देवरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान किसानों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। जो किसान दिन-रात मेहनत करके देश और प्रदेश का पेट भरता है, आज वही किसान खरीदी केंद्रों पर अपमान, अव्यवस्था और शोषण झेलने को मजबूर है। देवरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान किसानों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। जो किसान दिन-रात मेहनत करके देश और प्रदेश का पेट भरता है, आज वही किसान खरीदी केंद्रों पर अपमान, अव्यवस्था और शोषण झेलने को मजबूर है। गेहूं खरीदी केंद्रों पर किसानों से प्रति क्विंटल 2 से 3 किलो तक अतिरिक्त “अस्तरा” के नाम पर कटौती की जा रही है। यह सीधे-सीधे किसानों की मेहनत और हक पर डाका है। एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर खरीदी केंद्रों पर किसानों को लूटने का काम किया जा रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि किसान अपनी उपज बेचने के लिए दो-दो और तीन-तीन दिनों तक केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान में भी किसानों के लिए न तो छाया की व्यवस्था है, न पीने के पानी की, और न ही बैठने की कोई सुविधा उपलब्ध है। कई बुजुर्ग किसान और महिलाएं भी घंटों धूप में परेशान हो रही हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन बना हुआ है। खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम यह है कि किसानों को समय पर तौल नहीं मिल रही, बार-बार दस्तावेजों के नाम पर परेशान किया जा रहा है, और कर्मचारियों का रवैया भी किसानों के प्रति संवेदनशील नहीं दिखाई देता। किसान अपनी फसल बेचने के लिए घर-परिवार छोड़कर केंद्रों पर रातें बिताने को मजबूर हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार किसानों के हितों की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो किसानों का सरकार और प्रशासन से विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाएगा। हम प्रशासन और सरकार से मांग करते हैं कि खरीदी केंद्रों पर हो रही अवैध कटौती तत्काल बंद की जाए, किसानों के लिए पानी, छाया, बैठने और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तथा खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया जाए ताकि अन्नदाता को सम्मान और न्याय मिल सके।
देवरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान किसानों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। जो किसान दिन-रात मेहनत करके देश और प्रदेश का पेट भरता है, आज वही किसान खरीदी केंद्रों पर अपमान, अव्यवस्था और शोषण झेलने को मजबूर है। देवरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान किसानों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। जो किसान दिन-रात मेहनत करके देश और प्रदेश का पेट भरता है, आज वही किसान खरीदी केंद्रों पर अपमान, अव्यवस्था और शोषण झेलने को मजबूर है। गेहूं खरीदी केंद्रों पर किसानों से प्रति क्विंटल 2 से 3 किलो तक अतिरिक्त “अस्तरा” के नाम पर कटौती की जा रही है। यह सीधे-सीधे किसानों की मेहनत और हक पर डाका है। एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर खरीदी केंद्रों पर किसानों को लूटने का काम किया जा रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि किसान अपनी उपज बेचने के लिए दो-दो और तीन-तीन दिनों तक केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान में भी किसानों के लिए न तो छाया की व्यवस्था है, न पीने के पानी की, और न ही बैठने की कोई सुविधा उपलब्ध है। कई बुजुर्ग किसान और महिलाएं भी घंटों धूप में परेशान हो रही हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन बना हुआ है। खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम यह है कि किसानों को समय पर तौल नहीं मिल रही, बार-बार दस्तावेजों के नाम पर परेशान किया जा रहा है, और कर्मचारियों का रवैया भी किसानों के प्रति संवेदनशील नहीं दिखाई देता। किसान अपनी फसल बेचने के लिए घर-परिवार छोड़कर केंद्रों पर रातें बिताने को मजबूर हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार किसानों के हितों की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो किसानों का सरकार और प्रशासन से विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाएगा। हम प्रशासन और सरकार से मांग करते हैं कि खरीदी केंद्रों पर हो रही अवैध कटौती तत्काल बंद की जाए, किसानों के लिए पानी, छाया, बैठने और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तथा खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया जाए ताकि अन्नदाता को सम्मान और न्याय मिल सके।
- देवरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान किसानों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। जो किसान दिन-रात मेहनत करके देश और प्रदेश का पेट भरता है, आज वही किसान खरीदी केंद्रों पर अपमान, अव्यवस्था और शोषण झेलने को मजबूर है। देवरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान किसानों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। जो किसान दिन-रात मेहनत करके देश और प्रदेश का पेट भरता है, आज वही किसान खरीदी केंद्रों पर अपमान, अव्यवस्था और शोषण झेलने को मजबूर है। गेहूं खरीदी केंद्रों पर किसानों से प्रति क्विंटल 2 से 3 किलो तक अतिरिक्त “अस्तरा” के नाम पर कटौती की जा रही है। यह सीधे-सीधे किसानों की मेहनत और हक पर डाका है। एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर खरीदी केंद्रों पर किसानों को लूटने का काम किया जा रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि किसान अपनी उपज बेचने के लिए दो-दो और तीन-तीन दिनों तक केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान में भी किसानों के लिए न तो छाया की व्यवस्था है, न पीने के पानी की, और न ही बैठने की कोई सुविधा उपलब्ध है। कई बुजुर्ग किसान और महिलाएं भी घंटों धूप में परेशान हो रही हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन बना हुआ है। खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम यह है कि किसानों को समय पर तौल नहीं मिल रही, बार-बार दस्तावेजों के नाम पर परेशान किया जा रहा है, और कर्मचारियों का रवैया भी किसानों के प्रति संवेदनशील नहीं दिखाई देता। किसान अपनी फसल बेचने के लिए घर-परिवार छोड़कर केंद्रों पर रातें बिताने को मजबूर हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार किसानों के हितों की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो किसानों का सरकार और प्रशासन से विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाएगा। हम प्रशासन और सरकार से मांग करते हैं कि खरीदी केंद्रों पर हो रही अवैध कटौती तत्काल बंद की जाए, किसानों के लिए पानी, छाया, बैठने और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तथा खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया जाए ताकि अन्नदाता को सम्मान और न्याय मिल सके।1
- मध्य प्रदेश के एक वेयरहाउस में बिना किसान कोड टैग के गेहूं की बोरियां पैक की जा रही हैं। इससे यह पहचानना मुश्किल हो रहा है कि गेहूं किस किसान का है। इस अनियमितता से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।5
- नरसिंहपुर के तेंदूखेड़ा-गाडरवारा मार्ग पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से दर्दनाक हादसा हो गया। इस दुर्घटना में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है।1
- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में तेंदूखेड़ा-गाडरवारा मार्ग पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई। इस भीषण हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई।1
- मध्य प्रदेश के किसान कमीशनखोरी के कारण अपना अनाज बेचने के लिए मजबूर हैं। नरसिंहपुर के गाडरवारा में अन्नदाता दिन-रात भूखे-प्यासे बैठकर अपनी फसल की रखवाली कर रहे हैं। वहीं, नेताओं और मंत्रियों पर आरोप है कि वे एसी कमरों में बैठे हैं और किसानों की दुर्दशा से बेखबर हैं।1
- मध्य प्रदेश के सागर-बीना मार्ग पर भीषण आग लगने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।1
- नरसिंहपुर में मॉनसून से पहले SDRF और स्थानीय होमगार्ड की टीम ने नर्मदा नदी पर बचाव पूर्वाभ्यास किया। इस अभ्यास का उद्देश्य बारिश के दौरान संभावित बाढ़ व आपदाओं से निपटने की अपनी तैयारियों को जांचना था। टीमों ने आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया।1
- मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं को लेकर 'किसान सत्याग्रह आंदोलन' शुरू किया। प्रदेशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर चक्का जाम कर किसानों ने मोहन यादव सरकार को चेतावनी दी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान नेटवर्क बंद करवा दिया, जिससे सियासी पारा गरमा गया है।2