चार महीने से वेतन बंद, 102 एम्बुलेंस कर्मियों का फूटा गुस्सा DM के सामने जोरदार प्रदर्शन, ‘परिवार कैसे चले पश्चिम चंपारण से एक गंभीर खबर सामने आ रही है, जहां 102 एम्बुलेंस कर्मचारी संघ एटक के बैनर तले कर्मियों ने चार माह से वेतन नहीं मिलने के विरोध में जिला पदाधिकारी के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां और जुबान पर गूंजते नारों के साथ कर्मचारियों ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान पूरा माहौल गूंज उठा जब कर्मचारी एक स्वर में सवाल कर रहे थे चार माह से वेतन नहीं, परिवार कैसे चले जवाब दो बच्चों की पढ़ाई कैसे हो जवाब दो कर्मचारियों का कहना है कि लगातार चार महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। घर चलाना मुश्किल हो गया है, बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है। कर्मियों ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि सरकार ने 102 एम्बुलेंस सेवा को कंपनी के जिम्मे सौंप दिया है, जिसके बाद से आउटसोर्सिंग के तहत काम कर रहे कर्मचारियों का शोषण लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जब तक एम्बुलेंस सेवा स्वास्थ्य समिति के अधीन थी, तब तक स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर थी, लेकिन जैसे ही इसे निजी कंपनियों को सौंपा गया, कर्मचारियों की समस्याएं बढ़ती चली गईं। वेतन भुगतान में देरी, काम का बढ़ता दबाव और अधिकारों की अनदेखी अब आम बात हो गई है। इसी कड़ी में कर्मचारियों ने जिला पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर समय रहते वेतन भुगतान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस प्रदर्शन में एटक प्रभारी ओम प्रकाश क्रांति, 102 कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष सुनील राम, संजीत सिन्हा, अजय चौबे, विजय राम, गोविन्द प्रसाद, मेराज हुसैन, ऋतु राज, राजू कुमार, नन्दलाल राम, राजेश कुमार, उमेश गुप्ता, मुकेश पटेल, असलम, कृष्ण नन्दन ठाकुर, कमलेश पटेल, सुरेन्द्र प्रसाद समेत कई कर्मचारी मौजूद रहे। अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर चार महीने से वेतन के लिए जूझ रहे इन एम्बुलेंस कर्मियों को कब मिलेगा उनका हक और क्या सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएगी, या फिर यूं ही कर्मचारियों का संघर्ष जारी रहेगा।
चार महीने से वेतन बंद, 102 एम्बुलेंस कर्मियों का फूटा गुस्सा DM के सामने जोरदार प्रदर्शन, ‘परिवार कैसे चले पश्चिम चंपारण से एक गंभीर खबर सामने आ रही है, जहां 102 एम्बुलेंस कर्मचारी संघ एटक के बैनर तले कर्मियों ने चार माह से वेतन नहीं मिलने के विरोध में जिला पदाधिकारी के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां और जुबान पर गूंजते नारों के साथ कर्मचारियों ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान पूरा माहौल गूंज उठा जब कर्मचारी एक स्वर में सवाल कर रहे थे चार माह से वेतन नहीं, परिवार कैसे चले जवाब दो बच्चों की पढ़ाई कैसे हो जवाब दो कर्मचारियों का कहना है कि लगातार चार महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। घर चलाना मुश्किल हो गया है, बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है। कर्मियों ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि सरकार ने 102 एम्बुलेंस सेवा को कंपनी के जिम्मे सौंप दिया है, जिसके बाद से आउटसोर्सिंग के तहत काम कर रहे कर्मचारियों का शोषण लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जब तक एम्बुलेंस सेवा स्वास्थ्य समिति के अधीन थी, तब तक स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर थी, लेकिन जैसे ही इसे निजी कंपनियों को सौंपा गया, कर्मचारियों की समस्याएं बढ़ती चली गईं। वेतन भुगतान में देरी, काम का बढ़ता दबाव और अधिकारों की अनदेखी अब आम बात हो गई है। इसी कड़ी में कर्मचारियों ने जिला पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर समय रहते वेतन भुगतान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस प्रदर्शन में एटक प्रभारी ओम प्रकाश क्रांति, 102 कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष सुनील राम, संजीत सिन्हा, अजय चौबे, विजय राम, गोविन्द प्रसाद, मेराज हुसैन, ऋतु राज, राजू कुमार, नन्दलाल राम, राजेश कुमार, उमेश गुप्ता, मुकेश पटेल, असलम, कृष्ण नन्दन ठाकुर, कमलेश पटेल, सुरेन्द्र प्रसाद समेत कई कर्मचारी मौजूद रहे। अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर चार महीने से वेतन के लिए जूझ रहे इन एम्बुलेंस कर्मियों को कब मिलेगा उनका हक और क्या सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएगी, या फिर यूं ही कर्मचारियों का संघर्ष जारी रहेगा।
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- गोपालगंज के हथुआ नगर पंचायत क्षेत्र में शुरुआती बारिश ने ही विकास कार्यों की हकीकत उजागर कर दी है। नगर के विभिन्न इलाकों में जलजमाव की समस्या सामने आने लगी है, जिससे आम लोगों का सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी हथुआ गांव के वार्ड नंबर 10 स्थित दलित बस्ती में देखने को मिल रही है, जहां हल्की बारिश के बाद ही जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बस्ती की सड़कों पर पानी भर जाने से लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।1
- नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ना कभी सरकार में रहे ना ही अभी जेडीयू पार्टी में कुछ है लेकिन निशांत कुमार अपने भाषण में बार बार कह रहे हैं कि हमने ये किया हमने ओ किया निशांत के भाषण लिखने वाले बदनाम कर के ही छोड़ेंगे1
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- बेतिया में उस समय उत्साह का माहौल देखने को मिला जब बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत की खबर सामने आई। इस जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने सांसद डॉ. संजय जायसवाल के आवास पर पहुंचकर जमकर जश्न मनाया। पूरे परिसर में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा और कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया। जश्न के दौरान कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को झालमुरी खिलाकर खुशी साझा की। कागज के ठोंगे में झालमुरी लेकर कार्यकर्ताओं ने मिलकर इसका आनंद लिया और माहौल को और भी उत्साहपूर्ण बना दिया। इस मौके पर बीजेपी कार्यकर्ता राहुल कुमार ने कहा कि बंगाल और असम में पार्टी की यह जीत पूरे देश में कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का विषय है और हर जगह इसे उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। वहीं जिलाध्यक्ष रूपक श्रीवास्तव ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व का परिणाम बताते हुए कहा कि बंगाल में इस जीत के साथ वहां के कथित जंगलराज और गुंडाराज का अंत हुआ है। इस तरह बेतिया में कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच इस राजनीतिक सफलता का उत्साहपूर्वक जश्न मनाया।1
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बीच बीजेपी नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसमें वह हंसते हुए नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तंज कसते हुए साझा कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मिथुन चक्रवर्ती का एक पुराना वीडियो है जिसे चुनाव परिणामों के रुझानों के दौरान दोबारा वायरल किया जा रहा है। हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान का भी एक वीडियो चर्चा में रहा था जिसमें वह हंसते-हंसते विपक्षी पार्टी को चुनौती देते नजर आए थे।1
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