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कुशीनगर जनपद में निजी अस्पतालों की बेलगाम व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पडरौना स्थित किलकारी हॉस्पिटल और उसके संचालक डॉ. कमलेश वर्मा नवजात की मौत के बाद दोबारा सुर्खियों में हैं, जिन पर गलत इलाज, लापरवाही और मौत के बाद "समझौते" का खेल रचने के पुराने आरोप लगे हैं। इस बार भी एक गरीब परिवार का "दीपक बुझ गया" और आरोप है कि सिस्टम अस्पताल की ढाल बनकर खड़ा दिखाई दिया। यह मामला खड्डा थाना क्षेत्र के सालिकपुर गांव की नंदनी पत्नी विष्णु से जुड़ा है, जो अपने नवजात बच्चे की तेज धड़कन की शिकायत पर किलकारी अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल प्रशासन ने परिवार को बच्चे के ठीक होने का भरोसा दिया और छह दिन तक भर्ती रखकर इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही। आखिर में बीस हजार रुपये जमा कराने के बाद बच्चे को गोरखपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं। मासूम की मां जब कैमरों के सामने डॉक्टर की लापरवाही गिनाते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, ठीक उसी समय अस्पताल के भीतर मामले को "मैनेज" करने की पटकथा लिखी जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामा बढ़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपने करीबी लोगों, कथित पत्रकारों और पुलिस को मौके पर बुला लिया। इसके बाद दबाव का खेल शुरू हुआ, जिसमें पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय "समझौते" की सलाह देती दिखी और उन्हें यह कहकर डराया गया कि कार्रवाई करने पर नवजात का पोस्टमार्टम होगा और "इतने छोटे बच्चे की चीर-फाड़ से क्या मिलेगा?" अंततः चारों तरफ से दबाव, भय और मानसिक प्रताड़ना के बीच ₹23,000 में समझौते की बात तय कर दी गई। आरोप है कि नवजात के पिता से ₹10 के स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर पूरे मामले को रफा-दफा करा दिया गया। यह यक्ष प्रश्न उठता है कि क्या किसी नवजात की मौत की कीमत ₹23,000 है? क्या एक स्टाम्प पेपर पर लिखवा लेने से चिकित्सकीय लापरवाही समाप्त हो जाती है और क्या पुलिस का काम समझौता कराना है या निष्पक्ष कार्रवाई करना? जानकार बताते हैं कि इलाज के दौरान मौत और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की स्वतंत्र जांच, मेडिकल बोर्ड की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन कुशीनगर में मौत के बाद जांच नहीं, बल्कि "सेटिंग" शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किलकारी हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता रहा है और इस पर पहले भी गलत इंजेक्शन, देर से रेफर करने तथा मोटी रकम वसूलने के बाद मरीज की मौत जैसे आरोप लगते रहे हैं। हर बार एक ही फार्मूला दोहराया जाता है: इलाज का भरोसा, हालत बिगड़ने पर रेफर, फिर हंगामा और अंत में "ले-देकर मामला खत्म"। इसी कारण जनपद में चर्चा है कि यह अस्पताल इलाज से ज्यादा मौत बांटने व "मैनेजमेंट" के लिए जाना जाता है। स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि जनपद में कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। बड़े हादसों के बाद कुछ दिन नोटिस और बयानबाजी होती है, फिर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहा है कि यदि किसी अस्पताल पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं, तो उसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं हुई? पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं कि यदि निष्पक्ष जांच के बजाय समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, तो पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद किससे करे। जानकार कहते हैं कि अगर हर मौत के बाद कुछ हजार रुपये देकर मामला दबा दिया जाएगा, तो फिर कानून, जांच और प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए ही रह जाएंगे। आरोप है कि किलकारी हॉस्पिटल "मौत, मोलभाव और मैनेजमेंट" का अड्डा बन चुका है।

2 hrs ago
user_संजय चाणक्य
संजय चाणक्य
पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

कुशीनगर जनपद में निजी अस्पतालों की बेलगाम व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पडरौना स्थित किलकारी हॉस्पिटल और उसके संचालक डॉ. कमलेश वर्मा नवजात की मौत के बाद दोबारा सुर्खियों में हैं, जिन पर गलत इलाज, लापरवाही और मौत के बाद "समझौते" का खेल रचने के पुराने आरोप लगे हैं। इस बार भी एक गरीब परिवार का "दीपक बुझ गया" और आरोप है कि सिस्टम अस्पताल की ढाल बनकर खड़ा दिखाई दिया। यह मामला खड्डा थाना क्षेत्र के सालिकपुर गांव की नंदनी पत्नी विष्णु से जुड़ा है, जो अपने नवजात बच्चे की तेज धड़कन की शिकायत पर किलकारी अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल प्रशासन ने परिवार को बच्चे के ठीक होने का भरोसा दिया और छह दिन तक भर्ती रखकर इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही। आखिर में बीस हजार रुपये जमा कराने के बाद बच्चे को गोरखपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं। मासूम की मां जब कैमरों के सामने डॉक्टर की लापरवाही गिनाते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, ठीक उसी समय अस्पताल के भीतर मामले को "मैनेज" करने की पटकथा लिखी जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामा बढ़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपने करीबी लोगों, कथित पत्रकारों और पुलिस को मौके पर बुला लिया। इसके बाद दबाव का खेल शुरू हुआ, जिसमें पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय "समझौते" की सलाह देती दिखी और उन्हें यह कहकर डराया गया कि कार्रवाई करने पर नवजात का पोस्टमार्टम होगा और "इतने छोटे बच्चे की चीर-फाड़ से क्या मिलेगा?" अंततः चारों तरफ से दबाव, भय और मानसिक प्रताड़ना के बीच ₹23,000 में समझौते की बात तय कर दी गई। आरोप है कि नवजात के पिता से ₹10 के स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर पूरे मामले को रफा-दफा करा दिया गया। यह यक्ष प्रश्न उठता है कि क्या किसी नवजात की मौत की कीमत ₹23,000 है? क्या एक स्टाम्प पेपर पर लिखवा लेने से चिकित्सकीय लापरवाही समाप्त हो जाती है और क्या पुलिस का काम समझौता कराना है या निष्पक्ष कार्रवाई करना? जानकार बताते हैं कि इलाज के दौरान मौत और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की स्वतंत्र जांच, मेडिकल बोर्ड की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन कुशीनगर में मौत के बाद जांच नहीं, बल्कि "सेटिंग" शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किलकारी हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता रहा है और इस पर पहले भी गलत इंजेक्शन, देर से रेफर करने तथा मोटी रकम वसूलने के बाद मरीज की मौत जैसे आरोप लगते रहे हैं। हर बार एक ही फार्मूला दोहराया जाता है: इलाज का भरोसा, हालत बिगड़ने पर रेफर, फिर हंगामा और अंत में "ले-देकर मामला खत्म"। इसी कारण जनपद में चर्चा है कि यह अस्पताल इलाज से ज्यादा मौत बांटने व "मैनेजमेंट" के लिए जाना जाता है। स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि जनपद में कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। बड़े हादसों के बाद कुछ दिन नोटिस और बयानबाजी होती है, फिर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहा है कि यदि किसी अस्पताल पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं, तो उसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं हुई? पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं कि यदि निष्पक्ष जांच के बजाय समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, तो पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद किससे करे। जानकार कहते हैं कि अगर हर मौत के बाद कुछ हजार रुपये देकर मामला दबा दिया जाएगा, तो फिर कानून, जांच और प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए ही रह जाएंगे। आरोप है कि किलकारी हॉस्पिटल "मौत, मोलभाव और मैनेजमेंट" का अड्डा बन चुका है।

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  • कुशीनगर जनपद में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, जिसने आमजन की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने आगामी 28 मई तक तापमान के 47 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की संभावना जताई है। इस जानलेवा गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है, और जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने जनपदवासियों से सतर्क रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का कड़ाई से पालन करने की अपील की है। जिलाधिकारी ने लोगों को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है। उन्होंने शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए लगातार पानी पीने, तथा आवश्यकता पड़ने पर ओआरएस, नींबू पानी या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक का सेवन करने को कहा है। इसके अतिरिक्त, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और धूप में निकलते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करने की हिदायत भी दी गई है। प्रशासन ने विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, मजदूरों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने हीट स्ट्रोक के संभावित लक्षणों, जैसे तेज बुखार, बेहोशी, घबराहट, भ्रम, तेज धड़कन या पसीना बंद होने की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुँचने की चेतावनी जारी की है। उन्होंने लोगों से शराब, अत्यधिक चाय-कॉफी और भारी भोजन से परहेज करने की अपील की। साथ ही, बच्चों और पालतू जानवरों को बंद वाहनों में अकेला न छोड़ने की सलाह भी दी गई है। आपात स्थिति में नागरिक एम्बुलेंस सेवा 108, टोल फ्री नंबर 1077 या जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष के नंबर 05564-240590 पर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन ने जनपदवासियों से इस भीषण गर्मी में स्वयं सुरक्षित रहने और दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की है।
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    कुशीनगर जनपद में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, जिसने आमजन की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने आगामी 28 मई तक तापमान के 47 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की संभावना जताई है। इस जानलेवा गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है, और जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने जनपदवासियों से सतर्क रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का कड़ाई से पालन करने की अपील की है।

जिलाधिकारी ने लोगों को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है। उन्होंने शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए लगातार पानी पीने, तथा आवश्यकता पड़ने पर ओआरएस, नींबू पानी या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक का सेवन करने को कहा है। इसके अतिरिक्त, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और धूप में निकलते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करने की हिदायत भी दी गई है। प्रशासन ने विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, मजदूरों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।

डीएम ने हीट स्ट्रोक के संभावित लक्षणों, जैसे तेज बुखार, बेहोशी, घबराहट, भ्रम, तेज धड़कन या पसीना बंद होने की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुँचने की चेतावनी जारी की है। उन्होंने लोगों से शराब, अत्यधिक चाय-कॉफी और भारी भोजन से परहेज करने की अपील की। साथ ही, बच्चों और पालतू जानवरों को बंद वाहनों में अकेला न छोड़ने की सलाह भी दी गई है।

आपात स्थिति में नागरिक एम्बुलेंस सेवा 108, टोल फ्री नंबर 1077 या जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष के नंबर 05564-240590 पर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन ने जनपदवासियों से इस भीषण गर्मी में स्वयं सुरक्षित रहने और दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की है।
    user_प्रदीप यादव
    प्रदीप यादव
    Media company पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • कुशीनगर के पडरौना स्थित किलकारी हॉस्पिटल में एक मासूम बच्चे की मौत के बाद उसके परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मिली जानकारी के अनुसार, सलीमपुर पनियहवा निवासी नंदिनी, जो वर्तमान में अपने मायके मोहनपत्ती शेखपुरा में रह रही थीं, अपने बीमार बच्चे को इलाज के लिए किलकारी हॉस्पिटल लेकर पहुंची थीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर उनसे पैसे जमा करवा लिए, लेकिन इलाज के दौरान ही बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि बच्चे की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन उसे कहीं और रेफर करने की बात करने लगा, जिसके बाद वे आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में ही हंगामा शुरू कर दिया। इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही सुभाष चौक चौकी इंचार्ज अपनी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे, उन्होंने स्थिति को नियंत्रित किया और परिजनों को शांत कराया। पुलिस ने अब इस मामले में आवश्यक जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
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    कुशीनगर के पडरौना स्थित किलकारी हॉस्पिटल में एक मासूम बच्चे की मौत के बाद उसके परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मिली जानकारी के अनुसार, सलीमपुर पनियहवा निवासी नंदिनी, जो वर्तमान में अपने मायके मोहनपत्ती शेखपुरा में रह रही थीं, अपने बीमार बच्चे को इलाज के लिए किलकारी हॉस्पिटल लेकर पहुंची थीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर उनसे पैसे जमा करवा लिए, लेकिन इलाज के दौरान ही बच्चे की मौत हो गई।

परिजनों ने बताया कि बच्चे की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन उसे कहीं और रेफर करने की बात करने लगा, जिसके बाद वे आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में ही हंगामा शुरू कर दिया। इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही सुभाष चौक चौकी इंचार्ज अपनी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे, उन्होंने स्थिति को नियंत्रित किया और परिजनों को शांत कराया। पुलिस ने अब इस मामले में आवश्यक जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
    user_विकास गुप्ता पत्रकार
    विकास गुप्ता पत्रकार
    Court reporter पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • प्रधान द्वारा यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि सफाई व्यवस्था उचित तरीके से होनी चाहिए। इसके साथ ही, कर्मचारियों के दौरों और उनके 'ब्लफ' को भी प्रधान द्वारा पकड़ा जाना चाहिए।
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    प्रधान द्वारा यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि सफाई व्यवस्था उचित तरीके से होनी चाहिए। इसके साथ ही, कर्मचारियों के दौरों और उनके 'ब्लफ' को भी प्रधान द्वारा पकड़ा जाना चाहिए।
    user_Raviteja Rajbhar
    Raviteja Rajbhar
    पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध बाबा दोना शुक्ल स्थान पर इन दिनों श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ रहा है। दूर-दूर से आए भक्त बाबा के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। वे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बाबा के दर्शन और पूजन करने आते हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का सिलसिला लगातार जारी है। मलमास और अन्य धार्मिक आयोजनों के चलते श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। प्रशासन और स्थानीय समिति द्वारा भक्तों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। भक्तों का यह दृढ़ विश्वास है कि बाबा दोना शुक्ल के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का एक अद्भुत माहौल देखने को मिल रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है।
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    उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध बाबा दोना शुक्ल स्थान पर इन दिनों श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ रहा है। दूर-दूर से आए भक्त बाबा के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। वे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बाबा के दर्शन और पूजन करने आते हैं।

मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का सिलसिला लगातार जारी है। मलमास और अन्य धार्मिक आयोजनों के चलते श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। प्रशासन और स्थानीय समिति द्वारा भक्तों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। भक्तों का यह दृढ़ विश्वास है कि बाबा दोना शुक्ल के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।

मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का एक अद्भुत माहौल देखने को मिल रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है।
    user_Kapinjal pathak
    Kapinjal pathak
    Local News Reporter पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • कुशीनगर के पडरौना स्थित रामकोला रोड पर तिलक़ नगर पोखरा जाने वाली सड़क पर काली माता का मंदिर खतरे की जद में है। मंदिर के ठीक बगल में बिजली विभाग द्वारा लगाए गए दो ट्रांसफार्मरों के जर्जर नंगे बिजली के तारों के कारण हर साल बरसात में मंदिर में करंट उतरता है। यह स्थिति लगातार बनी हुई है और अब तक कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे किसी भी वक्त एक अप्रिय घटना घटित होने का गंभीर जोखिम बना हुआ है। लोगों का मानना है कि ये नंगे बिजली के तार कब किसको अपनी चपेट में ले लें, यह अब भगवान भरोसे है। भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मांग की जा रही है कि इन जर्जर और नंगे तारों को या तो ठीक से सुरक्षित किया जाए या फिर इनके चारों ओर कंटीले तारों से घेराव किया जाए। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन नंगे तारों के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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    कुशीनगर के पडरौना स्थित रामकोला रोड पर तिलक़ नगर पोखरा जाने वाली सड़क पर काली माता का मंदिर खतरे की जद में है। मंदिर के ठीक बगल में बिजली विभाग द्वारा लगाए गए दो ट्रांसफार्मरों के जर्जर नंगे बिजली के तारों के कारण हर साल बरसात में मंदिर में करंट उतरता है। यह स्थिति लगातार बनी हुई है और अब तक कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे किसी भी वक्त एक अप्रिय घटना घटित होने का गंभीर जोखिम बना हुआ है।

लोगों का मानना है कि ये नंगे बिजली के तार कब किसको अपनी चपेट में ले लें, यह अब भगवान भरोसे है। भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मांग की जा रही है कि इन जर्जर और नंगे तारों को या तो ठीक से सुरक्षित किया जाए या फिर इनके चारों ओर कंटीले तारों से घेराव किया जाए। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन नंगे तारों के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
    user_Ajeet kumar gond
    Ajeet kumar gond
    पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • एक तेज रफ्तार बाइक के पेड़ से टकरा जाने से दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद, दोनों घायल युवकों को तत्काल जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
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    एक तेज रफ्तार बाइक के पेड़ से टकरा जाने से दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद, दोनों घायल युवकों को तत्काल जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
    user_MANOJ KUMAR YADAV
    MANOJ KUMAR YADAV
    Video Creator हाटा, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    59 min ago
  • कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल स्थित टट्टीहक्कल नदी में एक हृदय विदारक घटना में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की डूबने से मौत हो गई। यह त्रासदी तब हुई जब वे सभी नदी में सीप इकट्ठा कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम लगातार इस क्षेत्र में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है ताकि प्रभावितों की मदद की जा सके।
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    कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल स्थित टट्टीहक्कल नदी में एक हृदय विदारक घटना में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की डूबने से मौत हो गई। यह त्रासदी तब हुई जब वे सभी नदी में सीप इकट्ठा कर रहे थे।

घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम लगातार इस क्षेत्र में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है ताकि प्रभावितों की मदद की जा सके।
    user_Times of Uttar Pradesh
    Times of Uttar Pradesh
    पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • पडरौना स्थित पीडी मॉल में एक लिफ्ट हादसे की खबर सामने आई है, जिसमें मॉल के दो कर्मचारी घायल हो गए। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस ने इसकी पुष्टि की है।
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    पडरौना स्थित पीडी मॉल में एक लिफ्ट हादसे की खबर सामने आई है, जिसमें मॉल के दो कर्मचारी घायल हो गए। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस ने इसकी पुष्टि की है।
    user_MANOJ KUMAR YADAV
    MANOJ KUMAR YADAV
    Video Creator हाटा, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • कुशीनगर के हाटा क्षेत्र में 25 मई से 2 जून तक नौतपा का दौर शुरू होने वाला है।
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    कुशीनगर के हाटा क्षेत्र में 25 मई से 2 जून तक नौतपा का दौर शुरू होने वाला है।
    user_Snews33
    Snews33
    हाटा, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
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