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जिंदे जिंदगी स्वर्ग है मेरा देवी ने होली क्यों मनाते हैं विस्तार किया पाखंडों के लिए होली है स्वर्गीय मीरा देवी लोगों को या संदेश दिए की होली पाखंडों के लिए है इसलिए आप लोग अच्छी तरह से समझिए कि जिस दिन किसी का मृत्यु होता है वह दिन शोक मनाया जाता है लेकिन वहां पर होली के दिन खुशी मनाया जाता है
Nirala Article 15,19 News
जिंदे जिंदगी स्वर्ग है मेरा देवी ने होली क्यों मनाते हैं विस्तार किया पाखंडों के लिए होली है स्वर्गीय मीरा देवी लोगों को या संदेश दिए की होली पाखंडों के लिए है इसलिए आप लोग अच्छी तरह से समझिए कि जिस दिन किसी का मृत्यु होता है वह दिन शोक मनाया जाता है लेकिन वहां पर होली के दिन खुशी मनाया जाता है
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- एंकर, नालंदा जिले में होली का उत्सव हर साल एक खास और अनोखे अंदाज़ में मनाया जाता है। यहां होली की शुरुआत रंगों से नहीं बल्कि कीचड़ से होती है। सुबह होते ही सड़कों और गलियों में लोग कीचड़ के साथ होली खेलते नजर आते हैं और पूरे इलाके में उत्साह और मस्ती का माहौल बन जाता है। नालंदा की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। होली के दिन सुबह से ही बच्चे, युवा और बुजुर्ग सड़कों पर उतर आते हैं और एक-दूसरे को कीचड़ लगाकर होली की शुरुआत करते हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप, होली के गीत और लोगों की हंसी-ठिठोली से पूरा माहौल उत्सवमय हो जाता है। लोगों का मानना है कि कीचड़ से होली खेलने की यह परंपरा सिर्फ मस्ती ही नहीं बल्कि आपसी भाईचारे और अपनापन का भी प्रतीक है। इस दौरान हर कोई जाति, वर्ग और उम्र की सीमाओं को भूलकर एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटता है। दोपहर बाद माहौल पूरी तरह बदल जाता है। लोग स्नान कर नए कपड़े पहनते हैं और फिर रंग व गुलाल के साथ पारंपरिक होली खेलते हैं। घर-घर में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे के घर जाकर अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं। नालंदा की यह अनोखी होली न केवल जिले की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और उत्साह का भी प्रतीक है। यही वजह है कि इस खास परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग नालंदा पहुंचते हैं और इस अनोखे उत्सव का आनंद लेते हैं।1
- स्वर्गीय मीरा देवी लोगों को या संदेश दिए की होली पाखंडों के लिए है इसलिए आप लोग अच्छी तरह से समझिए कि जिस दिन किसी का मृत्यु होता है वह दिन शोक मनाया जाता है लेकिन वहां पर होली के दिन खुशी मनाया जाता है1
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