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कुशीनगर के हाटा क्षेत्र में 25 मई से 2 जून तक नौतपा का दौर शुरू होने वाला है।
Snews33
कुशीनगर के हाटा क्षेत्र में 25 मई से 2 जून तक नौतपा का दौर शुरू होने वाला है।
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- कुशीनगर जिले के हाटा में एक विधवा महिला ने डीएम दरबार में अपनी जमीन पर हुए कथित अवैध कब्जे को लेकर न्याय की गुहार लगाई है। महिला का आरोप है कि कुछ लोगों ने उसकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, जिसके चलते उसने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत की और न्याय की मांग की है।1
- कुशीनगर के हाटा क्षेत्र में 25 मई से 2 जून तक नौतपा का दौर शुरू होने वाला है।1
- कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र में एक 47 वर्षीय व्यक्ति की मेडिकल स्टोर पर इलाज के दौरान मृत्यु हो गई, जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मृतक रामकृपाल यादव, जो खेती-बाड़ी का काम करते थे, उनके परिजनों ने मेडिकल स्टोर संचालक पर गलत इलाज, लापरवाही और मृत्यु के बाद मारपीट कराने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस को लिखित तहरीर दी गई है। परिजनों के अनुसार, शनिवार सुबह लगभग 11 बजे रामकृपाल यादव को दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें बालेसर चौराहा स्थित विनोद पांडेय मेडिकल स्टोर पर इलाज के लिए ले जाया गया। वहां एक कथित झोलाछाप डॉक्टर ने इंजेक्शन और बोतल चढ़ाकर उनका इलाज शुरू किया। मृतक के पुत्र उमेंद्र यादव ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया है कि उनके पिता की मृत्यु इलाज के दौरान ही हो गई थी, लेकिन मेडिकल स्टोर संचालक ने कथित तौर पर स्थिति को नियंत्रण में बताकर शाम तक इलाज जारी रखा और परिजनों को मरीज को किसी बड़े अस्पताल ले जाने से भी रोका। आरोप है कि जब रामकृपाल यादव की हालत बेहद बिगड़ने लगी और परिजनों ने दबाव बनाया, तब संचालक ने एक एंबुलेंस बुलाकर मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा भेजा। वहां चिकित्सकों ने रामकृपाल यादव को मृत घोषित कर दिया और पुष्टि की कि उनकी मृत्यु काफी पहले हो चुकी थी। इस घटना से आक्रोशित परिजन शव लेकर दोबारा मेडिकल स्टोर पहुंचे, लेकिन तब तक संचालक दुकान बंद कर फरार हो चुका था। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ देर बाद संचालक की ओर से 10 से 15 लोगों को भेजा गया, जिन्होंने उनके साथ मारपीट की और शव के साथ भी अभद्रता की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।1
- देवरिया जनपद में जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी और पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर ने शांति एवं कानून-व्यवस्था, सुरक्षा तथा सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से संयुक्त रूप से पैदल गश्त किया। प्रशासनिक एवं पुलिस बल के साथ यह गश्त थाना कोतवाली क्षेत्र के सुभाष चौक, रेलवे चौकी सहित प्रमुख बाजारों, भीड़भाड़ वाले स्थानों, संवेदनशील क्षेत्रों और मुख्य मार्गों में की गई, जिसका लक्ष्य आमजन में सुरक्षा की भावना को मजबूत करना था। गश्त के दौरान, अधिकारियों ने स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना। उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया कि जनपद पुलिस उनकी सुरक्षा एवं सहायता के लिए हर समय प्रतिबद्ध है और किसी भी असामाजिक गतिविधि या कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक ने आमजन से अपील करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु अथवा गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने का आग्रह किया, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का गहन निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं थाना प्रभारी को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। इसके अतिरिक्त, ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों को सतर्कता, अनुशासन एवं संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए निर्देशित किया गया।2
- कुशीनगर जनपद में निजी अस्पतालों की बेलगाम व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पडरौना स्थित किलकारी हॉस्पिटल और उसके संचालक डॉ. कमलेश वर्मा नवजात की मौत के बाद दोबारा सुर्खियों में हैं, जिन पर गलत इलाज, लापरवाही और मौत के बाद "समझौते" का खेल रचने के पुराने आरोप लगे हैं। इस बार भी एक गरीब परिवार का "दीपक बुझ गया" और आरोप है कि सिस्टम अस्पताल की ढाल बनकर खड़ा दिखाई दिया। यह मामला खड्डा थाना क्षेत्र के सालिकपुर गांव की नंदनी पत्नी विष्णु से जुड़ा है, जो अपने नवजात बच्चे की तेज धड़कन की शिकायत पर किलकारी अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल प्रशासन ने परिवार को बच्चे के ठीक होने का भरोसा दिया और छह दिन तक भर्ती रखकर इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही। आखिर में बीस हजार रुपये जमा कराने के बाद बच्चे को गोरखपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं। मासूम की मां जब कैमरों के सामने डॉक्टर की लापरवाही गिनाते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, ठीक उसी समय अस्पताल के भीतर मामले को "मैनेज" करने की पटकथा लिखी जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामा बढ़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपने करीबी लोगों, कथित पत्रकारों और पुलिस को मौके पर बुला लिया। इसके बाद दबाव का खेल शुरू हुआ, जिसमें पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय "समझौते" की सलाह देती दिखी और उन्हें यह कहकर डराया गया कि कार्रवाई करने पर नवजात का पोस्टमार्टम होगा और "इतने छोटे बच्चे की चीर-फाड़ से क्या मिलेगा?" अंततः चारों तरफ से दबाव, भय और मानसिक प्रताड़ना के बीच ₹23,000 में समझौते की बात तय कर दी गई। आरोप है कि नवजात के पिता से ₹10 के स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर पूरे मामले को रफा-दफा करा दिया गया। यह यक्ष प्रश्न उठता है कि क्या किसी नवजात की मौत की कीमत ₹23,000 है? क्या एक स्टाम्प पेपर पर लिखवा लेने से चिकित्सकीय लापरवाही समाप्त हो जाती है और क्या पुलिस का काम समझौता कराना है या निष्पक्ष कार्रवाई करना? जानकार बताते हैं कि इलाज के दौरान मौत और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की स्वतंत्र जांच, मेडिकल बोर्ड की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन कुशीनगर में मौत के बाद जांच नहीं, बल्कि "सेटिंग" शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किलकारी हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता रहा है और इस पर पहले भी गलत इंजेक्शन, देर से रेफर करने तथा मोटी रकम वसूलने के बाद मरीज की मौत जैसे आरोप लगते रहे हैं। हर बार एक ही फार्मूला दोहराया जाता है: इलाज का भरोसा, हालत बिगड़ने पर रेफर, फिर हंगामा और अंत में "ले-देकर मामला खत्म"। इसी कारण जनपद में चर्चा है कि यह अस्पताल इलाज से ज्यादा मौत बांटने व "मैनेजमेंट" के लिए जाना जाता है। स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि जनपद में कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। बड़े हादसों के बाद कुछ दिन नोटिस और बयानबाजी होती है, फिर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहा है कि यदि किसी अस्पताल पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं, तो उसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं हुई? पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं कि यदि निष्पक्ष जांच के बजाय समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, तो पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद किससे करे। जानकार कहते हैं कि अगर हर मौत के बाद कुछ हजार रुपये देकर मामला दबा दिया जाएगा, तो फिर कानून, जांच और प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए ही रह जाएंगे। आरोप है कि किलकारी हॉस्पिटल "मौत, मोलभाव और मैनेजमेंट" का अड्डा बन चुका है।1
- एक नए एप्लिकेशन का प्रचार किया जा रहा है जो उपयोगकर्ताओं को प्रतिदिन ₹400 से ₹500 कमाने का अवसर प्रदान करता है। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए, इच्छुक उपयोगकर्ताओं को कमेंट बॉक्स में दिए गए लिंक से एप्लिकेशन डाउनलोड करना होगा। एप्लिकेशन डाउनलोड करने पर ₹51 का मुफ्त बोनस मिलेगा, और दोस्तों को रेफर करने पर ₹200 का अतिरिक्त मुफ्त रेफरल बोनस प्राप्त होगा। उपयोगकर्ताओं को ऐप डाउनलोड करके गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।1
- वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र में महेश राजभर के लिए न्याय की मांग उठाई गई है। यह मांग 'न्याय दो न्याय दो' के नारे के साथ पुरजोर तरीके से की जा रही है, जिसमें महेश राजभर को न्याय दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।1
- कुशीनगर जिले में काली माता मंदिर के पास लगे बिजली के जर्जर तारों से गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। जानकारी के अनुसार, इन खराब तारों के कारण बरसात के मौसम में मंदिर परिसर के भीतर बिजली का करंट उतरने लगता है, जिससे किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।1