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एक क्षेत्र के लोगों को जैसे ही पैसेंजर ट्रेन के आने की सूचना मिली, बड़ी संख्या में लोग उसे देखने के लिए इकट्ठा हो गए।
BS Mandloi The News Today
एक क्षेत्र के लोगों को जैसे ही पैसेंजर ट्रेन के आने की सूचना मिली, बड़ी संख्या में लोग उसे देखने के लिए इकट्ठा हो गए।
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- एक पोस्ट में यह प्रश्न उठाया गया है कि शनिदेव को न्याय का देवता क्यों कहा जाता है। इसमें पाठकों को इस संबंध में पूरी कहानी जानने के लिए प्रेरित किया गया है।1
- Post by Sarvan Savita4
- भोपाल संभाग के ब्यूरो चीफ सैफ अली ने पाठकों को राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र 'भारत संवाद' और उसके लाइव न्यूज चैनल के साथ-साथ राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र 'परिवर्तन उदय' से आज की प्रमुख खबरों के लिए जुड़े रहने का आमंत्रण दिया है। खबर एवं विज्ञापन के लिए 9039403567 पर संपर्क किया जा सकता है।1
- शुक्रवार शाम बमोरी तहसील में अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। शाम करीब 5:00 बजे, बमोरी तहसील के दो दर्जन से अधिक गांवों में तेज आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश हुई। इस भीषण आंधी के कारण बमोरी तहसील के विभिन्न गांवों में कई बिजली के खंभे गिर गए, वहीं कई जगहों से पेड़ गिरने की भी खबरें सामने आई हैं।1
- राज्य शासन ने 12 जून से 18 जून की अवधि में जिले के प्रत्येक विकासखंड मुख्यालयों पर तीन दिवसीय जनकल्याण शिविर आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं। इसी कड़ी में, कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना ने जिले के सभी विकासखंड मुख्यालयों पर अलग-अलग तिथियों में शिविर आयोजित करने के आदेश दिए हैं, जिसके लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई है। इसी क्रम में, आज 12 जून शुक्रवार को मोहन बड़ोदिया जनपद पंचायत में कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना ने फीता काटकर जनकल्याण शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जनपद सीईओ अमृतराज सिसोदिया, मोहन बड़ोदिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉक्टर आरसी चक्रवर्ती, प्राचार्य बीएल पाटीदार सहित ग्राम पंचायतों के सचिव और ग्रामीण उपस्थित रहे। शिविर के दौरान, कलेक्टर ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों से संवाद किया और उनसे विभिन्न योजनाओं की जानकारी ली। इस बातचीत में मोहन बड़ोदिया के ग्रामीणों ने कलेक्टर से खेल मैदान की मांग को लेकर चर्चा की। यह तीन दिवसीय जनकल्याण शिविर जनपद पंचायत मोहन बड़ोदिया में कलेक्टर द्वारा शुरू किया गया है।1
- गुरुवार को पीलूखेड़ी स्थित ओसवाल डेनिम प्राइवेट लिमिटेड में मजदूरों ने विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल कर दी। सुबह करीब साढ़े दस बजे शुरू हुई इस हड़ताल में श्रमिकों ने बकाया वेतन एरियर सहित पूरा भुगतान, हर महीने की 8 तारीख तक वेतन का भुगतान, वेतन पर्ची उपलब्ध कराना, सरकारी दरों के अनुसार वेतन देना और कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने जैसी प्रमुख मांगें रखीं। हड़ताल की सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार सुनीता सिंह, पटवारी अर्पित सक्सेना सहित फैक्ट्री प्रबंधन और औद्योगिक संगठन के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने श्रमिकों की समस्याओं को सुना और उनके शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। प्रशासन और प्रबंधन से आश्वासन मिलने के बाद, मजदूर दोपहर करीब ढाई बजे काम पर लौट गए और हड़ताल समाप्त हो गई। हालांकि, श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो भविष्य में फिर से आंदोलन किया जा सकता है।1
- मानसून ने दस्तक दे दी है, जिससे किसान अब खेती की तैयारियों में जुट गए हैं। इस बार किसानों को अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।1
- बड़ोद नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथावाचक संत अभिराम दास महाराज ने इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे। महाराजश्री ने इस विवाह को प्रेम, समर्पण और धर्म की विजय का प्रतीक बताया, जिसके बाद पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया और श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारों और नृत्य के साथ उत्सव का भरपूर आनंद लिया। कथा के दौरान, महाराजश्री ने माता शकुंतला बाई, संत भक्त मीरा बाई और गोमाता के महत्व पर भी प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि गोसेवा भारतीय संस्कृति की पहचान है और इससे जीवन में सुख, समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। उन्होंने सत्संग की कमी के कारण परिवारों में बढ़ती दूरियों का भी जिक्र किया और बातचीत तथा सबको साथ लेकर चलने वाले मुखिया के महत्व पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, पुरुषोत्तम मास में किए गए जप, तप, दान और भक्ति के विशेष फल की बात कही। संत अभिराम दास महाराज ने श्रद्धालुओं की भक्ति और श्रद्धा की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बड़ोद को वृंदावन जैसा आध्यात्मिक वातावरण प्रदान कर दिया है। कथा का समापन राष्ट्र भक्ति के गीत के साथ हुआ, जिसने उपस्थित भक्तों में जोश भर दिया। बाहर से आए भक्तों ने महाराजश्री का स्वागत-सत्कार किया। कथा के अंतिम दिन, यानी 13 जून को, एक भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा।4
- राजगढ़ जिले में सड़कों पर घूमते आवारा सांडों की आपसी लड़ाई अब आमजन के लिए जानलेवा साबित हो रही है। पचोर, ब्यावरा सहित जिले के हर जगह सांडों के झुंड सड़कों पर मौजूद रहते हैं और लोगों पर हमला कर रहे हैं। इस बढ़ते आतंक से राजगढ़ के लोग बेहद परेशान हैं, क्योंकि इन आवारा सांडों की लड़ाई आमजन के लिए प्राणघातक बनती जा रही है।1