मुजफ्फरनगर: लोन की किस्त को लेकर विवाद, पुलिस हिरासत और भाजपा नेताओं के दखल से घिरा मामला भाजपा नेताओं के दबाव के बाद तहसीलदार के हस्तक्षेप से अभियुक्त मुचलके पर छूटे, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल मंसूरपुर क्षेत्र के गांव घसीपुरा में समूह लोन की किस्त को लेकर हुई कहासुनी और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई व राजनीतिक दखल ने एक साधारण विवाद को बड़ा मोड़ दे दिया है। मामला तब गर्माया जब घटना में हिरासत में लिए गए तीन अभियुक्तों को भाजपा नेताओं के दबाव और तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद थाने से ही मुचलके पर रिहा कर दिया गया, जिससे पुलिस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शाम को घसीपुरा निवासी राहुल (पुत्र गुलाब) के घर उसके द्वारा लिए गए समूह लोन की किस्त की वसूली को लेकर एजेंट आशु (पुत्र जयवीर) अपने दो साथियों के साथ पहुंचे। बातचीत के दौरान किस्त की रकम को लेकर आपस में कहासुनी हो गई, जो बढ़ते-बढ़ते तू-तू मैं-मैं तक पहुंच गई। आस-पास के लोगों ने जब हंगामे की सूचना बेगराजपुर चौकी को दी, तो मौके पर पहुंची पुलिस ने एजेंट आशु और उसके दोनों साथियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक दखल: पुलिस नेसभी तीनों अभियुक्तों का धारा 151 (शांति भंग की आशंका) के तहत चालान काट दिया और उन्हें मंसूरपुर थाना ले आई। इसी बीच, मामले की खबर स्थानीय भाजपा नेता यश गोयल (बोपाडा) तक पहुंची। कथित तौर पर यश गोयल ने पुलिस से इस मामले में नोक-झोंक की और अभियुक्तों पर जल्दबाजी में कार्रवाई का आरोप लगाया। इसके बाद स्थिति और उलझ गई, जब भाजपा कार्यकर्ता राजू अहलावत के नेतृत्व में दर्जन भर स्थानीय भाजपा नेताओं और समर्थकों का एक जत्था मंसूरपुर थाना पहुंचा। इन लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए थाना प्रांगण में बैठकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। नेताओं ने दावा किया कि यह एक साधारण झगड़ा था, जिसमें पुलिस ने अनावश्यक रूप से युवकों को फंसाया है। तहसीलदार का हस्तक्षेप और अभियुक्तों की रिहाई: भाजपानेताओं के दबाव के चलते मामला गंभीर होता देख तहसीलदार अरविंद कुमार स्वयं मंसूरपुर थाना पहुंचे। तहसीलदार के साथ थाने में मौजूद नेताओं से बातचीत के बाद एक रास्ता निकाला गया। तहसीलदार के हस्तक्षेप और पुलिस अधीक्षक स्तर से हुई बातचीत के बाद, थाने में ही तीनों अभियुक्तों से मुचलका (बांड) भरवाया गया और उन्हें रिहा कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान थाने पर मौजूद नेताओं में राजू अहलावत, विनीत ठाकुर, योगेंद्र चौधरी, यश गोयल, प्रांजल, सुमन सिंह (बालियान), कुलबीर प्रधान, मोनू आदि शामिल रहे।
मुजफ्फरनगर: लोन की किस्त को लेकर विवाद, पुलिस हिरासत और भाजपा नेताओं के दखल से घिरा मामला भाजपा नेताओं के दबाव के बाद तहसीलदार के हस्तक्षेप से अभियुक्त मुचलके पर छूटे, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल मंसूरपुर क्षेत्र के गांव घसीपुरा में समूह लोन की किस्त को लेकर हुई कहासुनी और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई व राजनीतिक दखल ने एक साधारण विवाद को बड़ा मोड़ दे दिया है। मामला तब गर्माया जब घटना में हिरासत में लिए गए तीन अभियुक्तों को भाजपा नेताओं के दबाव और तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद थाने से ही मुचलके पर रिहा कर दिया गया, जिससे पुलिस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शाम को घसीपुरा निवासी राहुल (पुत्र गुलाब) के घर उसके द्वारा लिए गए समूह लोन की किस्त की वसूली को लेकर एजेंट आशु (पुत्र जयवीर) अपने दो साथियों के साथ पहुंचे। बातचीत के दौरान किस्त की रकम को लेकर आपस में कहासुनी हो गई, जो बढ़ते-बढ़ते तू-तू मैं-मैं तक पहुंच गई। आस-पास के लोगों ने जब हंगामे की सूचना बेगराजपुर चौकी को दी, तो मौके पर पहुंची पुलिस ने एजेंट आशु और उसके दोनों साथियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक दखल: पुलिस नेसभी तीनों अभियुक्तों का धारा 151 (शांति भंग की आशंका)
के तहत चालान काट दिया और उन्हें मंसूरपुर थाना ले आई। इसी बीच, मामले की खबर स्थानीय भाजपा नेता यश गोयल (बोपाडा) तक पहुंची। कथित तौर पर यश गोयल ने पुलिस से इस मामले में नोक-झोंक की और अभियुक्तों पर जल्दबाजी में कार्रवाई का आरोप लगाया। इसके बाद स्थिति और उलझ गई, जब भाजपा कार्यकर्ता राजू अहलावत के नेतृत्व में दर्जन भर स्थानीय भाजपा नेताओं और समर्थकों का एक जत्था मंसूरपुर थाना पहुंचा। इन लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए थाना प्रांगण में बैठकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। नेताओं ने दावा किया कि यह एक साधारण झगड़ा था, जिसमें पुलिस ने अनावश्यक रूप से युवकों को फंसाया है। तहसीलदार का हस्तक्षेप और अभियुक्तों की रिहाई: भाजपानेताओं के दबाव के चलते मामला गंभीर होता देख तहसीलदार अरविंद कुमार स्वयं मंसूरपुर थाना पहुंचे। तहसीलदार के साथ थाने में मौजूद नेताओं से बातचीत के बाद एक रास्ता निकाला गया। तहसीलदार के हस्तक्षेप और पुलिस अधीक्षक स्तर से हुई बातचीत के बाद, थाने में ही तीनों अभियुक्तों से मुचलका (बांड) भरवाया गया और उन्हें रिहा कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान थाने पर मौजूद नेताओं में राजू अहलावत, विनीत ठाकुर, योगेंद्र चौधरी, यश गोयल, प्रांजल, सुमन सिंह (बालियान), कुलबीर प्रधान, मोनू आदि शामिल रहे।
- मौसम के मिजाज ने बढ़ाई किसानों की चिंता: बुवाई विलंब से खराब हो सकती है सरसों की फसल, फंगस रोग का खतरा मंडराया मुजफ्फरनगर, 04 जनवरी 2026। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। समय पर लेथ (रबी की एक प्रमुख फसल) की बुवाई न हो पाने के कारण अब सरसों की फसल पर फंगस जनित रोगों के हमले का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सतर्कता और उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो इस सीजन में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन और विलंबित बुवाई: एक दोहरी मार इस साल मानसून के देरी से विदा होने और बेमौसम बारिश के चलते जनपद के बड़े हिस्से में लेथ की बुवाई समय पर नहीं हो पाई। इस विलंब का सीधा असर अब सरसों पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञ बताते हैं कि देर से बोई गई फसलें अक्सर कमजोर होती हैं और उनमें रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऊपर से पिछले कुछ दिनों से दिन के तापमान में गिरावट और रात के समय कोहरे में बढ़ोतरी ने परिस्थितियों को और चिंताजनक बना दिया है। बढ़ता खतरा: झुलसा और सफेद रतुआ रोग कृषि विज्ञान केंद्र, मुजफ्फरनगर के एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक ने बताया, "वर्तमान में बढ़ी हुई नमी और कम तापमान का मिश्रण 'ऑल्टरनेरिया ब्लाइट' (झुलसा रोग) और 'व्हाइट रस्ट' (सफेद रतुआ) जैसे फंगस रोगों के लिए आदर्श स्थिति है। ये रोग पत्तियों, तनों और फलियों पर हमला करते हैं, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की क्षमता कम हो जाती है और दाने ठीक से नहीं बन पाते। अगर रोकथाम न की गई, तो पैदावार में 30 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।" किसानों की मुश्किलें और विभाग की सलाह जनपद के एक प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया, "पहले ही बुवाई में देरी से चिंता थी, अब यह नया खतरा सामने आ गया है। कीटनाशकों का खर्च बढ़ेगा और मेहनत भी ज्यादा लगेगी।" इस चुनौती को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें फसल की नियमित निगरानी करने, शुरुआती लक्षण दिखते ही कवकनाशी दवाओं (जैसे कि मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव) का उपयोग करने और खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन के प्रयोग पर जोर दिया गया है, क्योंकि अधिक नाइट्रोजन भी फंगस को बढ़ावा दे सकती है। जिले में कृषि संबंधी चुनौतियों का संदर्भ मुजफ्फरनगर जनपद में कृषि संबंधी मुद्दे नए नहीं हैं। इससे पहले भी सिंचाई विभाग द्वारा किए गए घटिया निर्माण कार्यों, जिसमें पांच दिन में उखड़ जाने वाली सड़क भी शामिल है, के कारण किसानों को सिंचाई सुविधाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। एक समाजसेवी द्वारा इन मुद्दों को उठाने के लिए भूख हड़ताल तक की गई थी। ऐसे में, फसलों पर रोगों का खतरा किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा सकता है। क्या है समाधान का रास्ता? विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम करना होगा। शॉर्ट ड्यूरेशन और रोग प्रतिरोधी किस्मों के बीजों को बढ़ावा देना, जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना और मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को समय पर सलाह देना ही इसका समाधान है। अगर समय रहते सावधानी बरती गई, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।2
- मुजफ्फरनगर श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व के उपलक्ष में श्री गुरु सिंह सभा द्वारा विशाल नगर कीर्तन गांधी कॉलोनी से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए शिव चौक पर सिख समाज के लोगों ने लगे स्टाल और नगर कीर्तन का किया स्वागत जिसमें पंच प्यारे और भजन कीर्तन करते हुए आगे बढ़ते हुए रोडवेज गुरुद्वारा पर हुआ समापन1
- मुज़फ्फरनगर!शहर की नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित आबकारी पुलिस चौकी पर शीत लहर के प्रकोप के बीच पुलिस कर्मी अलाव के सहारे पूरी तरह अलर्ट दिखाई दिए। आपको बता दें कि रविवार सुबह से ही मौसम ने अचानक करवट लेते हुए शीत लहर का विकराल रूप ले लिया है। कड़ाके की ठंड से जहां आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं पुलिस कर्मी बढ़ती सर्दी के बावजूद अपनी ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात नज़र आ रहे हैं। कड़ाके की ठंड में भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की यह सजगता प्रशंसनीय है। पुलिस प्रशासन द्वारा आवश्यक सतर्कता बरतते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ❄️👮♂️1
- Post by Ssnews UTTAR PRDESH1
- राष्ट्रीय महिला एकता संगठन1
- राष्ट्रीय महिला एकता संगठन1
- गांव रेई में स्थित राजकीय हाईस्कूल का प्रथम वार्षिकोत्सव बडें ही धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ रोहाना गन्ना समिति के चैयरमैन अनिल त्यागी, प्रधानाध्यापिका अनिता चौधरी आदि ने दीप प्रज्वलित करके किया। छात्र छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया। मुख्य अतिथि के द्वारा मेधावियों को सम्मानित किया गया।3
- पेपर मिल का जहरीला पानी सिंचाई नाले में छोड़ा जा रहा, सूख गए राष्ट्रीय राजमार्ग के पेड़ मुजफ्फरनगर। जनपद में पर्यावरण और स्वास्थ्य से खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सिंचाई विभाग के एक नाले में पेपर मिल का जहरीला औद्योगिक अपशिष्ट बेरोकटोक छोड़ा जा रहा है। इस प्रदूषित पानी के सिंचाई में इस्तेमाल का असर अब राजमार्ग पर लगे हजारों हरे-भरे पेड़ों को सुखा कर साफ दिखाई देने लगा है। विषैला पानी, सूखते पेड़ और चिंतित नागरिक स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पाया है कि एक निजी पेपर मिल की गंदगी को सिंचाई नाले में डाला जा रहा है। यह नाला स्थानीय किसानों द्वारा खेतों की सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे जहरीले रसायन सीधे फसलों और मिट्टी में जा रहे हैं। इसी पानी को, जानकारी के अभाव या विकल्पहीनता में, राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के किनारे हरियाली बनाए रखने के लिए भी उपयोग किया जा रहा है। अब उसी राजमार्ग के किनारे लगे पेड़ तेजी से मुरझाने और सूखने लगे हैं। बड़ी संख्या में पेड़ों का सूखना साफ इशारा कर रहा है कि पानी में मौजूद भारी रसायन और केमिकल्स पौधों की जड़ों को मार रहे हैं। पर्यावरणीय खतरा और स्वास्थ्य संकट पेपर मिलों के अपशिष्ट में क्लोरीन, डाइऑक्सिन, फरफ्यूरल और भारी धातु जैसे जहरीले तत्व पाए जाते हैं। जब यह पानी खेतों में जाता है, तो यह मिट्टी की सेहत को बर्बाद कर देता है, भूजल को जहरीला बना देता है और अंतत: फसलों के जरिए मानव शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। पेड़ों का सूखना तो इस गंभीर समस्या का सिर्फ दृश्यमान हिस्सा है। पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह एक बड़ा संकट है। विभागीय लापरवाही और जिम्मेदारों पर सवाल यह घटना मुजफ्फरनगर में सिंचाई विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। पिछले कुछ समय में विभाग अपने काम की घटिया गुणवत्ता के कारण विवादों में रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई एक सड़क महज पांच दिन में ही उखड़ गई थी और उसमें घास उग आई थी। इस मामले में समाजसेवी सुमित मलिक ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल तक की थी। ऐसे में, सवाल उठता है कि क्या उसी विभाग द्वारा संचालित नाले में जहरीला पानी छोड़ने की अनदेखी की जा रही है? क्या मिल मालिकों और निगरानी न करने वाले अधिकारियों के बीच कोई सांठगांठ है? किसान नेता और स्थानीय लोग पहले भी विभाग के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। नए साल के पहले दिन से ही एक कार्यकर्ता ने विभाग के 'घटिया खेल' के खिलाफ भूख हड़ताल जारी रखी हुई है। प्रशासन से मांग और भविष्य की चुनौती स्थानीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं: 1. सबसे पहले पेपर मिल द्वारा नाले में अपशिष्ट छोड़ने पर तुरंत रोक लगाई जाए। 2. प्रदूषित नाले के पानी और आसपास की मिट्टी का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए। 3. सूखे पेड़ों की जगह नए पौधे लगाए जाएं, लेकिन शुद्ध पानी की व्यवस्था के साथ। 4. पिछले मामलों की तरह इस मामले में भी भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूखते हजारों पेड़ सिर्फ पेड़ नहीं मर रहे, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और कृषि के लिए खतरे की घंटी है। प्रशासन की ओर से तुरंत और ठोस कार्रवाई ही इस संकट से निपट सकती है और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण दे सकती है।1