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वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र में 29 जून की शाम एक पारिवारिक विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया, जहाँ अधिवक्ता प्रशांत कुमार चतुर्वेदी पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में अधिवक्ता गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उनकी पत्नी रोमी चतुर्वेदी ने ससुराल पक्ष के पाँच लोगों पर मारपीट करने, छेड़छाड़ करने और जेवर छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
NEWS 2 INDIA (NTI)
वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र में 29 जून की शाम एक पारिवारिक विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया, जहाँ अधिवक्ता प्रशांत कुमार चतुर्वेदी पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में अधिवक्ता गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उनकी पत्नी रोमी चतुर्वेदी ने ससुराल पक्ष के पाँच लोगों पर मारपीट करने, छेड़छाड़ करने और जेवर छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
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- वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र में 29 जून की शाम एक पारिवारिक विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया, जहाँ अधिवक्ता प्रशांत कुमार चतुर्वेदी पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में अधिवक्ता गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उनकी पत्नी रोमी चतुर्वेदी ने ससुराल पक्ष के पाँच लोगों पर मारपीट करने, छेड़छाड़ करने और जेवर छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।1
- चंदौली के मारूफपुर में नव निर्मित मृत्युंजय महादेव शिव मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले मूर्ति नगर भ्रमण कराया गया। इस शुभ और आध्यात्मिक अवसर पर ग्रामवासियों ने बड़ी संख्या में इस शोभायात्रा में उत्साहपूर्वक शामिल होकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।1
- वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम की दिव्य भूमि पर आयोजित सद्गुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव का समापन एक भव्य आध्यात्मिक उत्सव के रूप में हुआ। इस आयोजन को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम न मानते हुए, इसे आत्मजागृति, मानवीय एकता और विचार-क्रांति का महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत बताया गया। महोत्सव से हजारों श्रद्धालु 'दीये से दीया जलाएं' का पावन संदेश लेकर अपने-अपने घरों को लौटे। समापन दिवस पर, संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने भाव-विभोर होकर मंच से उद्घोष किया कि "चलो दीप वहां जलाएं, जहां अभी अंधेरा है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब तक व्यक्ति अपने भीतर के अंधकार को नहीं समझता, तब तक बाहरी प्रकाश भी अधूरा है, और कबीर साहेब की वाणी हमें बाहर नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने का दृष्टिकोण प्रदान करती है। इसी अवसर पर, सद्गुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज ने विवेक, धैर्य, क्षमा और शांति को मानव के आभूषण के रूप में वर्णित करते हुए इन्हें व्यवहारिक जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने मानव-मानव के बीच परस्पर प्रेम और सद्भावना को अत्यंत आवश्यक बताया। महोत्सव के दौरान भीषण तपती दोपहरी में भी श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं देखी गई। प्रबंधन द्वारा शीतल जल की प्याऊ, पर्याप्त छाया व्यवस्था और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं की उत्तम व्यवस्था की गई थी, जिसकी सभी श्रद्धालुओं ने खुले दिल से सराहना की। यह भव्य कबीर प्राकट्य महोत्सव हजारों श्रद्धालुओं को गहन प्रेरणा के साथ संपन्न हुआ।1
- आज वाराणसी नगर निगम में मीट का कारोबार करने वाले व्यापारियों ने नगर निगम के आदेश को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। यह 'हल्लाबोल' निगम द्वारा मीट की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश के विरोध में किया गया।1
- सुबह बनारस के अस्सी घाट पर कबीर के जीवन पर आधारित एक नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक का शीर्षक "कबीरा खड़ा बाजार में" है और इसके लेखक भीष्म साहनी हैं। इस प्रस्तुति के बाद, ₹10,000 की इनामी राशि की घोषणा की गई, साथ ही कलाकारों को अन्य स्थानों पर भी इस नाटक के मंचन के लिए आमंत्रित किया गया है।1
- वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम की दिव्य भूमि पर आयोजित सद्गुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव का समापन एक भव्य आध्यात्मिक उत्सव के रूप में हुआ। इस आयोजन को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित न मानते हुए, इसे आत्मजागृति, मानवीय एकता और विचार-क्रांति के एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत के तौर पर देखा गया। महोत्सव से हजारों श्रद्धालु 'दीये से दीया जलाएं' का पावन संदेश लेकर अपने-अपने घरों को लौटे।1
- वाराणसी में एक पारिवारिक विवाद के दौरान हिंसा का मामला सामने आया है, जिसमें एक अधिवक्ता पर हमला किया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।1