एक 'बड़ा विदेशी गैंग' भारतीय लड़कियों को शादी के विरुद्ध भड़काने में सक्रिय है, जिसके लिए उन्हें बाकायदा पैसे दिए जा रहे हैं। इस गैंग का उद्देश्य ऐसी लड़कियों को तैयार करना है जो शादी को 'गुलामी और दुखों का पर्याय' बताएं, जिससे अन्य लड़कियों का 'ब्रेनवॉश' किया जा सके। यह प्रचार-प्रसार विदेशों से मोटी फंडिंग के ज़रिए हो रहा है और इसका असर दिखने लगा है, खासकर हिंदू लड़कियों में यह 'कुविचार' पनप रहा है, जिसके कारण देश 'घोर गुलामी' की ओर बढ़ रहा है। इस सोच के दूरगामी और भयानक परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा गया है कि आज की जवानी, शिक्षा और कमाने की क्षमता भले ही लड़कियों को बिना शादी के जीवन चलाने में मदद करे, पर साठ साल की उम्र के बाद या बीमारी में अपनों (भाई-भतीजों) का सहारा न मिलने पर, और दवाइयों व ऑपरेशन में सारा पैसा खत्म हो जाने पर बुढ़ापे में अपनी देखभाल कैसे होगी, यह प्रश्न उठता है। सबसे भयावह परिणाम हिंदुओं की पहले से तेजी से गिर रही आबादी पर पड़ेगा, क्योंकि यह पीढ़ी शादी से दूरी बना रही है या बहुत देर से शादी कर रही है, जिससे बच्चे एक या मुश्किल से दो ही होंगे। इससे देश 'बहुत तेजी से नारकीय गुलामी के अंधकार के दलदल' की ओर जा रहा है। पिछले एक हज़ार सालों के इतिहास का हवाला देते हुए बताया गया है कि उस 'गुलामी' के दौर में हिंदू स्त्रियों को लाखों की संख्या में समरकंद की मंडियों में नंगी परेड करवा कर दो-दो दीनार में बेचा गया था। उनके बच्चों को अलग-अलग बेचा गया, जिससे माँ, बेटा और बेटी जीवन में दोबारा कभी नहीं मिल पाए। उन्हें पीट-पीटकर दिन-रात काम कराया गया, जबकि बचे हुए हिंदुओं का कत्ल कर दिया गया और उन्हें जीवित जलाया गया। उनकी धन-संपत्ति और मवेशियों को लूटा गया, और यह सब उन हज़ारों सालों की गुलामी में बार-बार दोहराया गया। लाखों हिंदू स्त्रियों का बार-बार बलात्कार कर उन्हें रखैलों की श्रेणी में स्थान मिला। आज शादी से इनकार करने वाली पीढ़ी से पूछा गया है कि क्या वे कल अपने माता-पिता, भाई-बहन का कत्ल और खुद का बलात्कार अपनी आँखों से देखना पसंद करेंगे/करेंगी? या क्या वे 'बुर्के में धीमा साँस' लेना, चार-चार सौतन और गाय का माँस बनाना व खाना पसंद करेंगे/करेंगी? इस 'नर्क' को झेलने के लिए तैयार होने का प्रश्न उठाते हुए, चौधरी ने व्यक्ति से खुद ही फैसला लेने का आह्वान किया है।
एक 'बड़ा विदेशी गैंग' भारतीय लड़कियों को शादी के विरुद्ध भड़काने में सक्रिय है, जिसके लिए उन्हें बाकायदा पैसे दिए जा रहे हैं। इस गैंग का उद्देश्य ऐसी लड़कियों को तैयार करना है जो शादी को 'गुलामी और दुखों का पर्याय' बताएं, जिससे अन्य लड़कियों का 'ब्रेनवॉश' किया जा सके। यह प्रचार-प्रसार विदेशों से मोटी फंडिंग के ज़रिए हो रहा है और इसका असर दिखने लगा है, खासकर हिंदू लड़कियों में यह 'कुविचार' पनप रहा है, जिसके कारण देश 'घोर गुलामी' की ओर बढ़ रहा है। इस सोच के दूरगामी और भयानक परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा गया है कि आज की जवानी, शिक्षा और कमाने की क्षमता भले ही लड़कियों को बिना शादी के जीवन चलाने में मदद करे, पर साठ साल की उम्र के बाद या बीमारी में अपनों (भाई-भतीजों) का सहारा न मिलने पर, और दवाइयों व ऑपरेशन में सारा पैसा खत्म हो जाने पर बुढ़ापे में अपनी देखभाल कैसे होगी, यह प्रश्न उठता है। सबसे भयावह परिणाम हिंदुओं की पहले से तेजी से गिर रही आबादी पर पड़ेगा, क्योंकि यह पीढ़ी शादी से दूरी बना रही है या बहुत देर से शादी कर रही है, जिससे बच्चे एक या मुश्किल से दो ही होंगे। इससे देश 'बहुत तेजी से नारकीय गुलामी के अंधकार के दलदल' की ओर जा रहा है। पिछले एक हज़ार सालों के इतिहास का हवाला देते हुए बताया गया है कि उस 'गुलामी' के दौर में हिंदू स्त्रियों को लाखों की संख्या में समरकंद की मंडियों में नंगी परेड करवा कर दो-दो दीनार में बेचा गया था। उनके बच्चों को अलग-अलग बेचा गया, जिससे माँ, बेटा और बेटी जीवन में दोबारा कभी नहीं मिल पाए। उन्हें पीट-पीटकर दिन-रात काम कराया गया, जबकि बचे हुए हिंदुओं का कत्ल कर दिया गया और उन्हें जीवित जलाया गया। उनकी धन-संपत्ति और मवेशियों को लूटा गया, और यह सब उन हज़ारों सालों की गुलामी में बार-बार दोहराया गया। लाखों हिंदू स्त्रियों का बार-बार बलात्कार कर उन्हें रखैलों की श्रेणी में स्थान मिला। आज शादी से इनकार करने वाली पीढ़ी से पूछा गया है कि क्या वे कल अपने माता-पिता, भाई-बहन का कत्ल और खुद का बलात्कार अपनी आँखों से देखना पसंद करेंगे/करेंगी? या क्या वे 'बुर्के में धीमा साँस' लेना, चार-चार सौतन और गाय का माँस बनाना व खाना पसंद करेंगे/करेंगी? इस 'नर्क' को झेलने के लिए तैयार होने का प्रश्न उठाते हुए, चौधरी ने व्यक्ति से खुद ही फैसला लेने का आह्वान किया है।
- मुख्यमंत्री भजनलाल की पहल पर, जयपुर नगर-निगम ने आगामी निर्जला एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं को दान-पुण्य करने के लिए विशेष सुविधाएँ प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत, निगम शहर में सौ से अधिक स्थानों पर जगह, टेंट और कुर्सियों की व्यवस्था करेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए, इन सुविधाओं के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे निर्जला एकादशी पर इस पहल का लाभ उठा सकें।1
- उत्तराखंड स्पोर्ट्स साइंस कॉन्क्लेव-2026 में खेल आधारित आर्थिक विकास और युवाओं के लिए रोजगार सृजन के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। उत्तराखंड राज्य खेल विश्वविद्यालय द्वारा हल्द्वानी के गैलापार स्थित आईजी खेल विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस राष्ट्रीय आयोजन का शुभारंभ कुलपति प्रो. अमित सिंहा ने किया। उन्होंने बताया कि राज्य के प्रत्येक जिले में 'खेल हब परियोजना' क्रियान्वित की जा रही है, तथा विश्वविद्यालय में जुलाई से प्रवेश और अगस्त से पाठ्यक्रम शुरू होंगे। कॉन्क्लेव में कोटा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. अनुकृति शर्मा की 'स्पोर्ट्स मैनेजमेंट फॉर स्पोर्ट्स-लेड इकोनॉमिक डेवलपमेंट एंड यूथ जॉब अपॉर्च्युनिटीज इन उत्तराखंड' विषय पर प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। डॉ. शर्मा ने तर्क दिया कि उत्तराखंड अपनी अद्वितीय भौगोलिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विशेषताओं के कारण देश का एक अग्रणी स्पोर्ट्स इकोनॉमी हब बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने रेखांकित किया कि हिमालयी क्षेत्र साहसिक, शीतकालीन और पर्वतीय खेलों के लिए विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करता है, वहीं राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से राज्य की खेल अधोसंरचना मजबूत हुई है। इसके अतिरिक्त, ऋषिकेश और हरिद्वार ने योग एवं वेलनेस पर्यटन में वैश्विक पहचान स्थापित की है। प्रो. अनुकृति शर्मा ने स्पोर्ट्स मैनेजमेंट को खेल संगठनों, प्रतियोगिताओं, खिलाड़ियों और खेल व्यवसाय के वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़ा एक बहुआयामी अनुशासन बताया। उन्होंने स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर पर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया, जिससे खेल आयोजन प्रबंधक, स्पोर्ट्स मार्केटिंग विशेषज्ञ, खेल विश्लेषक, स्टेडियम प्रबंधक, खेल पत्रकार और एडवेंचर टूरिज्म प्रबंधक जैसे विभिन्न व्यवसायों में युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर खुलेंगे। डॉ. शर्मा ने स्पोर्ट्स इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना पर भी जोर दिया, ताकि युवाओं को स्टार्टअप, नवाचार और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर मिलें। इस दिशा में खेलो इंडिया, राष्ट्रीय खेल विकास कोष, स्टार्टअप इंडिया और उत्तराखंड स्टार्टअप नीति-2023 जैसी केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को सहायक बताया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की उपकुलपति डॉ. रशिका सिद्दीकी ने बताया कि खेल विश्वविद्यालय और फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PFI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिससे दोनों संस्थानों के छात्र खेल संसाधनों का परस्पर उपयोग कर सकेंगे। कॉन्क्लेव में प्रस्तुत कार्ययोजना के अनुसार, वर्ष 2026-27 से स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कार्यक्रम आरंभ करने, उद्योग एवं सरकारी संस्थाओं के साथ समझौते करने तथा आगामी वर्षों में शोध एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। वक्ताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि विश्वविद्यालयों, सरकार और उद्योग जगत के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड को देश की 'स्पोर्ट्स कैपिटल' के रूप में स्थापित किया जा सकता है। कार्यक्रम में एनएसीआईटी के सलाहकार डॉ. अरुण कुमार, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंहा, अभिषेक इस्तार, गौतम विर्क और डी टाउन रोबोटिक्स के अविनाश चंद पाल ने भी अपने विचार साझा किए।4
- यह बात किसी भी व्यक्ति के लिए सत्य है कि उसकी कड़ी मेहनत, वर्षों का अथक संघर्ष और कुछ नया सीखने की प्रबल इच्छाशक्ति ही अंततः उसे अपने क्षेत्र का धुरंधर बना देती है। इन्हीं गुणों के बल पर एक इंसान एक दिन निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करता है।1
- नगर निगम के अतिक्रमण अनुभाग द्वारा शहर में अवैध होर्डिंग्स, पोस्टर, बैनर और अस्थाई अतिक्रमणों के विरुद्ध लगातार तीसरे दिन एक विशेष अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई के तहत विभिन्न क्षेत्रों से सड़क और सार्वजनिक स्थलों पर किए गए सभी अवैध होर्डिंग्स, विज्ञापन बोर्ड, पोस्टर-बैनर और अस्थाई अतिक्रमणों को हटाया गया। नगर निगम प्रशासन पिछले कई दिनों से मुनादी और जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को अतिक्रमण न करने की समझाइश दे रहा था, बावजूद इसके अवैध होर्डिंग्स और अस्थाई अतिक्रमणों की लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इसी के चलते, आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशानुसार, आज थर्मल चौराहा से महाराणा प्रताप चौराहा तक विशेष कार्रवाई करते हुए सभी अवैध होर्डिंग्स, बोर्ड और अस्थाई अतिक्रमणों को हटाया गया। इस दौरान, संबंधित लोगों को दोबारा अतिक्रमण नहीं करने की कड़ी चेतावनी भी दी गई और भविष्य में सख्त कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई। नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। सभी दुकानदारों और व्यापारियों से अपील की गई है कि वे अपना सामान दुकान की निर्धारित सीमा तक ही रखें तथा सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा-कचरा, निर्माण सामग्री या किसी भी प्रकार का अस्थाई अतिक्रमण न करें। निगम प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि नियमों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।1
- रविवार को बड़गांव कस्बे में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया, जिसके बाद करीब एक घंटे तक झमाझम बारिश हुई। इस मूसलाधार वर्षा ने पूरे क्षेत्र को तर-बतर कर दिया, जिससे सड़कों पर पानी बहने लगा और खेतों में भी अच्छी-खासी आवक दर्ज की गई। खेतों में लबालब पानी भरने से किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे, क्योंकि उन्हें लंबे समय से इस बारिश का इंतजार था। यह वर्षा कृषि क्षेत्र के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही है, क्योंकि इसने फसलों की सिंचाई की चिंता कम की है। बारिश के कारण तापमान में भी भारी गिरावट आई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है और क्षेत्र का मौसम पूरी तरह से खुशनुमा हो गया है। हालांकि, बारिश के चलते कस्बे के मुख्य मार्गों पर पानी भर गया, जिससे राहगीरों को हल्की परेशानी का सामना करना पड़ा। फिर भी, ग्रामीण इलाकों में फसल की बुवाई और सिंचाई की तैयारियों में जुटे किसानों के लिए यह बारिश संजीवनी बनकर आई है।1
- कोटा में चंबल नदी के कोटा बैराज पर गेट नंबर 19 के पास नहाते समय एक व्यक्ति के डूबने की खबर सामने आई है। इस सूचना पर पुलिस, सिविल डिफेंस और गोताखोरों की टीम ने तुरंत मौके पर पहुँचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।1