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नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने अचानक क्यों दे दिया इस्तीफा? जानें खुद क्या बताई वजह नेपाल की नई-नवेली बालेन शाह सरकार के गृहमंत्री सुदन गुरुंग 1 महीना भी पूरा नहीं कर पाए और उन्होंने आज (बुधवार को) अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुदन गुरुंग ने नैतिक जिम्मेदारी और अपनी संपत्तियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों की निष्पक्ष जांच की जरूरत का हवाला दिया और पद से त्यागपत्र दे दिया। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए एक फेसबुक पोस्ट में, सुदन गुरुंग ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक आलोचना गंभीरता से ली और पब्लिक लाइफ में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का ऑप्शन चुना। गृहमंत्री ने गंभीरता से ली जनता की आलोचना सुदन गुरुंग ने बताया, 'मैं, सुदन गुरुंग, चैत्र 13, 2082 यानी 26 मार्च, 2026 से गृहमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और उनसे जुड़े मामलों के बारे में नागरिकों की ओर से उठाए गए सवालों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।' नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम- गुरुंग ईमानदारी के महत्व पर जोर देते हुए सुदन गुरुंग ने कहा कि पद संभालने से पहले जनता का भरोसा सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम है, और पब्लिक के विश्वास से बढ़कर कोई ताकत नहीं है। आज का Gen Z आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की डिमांड करता है, यही मैसेज देता है: सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और लीडरशिप जवाबदेह होनी चाहिए।'

6 hrs ago
user_Sunita Jain
Sunita Jain
Saharanpur, Uttar Pradesh•
6 hrs ago

नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने अचानक क्यों दे दिया इस्तीफा? जानें खुद क्या बताई वजह नेपाल की नई-नवेली बालेन शाह सरकार के गृहमंत्री सुदन गुरुंग 1 महीना भी पूरा नहीं कर पाए और उन्होंने आज (बुधवार को) अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुदन गुरुंग ने नैतिक जिम्मेदारी और अपनी संपत्तियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों की निष्पक्ष जांच की जरूरत का हवाला दिया और पद से त्यागपत्र दे दिया। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए एक फेसबुक पोस्ट में, सुदन गुरुंग ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक आलोचना गंभीरता से ली और पब्लिक लाइफ में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का ऑप्शन चुना। गृहमंत्री ने गंभीरता से ली जनता की आलोचना सुदन गुरुंग ने बताया, 'मैं, सुदन गुरुंग, चैत्र 13, 2082 यानी 26 मार्च, 2026 से गृहमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और उनसे जुड़े मामलों के बारे में नागरिकों की ओर से उठाए गए सवालों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।' नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम- गुरुंग ईमानदारी के महत्व पर जोर देते हुए सुदन गुरुंग ने कहा कि पद संभालने से पहले जनता का भरोसा सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम है, और पब्लिक के विश्वास से बढ़कर कोई ताकत नहीं है। आज का Gen Z आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की डिमांड करता है, यही मैसेज देता है: सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और लीडरशिप जवाबदेह होनी चाहिए।'

  • user_User7239
    User7239
    Agra, Uttar Pradesh
    👏
    3 hrs ago
  • user_Vijay Gond
    Vijay Gond
    उल्हासनगर, ठाणे, महाराष्ट्र
    🙏
    3 hrs ago
More news from Uttar Pradesh and nearby areas
  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने सैन्य ताकत में लगाए चार चांद!
    1
    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने सैन्य ताकत में लगाए चार चांद!
    user_Sunita Jain
    Sunita Jain
    Saharanpur, Uttar Pradesh•
    48 min ago
  • Post by Vaseem Malik
    1
    Post by Vaseem Malik
    user_Vaseem Malik
    Vaseem Malik
    सहारनपुर, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • सहारनपुर। जनपद के नकुड़ में भारत की जनगणना 2027 के लिए प्रगणकों, पर्यवेक्षकों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें घर घर जाकर मकान सूचीकरण, मकानों की गणना एवं जनगणना करने के लिए विस्तार से समझाया गया, इसी के साथ डेमो जनगणना भी कराई गई । स्थानीय किशोरी लाल गांधी मैमोरियल इंटर कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय सुपरवाइजर एवं प्रगणकों को प्रशिक्षण देते हुए फील्ड ट्रेनर्स नाथी राम व मुकेश कुमार कुशवाह ने बताया की भारत की जनगणना 2027 पूर्णतया डिजिटल होनी है, जिसमें सभी पर्यवेक्षकों एवं प्रगणकों को अपनी जिम्मेदारी का पूर्ण रूप से निर्वहन किया जाना है। इस अवसर पर जनगणना इंचार्ज अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने कहा की इस बार की जनगणना डिजिटल होने के साथ साथ स्व गणना का भी विकल्प है। उन्होंने कहा की इस कार्य का सभी कर्तव्य निष्ठा के साथ कार्य करें । जनगणना लिपिक आशीष कुमार शर्मा ने बताया की प्रशिक्षण दो चरणों में दिया जाना है। दूसरा चरण 27 अप्रैल से 29अप्रैल तक चलेगा । प्रशिक्षण में सहेन्दर पाल, राजेश जैन, अनूप कुमार, संगीता रानी, विनोद कुमार, संजय कुमार, संदीप, योगिता बाला, रश्मि, जयबीर समेत 30 सुपरवाइजरों एवं प्रगणकों को प्रशिक्षित किया गया। वीडियो:- प्रशिक्षण देते जनगणना इंचार्ज अधिकारी
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    सहारनपुर।
जनपद के नकुड़ में भारत की जनगणना 2027 के लिए प्रगणकों, पर्यवेक्षकों को तीन दिवसीय  प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें घर घर जाकर मकान सूचीकरण, मकानों की गणना एवं जनगणना  करने के लिए विस्तार से समझाया गया, इसी के साथ डेमो जनगणना भी कराई गई ।
स्थानीय किशोरी लाल गांधी मैमोरियल इंटर कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय सुपरवाइजर एवं  प्रगणकों को प्रशिक्षण देते हुए फील्ड ट्रेनर्स नाथी राम व मुकेश कुमार कुशवाह ने बताया की भारत की जनगणना 2027 पूर्णतया डिजिटल होनी है, जिसमें सभी पर्यवेक्षकों एवं प्रगणकों को अपनी जिम्मेदारी का पूर्ण रूप से निर्वहन किया जाना है।
इस अवसर पर जनगणना इंचार्ज अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने कहा की इस बार की जनगणना डिजिटल होने के साथ साथ स्व गणना का भी विकल्प है। उन्होंने कहा की इस कार्य का सभी कर्तव्य निष्ठा के साथ कार्य करें । जनगणना लिपिक आशीष कुमार शर्मा ने बताया की प्रशिक्षण दो चरणों में दिया जाना है। दूसरा चरण 27 अप्रैल से 29अप्रैल तक चलेगा । प्रशिक्षण में सहेन्दर पाल, राजेश जैन, अनूप कुमार, संगीता रानी, विनोद कुमार, संजय कुमार, संदीप, योगिता बाला, रश्मि, जयबीर समेत 30 सुपरवाइजरों एवं प्रगणकों को प्रशिक्षित किया गया।
वीडियो:- प्रशिक्षण देते जनगणना इंचार्ज अधिकारी
    user_Quazi Shahid Ahmed
    Quazi Shahid Ahmed
    Saharanpur, Uttar Pradesh•
    20 hrs ago
  • गुरुग्राम में हरियाणा पत्रकार संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री श्री राजेश नागर जी ने मेवात के दिवंगत पत्रकार स्वर्गीय कौशल किशोर सिंगला जी की धर्मपत्नी श्रीमती सीमा सिंगला को ₹5,00,000 की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया। इस दौरान मंत्री जी ने पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए कैशलैस योजना लागू करवाने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में संघ के प्रदेश अध्यक्ष के.बी. पंडित जी ने बताया कि हरियाणा पत्रकार संघ अब तक दिवंगत एवं असाध्य रोग से पीड़ित पत्रकार परिवारों को ₹2.40 करोड़ की सहायता प्रदान कर चुका है। साथ ही, वृद्ध पत्रकारों के लिए ₹15,000 मासिक पेंशन और ₹5 लाख तक की कैशलैस चिकित्सा बीमा योजना के प्रयास भी जारी हैं। स्वामी धर्मदेव जी ने दिवंगत पत्रकार की दोनों बेटियों को ₹1-1 लाख की सहायता दी, वहीं मुख्यमंत्री के मीडिया कोऑर्डिनेटर मुकेश वशिष्ठ जी ने राज्य सरकार से ₹2.50 लाख दिलवाने का भरोसा देते हुए अपनी ओर से ₹50-50 हजार देने की घोषणा की। इस अवसर पर अनिल आर्य, धर्मपाल आर्य, नरेश गर्ग, मनु मैहता सहित अनेक पत्रकार साथी उपस्थित रहे। 🙏 समाज के प्रति पत्रकारों की सेवाओं को नमन
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    गुरुग्राम में हरियाणा पत्रकार संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री श्री राजेश नागर जी ने मेवात के दिवंगत पत्रकार स्वर्गीय कौशल किशोर सिंगला जी की धर्मपत्नी श्रीमती सीमा सिंगला को ₹5,00,000 की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया।
इस दौरान मंत्री जी ने पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए कैशलैस योजना लागू करवाने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में संघ के प्रदेश अध्यक्ष के.बी. पंडित जी ने बताया कि हरियाणा पत्रकार संघ अब तक दिवंगत एवं असाध्य रोग से पीड़ित पत्रकार परिवारों को ₹2.40 करोड़ की सहायता प्रदान कर चुका है। साथ ही, वृद्ध पत्रकारों के लिए ₹15,000 मासिक पेंशन और ₹5 लाख तक की कैशलैस चिकित्सा बीमा योजना के प्रयास भी जारी हैं।
स्वामी धर्मदेव जी ने दिवंगत पत्रकार की दोनों बेटियों को ₹1-1 लाख की सहायता दी, वहीं मुख्यमंत्री के मीडिया कोऑर्डिनेटर मुकेश वशिष्ठ जी ने राज्य सरकार से ₹2.50 लाख दिलवाने का भरोसा देते हुए अपनी ओर से ₹50-50 हजार देने की घोषणा की।
इस अवसर पर अनिल आर्य, धर्मपाल आर्य, नरेश गर्ग, मनु मैहता सहित अनेक पत्रकार साथी उपस्थित रहे।
🙏 समाज के प्रति पत्रकारों की सेवाओं को नमन
    user_Gulshan Dhiman
    Gulshan Dhiman
    रादौर, यमुनानगर, हरियाणा•
    4 hrs ago
  • प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आज देश की महिलाएं जागरूक हैं और अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी हैं। यह रोष प्रदर्शन महिलाओं की आवाज बुलंद करने का प्रतीक है। भारतीय जनता पार्टी सदैव महिला सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ी रही है और आगे भी महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।
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    प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आज देश की महिलाएं जागरूक हैं और अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी हैं।
यह रोष प्रदर्शन महिलाओं की आवाज बुलंद करने का प्रतीक है। भारतीय जनता पार्टी सदैव महिला सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ी रही है और आगे भी महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।
    user_Kulwant Singh Reporter India T
    Kulwant Singh Reporter India T
    Local News Reporter जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    23 hrs ago
  • राधा कृष्ण
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    राधा कृष्ण
    user_Rajnath Singh
    Rajnath Singh
    Digital Marketing Specialist इंद्री, करनाल, हरियाणा•
    9 hrs ago
  • मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?" ​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?" ​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं? ​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल: ​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं? ​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था। ​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा? ​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा? ​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा? ​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट— विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
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    मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?"
​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?"
​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं?
​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल:
​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं?
​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं
लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था।
​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा?
​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा?
​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी
अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा?
​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट—
विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
    user_IndiaNews 9Live
    IndiaNews 9Live
    Media company Ladwa, Kurukshetra•
    22 hrs ago
  • नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने अचानक क्यों दे दिया इस्तीफा? जानें खुद क्या बताई वजह नेपाल की नई-नवेली बालेन शाह सरकार के गृहमंत्री सुदन गुरुंग 1 महीना भी पूरा नहीं कर पाए और उन्होंने आज (बुधवार को) अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुदन गुरुंग ने नैतिक जिम्मेदारी और अपनी संपत्तियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों की निष्पक्ष जांच की जरूरत का हवाला दिया और पद से त्यागपत्र दे दिया। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए एक फेसबुक पोस्ट में, सुदन गुरुंग ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक आलोचना गंभीरता से ली और पब्लिक लाइफ में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का ऑप्शन चुना। गृहमंत्री ने गंभीरता से ली जनता की आलोचना सुदन गुरुंग ने बताया, 'मैं, सुदन गुरुंग, चैत्र 13, 2082 यानी 26 मार्च, 2026 से गृहमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और उनसे जुड़े मामलों के बारे में नागरिकों की ओर से उठाए गए सवालों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।' नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम- गुरुंग ईमानदारी के महत्व पर जोर देते हुए सुदन गुरुंग ने कहा कि पद संभालने से पहले जनता का भरोसा सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम है, और पब्लिक के विश्वास से बढ़कर कोई ताकत नहीं है। आज का Gen Z आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की डिमांड करता है, यही मैसेज देता है: सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और लीडरशिप जवाबदेह होनी चाहिए।'
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    नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने अचानक क्यों दे दिया इस्तीफा? जानें खुद क्या बताई वजह
नेपाल की नई-नवेली बालेन शाह सरकार के गृहमंत्री सुदन गुरुंग 1 महीना भी पूरा नहीं कर पाए और उन्होंने आज (बुधवार को) अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुदन गुरुंग ने नैतिक जिम्मेदारी और अपनी संपत्तियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों की निष्पक्ष जांच की जरूरत का हवाला दिया और पद से त्यागपत्र दे दिया। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए एक फेसबुक पोस्ट में, सुदन गुरुंग ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक आलोचना गंभीरता से ली और पब्लिक लाइफ में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का ऑप्शन चुना।
गृहमंत्री ने गंभीरता से ली जनता की आलोचना
सुदन गुरुंग ने बताया, 'मैं, सुदन गुरुंग, चैत्र 13, 2082 यानी 26 मार्च, 2026 से गृहमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और उनसे जुड़े मामलों के बारे में नागरिकों की ओर से उठाए गए सवालों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।'
नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम- गुरुंग
ईमानदारी के महत्व पर जोर देते हुए सुदन गुरुंग ने कहा कि पद संभालने से पहले जनता का भरोसा सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से ज्यादा अहम है, और पब्लिक के विश्वास से बढ़कर कोई ताकत नहीं है। आज का Gen Z आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की डिमांड करता है, यही मैसेज देता है: सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और लीडरशिप जवाबदेह होनी चाहिए।'
    user_Sunita Jain
    Sunita Jain
    Saharanpur, Uttar Pradesh•
    6 hrs ago
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