उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने 16 जून, 2026 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि 25 जून से पठन-पाठन शुरू होने से पहले 22, 23 और 24 जून को सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और कर्मचारी विद्यालयों में उपस्थित होकर साफ-सफाई, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, बिजली, पेयजल और शौचालयों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करें, ताकि बच्चों के विद्यालय पहुंचते ही पढ़ाई नियमित रूप से शुरू हो सके। हालांकि, जनपद बांदा के बड़ोखर ब्लॉक अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय ददरिया में इन निर्देशों के ठीक उलट तस्वीर सामने आई। ग्रामीणों की सूचना पर मंगलवार, 23 जून, 2026 को सुबह लगभग 10:46 बजे विद्यालय का मुख्य गेट लटकता मिला ताला, जबकि ठीक सामने स्थित यूपीएस ददरिया विद्यालय खुला था और वहां साफ-सफाई सहित अन्य तैयारियां चल रही थीं। ग्रामीणों का तो यहाँ तक कहना है कि प्राथमिक विद्यालय ददरिया 22 जून को भी बंद रहा था। इस स्थिति ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब शासन ने तीन दिनों तक अनिवार्य उपस्थिति के स्पष्ट आदेश दिए हैं, तो आखिर यह विद्यालय बंद क्यों रहा? क्या जिम्मेदार शिक्षक और कर्मचारी शासन के इन आदेशों को हल्के में ले रहे हैं, या फिर जमीनी निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित है? इस संबंध में जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अव्यक्त राम तिवारी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मामले में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। अब सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि क्या यह पूरा मामला केवल नोटिस जारी करने तक सिमट जाएगा, या फिर शासन के आदेशों की सीधी अवहेलना करने वालों के खिलाफ कोई वास्तविक और ठोस कार्रवाई भी की जाएगी? क्योंकि शिक्षा व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा उन बच्चों को भुगतना पड़ता है, जिनके उज्ज्वल भविष्य की जिम्मेदारी इन्हीं विद्यालयों के कंधों पर होती है। यदि शासन के आदेश केवल फाइलों तक सीमित रह जाएं और विद्यालयों के ताले तय समय पर न खुलें, तो 'स्कूल चलो अभियान' और शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावों की सार्थकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने 16 जून, 2026 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि 25 जून से पठन-पाठन शुरू होने से पहले 22, 23 और 24 जून को सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और कर्मचारी विद्यालयों में उपस्थित होकर साफ-सफाई, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, बिजली, पेयजल और शौचालयों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करें, ताकि बच्चों के विद्यालय पहुंचते ही पढ़ाई नियमित रूप से शुरू हो सके। हालांकि, जनपद बांदा के बड़ोखर ब्लॉक अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय ददरिया में इन निर्देशों के ठीक उलट तस्वीर सामने आई। ग्रामीणों की सूचना पर मंगलवार, 23 जून, 2026 को सुबह लगभग 10:46 बजे विद्यालय का मुख्य गेट लटकता मिला ताला, जबकि ठीक सामने स्थित यूपीएस ददरिया विद्यालय खुला था और वहां साफ-सफाई सहित अन्य तैयारियां चल रही थीं। ग्रामीणों का तो यहाँ तक कहना है कि प्राथमिक विद्यालय ददरिया 22 जून को भी बंद रहा था। इस स्थिति ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब शासन ने तीन दिनों तक अनिवार्य उपस्थिति के स्पष्ट आदेश दिए हैं, तो आखिर यह विद्यालय बंद क्यों रहा? क्या जिम्मेदार शिक्षक और कर्मचारी शासन के इन आदेशों को हल्के में ले रहे हैं, या फिर जमीनी निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित है? इस संबंध में जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अव्यक्त राम तिवारी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मामले में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। अब सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि क्या यह पूरा मामला केवल नोटिस जारी करने तक सिमट जाएगा, या फिर शासन के आदेशों की सीधी अवहेलना करने वालों के खिलाफ कोई वास्तविक और ठोस कार्रवाई भी की जाएगी? क्योंकि शिक्षा व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा उन बच्चों को भुगतना पड़ता है, जिनके उज्ज्वल भविष्य की जिम्मेदारी इन्हीं विद्यालयों के कंधों पर होती है। यदि शासन के आदेश केवल फाइलों तक सीमित रह जाएं और विद्यालयों के ताले तय समय पर न खुलें, तो 'स्कूल चलो अभियान' और शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावों की सार्थकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
- बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल अनुबंध में बड़े राजस्व नुकसान का खुलासा हुआ है, जहाँ यूपीडा (यूपी एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण) और टोल ठेकेदार कंपनी ने मिलकर सरकार को ₹13.34 करोड़ की स्टांप चोरी का चूना लगाया है। यह मामला तब सामने आया जब दातार सिक्योरिटी सर्विस ग्रुप इन कंसोर्टियम विद मेसर्स श्री साई इंटरप्राइजेज ने यूपीडा के साथ 10 अक्टूबर 2024 को दो साल के लिए ₹333 करोड़ 65 लाख का टोल कलेक्शन एग्रीमेंट मात्र ₹100 के स्टांप पेपर पर गुपचुप तरीके से कर लिया, जबकि किसी भी बड़े अनुबंध पर उसकी विधि कीमत के आधार पर एक निर्धारित स्टांप शुल्क देना अनिवार्य होता है। इस तरह, ठेकेदार कंपनी ने सरकार की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश की और ₹13 करोड़ 34 लाख की स्टांप चोरी की। यह गंभीर धोखाधड़ी स्टांप एवं निबंधन विभाग की जांच में उजागर हुई, जिसके बाद संबंधित पक्षों के खिलाफ स्टांप चोरी का मुकदमा दर्ज किया गया है। चित्रकूट धाम मंडल के डीआईजी निबंधक स्टांप, रईस अहमद खान ने बताया है कि भारतीय स्टांप अधिनियम के उल्लंघन के इस मामले में आरोपी कंपनी और यूपीडा सहित संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार वसूली और कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब अन्य बड़े अनुबंधों की भी जांच शुरू की गई है।4
- उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने 16 जून, 2026 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि 25 जून से पठन-पाठन शुरू होने से पहले 22, 23 और 24 जून को सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और कर्मचारी विद्यालयों में उपस्थित होकर साफ-सफाई, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, बिजली, पेयजल और शौचालयों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करें, ताकि बच्चों के विद्यालय पहुंचते ही पढ़ाई नियमित रूप से शुरू हो सके। हालांकि, जनपद बांदा के बड़ोखर ब्लॉक अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय ददरिया में इन निर्देशों के ठीक उलट तस्वीर सामने आई। ग्रामीणों की सूचना पर मंगलवार, 23 जून, 2026 को सुबह लगभग 10:46 बजे विद्यालय का मुख्य गेट लटकता मिला ताला, जबकि ठीक सामने स्थित यूपीएस ददरिया विद्यालय खुला था और वहां साफ-सफाई सहित अन्य तैयारियां चल रही थीं। ग्रामीणों का तो यहाँ तक कहना है कि प्राथमिक विद्यालय ददरिया 22 जून को भी बंद रहा था। इस स्थिति ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब शासन ने तीन दिनों तक अनिवार्य उपस्थिति के स्पष्ट आदेश दिए हैं, तो आखिर यह विद्यालय बंद क्यों रहा? क्या जिम्मेदार शिक्षक और कर्मचारी शासन के इन आदेशों को हल्के में ले रहे हैं, या फिर जमीनी निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित है? इस संबंध में जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अव्यक्त राम तिवारी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मामले में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। अब सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि क्या यह पूरा मामला केवल नोटिस जारी करने तक सिमट जाएगा, या फिर शासन के आदेशों की सीधी अवहेलना करने वालों के खिलाफ कोई वास्तविक और ठोस कार्रवाई भी की जाएगी? क्योंकि शिक्षा व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा उन बच्चों को भुगतना पड़ता है, जिनके उज्ज्वल भविष्य की जिम्मेदारी इन्हीं विद्यालयों के कंधों पर होती है। यदि शासन के आदेश केवल फाइलों तक सीमित रह जाएं और विद्यालयों के ताले तय समय पर न खुलें, तो 'स्कूल चलो अभियान' और शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावों की सार्थकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।1
- बंदा में एक व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है कि आवासीय पट्टा और शस्त्र लाइसेंस बनवाने के नाम पर उससे लाखों रुपये की ठगी की गई है। पीड़ित कृष्ण कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उसे इन आवश्यक दस्तावेजों को दिलवाने का झांसा देकर लाखों रुपये ठग लिए गए।1
- बेंगलुरु कोर्ट में एक मामला पिछले 16 साल से लंबित है, जिसमें 'जेसीबी रमेश' नामक व्यक्ति पर ₹5,17,661 के गबन का आरोप है। जानकारी के अनुसार, पुलिस प्रशासन इस मामले की सीसी कॉपी तत्काल जारी नहीं कर रहा है। आरोप है कि यह 'जेसीबी रमेश', कांग्रेस विधायक कृष्णप्पा का दोस्त है और उसका आचरण 'ऑडियो रब्बा' से मिलता-जुलता है। आरोपी 'जेसीबी रमेश' कथित तौर पर कानून का कोई डर नहीं दिखाता और दावा करता है कि सोनिया गांधी और 'रेडियो रब्बा' भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, कोर्ट ने इस मामले को एक तरफ करके बंद कर दिया है, जिससे पीड़ितों में भारी आक्रोश है। इस अन्यायपूर्ण निर्णय और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण, मामले से जुड़े लोग अब इस केस को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में ले जाने पर मजबूर हैं। लोगों ने बेंगलुरु कोर्ट के खिलाफ अपनी गहरी निराशा और गुस्सा व्यक्त करते हुए 'बेंगलुरु कोर्ट मुर्दाबाद' के नारे लगाए हैं।1
- बाँदा में पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देश पर अतर्रा पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। तहसील के सामने एक दुकान से लैपटॉप और अन्य सामान चोरी करने वाले चोर को पुलिस ने सूचना मिलने के सिर्फ 14 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया और चोरी किया गया सारा माल बरामद कर लिया। यह मामला 22 और 23 जून की दरमियानी रात का है, जब अज्ञात चोर ने दुकान का ताला तोड़कर वारदात को अंजाम दिया। लखमी थोक बिसण्डा निवासी देवदत्त ने 23 जून की शाम थाने में तहरीर देकर इस चोरी की सूचना दी थी। पुलिस अधीक्षक ने मामले के खुलासे के लिए तुरंत एक टीम गठित की। ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और वैज्ञानिक साक्ष्यों की मदद से चोर की पहचान की गई। इसके बाद, मुखबिर से मिली सटीक सूचना पर पुलिस ने गल्ला मंडी के पीछे से राजेश पुत्र रामबालक को चोरी के माल समेत दबोच लिया। राजेश चित्रकूट जिले के भरतकूप थाना क्षेत्र के गोबरिया बुजुर्ग भैसौदा का निवासी है। पुलिस ने आरोपी के पास से एक लैपटॉप, की-बोर्ड, माउस, फिंगर प्रिंट डिवाइस, लैपटॉप स्टैंड, सीडी कवर के साथ-साथ ताला तोड़ने में इस्तेमाल की गई लोहे की छड़, एक कटर और छोटा-बड़ा प्लास भी बरामद किया है।1
- देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने का कार्य तेजी से जारी है, जिससे उपभोक्ता अब अपनी बिजली खपत की जानकारी मोबाइल पर रियल टाइम में देख सकेंगे। इन स्मार्ट मीटरों के माध्यम से बिलिंग प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आने और बिजली प्रबंधन में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है। ऊर्जा क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल डिजिटल इंडिया अभियान के तहत ऊर्जा क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा अपडेट है।1
- मौदहा नगर में देर रात बुर्राक का भव्य जुलूस पूरी धूमधाम और अकीदत के साथ निकाला गया। इस दौरान पूरा नगर 'या हुसैन-या हुसैन' के नारों से गूंज उठा। यह जुलूस छोटा कसौड़ा स्थित इमामबाड़े से शुरू हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। आयोजन के दौरान नगर की गली-गली में लंगर लगाए गए, जहाँ हसन-हुसैन के चाहने वालों ने श्रद्धापूर्वक सेवा की। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर, पूरे आयोजन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। क्राइम इंस्पेक्टर चंद्रशेखर गौतम ने स्वयं सुरक्षा की कमान संभाली।1
- बंदा में एक दुकान का ताला तोड़कर लैपटॉप और अन्य उपकरण चोरी करने वाले आरोपी को घटना के मात्र 14 घंटे के भीतर ही गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस चोरी के मामले को सुलझाया और आरोपी को पकड़ लिया।1