सुरक्षा के बीच, सभी ताजिए कतारबद्ध होकर कर्बला के लिए रवाना किए गए, जहाँ देर रात उन्हें ठंडा किया जाएगा। कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मुहर्रम के दौरान डीएसपी और एसएचओ सहित लगभग 300 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किया गया था। पूरे मार्ग की निगरानी ड्रोन के माध्यम से की जा रही थी, और नदी किनारे एसडीआरएफ की टीम भी तैनात की गई थी। इसके अतिरिक्त, हर एक ताजिए के साथ एक पुलिस जवान को लगाया गया था। किसी भी विद्युत-संबंधी हादसे से बचाव के लिए पूरे मार्ग की विद्युत आपूर्ति भी बंद करवा दी गई थी।4
- यह खबर नाभि जटका प्रयोग के संबंध में है।1
- बारां जिले के छीपाबड़ौद उपखंड क्षेत्र के ढोलम पंचायत के सुल्तानपुरा निवासी सतीश नामक युवक का शव 16 जून को राईं की घाटी में एक पेड़ से लटका मिला था। परिजनों और समाज बंधुओं ने इसे हत्या बताते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। अखिल भारतीय प्रजापति कुम्भकार महासंघ के जिलाध्यक्ष ईश्वर प्रजापति के नेतृत्व में मृतक के पिता और समाज के पदाधिकारियों ने इस संबंध में उपखंड अधिकारी और छीपाबड़ौद थानाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। महासंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष देवकिशन प्रजापति ने बताया कि मृतक के पिता हेमराज कुम्हार के अनुसार, सतीश दोपहर करीब 12 बजे पानी-पताशी बनाने के लिए लकड़ी लेने अपनी मोटरसाइकिल से छीपाबड़ौद गया था। जब वह देर शाम तक घर नहीं लौटा, तो उसकी तलाश की गई। शाम को राईं के जंगल में बकरी चराने वालों ने पेड़ से लटके शव की सूचना गांव में दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पेड़ से उतारा। परिजनों को दृढ़ आशंका है कि सतीश की जानबूझकर हत्या करने के बाद उसके शव को पेड़ से लटकाया गया था। परिजनों ने ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने मांग की है कि मृत्यु के दो दिन पहले से लेकर मृत्यु के समय तक सतीश के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड के आधार पर जिन भी व्यक्तियों या महिलाओं से उसकी बात हुई, उनसे थाने बुलाकर कड़ी पूछताछ की जाए। साथ ही, मृतक के मोबाइल की अंतिम टावर लोकेशन का पूरा विवरण निकालकर उस क्षेत्र की विस्तृत जांच की जाए। इसके अलावा, परिजनों ने यह भी जानने की मांग की है कि सतीश ने अपने मोबाइल से सबसे अधिक समय किस व्यक्ति या महिला से बात की थी। उन्होंने मोटरसाइकिल के पास मिली बोतलों में मौजूद पदार्थ की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है। परिजनों ने जोर देकर कहा कि सीबीआई जांच के माध्यम से ही सही मुल्जिम का पता चल पाएगा। इस दौरान बाबूलाल, मुकेश, सोहन पेंटर, भगवान, महावीर, राजेंद्र, महेश, धीरज, चंद्रमोहन प्रजापति, गिरिराज, डॉ. अरविंद माथोड़िया, ओमप्रकाश, गिर्राज नागर, पप्पू अध्यापक सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।3
- बारां जिले के छीपाबड़ौद कस्बे में शुक्रवार को हजरत इमाम हसन-हुसैन की याद में मुस्लिम समुदाय ने मातमी धुन के साथ दो ताजिए निकाले। इन ताजियों को देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। ताशे-बाजों और अखाड़ों के साथ ताजिए अपने निर्धारित समय पर अपने मुकाम से रवाना हुए। ताजिये के लिए सब्जी मंडी परिसर, अस्पताल चौक और हाट चौक में विशेष मुकाम बनाए गए, जहां बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने चढ़ावे चढ़ाकर मन्नतें मांगीं। इस दौरान सरकारी अस्पताल के पास हुसेनी कमेटी ने राहगीरों के लिए सेवा शिविर आयोजित किए। छिटकू, हनीफ हरसल, शाहिद, मुख्तियार भाई, मुजीब भाई, अप्पू भाई, हलीम, मोसीन, रिंकू, सद्दाम मंसूरी, कालू भाई मंसूरी, बबलू भाई, मुश्ताक भाई और आसिफ भाई सहित अन्य युवाओं ने शरबत, हलीम, बिरयानी और ठंडे पानी की छबीलें लगाईं। ताजियों के जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के जवान चौराहों पर तैनात रहे। इस अवसर पर अखाड़े के उस्तादों और अन्य कलाकारों को सम्मानित भी किया गया। बाद में दोनों ताजियों को उतावली स्थित कर्बला ले जाया गया, जहाँ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।4