लखीमपुर खीरी जनपद के कस्बा खीरी में मोहर्रम की 10 तारीख यानी यौमे आशूरा के अवसर पर अकीदतमंदों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान एक से बढ़कर एक खूबसूरत और दिलों को छू लेने वाले ताज़ियों को पूरे एहतराम, मोहब्बत और अकीदत के साथ ज़ियारत के बाद नम आँखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस मंज़र में हर आँख नम थी, हर चेहरा ग़मगीन था और हर ज़ुबान पर सिर्फ़ "या हुसैन… या हुसैन…" की सदा गूँज रही थी। मोहर्रम केवल एक तारीख या रस्म नहीं, बल्कि सब्र, कुर्बानी, इंसाफ और हक़ की राह पर कायम रहने का पैगाम है। यह दिन कर्बला के उस अज़ीम वाकये की याद दिलाता है, जहाँ इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके जानिसार साथियों ने इंसानियत, अमन, इंसाफ और सच्चाई के लिए तपती हुई रेत पर ऐसी मिसाल कायम की जिसे दुनिया कभी भूल नहीं सकती। उन्होंने कठिन हालात, प्यास और तकलीफ़ों के बावजूद हक़ के सामने झुकने के बजाय कुर्बानी को चुना, यही कारण है कि सदियाँ बीत जाने के बाद भी आज दुनिया भर में शहीदाने कर्बला को याद किया जाता है। कस्बा खीरी में भी उसी अकीदत और एहतराम की झलक देखने को मिली, जहाँ छोटे बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग सहित हर उम्र के लोग इस ग़म में शरीक हुए। रास्तों पर लोगों की भीड़, ताज़ियों की रौनक और ग़म का माहौल एक साथ छाया रहा। दूर-दूर से आए कई अकीदतमंदों ने फ़ातिहा पढ़ी, दुआ की और ख़ामोशी से खड़े होकर अपनी अकीदत पेश की। जैसे-जैसे ताज़िये अपने आखिरी मरहले की तरफ बढ़ते गए, माहौल और ज़्यादा पुरअसर होता गया। ताज़ियों को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान कई लोगों की आँखें नम थीं और फ़िज़ाओं में "लब्बैक या हुसैन" की सदाएँ गूँज उठीं, जब लोगों ने शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों को सलाम पेश किया। यह मोहर्रम हमें यह भी सिखाता है कि इंसानियत, सब्र, इखलास और सच्चाई का रास्ता कभी ख़त्म नहीं होता; वक्त बदल जाता है लेकिन कुर्बानी और हक़ की आवाज़ हमेशा ज़िंदा रहती है।
लखीमपुर खीरी जनपद के कस्बा खीरी में मोहर्रम की 10 तारीख यानी यौमे आशूरा के अवसर पर अकीदतमंदों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान एक से बढ़कर एक खूबसूरत और दिलों को छू लेने वाले ताज़ियों को पूरे एहतराम, मोहब्बत और अकीदत के साथ ज़ियारत के बाद नम आँखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस मंज़र में हर आँख नम थी, हर चेहरा ग़मगीन था और हर ज़ुबान पर सिर्फ़ "या हुसैन… या हुसैन…" की सदा गूँज रही थी। मोहर्रम केवल एक तारीख या रस्म नहीं, बल्कि सब्र, कुर्बानी, इंसाफ और हक़ की राह पर कायम रहने का पैगाम है। यह दिन कर्बला के उस अज़ीम वाकये की याद दिलाता है, जहाँ इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके जानिसार साथियों ने इंसानियत, अमन, इंसाफ और सच्चाई के लिए तपती हुई रेत पर ऐसी मिसाल कायम की जिसे दुनिया कभी भूल नहीं सकती। उन्होंने कठिन हालात, प्यास और तकलीफ़ों के बावजूद हक़ के सामने झुकने के बजाय कुर्बानी को चुना, यही कारण है कि सदियाँ बीत जाने के बाद भी आज दुनिया भर में शहीदाने कर्बला को याद किया जाता है। कस्बा खीरी में भी उसी अकीदत और एहतराम की झलक देखने को मिली, जहाँ छोटे बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग सहित हर उम्र के लोग इस ग़म में शरीक हुए। रास्तों पर लोगों की भीड़, ताज़ियों की रौनक और ग़म का माहौल एक साथ छाया रहा। दूर-दूर से आए कई अकीदतमंदों ने फ़ातिहा पढ़ी, दुआ की और ख़ामोशी से खड़े होकर अपनी अकीदत पेश की। जैसे-जैसे ताज़िये अपने आखिरी मरहले की तरफ बढ़ते गए, माहौल और ज़्यादा पुरअसर होता गया। ताज़ियों को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान कई लोगों की आँखें नम थीं और फ़िज़ाओं में "लब्बैक या हुसैन" की सदाएँ गूँज उठीं, जब लोगों ने शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों को सलाम पेश किया। यह मोहर्रम हमें यह भी सिखाता है कि इंसानियत, सब्र, इखलास और सच्चाई का रास्ता कभी ख़त्म नहीं होता; वक्त बदल जाता है लेकिन कुर्बानी और हक़ की आवाज़ हमेशा ज़िंदा रहती है।
- लखीमपुर-खीरी में 26 यूपी बटालियन एनसीसी के कैडेटों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से आयोजित एक पल्स पोलियो जागरूकता रैली में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस रैली का प्राथमिक उद्देश्य “दो बूंद जिंदगी की” के जन-जागरूकता संदेश को हर घर तक पहुँचाना था, ताकि पोलियो उन्मूलन के प्रति समाज में चेतना का प्रसार हो सके। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से शुरू हुई इस रैली में एनसीसी कैडेटों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियाँ और बैनर लेकर नगर के प्रमुख मार्गों पर भ्रमण किया। उन्होंने लोगों को पाँच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को समय-समय पर पोलियो की खुराक अवश्य पिलाने के लिए प्रेरित किया। रैली के दौरान, कैडेटों ने “दो बूंद जिंदगी की, हर बच्चे की सुरक्षा की”, “पोलियो मुक्त भारत, हमारा संकल्प” और “हर बच्चा, हर बार – पोलियो की खुराक बार-बार” जैसे प्रेरक नारों के माध्यम से पोलियो उन्मूलन के प्रति व्यापक जन-जागरूकता का संदेश दिया। इस अभियान में आमजन ने भी गहरी रुचि दिखाई और पोलियो उन्मूलन के संकल्प को अपना समर्थन दिया। इस अवसर पर, 26 यूपी बटालियन एनसीसी के कैडेटों ने अनुशासन, सेवा-भाव और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट परिचय दिया। उनकी सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्र निर्माण और जनस्वास्थ्य अभियानों में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह रैली केवल एक जागरूकता अभियान तक सीमित नहीं थी, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने और “एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं पोलियो मुक्त भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आई। एनसीसी कैडेटों ने अपने आदर्श वाक्य “एकता और अनुशासन” को चरितार्थ करते हुए समाज सेवा के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।2
- पलिया नगर के मोहल्ला ढाकिन नई बस्ती स्थित एक खाली पड़े प्लॉट में शनिवार को एक अज्ञात अधेड़ का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। शव पड़े होने की सूचना मिलते ही आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई और पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पलिया कोतवाली पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और निरीक्षण के बाद शव को अपने कब्जे में ले लिया। मृतक की उम्र लगभग 50 वर्ष बताई जा रही है, हालांकि अभी तक उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी है। थानाध्यक्ष पंकज त्रिपाठी ने जानकारी दी कि पुलिस शव की पहचान कराने का प्रयास कर रही है। पहचान होने के बाद परिजनों को सूचित किया जाएगा। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। इसके उपरांत मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जाएगी।4
- उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के निघासन थाना क्षेत्र की झंडी चौकी अंतर्गत पचपेड़ी गांव में मोहर्रम के दौरान बनाए जा रहे 55 फीट ऊँचे ताजिए पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। मानक से अधिक ऊंचाई का ताजिया तैयार किए जाने की सूचना मिलने के बाद तहसील और पुलिस प्रशासन तुरंत मौके पर पहुँचा। प्रशासन ने ताजिए को गिराकर उसकी ऊंचाई कम करवाई, जिसके बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखा गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से गुस्साए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ताजिया खड़ा होने के बाद उसे जबरन गिराकर काटा गया, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। स्थानीय लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि जब पूरी रात ताजिया तैयार किया जा रहा था, तो झंडी चौकी पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम और सीओ मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों से बातचीत कर माहौल को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल, क्षेत्र में स्थिति नियंत्रित बताई जा रही है और प्रशासन पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है।2
- लखीमपुर खीरी जनपद के कस्बा खीरी में मोहर्रम की 10 तारीख यानी यौमे आशूरा के अवसर पर अकीदतमंदों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान एक से बढ़कर एक खूबसूरत और दिलों को छू लेने वाले ताज़ियों को पूरे एहतराम, मोहब्बत और अकीदत के साथ ज़ियारत के बाद नम आँखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस मंज़र में हर आँख नम थी, हर चेहरा ग़मगीन था और हर ज़ुबान पर सिर्फ़ "या हुसैन… या हुसैन…" की सदा गूँज रही थी। मोहर्रम केवल एक तारीख या रस्म नहीं, बल्कि सब्र, कुर्बानी, इंसाफ और हक़ की राह पर कायम रहने का पैगाम है। यह दिन कर्बला के उस अज़ीम वाकये की याद दिलाता है, जहाँ इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके जानिसार साथियों ने इंसानियत, अमन, इंसाफ और सच्चाई के लिए तपती हुई रेत पर ऐसी मिसाल कायम की जिसे दुनिया कभी भूल नहीं सकती। उन्होंने कठिन हालात, प्यास और तकलीफ़ों के बावजूद हक़ के सामने झुकने के बजाय कुर्बानी को चुना, यही कारण है कि सदियाँ बीत जाने के बाद भी आज दुनिया भर में शहीदाने कर्बला को याद किया जाता है। कस्बा खीरी में भी उसी अकीदत और एहतराम की झलक देखने को मिली, जहाँ छोटे बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग सहित हर उम्र के लोग इस ग़म में शरीक हुए। रास्तों पर लोगों की भीड़, ताज़ियों की रौनक और ग़म का माहौल एक साथ छाया रहा। दूर-दूर से आए कई अकीदतमंदों ने फ़ातिहा पढ़ी, दुआ की और ख़ामोशी से खड़े होकर अपनी अकीदत पेश की। जैसे-जैसे ताज़िये अपने आखिरी मरहले की तरफ बढ़ते गए, माहौल और ज़्यादा पुरअसर होता गया। ताज़ियों को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान कई लोगों की आँखें नम थीं और फ़िज़ाओं में "लब्बैक या हुसैन" की सदाएँ गूँज उठीं, जब लोगों ने शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों को सलाम पेश किया। यह मोहर्रम हमें यह भी सिखाता है कि इंसानियत, सब्र, इखलास और सच्चाई का रास्ता कभी ख़त्म नहीं होता; वक्त बदल जाता है लेकिन कुर्बानी और हक़ की आवाज़ हमेशा ज़िंदा रहती है।1
- राम मंदिर चंदा चोरी मामले से संबंधित एक घटनाक्रम में, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर चल रही खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एएनआई (ANI) से बात करते हुए आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि उनके पास इन खबरों की कोई पुष्टि नहीं है। उन्होंने कहा, "मेरे पास इसकी कोई भी पुष्टि नहीं है, मैं कुछ नहीं कह सकता"।1
- सलेमपुर कौन से रामपुर नगर के बीच चल रहे अवैध मिट्टी खनन के दौरान 26 जून को सुबह लगभग 6:00 बजे पंकज कुमार (30 वर्ष), पिता मनु लाल, की मिट्टी में दबकर मौत हो गई। आरोप है कि मनोज, जो ट्रैक्टर चला रहा था, तथा धररा और राममूर्ति (पिता मेघे) को सुबह 6:00 बजे ही इस घटना की जानकारी हो गई थी, लेकिन उन्होंने मृतक के परिजनों को इसकी खबर नहीं दी। लगभग 9:00 बजे किसी अन्य व्यक्ति ने परिजनों को सूचित किया। जब मृतक की माताजी, पत्नी और बहन सहित परिवार के सदस्य घटनास्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि शव वहां नहीं था। बताया गया है कि पुलिस द्वारा युवक के शव को सुबह 6:00 बजे ही बिना परिजनों को सूचित किए पीएम हाउस ले जाया गया और वहां से गायब कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, जिस ट्रैक्टर से मृत्यु हुई थी, वह पॉवरट्रैक था, लेकिन मौके पर सोनालिका ट्रैक्टर दिखाया गया, क्योंकि उसके सभी कागजात पूरे थे। आरोप है कि मनोज, धररा और राममूर्ति मिलकर पुलिस प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं और ट्रैक्टर बदलकर तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।1