मूंगफली के साथ धनिया-मिर्च की जगह घास की चटनी देने का मामला खाद्य विभाग की जांच पर उठे सवाल, मेला गेट के सामने ठेला लगाकर बेच रहा विक्रेता, चटनी का नमूना लेकर संबंधित अधिकारियों को दिखाने की तैयारी पलियाकलां-खीरी। पलिया नगर में कुछ मूंगफली विक्रेताओं की ओर से ग्राहकों को दी जाने वाली चटनी की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। मूंगफली के साथ हरी धनिया या हरी मिर्च की चटनी देने के बजाय कुछ विक्रेता घास जैसी दिखने वाली चटनी परोस रहे हैं, जिसमें धनिया-मिर्च की खुशबू के बजाय अजीब सी दुर्गंध आती है। इससे चटनी खाने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। मामला नगर के मेला गेट के सामने ठेला लगाकर मूंगफली बेचने वाले एक विक्रेता से जुड़ा है। आज शनिवार की देर शाम लगभग आठ बजे मूंगफली खरीदने पहुंचे एक व्यक्ति को चटनी की गुणवत्ता संदिग्ध लगी। चटनी से दुर्गंध आने पर उसने विक्रेता से इसके बारे में पूछताछ की तो विक्रेता नाराज हो गया और उसने चटनी की जांच प्रयोगशाला में कराने तक की बात कह डाली। इसके बाद संबंधित व्यक्ति ने कुछ चटनी नमूने के तौर पर ले ली। उसका कहना है कि वह इस नमूने को संबंधित विभाग के अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करेगा, ताकि चटनी की गुणवत्ता की जांच कराई जा सके और यदि अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। कभी-कभी क्या होता है कि जब फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों पर कोई उंगली उठाता है तो समाज कहता है बेचारा गरीब आदमी है, छोटा-मोटा व्यापार करके अपने परिवार का खर्चा चला रहा है, इसके बाद भी लोग उसे चैन से काम नहीं करने दे रहे हैं, लेकिन वो जनता को क्या खिलाकर पैसे ले रहे हैं, इस पर कोई आवाज नहीं उठाता। माना कि गरीब आदमी है और हरी धनिया की चलती महंगाई के कारण गुणवत्तापूर्ण चटनी देने में एवरेज नहीं आएगा, तो इनसे ये किसने कहा कि मूंगफली के साथ में चटनी दीजिए, नहीं एवरेज आ रहा है तो केवल नमक दीजिए या फिर दो-चार रुपये अधिक ले, लेकिन चटनी तो कम से कम हरी धनिया या हरी मिर्च की दें। खाद्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल नगर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि विभाग की ओर से होटलों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच के साथ-साथ सड़क किनारे ठेले लगाकर खाद्य सामग्री बेचने वालों की भी नियमित जांच क्यों नहीं की जाती। मूंगफली के साथ परोसी जाने वाली चटनी की गुणवत्ता की जांच भी जरूरी है, ताकि लोगों को दूषित या मिलावटी खाद्य सामग्री के सेवन से बचाया जा सके। अब देखना होगा कि खाद्य सुरक्षा विभाग इस मामले को संज्ञान में लेकर संबंधित विक्रेता के यहां जांच करता है या नहीं। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, जिससे आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
मूंगफली के साथ धनिया-मिर्च की जगह घास की चटनी देने का मामला खाद्य विभाग की जांच पर उठे सवाल, मेला गेट के सामने ठेला लगाकर बेच रहा विक्रेता, चटनी का नमूना लेकर संबंधित अधिकारियों को दिखाने की तैयारी पलियाकलां-खीरी। पलिया नगर में कुछ मूंगफली विक्रेताओं की ओर से ग्राहकों को दी जाने वाली चटनी की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। मूंगफली के साथ हरी धनिया या हरी मिर्च की चटनी देने के बजाय कुछ विक्रेता घास जैसी दिखने वाली चटनी परोस रहे हैं, जिसमें धनिया-मिर्च की खुशबू के बजाय अजीब सी दुर्गंध आती है। इससे चटनी खाने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। मामला नगर के मेला गेट के सामने ठेला लगाकर मूंगफली बेचने वाले एक विक्रेता से जुड़ा है। आज शनिवार की देर शाम लगभग आठ बजे मूंगफली खरीदने पहुंचे एक व्यक्ति को चटनी की गुणवत्ता संदिग्ध लगी। चटनी से दुर्गंध आने पर उसने विक्रेता से इसके बारे में पूछताछ की तो विक्रेता नाराज हो गया और उसने चटनी की जांच प्रयोगशाला में कराने तक की बात कह डाली। इसके बाद संबंधित व्यक्ति ने कुछ चटनी नमूने के तौर पर ले ली। उसका कहना है कि वह इस नमूने को संबंधित विभाग के अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करेगा, ताकि चटनी की गुणवत्ता की जांच कराई जा सके और यदि अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। कभी-कभी क्या होता है कि जब फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों पर कोई उंगली उठाता
है तो समाज कहता है बेचारा गरीब आदमी है, छोटा-मोटा व्यापार करके अपने परिवार का खर्चा चला रहा है, इसके बाद भी लोग उसे चैन से काम नहीं करने दे रहे हैं, लेकिन वो जनता को क्या खिलाकर पैसे ले रहे हैं, इस पर कोई आवाज नहीं उठाता। माना कि गरीब आदमी है और हरी धनिया की चलती महंगाई के कारण गुणवत्तापूर्ण चटनी देने में एवरेज नहीं आएगा, तो इनसे ये किसने कहा कि मूंगफली के साथ में चटनी दीजिए, नहीं एवरेज आ रहा है तो केवल नमक दीजिए या फिर दो-चार रुपये अधिक ले, लेकिन चटनी तो कम से कम हरी धनिया या हरी मिर्च की दें। खाद्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल नगर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि विभाग की ओर से होटलों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच के साथ-साथ सड़क किनारे ठेले लगाकर खाद्य सामग्री बेचने वालों की भी नियमित जांच क्यों नहीं की जाती। मूंगफली के साथ परोसी जाने वाली चटनी की गुणवत्ता की जांच भी जरूरी है, ताकि लोगों को दूषित या मिलावटी खाद्य सामग्री के सेवन से बचाया जा सके। अब देखना होगा कि खाद्य सुरक्षा विभाग इस मामले को संज्ञान में लेकर संबंधित विक्रेता के यहां जांच करता है या नहीं। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, जिससे आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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- आखिर किस टेक्नोलॉजी से रात मे बन रहा है निघासन नगर का यह नाला? लखीमपुर खीरी के निघासन नगर पंचायत के झंडी रोड, नानक नगर वार्ड-10 में नाले के अंदर पानी और भारी कीचड़ भरा है, फिर भी नाला का निर्माण कार्य जारी है। वीडियो में पानी के बीच सूखा मसाला डालते हुए काम होता साफ दिखाई दे रहा है। सवाल बड़ा है—पानी और कीचड़ के बीच बना रहा यह नाला कितने दिन टिकेगा? जब बजट अच्छा-खासा है और मजबूत निर्माण का दावा है, तो निर्माण की गुणवत्ता पर ऐसे सवाल क्यों? अब देखना है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर गुणवत्ता की जांच कराते हैं या नहीं। जानकारी के अनुसार ठेकेदार गोरखपुर का बताया जा रहा है।1
- मूंगफली के साथ धनिया-मिर्च की जगह घास की चटनी देने का मामला खाद्य विभाग की जांच पर उठे सवाल, मेला गेट के सामने ठेला लगाकर बेच रहा विक्रेता, चटनी का नमूना लेकर संबंधित अधिकारियों को दिखाने की तैयारी पलियाकलां-खीरी। पलिया नगर में कुछ मूंगफली विक्रेताओं की ओर से ग्राहकों को दी जाने वाली चटनी की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। मूंगफली के साथ हरी धनिया या हरी मिर्च की चटनी देने के बजाय कुछ विक्रेता घास जैसी दिखने वाली चटनी परोस रहे हैं, जिसमें धनिया-मिर्च की खुशबू के बजाय अजीब सी दुर्गंध आती है। इससे चटनी खाने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। मामला नगर के मेला गेट के सामने ठेला लगाकर मूंगफली बेचने वाले एक विक्रेता से जुड़ा है। आज शनिवार की देर शाम लगभग आठ बजे मूंगफली खरीदने पहुंचे एक व्यक्ति को चटनी की गुणवत्ता संदिग्ध लगी। चटनी से दुर्गंध आने पर उसने विक्रेता से इसके बारे में पूछताछ की तो विक्रेता नाराज हो गया और उसने चटनी की जांच प्रयोगशाला में कराने तक की बात कह डाली। इसके बाद संबंधित व्यक्ति ने कुछ चटनी नमूने के तौर पर ले ली। उसका कहना है कि वह इस नमूने को संबंधित विभाग के अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करेगा, ताकि चटनी की गुणवत्ता की जांच कराई जा सके और यदि अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। कभी-कभी क्या होता है कि जब फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों पर कोई उंगली उठाता है तो समाज कहता है बेचारा गरीब आदमी है, छोटा-मोटा व्यापार करके अपने परिवार का खर्चा चला रहा है, इसके बाद भी लोग उसे चैन से काम नहीं करने दे रहे हैं, लेकिन वो जनता को क्या खिलाकर पैसे ले रहे हैं, इस पर कोई आवाज नहीं उठाता। माना कि गरीब आदमी है और हरी धनिया की चलती महंगाई के कारण गुणवत्तापूर्ण चटनी देने में एवरेज नहीं आएगा, तो इनसे ये किसने कहा कि मूंगफली के साथ में चटनी दीजिए, नहीं एवरेज आ रहा है तो केवल नमक दीजिए या फिर दो-चार रुपये अधिक ले, लेकिन चटनी तो कम से कम हरी धनिया या हरी मिर्च की दें। खाद्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल नगर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि विभाग की ओर से होटलों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच के साथ-साथ सड़क किनारे ठेले लगाकर खाद्य सामग्री बेचने वालों की भी नियमित जांच क्यों नहीं की जाती। मूंगफली के साथ परोसी जाने वाली चटनी की गुणवत्ता की जांच भी जरूरी है, ताकि लोगों को दूषित या मिलावटी खाद्य सामग्री के सेवन से बचाया जा सके। अब देखना होगा कि खाद्य सुरक्षा विभाग इस मामले को संज्ञान में लेकर संबंधित विक्रेता के यहां जांच करता है या नहीं। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, जिससे आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।2
- जरा खीरी सीएमओ की ठसक, धमक और तेवर तो देखिए- बजाई चुटकी...और बोले -"15 मिनट में खाली करो स्थल... वरना एक-एक के खिलाफ होगा एक्शन ..." अहंकार भरे लफ़्ज़ों में लखीमपुर खीरी के सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने संविदा कर्मियों को धमकाया संविदा कर्मचारियों के धरने पर पहुंचकर उनको अल्टीमेटम दिया- बोले 15 मिनट में निकलिए बाहर1
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- गमगीन माहौल में हुआ रचना का अंतिम संस्कार, 11 वर्षीय बेटे के सिर से उठा मां का साया पलिया-खीरी। भीरा थाना क्षेत्र के ग्राम घुरहा में रचना का शव शनिवार को पोस्टमार्टम हाउस से घर वापस आ गया। शव आते ही परिजनों में कोहराम मच गया। गमगीन माहौल एवं पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिजनों और रिश्तेदारों की आंखें नम रहीं। मृतका के मायके वालों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार में मातम पसरा रहा और हर किसी की आंखें नम नजर आईं। रचना अपने पीछे 11 वर्षीय बेटे प्रखर को छोड़ गई हैं। मां की मौत के बाद मासूम प्रखर के भविष्य और उसकी परवरिश को लेकर परिवार के सामने चिंता खड़ी हो गई है। जिस उम्र में बच्चे को मां के स्नेह और देखभाल की सबसे अधिक जरूरत होती है, उस उम्र में उसके सिर से मां का साया उठ गया। रचना की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया।2