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राधा कृष्ण

7 hrs ago
user_Rajnath Singh
Rajnath Singh
Digital Marketing Specialist इंद्री, करनाल, हरियाणा•
7 hrs ago

राधा कृष्ण

More news from हरियाणा and nearby areas
  • 22-04-2026 आज यमुनानगर के Anand Public School, Professor Colony के बाहर अभिभावकों द्वारा जोरदार रोष प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन निजी स्कूलों द्वारा की जा रही किताबों की लूट के खिलाफ आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन द्वारा अभिभावकों को विशेष पब्लिशर्स (Publishers) की किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
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    22-04-2026
आज यमुनानगर के Anand Public School, Professor Colony के बाहर अभिभावकों द्वारा जोरदार रोष प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन निजी स्कूलों द्वारा की जा रही किताबों की लूट के खिलाफ आयोजित किया गया।
प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन द्वारा अभिभावकों को विशेष पब्लिशर्स (Publishers) की किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
    user_Gulshan Dhiman
    Gulshan Dhiman
    रादौर, यमुनानगर, हरियाणा•
    21 hrs ago
  • मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?" ​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?" ​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं? ​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल: ​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं? ​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था। ​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा? ​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा? ​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा? ​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट— विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
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    मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?"
​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?"
​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं?
​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल:
​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं?
​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं
लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था।
​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा?
​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा?
​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी
अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा?
​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट—
विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
    user_IndiaNews 9Live
    IndiaNews 9Live
    Media company Thanesar, Kurukshetra•
    20 hrs ago
  • ब्रिटेन में 2008 के बाद जन्मे लोग तंबाकू नहीं खरीद पाएंगे ◆ ब्रिटेन की संसद ने हेल्थ सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा फैसला लेते हुए टोबैको एंड वैप्स बिल को मंजूरी दे दी है ◆ बिल के अनुसार 2008 के बाद पैदा हुए किसी भी बच्चे के लिए ब्रिटेन में सिगरेट खरीदना उम्रभर के लिए सपना बन जाएगा Britain | Tobacco Ban in Britain
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    ब्रिटेन में 2008 के बाद जन्मे लोग तंबाकू नहीं खरीद पाएंगे
◆ ब्रिटेन की संसद ने हेल्थ सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा फैसला लेते हुए टोबैको एंड वैप्स बिल को मंजूरी दे दी है
◆ बिल के अनुसार 2008 के बाद पैदा हुए किसी भी बच्चे के लिए ब्रिटेन में सिगरेट खरीदना उम्रभर के लिए सपना बन जाएगा
Britain | Tobacco Ban in Britain
    user_JHN INDIA News
    JHN INDIA News
    घरौंडा, करनाल, हरियाणा•
    20 hrs ago
  • Post by Ch Pankaj Chauhan
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    Post by Ch Pankaj Chauhan
    user_Ch Pankaj Chauhan
    Ch Pankaj Chauhan
    Local News Reporter ऊन, शामली, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • जय सिटी कॉलोनी में आज उस समय हड़कंप मच गया जब डीटीपी विभाग की टीम ने अचानक पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भारी रोष देखने को मिला। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही अपनी बात रखने का मौका मिला। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या बिना प्रक्रिया पूरी किए इस तरह की कार्रवाई जायज है? जगाधरी की जय सिटी कॉलोनी में डीटीपी विभाग की टीम ने कथित अवैध निर्माण को लेकर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की। टीम के पहुंचते ही कॉलोनी के लोग इकट्टा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से यहां मकान बनाए हैं और सरकार व नगर निगम के नाम पर सभी जरूरी शुल्क भी जमा करवाए हैं। बावजूद इसके, बिना किसी नोटिस के इस तरह की कार्रवाई करना सरासर अन्याय है। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि अधिकारियों ने उनके घरों के सामने गड्ढे खोद दिए और तोड़फोड़ शुरू कर दी, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
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    जय सिटी कॉलोनी में आज उस समय हड़कंप मच गया जब डीटीपी विभाग की टीम ने अचानक पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भारी रोष देखने को मिला। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही अपनी बात रखने का मौका मिला। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या बिना प्रक्रिया पूरी किए इस तरह की कार्रवाई जायज है?
जगाधरी की जय सिटी कॉलोनी में डीटीपी विभाग की टीम ने कथित अवैध निर्माण को लेकर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की। टीम के पहुंचते ही कॉलोनी के लोग इकट्टा  हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से यहां मकान बनाए हैं और सरकार व नगर निगम के नाम पर सभी जरूरी शुल्क भी जमा करवाए हैं। बावजूद इसके, बिना किसी नोटिस के इस तरह की कार्रवाई करना सरासर अन्याय है।
कॉलोनीवासियों का आरोप है कि अधिकारियों ने उनके घरों के सामने गड्ढे खोद दिए और तोड़फोड़ शुरू कर दी, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
    user_Kulwant Singh Reporter India T
    Kulwant Singh Reporter India T
    Local News Reporter जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    22 hrs ago
  • नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने अचानक क्यों दे दिया इस्तीफा? जानें खुद क्या बताई वजह नेपाल की नई-नवेली बालेन शाह सरकार के गृहमंत्री सुदन गुरुंग 1 महीना भी पूरा नहीं कर पाए और उन्होंने आज (बुधवार को) अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुदन गुरुंग ने नैतिक जिम्मेदारी और अपनी संपत्तियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों की निष्पक्ष जांच की जरूरत का हवाला दिया और पद से त्यागपत्र दे दिया। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए एक फेसबुक पोस्ट में, सुदन गुरुंग ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक आलोचना गंभीरता से ली और पब्लिक लाइफ में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का ऑप्शन चुना। गृहमंत्री ने गंभीरता से ली जनता की आलोचना सुदन गुरुंग ने बताया, 'मैं, सुदन गुरुंग, चैत्र 13, 2082 यानी 26 मार्च, 2026 से गृहमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और उनसे जुड़े मामलों के बारे में नागरिकों की ओर से उठाए गए सवालों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।' नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम- गुरुंग ईमानदारी के महत्व पर जोर देते हुए सुदन गुरुंग ने कहा कि पद संभालने से पहले जनता का भरोसा सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम है, और पब्लिक के विश्वास से बढ़कर कोई ताकत नहीं है। आज का Gen Z आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की डिमांड करता है, यही मैसेज देता है: सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और लीडरशिप जवाबदेह होनी चाहिए।'
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    नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने अचानक क्यों दे दिया इस्तीफा? जानें खुद क्या बताई वजह
नेपाल की नई-नवेली बालेन शाह सरकार के गृहमंत्री सुदन गुरुंग 1 महीना भी पूरा नहीं कर पाए और उन्होंने आज (बुधवार को) अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुदन गुरुंग ने नैतिक जिम्मेदारी और अपनी संपत्तियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों की निष्पक्ष जांच की जरूरत का हवाला दिया और पद से त्यागपत्र दे दिया। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए एक फेसबुक पोस्ट में, सुदन गुरुंग ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक आलोचना गंभीरता से ली और पब्लिक लाइफ में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का ऑप्शन चुना।
गृहमंत्री ने गंभीरता से ली जनता की आलोचना
सुदन गुरुंग ने बताया, 'मैं, सुदन गुरुंग, चैत्र 13, 2082 यानी 26 मार्च, 2026 से गृहमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और उनसे जुड़े मामलों के बारे में नागरिकों की ओर से उठाए गए सवालों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।'
नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम- गुरुंग
ईमानदारी के महत्व पर जोर देते हुए सुदन गुरुंग ने कहा कि पद संभालने से पहले जनता का भरोसा सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम है, और पब्लिक के विश्वास से बढ़कर कोई ताकत नहीं है। आज का Gen Z आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की डिमांड करता है, यही मैसेज देता है: सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और लीडरशिप जवाबदेह होनी चाहिए।'
    user_Sunita Jain
    Sunita Jain
    Saharanpur, Uttar Pradesh•
    5 hrs ago
  • मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?" ​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?" ​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं? ​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल: ​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं? ​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था। ​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा? ​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा? ​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा? ​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट— विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
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    मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?"
​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?"
​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं?
​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल:
​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं?
​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं
लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था।
​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा?
​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा?
​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी
अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा?
​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट—
विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
    user_IndiaNews 9Live
    IndiaNews 9Live
    Media company Shahbad, Kurukshetra•
    20 hrs ago
  • Post by Ch Pankaj Chauhan
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    Post by Ch Pankaj Chauhan
    user_Ch Pankaj Chauhan
    Ch Pankaj Chauhan
    Local News Reporter ऊन, शामली, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • मामला रादौर क्षेत्र के भूरे का माजरा गांव का है, जहां मंगलवार-बुधवार की रात करीब 1:30 बजे तीन अज्ञात युवक पल्सर बाइक पर सवार होकर पहुंचे और पूर्व सरपंच ऋषि पाल के घर को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने करीब 14 से 15 राउंड फायर किए और इसके बाद मौके से फरार हो गए। फायरिंग की यह पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है। घटना के समय घर में मौजूद लोग बाल-बाल बच गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के लोग दहशत में आ गए और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
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    मामला रादौर क्षेत्र के भूरे का माजरा गांव का है, जहां मंगलवार-बुधवार की रात करीब 1:30 बजे तीन अज्ञात युवक पल्सर बाइक पर सवार होकर पहुंचे और पूर्व सरपंच ऋषि पाल के घर को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि हमलावरों ने करीब 14 से 15 राउंड फायर किए और इसके बाद मौके से फरार हो गए।
फायरिंग की यह पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है।
घटना के समय घर में मौजूद लोग बाल-बाल बच गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के लोग दहशत में आ गए और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
    user_Kulwant Singh Reporter India T
    Kulwant Singh Reporter India T
    Local News Reporter जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    22 hrs ago
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