इंदौर में तेज रफ्तार का कहर, कार ने दो पुलिसकर्मियों को मारी टक्कर #IndoreAccident #RoadAccident #IndorePolice #BreakingNews #MPNews #Speeding #RoadSafety #IndoreUpdate #CrimeNews #TrafficAlert #sundaramexpress इंदौर में तेज रफ्तार का कहर दो पुलिसकर्मी को मारी टक्कर हॉस्पिटल में ईलाज जारी कार ने गश्त कर रहे दो जवानों को मारी टक्कर डीआरपी लाइन में तैनात विजय नामक पुलिसकर्मी चला रहा घायल जवान अस्पताल में भर्ती कराया है एंकर: इंदौर में तेज रफ्तार कर के कारण आए दिन सड़क दुर्घटना लगातार बढ़ रही है बीती 48 घंटे में दो सड़क दुर्घटनाएं इसी तरह की के सामने आए ताजा मामले में दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है साथी बताया जा रहा है जो कर चालक है वह भी डीआरपी लाइन में पदस्थ पुलिसकर्मी ही है जिसको लेकर अब जांच पड़ताल की जा रही है। वीओ राजेंद्र नगर के आनंद नगर इलाके की है। पुलिस जवान भूरालाल और प्रमोद अपनी बाइक से रूटीन गश्त पर थे, ताकि इलाके में सुरक्षा बनी रहे। इसी दौरान डीआरपी लाइन में पदस्थ सिपाही विजय अपनी कार लेकर वहां पहुँचा। विजय ने कार पर नियंत्रण खो दिया और सीधे गश्ती दल की बाइक को टक्कर मार दी।टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों जवान सड़क पर दूर जा गिरे। उन्हें इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया। बाइट: प्रियंका डोडवे (एडिशनल डीसीपी, इंदौर)
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- 📰 विस्तृत खबर: मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के मूसा खेड़ी मयूर नगर पावर हाउस के पास नगर क्षेत्र में स्थित ‘न्यू लाइफ’ नामक प्राइवेट हॉस्पिटल एक बड़े विवाद में घिर गया है। जानकारी के अनुसार इस अस्पताल का रजिस्ट्रेशन 30 मार्च को समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद अस्पताल का संचालन लगातार जारी रखा गया। यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि जब इस पूरे मामले को लेकर मीडिया टीम अस्पताल पहुंची और संचालक से सवाल किए, तो उन्होंने जवाब देने के बजाय मीडिया के साथ अभद्र व्यवहार किया और सवालों से बचते नजर आए। इस घटना ने न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर भी संदेह उत्पन्न किया है। मामले की शिकायत संबंधित महिला स्वास्थ्य अधिकारी से की गई, लेकिन आरोप है कि उनकी ओर से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के चलते ऐसे अस्पताल संचालित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई ऐसे अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जिनके पास न तो वैध लाइसेंस है और न ही योग्य डॉक्टर या प्रशिक्षित स्टाफ। ऐसे में अगर किसी मरीज के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा—यह एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। यह पूरा मामला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। आम जनता ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अवैध अस्पतालों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।3