मंदसौर प्रशासन ने शहर की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से विकास कार्य शुरू किए थे, लेकिन इन पहलों से जनता को हुई 'पीड़ा' सहन नहीं हुई, जिसके चलते बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रशासन ने इन कार्यों को विकास की दिशा में एक कदम बताया, हालांकि जनता ने इसकी कीमत चुकाने से इनकार कर दिया। विवाद का मुख्य केंद्र सरदार वल्लभ भाई पटेल चौराहा था, जहाँ प्रशासन ने यातायात को सुव्यवस्थित करने के लिए 'वन-वे' प्रणाली लागू की थी। इस बदलाव के कारण गलत दिशा में वाहन चलाने वालों की आवाजाही रुक गई और लोगों को घूमकर आना पड़ रहा था। इसी बात को लेकर जनता में गहरा असंतोष फैल गया और उन्होंने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। जनता की इस 'हठ धर्मिता' को देखते हुए प्रशासन को झुकना पड़ा। उन्होंने बैरिकेड्स हटाकर गलत दिशा से आवाजाही को फिर से शुरू करवा दिया। प्रशासन ने यह मान लिया कि यदि जनता विकास नहीं चाहती है, तो वे वही करें जो उन्हें उचित लगे। अब सभी की निगाहें 'आदर्श सड़क' पर हैं कि आगे क्या होता है, जहाँ एक तरफ एक और आदर्श सड़क बनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर सड़क मार्ग को लेकर यह 'नूरी कुश्ती' जारी है।
मंदसौर प्रशासन ने शहर की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से विकास कार्य शुरू किए थे, लेकिन इन पहलों से जनता को हुई 'पीड़ा' सहन नहीं हुई, जिसके चलते बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रशासन ने इन कार्यों को विकास की दिशा में एक कदम बताया, हालांकि जनता ने इसकी कीमत चुकाने से इनकार कर दिया। विवाद का मुख्य केंद्र सरदार वल्लभ भाई पटेल चौराहा था, जहाँ प्रशासन ने यातायात को सुव्यवस्थित करने के लिए 'वन-वे' प्रणाली लागू की थी। इस बदलाव के कारण गलत दिशा में वाहन चलाने वालों की आवाजाही रुक गई और लोगों को घूमकर आना पड़ रहा था। इसी बात को लेकर जनता में गहरा असंतोष फैल गया और उन्होंने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। जनता की इस 'हठ धर्मिता' को देखते हुए प्रशासन को झुकना पड़ा। उन्होंने बैरिकेड्स हटाकर गलत दिशा से आवाजाही को फिर से शुरू करवा दिया। प्रशासन ने यह मान लिया कि यदि जनता विकास नहीं चाहती है, तो वे वही करें जो उन्हें उचित लगे। अब सभी की निगाहें 'आदर्श सड़क' पर हैं कि आगे क्या होता है, जहाँ एक तरफ एक और आदर्श सड़क बनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर सड़क मार्ग को लेकर यह 'नूरी कुश्ती' जारी है।
- मंदसौर प्रशासन ने शहर की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से विकास कार्य शुरू किए थे, लेकिन इन पहलों से जनता को हुई 'पीड़ा' सहन नहीं हुई, जिसके चलते बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रशासन ने इन कार्यों को विकास की दिशा में एक कदम बताया, हालांकि जनता ने इसकी कीमत चुकाने से इनकार कर दिया। विवाद का मुख्य केंद्र सरदार वल्लभ भाई पटेल चौराहा था, जहाँ प्रशासन ने यातायात को सुव्यवस्थित करने के लिए 'वन-वे' प्रणाली लागू की थी। इस बदलाव के कारण गलत दिशा में वाहन चलाने वालों की आवाजाही रुक गई और लोगों को घूमकर आना पड़ रहा था। इसी बात को लेकर जनता में गहरा असंतोष फैल गया और उन्होंने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। जनता की इस 'हठ धर्मिता' को देखते हुए प्रशासन को झुकना पड़ा। उन्होंने बैरिकेड्स हटाकर गलत दिशा से आवाजाही को फिर से शुरू करवा दिया। प्रशासन ने यह मान लिया कि यदि जनता विकास नहीं चाहती है, तो वे वही करें जो उन्हें उचित लगे। अब सभी की निगाहें 'आदर्श सड़क' पर हैं कि आगे क्या होता है, जहाँ एक तरफ एक और आदर्श सड़क बनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर सड़क मार्ग को लेकर यह 'नूरी कुश्ती' जारी है।1
- नीमच में स्कीम नंबर 36-ए स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शनिवार को मंत्री नारायणसिंह कुशवाह कथा पंडाल पहुंचे। इस अवसर पर आयोजन समिति ने मंत्री का स्वागत किया। मंत्री कुशवाह ने व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली और समिति को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समिति सदस्य मौजूद रहे।1
- नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने झंझारवाड़ा उद्योग क्षेत्र का दौरा कर निरीक्षण किया।1
- मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की एक खास रिपोर्ट में बेहद गंभीर दावे किए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि झुग्गियों (झोपड़ियों) में चार-चार AC लगे हैं, और उनके लिए कोई बिजली बिल भी नहीं चुकाया जाता। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इन झुग्गियों में रहने वाले 99% लोग बांग्लादेशी मुस्लिम हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेसियों, समाजवादियों और TMC जैसे दलों ने देश हित को दरकिनार करते हुए, केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए इन लोगों को बसाया है। यह रिपोर्ट एक तीखा सवाल उठाती है कि 'अमीरों से नफरत करना आसान है, लेकिन क्या गरीबों से नफरत करने का साहस है?' साथ ही, यह आरोप भी लगाया गया है कि राजनीतिक दलों ने देश के राष्ट्रीय हितों को ताक पर रखकर, सिर्फ वोट हासिल करने के मकसद से इस वर्ग को संरक्षण दिया है।1
- राजस्थान के उदयपुर में एक युवक का अपहरण 'फिल्मी अंदाज' में किया गया, जिसने इलाके में सनसनी फैला दी। इस घटना के तुरंत बाद हरकत में आई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मात्र 12 घंटे के भीतर अपहृत युवक को सकुशल ढूंढ निकाला और उसे सुरक्षित बचा लिया। पुलिस ने इस मामले में पंजाब के रहने वाले छह आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।1