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स्थानीय निवासियों ने अकोटिया में एक कॉलेज स्थापित करने की मांग की है। इस मांग के साथ यह भी कहा गया है कि यह कॉलेज पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से संचालित होना चाहिए।
Rahul. bagwan
स्थानीय निवासियों ने अकोटिया में एक कॉलेज स्थापित करने की मांग की है। इस मांग के साथ यह भी कहा गया है कि यह कॉलेज पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से संचालित होना चाहिए।
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- स्थानीय निवासियों ने अकोटिया में एक कॉलेज स्थापित करने की मांग की है। इस मांग के साथ यह भी कहा गया है कि यह कॉलेज पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से संचालित होना चाहिए।1
- देवास जिले से एक वीडियो साझा किया गया है जिसमें बारिश दिखाई दे रही है, जिसका समय 6:51 दर्शाया गया है। इस पोस्ट में दर्शकों से यह जानने का आग्रह किया गया है कि क्या उनके क्षेत्र में भी ऐसी ही बारिश हो रही है, और उनसे कमेंट करके बताने को कहा गया है।1
- इंदौर में 31 मई 2026 को लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। गांधी हॉल परिसर में एक भव्य एवं ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण लगभग 150 कलाकारों द्वारा राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' का सामूहिक वादन रहा, जिसकी सुरमयी प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना का संचार किया। इस अवसर पर आयोजित भजन जेमिंग मेले में भी विभिन्न कलाकारों और भजन मंडलियों ने भक्तिमय प्रस्तुतियां दीं, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन को भारतीय संस्कृति, सुशासन, लोककल्याण और धर्म संरक्षण का एक अद्वितीय उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई ने एक कठिन कालखंड में अपने दूरदर्शी नेतृत्व, न्यायप्रियता और जनसेवा के माध्यम से ऐसे आदर्श स्थापित किए, जो आज भी रामराज्य की भावना का अनुभव कराते हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री हिमांशु जोशी और न्यायमूर्ति श्री आनंद सिंह बहरावत को 'अहिल्या गौरव सम्मान' से विभूषित किया, साथ ही उत्सव के तहत आयोजित फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। डॉ. यादव ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों, लोककल्याणकारी कार्यों एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि इंदौर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की स्मृतियों को चिरस्थाई बनाने के लिए लगातार कार्यक्रम किए जा रहे हैं और 'अहिल्या लोक' भी विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश सरकार ने अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर महेश्वर और इंदौर के राजवाड़ा में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित कर उन्हें विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की थी, और प्रदेश की एक बटालियन का नाम भी महारानी अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर रखा गया है, जो उनके गौरवशाली योगदान को सम्मान देने का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी उल्लेख किया कि अहिल्याबाई ने अपने जीवन में अनेक व्यक्तिगत और सामाजिक चुनौतियों का सामना किया, और सीमित संसाधनों के बावजूद सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, महाकाल सहित देशभर के अनेक मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसे भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया गया। डॉ. यादव ने अहिल्याबाई होलकर के जीवन को जनसेवा और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक के रूप में सदैव स्मरणीय बताते हुए कहा कि उनके कार्य आज भी लोगों को प्रेरित कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं। उन्होंने लोकतंत्र में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सुशासन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और न्याय आधारित व्यवस्थाओं को सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर जयंती की शुभकामनाएं देते हुए उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने स्वागत भाषण दिया और इंदौर नगर निगम द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विकास को नई गति मिली है, और बीते एक वर्ष में 'डिजिटल इंदौर' के माध्यम से शहर ने 'डिजिटल सिटी' का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। श्री भार्गव ने यह भी उल्लेख किया कि इंदौर देश की पहली नगर निगम बनी है जिसने अपना 60 मेगावाट का सोलर पार्क स्थापित किया है और मध्यप्रदेश डिस्कॉम के सहयोग से शहर में 31 हजार छतों पर सोलर रूफटॉप लगाकर लगभग 233 मेगावाट बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड भी बनाया गया है। उन्होंने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की जनभागीदारी की प्रेरणा से इंदौर द्वारा सफाई व्यवस्था के डिजिटलीकरण, कपड़े से कपड़ा बनाने और एनिमल कारकस प्रबंधन सहित अनेक नवाचारों को अपनाने पर भी प्रकाश डाला। इस भव्य आयोजन में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद श्री शंकर लालवानी, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्री गोलू शुक्ला, श्री महेन्द्र हार्डिया, श्रीमती मालिनी गौड़, सुश्री उषा ठाकुर, श्री मधु वर्मा, श्री प्रताप करोसिया, श्री सावन सोनकर, श्री श्रवण चावड़ा, श्री गौरव रणदीवे, डॉ. निशांत खरे सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर श्री संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर श्री शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री क्षितिज सिंघल, गणमान्य नागरिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नरसिंहपुर स्थित रेलवे हॉस्पिटल में एक महत्वपूर्ण जागरूकता संदेश दिया गया। यह संदेश 'जल बचाओ' और 'ऊर्जा बचाओ' के महत्व पर केंद्रित था, जिसका उद्देश्य इन आवश्यक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।1
- अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस, 31 मई के अवसर पर, कन्नौद में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा रविवार शाम 5:00 बजे एक व्यसन मुक्ति जन जागरण रैली का आयोजन किया गया। यह रैली बस स्टैंड स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के मुख्य मार्ग से गुजरती हुई नगर परिषद चौराहे तक पहुँची। इस रैली में बड़ी संख्या में मातृशक्ति बहनें, नगर के नागरिक और गायत्री परिवार के सदस्य शामिल हुए। प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस पर तंबाकू से होने वाले दुष्परिणामों से संबंधित नारे लगाए और तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों से इसे छोड़ने का आह्वान किया, ताकि गंभीर बीमारियों से बचा जा सके। साथ ही, नागरिकों ने तंबाकू का सेवन करने वाले महिला-पुरुषों को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की अपील भी की। इस अवसर पर गायत्री परिवार के राजेंद्र शर्मा, रामकरण यादव, रमेश राठौड़ सहित कई अन्य महिला और पुरुष सदस्य रैली में मौजूद थे।3
- कन्नौद तहसील के ग्राम भुवाना में रविवार सुबह करीब 11 बजे जंगल में भीषण गर्मी के कारण एक दर्जन से अधिक गोवंश चक्कर खाकर गिर गए। इस खबर से गांव में सनसनी फैल गई, जिसके बाद ग्राम भुवाना के पशुपालक तुरंत जंगल की ओर दौड़े। उन्होंने देखा कि पशु जगह-जगह इधर-उधर पड़े हुए थे।1