मध्य प्रदेश में एक दलित परिवार को अपने मृत परिजन की चिता जलाने से रोका गया है, जिसे सामाजिक न्याय और मानवता पर सीधा प्रहार बताया जा रहा है। इस घटना को अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय करार दिया गया है, जहाँ पुलिस प्रशासन ने खुद आकर दलित परिवार को अंतिम संस्कार करने से बाधित किया। यह गंभीर सवाल उठाया गया है कि क्या इस देश में दलित समाज को अपने मृत परिजनों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का भी अधिकार नहीं है। संविधान द्वारा सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए जाने के बावजूद, इस परिवार को उसके अंतिम संस्कार के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन से तत्काल निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। यह भी मांग की गई है कि जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए, क्योंकि किसी भी व्यक्ति की गरिमा, सम्मान और अंतिम संस्कार के अधिकार के साथ खिलवाड़ को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस घटना को अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का समय बताया गया है, जहाँ न्याय, समानता और संविधान के सम्मान के लिए आवाज़ बुलंद करनी होगी। पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहने और उन्हें न्याय मिलने तक अपनी आवाज़ उठाते रहने का संकल्प व्यक्त किया गया है।
मध्य प्रदेश में एक दलित परिवार को अपने मृत परिजन की चिता जलाने से रोका गया है, जिसे सामाजिक न्याय और मानवता पर सीधा प्रहार बताया जा रहा है। इस घटना को अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय करार दिया गया है, जहाँ पुलिस प्रशासन ने खुद आकर दलित परिवार को अंतिम संस्कार करने से बाधित किया। यह गंभीर सवाल उठाया गया है कि क्या इस देश में दलित समाज को अपने मृत परिजनों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का भी अधिकार नहीं है। संविधान द्वारा सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए जाने के बावजूद, इस परिवार को उसके अंतिम संस्कार के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन से तत्काल निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। यह भी मांग की गई है कि जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए, क्योंकि किसी भी व्यक्ति की गरिमा, सम्मान और अंतिम संस्कार के अधिकार के साथ खिलवाड़ को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस घटना को अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का समय बताया गया है, जहाँ न्याय, समानता और संविधान के सम्मान के लिए आवाज़ बुलंद करनी होगी। पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहने और उन्हें न्याय मिलने तक अपनी आवाज़ उठाते रहने का संकल्प व्यक्त किया गया है।
- ग्राम पंचायत मानिकपुर चोरवरी के पास चल रहे मिट्टी भराई के काम को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिट्टी भराई का कार्य किया जा रहा है, जिसके कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और यातायात भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने विशेष रूप से यह शिकायत की है कि कई डंपर बिना नंबर प्लेट के ही चलाए जा रहे हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है कि मिट्टी खनन और परिवहन के लिए कितने वाहनों को वैध अनुमति मिली है और कितने वाहन अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि खनन की अनुमति किस गाटा संख्या के लिए जारी की गई है और निकाली गई मिट्टी को किस जगह पर डाला जा रहा है। उनकी मांग है कि इस पूरे मामले की गहन जांच की जाए और अनुमति पत्र, परिवहन पास, तथा वाहनों के सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए। ग्रामीणों ने एक गंभीर चिंता व्यक्त की है कि यदि बिना नंबर प्लेट वाले किसी वाहन से कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इस मामले को लेकर उन्होंने खनन विभाग और परिवहन सहित संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है।1
- एक कथावाचक के संघर्ष और उनकी ईमानदारी का एक उदाहरण सामने आया है, जिनके पास अपनी पत्नी के अवसान के बाद अस्थि विसर्जन तक के लिए पैसे नहीं थे। यह घटना इस बात का एक उत्तम उदाहरण है कि भगवान का नाम बेच कर पैसा नहीं कमाया जाता है, और यह कथावाचक अपनी सादगी व सिद्धांतों के प्रति निष्ठा के कारण प्रेरणास्रोत बने हैं।1
- इटावा के पक्का तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर नगर पालिका इटावा द्वारा खर्च किए गए करोड़ों रुपये के हिसाब पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इस विशाल राशि के इस्तेमाल के बावजूद आज पक्का तालाब की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जिसके लिए सीधे तौर पर नगर पालिका इटावा को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इटावा से समाजसेवी विकास रावत ने इस मामले में नगर पालिका की पोल खोलते हुए, करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी तालाब की वर्तमान दुर्दशा पर जवाबदेही तय करने की मांग की है।1
- यह देखा जा सकता है कि अब महिलाएँ पूरी सुरक्षा के साथ कहीं भी आ-जा सकती हैं, जिससे उनके सुरक्षित आवागमन की सुविधा सुनिश्चित हुई है।1
- उत्तर प्रदेश के चौबिया थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ एक विकलांग व्यक्ति ने अपने फौजी भाई पर अपनी जमीन फर्जी बैनामे के ज़रिए हड़पने का आरोप लगाया है। पीड़ित विकलांग भाई का कहना है कि उसके फौजी भाई ने जमीन हड़पने की नीयत से यह फर्जी बैनामा कराया है। इस पूरे मामले में, पीड़ित ने मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।1
- एक व्यक्ति ने लोगों की मानसिकता पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि आजकल यदि किसी की इज्जत की जाए, तो उसे अक्सर बेवकूफ़ समझा जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी विनम्रता और उनके संस्कार को किसी भी सूरत में उनकी कमजोरी नहीं समझना चाहिए, यह एक सीधी और सशक्त बात है।1
- कांग्रेस पार्टी ने प्रशासन को साफ शब्दों में चेतावनी दी है। पार्टी का कहना है कि यदि रणजीत राजपूत की हत्या के दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस थाने का घेराव करेगी।1
- एक कथावाचक की स्थिति सामने आई है, जिनके पास अपनी पत्नी के अवसान के बाद उनकी अस्थियों के विसर्जन के लिए पर्याप्त धन नहीं था। यह घटना इस बात का उत्तम उदाहरण मानी जा रही है कि उन्होंने भगवान का नाम बेचकर पैसा नहीं कमाया, और इस प्रकार वे ईमानदारी तथा निष्ठा के प्रतीक बने हुए हैं।1
- इटावा में 31 मई 1857 को घोषित भारतवर्ष की पूर्ण स्वतंत्रता के उद्घोष 'ऐलान-ए-मुकम्मल आज़ादी' की 169वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर चंबल फाउंडेशन परिवार द्वारा चकरनगर स्थित क्रांतिकारी राजा निरंजन सिंह चौहान की ऐतिहासिक राजगढ़ी में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जो रविवार प्रातः 10 बजे से राजगढ़ी परिसर में शुरू होगा। चंबल फाउंडेशन के अनुसार, 31 मई 1857 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जब किसानों, राजाओं और आम जनता के सामूहिक संघर्ष के फलस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को चुनौती देते हुए पूर्ण स्वतंत्रता का उद्घोष किया गया था। फाउंडेशन ने यह भी बताया कि 1857 की जनक्रांति में पूरा चंबल अंचल क्रांतिकारी राजा निरंजन सिंह चौहान के नेतृत्व में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एकजुट हुआ था। कार्यक्रम के दौरान 1857 के ज्ञात-अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी, साथ ही पिछले दो माह से संचालित 'चंबल मिशन' अभियान की समीक्षा कर आगामी रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। इस अवसर पर चंबल फाउंडेशन परिवार सरकार के समक्ष अपनी 14 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से रखेगा। इन मांगों में चंबल शौर्य स्मारक का निर्माण, चंबल केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना, स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर संस्थानों का नामकरण, क्रांतिवीरों पर पुस्तक एवं डॉक्यूमेंट्री का निर्माण, उन्हें शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल करना, पर्यटन विकास, स्मारक डाक टिकट जारी करना, सेनानी परिवारों को सम्मान एवं सुविधाएं प्रदान करना, तथा चंबल क्षेत्र के समग्र विकास से संबंधित मांगें शामिल हैं। फाउंडेशन ने प्रदेश एवं केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि चंबल के गुमनाम क्रांतिकारियों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान प्रदान किया जाए और चंबल को अपराध की नहीं, बल्कि क्रांति, बलिदान और शौर्य की धरती के रूप में स्थापित किया जाए। संगठन ने क्षेत्र के नागरिकों, इतिहासकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं जनप्रतिनिधियों से इस कार्यक्रम में सहभागिता कर 1857 के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने की अपील की है।1