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फ़िरोज़ अहमद
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- गोरखपुर में महिला सिपाही का फोन नंबर अश्लील तस्वीरों के साथ सोशल मीडिया पर वायरल, मुकदमा दर्ज गोरखपुर में तैनात महिला सिपाही के फेसबुक पर मोबाइल नंबर, आपत्तिजनक फोटो और वीडियो प्रसारित कर दिया। इसके बाद उसके मोबाइल पर अनजान नंबरों से लगातार फोन आने लगे। कॉल करने वाले अश्लील बातें करने के साथ व्हाट्सएप पर आपत्तिजनक संदेश और फोटो भेजने लगे। इससे परेशान होकर महिला सिपाही ने अपना मोबाइल बंद कर दिया। उसकी तहरीर पर तीन सितंबर को साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने फर्जी फेसबुक प्रोफाइल की जांच शुरू कर दी है। बलिया की रहने वाली महिला सिपाही ने पुलिस को बताया कि 17 अगस्त को वह थाने में थी। इसी दौरान उसके मोबाइल पर लगातार अंजान नंबरों से कॉल आने लगीं। कुछ देर बाद अलग-अलग नंबरों से व्हाट्सएप पर अश्लील संदेश और आपत्तिजनक फोटो भेजे जाने लगे। लगातार हो रहे इस मैसेज से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई। एक कॉलर से सख्ती से पूछताछ करने पर उसने बताया कि फेसबुक पर एक फर्जी आईडी बनाई गई है। इस प्रोफाइल पर आपत्तिजनक फोटो और वीडियो के साथ महिला सिपाही का मोबाइल नंबर भी डाला गया है। इसके बाद से ही उसके पास लगातार फोन और संदेश आने लगे। लगातार हो रहे मानसिक उत्पीड़न से परेशान महिला सिपाही ने थाना प्रभारी को तहरीर दी। तीन सितंबर को पुलिस ने फर्जी फेसबुक आईडी के माध्यम से अश्लील सामग्री प्रसारित करने और नंबर वायरल करने के आरोप में बीएनएस व आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की।1
- गोरखपुर में भारतीय अपना समाज पार्टी का जोरदार आंदोलन | UGC-SC/ST एक्ट रोलबैक, आरक्षण सुधार की मांग1
- ..इतनी फोर्स बुलाऊँगा ठंडा कर दूँगा..गोरखपुर पुलिस है..मैं बता दे रहा हूं.. गोरखपुर विश्वविद्यालय में बोले दरोगा..शांतिपूर्ण धरने के पूरी माँ....। ..इतनी फोर्स बुलाऊँगा ठंडा कर दूँगा..गोरखपुर पुलिस है..मैं बता दे रहा हूं.. गोरखपुर विश्वविद्यालय में बोले दरोगा..शांतिपूर्ण धरने के पूरी माँ....।1
- Post by फ़िरोज़ अहमद1
- गुंडई होगी यहाँ? प्रेम से समझा रहा हूँ, समझ में नहीं आ रहा—SO, सपा की रैली देखकर बौखलाए SO का वीडियो वायरल! #कैंपियरगंज #गोरखपुर #सपा #समाजवादीपार्टी #सपा_रैली #पुलिस #SO #पुलिस_विवाद #रैली #वायरल_वीडियो #UPNews #GorakhpurNews #BreakingNews #ABC_Hindustan #UPPolitics #2027चुनाव1
- पीपीगंज में बिना अनुमति रैली को लेकर हंगामा, सपा प्रत्याशी साधु यादव की पुलिस से हुई नोकझोंक गोरखपुर। पीपीगंज थाना क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी साधु यादव द्वारा बिना अनुमति रैली निकाले जाने को लेकर हंगामा हो गया। रैली के चलते क्षेत्र में जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और रैली को बिना अनुमति निकाले जाने से रोकने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, बिना अनुमति रैली निकाले जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था। पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आयोजकों और रैली में शामिल लोगों को रैली रोकने के लिए कहा। इसी दौरान पुलिस और रैली में शामिल लोगों के बीच नोकझोंक हो गई। स्थिति बिगड़ने की सूचना पर अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। अतिरिक्त पुलिस बल के पहुंचने के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और मौके पर शांति व्यवस्था कायम कराई। पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति रैली निकालने और पुलिस के कार्य में बाधा डालने के मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।1
- सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढही, सात की मौत; अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल 27 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, मलबे से निकाले गए शव; बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम, G+1 की अनुमति पर खड़ी कर दी गईं पांच मंजिलें नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर 2026 को एक दर्दनाक हादसे में छात्रों के लिए संचालित पांच मंजिला पीजी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के समय इमारत में कई छात्र मौजूद थे। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई और कई लोग उसके नीचे दब गए। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। घटना के बाद करीब 27 घंटे तक बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ, डीडीएमए, सिविल डिफेंस समेत अन्य राहत एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। मलबा काफी भारी और इमारत की संरचना अस्थिर होने के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। राहतकर्मियों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया और एक-एक कर फंसे लोगों को बाहर निकाला। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम प्रारंभिक जांच में हादसे को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत अथवा रेनोवेशन का काम चल रहा था। बेसमेंट में लंबे समय से पानी का रिसाव और सीलन होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मरम्मत के दौरान भवन की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई और इसी वजह से इमारत अचानक ढह गई। G+1 की अनुमति, पांच मंजिल तक निर्माण का आरोप हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल अवैध निर्माण को लेकर उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भवन को मूल रूप से ग्राउंड प्लस एक मंजिल (G+1) के लिए अनुमति मिली थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर इसमें अतिरिक्त मंजिलें बनाकर इसे करीब पांच मंजिला कर दिया गया। इतनी पुरानी इमारत पर अतिरिक्त निर्माण किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी जांच का विषय है कि भवन में पीजी का संचालन किस आधार पर किया जा रहा था और क्या वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा था। मालिक समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने भवन मालिक हरिराम बंसल और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हादसे के वास्तविक कारणों, अवैध निर्माण, मरम्मत कार्य तथा भवन की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। MCD की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में हादसे ने दिल्ली में अवैध निर्माण और पुराने भवनों की सुरक्षा जांच की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि भवन में स्वीकृत नक्शे के विपरीत अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं और वह लंबे समय से जर्जर स्थिति में था तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? छात्रों के रहने के लिए पीजी के रूप में इस्तेमाल होने वाली इमारत की सुरक्षा जांच समय-समय पर क्यों नहीं की गई? हादसे के बाद नगर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और चिन्हित अवैध संरचनाओं को सील करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है तथा लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की बात कही गई है। छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल सत्य निकेतन दिल्ली का प्रमुख छात्र इलाका है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पीजी और किराये के मकानों में रहते हैं। ऐसे में इस हादसे ने राजधानी में पीजी, हॉस्टल और किराये की इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को ऐसे सभी पुराने भवनों का संरचनात्मक ऑडिट कराना चाहिए, जहां बड़ी संख्या में छात्र या अन्य लोग रह रहे हैं। विशेष रूप से उन भवनों की जांच जरूरी है, जिनमें स्वीकृत मानकों से अधिक निर्माण किया गया है। जिम्मेदारी तय होने का इंतजार सत्य निकेतन हादसे ने एक साथ कई सवाल खड़े किए हैं—क्या अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई हुई थी? क्या भवन की संरचनात्मक जांच की गई थी? बेसमेंट में चल रहे काम की अनुमति किसने दी? और यदि भवन असुरक्षित था तो उसमें छात्रों के रहने की व्यवस्था कैसे चलती रही? अब लोगों की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। जरूरत है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा केवल भवन मालिक ही नहीं, बल्कि यदि किसी अधिकारी या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जवाबदेही तय की जाए। सत्य निकेतन का मलबा हटाने के साथ राहत अभियान भले समाप्त हो गया हो, लेकिन यह हादसा दिल्ली में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण की निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल छोड़ गया है।1
- रेलकर्मी ने हत्याकर फेंकी थी महिला की न्यूड लाश, घटना का पर्दाफाश गोरखपुर में रेलकर्मी ने 35 साल की महिला से रेप कर हत्या की थी। इसके बाद न्यूड लाश फेंककर भाग गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर घटना का पर्दाफाश किया है। झंगहा इलाके में 3 सितंबर की सुबह सड़क किनारे खेत में महिला की न्यूड लाश मिली थी। सौ से अधिक पुलिसकर्मी घटना का पर्दाफाश करने के लिए लगाए गए थे। सीसीटीवी कैमरे की मदद से पुलिस हत्यारोपी तक पहुंच गई। सोमवार को पुलिस ने देवरिया के तरकुलवा थाना क्षेत्र के रामपुर शुक्ल गांव अभय कुमार तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। अभय रेलवे में प्वाइस मैन का काम करता है। एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि बुधवार शाम ट्रेन के माध्यम से महिला लखनऊ से गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुंची थी। 2 सितंबर की शाम करीब 7:30 बजे उससे अभय मिला और बातचीत करते हुए अपने साथ लेकर बाहर चला आया। टीमों ने रेलवे स्टेशन, प्रमुख मार्गों और घटनास्थल के आसपास लगे 500 से अधिक सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली। अलग-अलग कैमरों की फुटेज जोड़ने पर महिला के साथ अभय की मौजूदगी सामने आई और जांच उसी दिशा में आगे बढ़ी। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और आरोपित के बयान का मिलान कर रही है। महिला की पहचान और हत्या के पीछे की पूरी वजह सामने आने के बाद विवेचना को आगे बढ़ाया जाएगा।1