Shuru
Apke Nagar Ki App…
स्किल इंडिया और जन शिक्षण संस्थान के साथ मिलकर युवाओं को मिल रहा रोजगार; स्किल इंडिया और जन शिक्षण संस्थान के साथ मिलकर युवाओं को मिल रहा रोजगार; कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर फैशन डिजाइनिंग तक के कोर्सेज से संवर रहा भविष्य
प्रदेश खुलासा न्यूज
स्किल इंडिया और जन शिक्षण संस्थान के साथ मिलकर युवाओं को मिल रहा रोजगार; स्किल इंडिया और जन शिक्षण संस्थान के साथ मिलकर युवाओं को मिल रहा रोजगार; कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर फैशन डिजाइनिंग तक के कोर्सेज से संवर रहा भविष्य
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- इन्दौर मेट्रो की कानेकटिविटी बड़े गी देवास. उज्जैन.. महू. पीथमपुर.. तक इन्दौर विजय नगर इन्दौर मेट्रो कनेक्टिविटी बढ़ाने कनिर्णय लिया है सरकार ने इंदौर महू इंदौर उज्जैन इंदौर देवास इंदौर पीथमपुर इंदौर मेट्रो से जोड़ने का निर्णय लिया है पर जल्दी होगा कान काम शरू1
- Post by राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 1001
- स्किल इंडिया और जन शिक्षण संस्थान के साथ मिलकर युवाओं को मिल रहा रोजगार; कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर फैशन डिजाइनिंग तक के कोर्सेज से संवर रहा भविष्य1
- Jay Shri Ram Bhai Sahab1
- Post by Aarti Raikwar1
- मई में मौसम दिखाएगा रौद्र रूप1
- हवाबाज, रील बाज और जानलेवा शौकीन रैपर शाहाबाद और कार मालिक आशुतोष को पुलिस ने करा गिरफ्तार किया.. * देखिए पूरी खबर * संपर्क : सुदेश गुप्ता * 9201770 2771
- 📰 विस्तृत खबर: मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के मूसा खेड़ी मयूर नगर पावर हाउस के पास नगर क्षेत्र में स्थित ‘न्यू लाइफ’ नामक प्राइवेट हॉस्पिटल एक बड़े विवाद में घिर गया है। जानकारी के अनुसार इस अस्पताल का रजिस्ट्रेशन 30 मार्च को समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद अस्पताल का संचालन लगातार जारी रखा गया। यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि जब इस पूरे मामले को लेकर मीडिया टीम अस्पताल पहुंची और संचालक से सवाल किए, तो उन्होंने जवाब देने के बजाय मीडिया के साथ अभद्र व्यवहार किया और सवालों से बचते नजर आए। इस घटना ने न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर भी संदेह उत्पन्न किया है। मामले की शिकायत संबंधित महिला स्वास्थ्य अधिकारी से की गई, लेकिन आरोप है कि उनकी ओर से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के चलते ऐसे अस्पताल संचालित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई ऐसे अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जिनके पास न तो वैध लाइसेंस है और न ही योग्य डॉक्टर या प्रशिक्षित स्टाफ। ऐसे में अगर किसी मरीज के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा—यह एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। यह पूरा मामला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। आम जनता ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अवैध अस्पतालों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।3