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प्रेमानंद महाराज जी की जय हो 🙏🙏🙏🙏 राधे राधे गुरु जी 🙏🙏
Varun Slathia
प्रेमानंद महाराज जी की जय हो 🙏🙏🙏🙏 राधे राधे गुरु जी 🙏🙏
More news from Jammu and Kashmir and nearby areas
- Post by Varun Slathia1
- Net practice of cap ludhiana. Atleast six months in ludhiana pathan academy of cricket.Skills and knowledge of cricket. My name is Naresh singh. I am from jammu and kashmir in Kathua district.Ramkot Tehsil and village is Rajwalta. I started play cricket at the age is 20. I can play more private leagues good performance better then study.2
- Post by Till The End News1
- Post by Ratan singh1
- ऊना के बहडाला से एक बेहद शर्मनाक और मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक प्रवासी मासूम बच्ची को अमरूद तोड़ने की मामूली बात पर पूर्व फौजी द्वारा क्रूरता का शिकार बनाया गया। आरोपी ने न केवल बच्ची को सीढ़ियों के साथ बांध दिया, बल्कि उसकी बेरहमी से पिटाई भी की। यह घटना उस समय सामने आई जब मर्चेंट नेवी में तैनात कैप्टन रोहित जसवाल वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने बच्ची की दर्दनाक हालत को अपनी आंखों से देखा और तुरंत हस्तक्षेप करते हुए आरोपी के घर पहुंचे। उन्होंने पूर्व फौजी से बच्ची को छोड़ने के लिए कहा, लेकिन आरोपी अपनी जिद पर अड़ा रहा। इसी दौरान आसपास के कुछ युवक भी मौके पर पहुंच गए और पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो के वायरल होते ही लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। स्थिति को गंभीर होते देख कैप्टन रोहित जसवाल ने साहस दिखाते हुए बच्ची को आरोपी के चंगुल से छुड़ाया और उसे सुरक्षित उसके घर पहुंचाया। इसके साथ ही उन्होंने मानवता का परिचय देते हुए तुरंत पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन को भी इस घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं कैप्टन रोहित जसवाल ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने बच्ची के साथ हो रही क्रूरता देखी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे बचाया।हालांकि, आरोपी ने अपने कृत्य के लिए माफी मांग ली है, जिसके चलते फिलहाल किसी कानूनी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।2
- हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र अपनी अद्भुत प्राकृतिक संपदा और समृद्ध जैव विविधता के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखते हैं। इन्हीं क्षेत्रों में जिला चंबा का पांगी विकास खंड एक ऐसा इलाका है, जिसे वन्य प्राणियों का सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता है। ऊंचे-ऊंचे पहाड़, घने जंगल, बर्फ से ढकी चोटियां और दूर-दराज़ की शांत घाटियां यहां के वन्य जीवन को संरक्षण प्रदान करती हैं। पांगी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के दुर्लभ और संरक्षित वन्य जीव पाए जाते हैं। इनमें हिमालयन आइबेक्स, हिमालयन थार, कस्तूरी मृग, बर्फीला तेंदुआ (स्नो लेपर्ड), काला भालू, भूरा भालू, लाल भालू और जंगली बकरी, पक्षीयो में नील नीलो, चकोर, गोरेया, गलोन, गिद प्रमुख हैं। इन जीवों की मौजूदगी इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खास बात यह है कि ये वन्य जीव पांगी की ऊंची धारों (गहारों) में प्राकृतिक रूप से विचरण करते हैं, जिससे यह क्षेत्र जैव विविधता का अनमोल केंद्र बन गया है। प्रदेश सरकार द्वारा पांगी के टावन सैचू क्षेत्र को वन्य जीवों के लिए आरक्षित अभयारण्य घोषित किया गया है, जिससे यहां के वन्य जीवों को अतिरिक्त सुरक्षा मिल रही है। पांगी वन मंडल के अंतर्गत गहार परमार, दुसगहार, हरुई, चस्क भटोरी, हिलूटवान, सुराल हुडान, प्रेग्राम और विन्द्रावानी जैसी अनेक सुंदर धारें स्थित हैं। ये सभी गहार अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां के बर्फ से ढके पहाड़, हरे-भरे चरागाह और स्वच्छ वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। वन्य जीवों की गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए पर्यावरण प्रेमी डॉ. नरेश ठाकुर, जो वर्तमान में पशुपालन विभाग पांगी में कार्यरत हैं, बताते हैं कि गर्मियों के मौसम में ये वन्य जीव 9,000 से 12,000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चले जाते हैं। इस दौरान उन्हें पर्याप्त भोजन और अनुकूल वातावरण मिलता है। वहीं सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण ये जीव निचले क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं, जहां उन्हें जीवन यापन के लिए बेहतर परिस्थितियां मिलती हैं। पांगी की ये गहारें न केवल वन्य जीवों के लिए सुरक्षित आवास हैं, बल्कि वन्यजीव पर्यटन के लिए भी अपार संभावनाएं रखती हैं। यदि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए, तो यह स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकता है। साथ ही, इससे लोगों में वन्य जीवों के प्रति जागरूकता और संरक्षण की भावना भी विकसित होगी। अतः यह आवश्यक है कि हम सभी मिलकर पांगी की इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करने का संकल्प लें। वन्य जीवों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और संतुलित पर्यटन विकास के माध्यम से ही इस क्षेत्र की सुंदरता और जैव विविधता को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।1
- Post by Dinesh Kumar1
- नेरचौक में SC मोर्चा की बड़ी बैठक | बाबा साहेब अंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाने का फैसला1