सात करोड़ खर्च के बाद भी बदहाल जसवंत प्रदर्शनी मैदान राहुल मदेरणा की मांग: सात करोड़ से विकसित जसवंत प्रदर्शनी मैदान को मिले नियमित सफाई और रखरखाव की सुविधा रखरखाव और हरियाली के अभाव में बेनूर हो रहा ऐतिहासिक परिसर, जलभराव-कचरे से परेशान शहरवासी दैनिक अभियान आज तक यशपाल सोलंकी भरतपुर शहर के ऐतिहासिक महाराजा जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला मैदान के विकास पर करीब सात करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद नियमित रखरखाव, सफाई, जल निकासी और हरियाली के अभाव में यह परिसर बदहाल होता जा रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क, लाइट और अन्य विकास कार्य तो किए गए लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के बाद जिस नियमित देखरेख की जरूरत थी, वह नजर नहीं आ रही है। स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा का कहना है कि यदि इस पूरे परिसर की नियमित सफाई, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और पौधारोपण पर ध्यान दिया जाए तो यही मैदान भरतपुर के सबसे सुंदर और उपयोगी सार्वजनिक स्थलों में शामिल हो सकता है। -कचरा, गंदा पानी और जलभराव से परेशानी नुमाइश मैदान में जगह-जगह खुले में कचरा और सामग्री पड़ी दिखाई देती है। कई स्थानों पर पानी जमा रहता है और बारिश के बाद स्थिति और खराब हो जाती है। मैदान के बड़े हिस्से में कीचड़ और जलभराव की समस्या बनी रहती है। मदेरणा के अनुसार कभी कोई पशु मर जाए तो समय पर उसे हटाने की व्यवस्था नहीं होने से दुर्गंध और गंदगी की स्थिति भी बन जाती है। ऐसे वातावरण में मैदान का इस्तेमाल करने वाले लोगों को परेशानी होती है। -सड़क बनी, लेकिन जल निकासी की व्यवस्था नहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान में सड़क और अन्य निर्माण कार्य किए गए लेकिन पर्याप्त नालियां और प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है। मदेरणा का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक परिसर का विकास केवल सड़क और निर्माण कार्य तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि जल निकासी की व्यवस्था नहीं होगी तो बारिश के समय करोड़ों रुपये से विकसित किया गया परिसर भी कीचड़ और पानी में बदल जाएगा। -लाइटें लगीं, लेकिन नियमित रोशनी का अभाव मैदान में लाइटें लगाई गई हैं लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार सामान्य दिनों में इनका नियमित उपयोग नहीं होता। उनका कहना है कि मेले के दौरान तो प्रकाश व्यवस्था दिखाई देती है लेकिन बाकी समय मैदान में आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त रोशनी उपलब्ध नहीं रहती। स्टेडियम में जलभराव के कारण कई लोग इस मैदान में सुबह-शाम वॉक करने आते हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिक और महिलाएं भी शामिल हैं। ऐसे में नियमित प्रकाश व्यवस्था सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। -पुराने गेटों का भी नहीं हुआ जीर्णोद्धार मैदान की पहचान रहे पुराने गेटों की स्थिति भी चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों के अनुसार विकास कार्यों के बावजूद पुराने गेटों का समुचित जीर्णोद्धार नहीं किया गया। कहीं गेट टूटे हुए हैं तो कहीं उनकी हालत जर्जर है। मदेरणा का कहना है कि जिस परिसर का ऐतिहासिक महत्व इतना बड़ा है, वहां प्रवेश द्वार भी उसी इतिहास और पहचान को दर्शाने वाले होने चाहिए। मैदान के लिए एक सुंदर और व्यवस्थित मुख्य प्रवेश द्वार विकसित किया जाना चाहिए। -हरियाली के नाम पर लगभग कुछ नहीं स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा ने मैदान की हरियाली और पौधारोपण को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इतना बड़ा खुला परिसर होने के बावजूद यहां व्यवस्थित रूप से पेड़-पौधे, लॉन या हरित क्षेत्र विकसित नहीं किया गया है। यदि मैदान के चारों ओर और अंदर पर्याप्त संख्या में छायादार एवं स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएं, हरित पट्टी विकसित की जाए और बैठने की व्यवस्था की जाए तो यह स्थान बेहद खूबसूरत बन सकता है। उनका सुझाव है कि यहां ग्रीन बेल्ट, पौधारोपण, वॉकिंग ट्रैक और बैठने के लिए बेंच विकसित की जाएं, जिससे यह केवल साल में लगने वाले मेले का मैदान ना रहकर पूरे वर्ष शहरवासियों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल बन सके। -महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति को भी मिले पहचान जिस महाराजा के नाम पर करीब एक सदी से यह प्रदर्शनी एवं पशु मेला आयोजित होता आ रहा है, उनकी स्मृति को भी परिसर में प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान में महाराजा जसवंत सिंह की प्रतिमा या स्मृति स्थल बनाया जा सकता है। प्रवेश द्वार पर ऐतिहासिक जानकारी वाला बोर्ड लगाया जाए, जिससे यहां आने वाले लोगों को मेले के इतिहास और इसकी परंपरा की जानकारी मिल सके। -हर मंगलवार हाट, फिर भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव नुमाइश मैदान में प्रत्येक मंगलवार साप्ताहिक हाट लगती है। इसमें छोटे दुकानदार, गरीब और मध्यम वर्गीय व्यापारी अपने सामान की बिक्री के लिए आते हैं। किसान और आम नागरिक भी यहां खरीदारी करते हैं लेकिन बारिश के दौरान जलभराव के कारण व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाट के लिए व्यवस्थित जगह, जल निकासी, साफ-सफाई, प्रकाश और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। -अक्टूबर में फिर लगेगा ऐतिहासिक मेला हर वर्ष दशहरे के आसपास यहां जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला आयोजित होता है। मेले में छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारी दूर-दराज से आते हैं। उनके लिए भी साफ-सुथरा और व्यवस्थित परिसर उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आगामी मेले से पहले मैदान की व्यापक सफाई, जल निकासी और आवश्यक मरम्मत का काम कराया जाना चाहिए ताकि मेले के समय केवल अस्थायी सजावट करके व्यवस्था संभालने की नौबत ना आए। -चौपाटी के रूप में भी विकसित हो सकता है मैदान राहुल मदेरणा का कहना है कि इतने बड़े परिसर को साल में सिर्फ एक बार लगने वाले मेले तक सीमित रखने के बजाय इसे स्थायी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। यहां व्यवस्थित चौपाटी, छोटे दुकानदारों के लिए निर्धारित स्थान, वॉकिंग ट्रैक, हरियाली, बैठने की व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी, स्वच्छ शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था की जाए तो यह शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। -प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा, रुपेश खंडेलवाल, सुशांत गुप्ता, उमेश तिवारी, मनोज खण्डेलवाल ने जिला प्रशासन और भरतपुर विकास प्राधिकरण से मांग की है कि जसवंत प्रदर्शनी मैदान का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और निम्न कार्य प्राथमिकता से कराए जाएं। पूरे परिसर की विशेष सफाई कराई जाए, खुले में पड़ा कचरा और अनावश्यक सामग्री हटाई जाए, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, पर्याप्त नालियां और प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए, पुराने गेटों का जीर्णोद्धार कराया जाए, मैदान की लाइटें नियमित रूप से चालू रखी जाएं, बड़े स्तर पर पौधरोपण कर हरित क्षेत्र विकसित किया जाए, वॉकिंग ट्रैक और बैठने की व्यवस्था बनाई जाए, महाराजा जसवंत सिंह की प्रतिमा एवं स्मृति स्थल विकसित किया जाए, एक आकर्षक और व्यवस्थित मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जाए, आगामी जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले से पहले पूरे परिसर को साफ और व्यवस्थित किया जाए। मदेरणा का कहना है कि सात करोड़ रुपये खर्च करके किसी सार्वजनिक परिसर को विकसित करना पहला कदम है लेकिन उसकी असली सफलता उसके नियमित रखरखाव और जनता के उपयोग में है। यदि साफ-सफाई, हरियाली, जल निकासी और प्रकाश व्यवस्था पर लगातार ध्यान दिया जाए तो यही ऐतिहासिक मैदान भरतपुर की खूबसूरत पहचान बन सकता है। प्रशासन को चाहिए कि करोड़ों रुपये से तैयार किए गए इस परिसर को उपेक्षा के कारण खराब होने देने के बजाय इसकी नियमित देखरेख की स्थायी व्यवस्था करे।
सात करोड़ खर्च के बाद भी बदहाल जसवंत प्रदर्शनी मैदान राहुल मदेरणा की मांग: सात करोड़ से विकसित जसवंत प्रदर्शनी मैदान को मिले नियमित सफाई और रखरखाव की सुविधा रखरखाव और हरियाली के अभाव में बेनूर हो रहा ऐतिहासिक परिसर, जलभराव-कचरे से परेशान शहरवासी दैनिक अभियान आज तक यशपाल सोलंकी भरतपुर शहर के ऐतिहासिक महाराजा जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला मैदान के विकास पर करीब सात करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद नियमित रखरखाव, सफाई, जल निकासी और हरियाली के अभाव में यह परिसर बदहाल होता जा रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क, लाइट और अन्य विकास कार्य तो किए गए लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के बाद जिस नियमित देखरेख की जरूरत थी, वह नजर नहीं आ रही है। स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा का कहना है कि यदि इस पूरे परिसर की नियमित सफाई, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और पौधारोपण पर ध्यान दिया जाए तो यही मैदान भरतपुर के सबसे सुंदर और उपयोगी सार्वजनिक स्थलों में शामिल हो सकता है। -कचरा, गंदा पानी और जलभराव से परेशानी नुमाइश मैदान में जगह-जगह खुले में कचरा और सामग्री पड़ी दिखाई देती है। कई स्थानों पर पानी जमा रहता है और बारिश के बाद स्थिति और खराब हो जाती है। मैदान के बड़े हिस्से में कीचड़ और जलभराव की समस्या बनी रहती है। मदेरणा के अनुसार कभी कोई पशु मर जाए तो समय पर उसे हटाने की व्यवस्था नहीं होने से दुर्गंध और गंदगी की स्थिति भी बन जाती है। ऐसे वातावरण में मैदान का इस्तेमाल करने वाले लोगों को परेशानी होती है। -सड़क बनी, लेकिन जल निकासी की व्यवस्था नहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान में सड़क और अन्य निर्माण कार्य किए गए लेकिन पर्याप्त नालियां और प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है। मदेरणा का कहना है कि
किसी भी सार्वजनिक परिसर का विकास केवल सड़क और निर्माण कार्य तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि जल निकासी की व्यवस्था नहीं होगी तो बारिश के समय करोड़ों रुपये से विकसित किया गया परिसर भी कीचड़ और पानी में बदल जाएगा। -लाइटें लगीं, लेकिन नियमित रोशनी का अभाव मैदान में लाइटें लगाई गई हैं लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार सामान्य दिनों में इनका नियमित उपयोग नहीं होता। उनका कहना है कि मेले के दौरान तो प्रकाश व्यवस्था दिखाई देती है लेकिन बाकी समय मैदान में आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त रोशनी उपलब्ध नहीं रहती। स्टेडियम में जलभराव के कारण कई लोग इस मैदान में सुबह-शाम वॉक करने आते हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिक और महिलाएं भी शामिल हैं। ऐसे में नियमित प्रकाश व्यवस्था सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। -पुराने गेटों का भी नहीं हुआ जीर्णोद्धार मैदान की पहचान रहे पुराने गेटों की स्थिति भी चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों के अनुसार विकास कार्यों के बावजूद पुराने गेटों का समुचित जीर्णोद्धार नहीं किया गया। कहीं गेट टूटे हुए हैं तो कहीं उनकी हालत जर्जर है। मदेरणा का कहना है कि जिस परिसर का ऐतिहासिक महत्व इतना बड़ा है, वहां प्रवेश द्वार भी उसी इतिहास और पहचान को दर्शाने वाले होने चाहिए। मैदान के लिए एक सुंदर और व्यवस्थित मुख्य प्रवेश द्वार विकसित किया जाना चाहिए। -हरियाली के नाम पर लगभग कुछ नहीं स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा ने मैदान की हरियाली और पौधारोपण को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इतना बड़ा खुला परिसर होने के बावजूद यहां व्यवस्थित रूप से पेड़-पौधे, लॉन या हरित क्षेत्र विकसित नहीं किया गया है। यदि मैदान के चारों ओर और अंदर पर्याप्त संख्या में छायादार एवं स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएं, हरित पट्टी विकसित की जाए और बैठने की व्यवस्था की जाए तो यह स्थान बेहद खूबसूरत बन सकता है।
उनका सुझाव है कि यहां ग्रीन बेल्ट, पौधारोपण, वॉकिंग ट्रैक और बैठने के लिए बेंच विकसित की जाएं, जिससे यह केवल साल में लगने वाले मेले का मैदान ना रहकर पूरे वर्ष शहरवासियों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल बन सके। -महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति को भी मिले पहचान जिस महाराजा के नाम पर करीब एक सदी से यह प्रदर्शनी एवं पशु मेला आयोजित होता आ रहा है, उनकी स्मृति को भी परिसर में प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान में महाराजा जसवंत सिंह की प्रतिमा या स्मृति स्थल बनाया जा सकता है। प्रवेश द्वार पर ऐतिहासिक जानकारी वाला बोर्ड लगाया जाए, जिससे यहां आने वाले लोगों को मेले के इतिहास और इसकी परंपरा की जानकारी मिल सके। -हर मंगलवार हाट, फिर भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव नुमाइश मैदान में प्रत्येक मंगलवार साप्ताहिक हाट लगती है। इसमें छोटे दुकानदार, गरीब और मध्यम वर्गीय व्यापारी अपने सामान की बिक्री के लिए आते हैं। किसान और आम नागरिक भी यहां खरीदारी करते हैं लेकिन बारिश के दौरान जलभराव के कारण व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाट के लिए व्यवस्थित जगह, जल निकासी, साफ-सफाई, प्रकाश और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। -अक्टूबर में फिर लगेगा ऐतिहासिक मेला हर वर्ष दशहरे के आसपास यहां जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला आयोजित होता है। मेले में छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारी दूर-दराज से आते हैं। उनके लिए भी साफ-सुथरा और व्यवस्थित परिसर उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आगामी मेले से पहले मैदान की व्यापक सफाई, जल निकासी और आवश्यक मरम्मत का काम कराया जाना चाहिए ताकि मेले के समय केवल अस्थायी सजावट करके व्यवस्था संभालने की नौबत ना आए। -चौपाटी के रूप में भी विकसित हो सकता है मैदान राहुल मदेरणा का कहना
है कि इतने बड़े परिसर को साल में सिर्फ एक बार लगने वाले मेले तक सीमित रखने के बजाय इसे स्थायी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। यहां व्यवस्थित चौपाटी, छोटे दुकानदारों के लिए निर्धारित स्थान, वॉकिंग ट्रैक, हरियाली, बैठने की व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी, स्वच्छ शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था की जाए तो यह शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। -प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा, रुपेश खंडेलवाल, सुशांत गुप्ता, उमेश तिवारी, मनोज खण्डेलवाल ने जिला प्रशासन और भरतपुर विकास प्राधिकरण से मांग की है कि जसवंत प्रदर्शनी मैदान का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और निम्न कार्य प्राथमिकता से कराए जाएं। पूरे परिसर की विशेष सफाई कराई जाए, खुले में पड़ा कचरा और अनावश्यक सामग्री हटाई जाए, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, पर्याप्त नालियां और प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए, पुराने गेटों का जीर्णोद्धार कराया जाए, मैदान की लाइटें नियमित रूप से चालू रखी जाएं, बड़े स्तर पर पौधरोपण कर हरित क्षेत्र विकसित किया जाए, वॉकिंग ट्रैक और बैठने की व्यवस्था बनाई जाए, महाराजा जसवंत सिंह की प्रतिमा एवं स्मृति स्थल विकसित किया जाए, एक आकर्षक और व्यवस्थित मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जाए, आगामी जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले से पहले पूरे परिसर को साफ और व्यवस्थित किया जाए। मदेरणा का कहना है कि सात करोड़ रुपये खर्च करके किसी सार्वजनिक परिसर को विकसित करना पहला कदम है लेकिन उसकी असली सफलता उसके नियमित रखरखाव और जनता के उपयोग में है। यदि साफ-सफाई, हरियाली, जल निकासी और प्रकाश व्यवस्था पर लगातार ध्यान दिया जाए तो यही ऐतिहासिक मैदान भरतपुर की खूबसूरत पहचान बन सकता है। प्रशासन को चाहिए कि करोड़ों रुपये से तैयार किए गए इस परिसर को उपेक्षा के कारण खराब होने देने के बजाय इसकी नियमित देखरेख की स्थायी व्यवस्था करे।
- पाली रिपोर्टर राजेश चौधरी भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में उम्मीदवारों ने दिखाया शक्ति प्रदर्शन वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं में भरा जीत का जोश, भाजपा के साथ मिलकर निकाय चुनाव में विजय का लिया संकल्प मारवाड़ जंक्शन। आगामी निकाय चुनाव को लेकर भाजपा की ओर से मारवाड़ जंक्शन के चौधरी छात्रावास में कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में पार्टी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न वार्डों से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान उम्मीदवारों ने अपने समर्थकों के साथ पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन किया। सम्मेलन में कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। इस सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व सांसद पुष्प जैन ने कार्यकर्ताओं में चुनाव को लेकर जोश फूंकते हुए कहा कि मारवाड़ नगरपालिका में कमल खिलाना है ओर इसको लेकर आमजन के साथ कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली है इसी तरह कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते मारवाड़ जंक्शन निकाय चुनाव के प्रभारी सहीराम विश्नोई हुए ने आगामी निकाय चुनाव में भाजपा को मजबूत करने और संगठन के अधिकृत प्रत्याशियों को विजयी बनाने का आह्वान किया। सम्मेलन में सह प्रभारी राजेन्द्र सिंह किसान,संयोजक श्रीपाल वैष्णव,सह संयोजक संदीप सोनी,जिला प्रवक्ता पंकज चौधरी, निवर्तमान भाजपा ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष हेमंत चौधरी,भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरेश भैरवानी,पूर्व उप प्रधान चौथाराम मेघवाल, विधानसभा संयोजक डूंगरसिंह राजपुरोहित एवं महामंत्री दिनेशदास वैष्णव सहित भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। पाली रिपोर्टर राजेश चौधरी भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में उम्मीदवारों ने दिखाया शक्ति प्रदर्शन वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं में भरा जीत का जोश, भाजपा के साथ मिलकर निकाय चुनाव में विजय का लिया संकल्प मारवाड़ जंक्शन। आगामी निकाय चुनाव को लेकर भाजपा की ओर से मारवाड़ जंक्शन के चौधरी छात्रावास में कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में पार्टी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न वार्डों से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान उम्मीदवारों ने अपने समर्थकों के साथ पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन किया। सम्मेलन में कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। इस सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व सांसद पुष्प जैन ने कार्यकर्ताओं में चुनाव को लेकर जोश फूंकते हुए कहा कि मारवाड़ नगरपालिका में कमल खिलाना है ओर इसको लेकर आमजन के साथ कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली है इसी तरह कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते मारवाड़ जंक्शन निकाय चुनाव के प्रभारी सहीराम विश्नोई हुए ने आगामी निकाय चुनाव में भाजपा को मजबूत करने और संगठन के अधिकृत प्रत्याशियों को विजयी बनाने का आह्वान किया। सम्मेलन में सह प्रभारी राजेन्द्र सिंह किसान,संयोजक श्रीपाल वैष्णव,सह संयोजक संदीप सोनी,जिला प्रवक्ता पंकज चौधरी, निवर्तमान भाजपा ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष हेमंत चौधरी,भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरेश भैरवानी,पूर्व उप प्रधान चौथाराम मेघवाल, विधानसभा संयोजक डूंगरसिंह राजपुरोहित एवं महामंत्री दिनेशदास वैष्णव सहित भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- रूपवास: जननी एक्सप्रेस चालक पर प्रसूता से 500 रुपये मांगने का आरोप, परिजनों ने दी लिखित शिकायत,, नर्सिंग_प्रभारी_के_कार्यालय में धमकाने का भी लगा आरोप, जांच शुरू,,,, रूपवास उपजिला अस्पताल में जननी एक्सप्रेस सेवा को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक प्रसूता के परिजनों ने जननी एक्सप्रेस चालक पर अस्पताल से घर छोड़ने के बदले 500 रुपये मांगने का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता के अनुसार प्रसूता को अस्पताल से घर पहुंचाने के लिए जननी एक्सप्रेस चालक ने 500 रुपये की मांग की। आरोप है कि राशि नहीं देने पर सरकारी सुविधा नहीं मिलने का भय भी दिखाया गया। परिजनों का कहना है कि जननी एक्सप्रेस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने और प्रसव के बाद उन्हें घर छोड़ने की सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बाद उसे नर्सिंग प्रभारी के कार्यालय में बुलाया गया। वहां क्षेत्र के एक जनप्रतिनिधि से जुड़े व्यक्ति ने उसे थप्पड़ मारने का प्रयास करते हुए डराया-धमकाया। शिकायतकर्ता ने इस पूरे घटनाक्रम की भी जांच कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की जननी एक्सप्रेस सेवा का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को निःशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अस्पताल आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उपजिला अस्पताल प्रभारी पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अजीत नामक युवक ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। वही इस घटना के समय मौजूद एक व्यक्ति ने मामले को झूठा बताया । अब पूरे मामले की जांच के बाद ही आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी।4
- योगी सरकार में विकास को तरस रहे बृजवासी दबंग के विरोध के चलते रास्ते का निर्माण अटका, बारिश में ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी मथुरा। छाता तहसील क्षेत्र के गांव करहेला में रास्ते की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक दबंग के विरोध के चलते रास्ते का निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। बारिश के मौसम में रास्ते पर कीचड़ और जलभराव होने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब रास्ते के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती है। वहीं, जलभराव और गंदगी के चलते बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में शादी-विवाह समेत अन्य जरूरी कार्यों के दौरान भी लोगों को इसी बदहाल रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कल्याण सिंह, बाबू, बिजेंद्र, राजेंद्र, मोहन, सुंदर, गिरधारी, रामकिशन, अजय सिंह, बच्चू, कंजर भज्जी वाली और दाऊजी सहित कई ग्रामीणों ने रास्ते की समस्या को लेकर संबंधित जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन से कई बार शिकायत की है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन करहेला गांव में जमीनी स्तर पर विकास की तस्वीर अलग नजर आ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर रास्ते की स्थिति का निरीक्षण कराने तथा जल्द से जल्द रास्ते का निर्माण कराए जाने की मांग की है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कब होता है और उन्हें बदहाल रास्ते से कब राहत मिलती है। योगी सरकार में विकास को तरस रहे बृजवासी दबंग के विरोध के चलते रास्ते का निर्माण अटका, बारिश में ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी मथुरा। छाता तहसील क्षेत्र के गांव करहेला में रास्ते की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक दबंग के विरोध के चलते रास्ते का निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। बारिश के मौसम में रास्ते पर कीचड़ और जलभराव होने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब रास्ते के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती है। वहीं, जलभराव और गंदगी के चलते बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में शादी-विवाह समेत अन्य जरूरी कार्यों के दौरान भी लोगों को इसी बदहाल रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कल्याण सिंह, बाबू, बिजेंद्र, राजेंद्र, मोहन, सुंदर, गिरधारी, रामकिशन, अजय सिंह, बच्चू, कंजर भज्जी वाली और दाऊजी सहित कई ग्रामीणों ने रास्ते की समस्या को लेकर संबंधित जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन से कई बार शिकायत की है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन करहेला गांव में जमीनी स्तर पर विकास की तस्वीर अलग नजर आ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर रास्ते की स्थिति का निरीक्षण कराने तथा जल्द से जल्द रास्ते का निर्माण कराए जाने की मांग की है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कब होता है और उन्हें बदहाल रास्ते से कब राहत मिलती है।4
- मथुरा जंक्शन पर टला बड़ा हादसा: जान पर खेलकर GRP जवान ने बचाई चलती ट्रेन से घिसट रहे यात्री की जान मथुरा। मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 09 पर बुधवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। चलती ट्रेन में चढ़ने के प्रयास में एक यात्री का पैर फिसल गया और वह ट्रेन के साथ घिसटने लगा। प्लेटफॉर्म पर तैनात जीआरपी के एक जाबांज हेड कांस्टेबल की मुस्तैदी और साहस की बदौलत यात्री को सुरक्षित बचा लिया गया। जीआरपी अनुभाग आगरा द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह घटना लालकुआं-राजकोट स्पेशल ट्रेन के प्रस्थान के समय हुई। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म से रवाना होने लगी, एक यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास करने लगा। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और पैर फिसलने के कारण वह ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच घिसटने लगा। प्लेटफॉर्म नंबर 09 पर ड्यूटी पर तैनात जीआरपी थाना मथुरा जंक्शन के हेड कांस्टेबल सुरजीत कुमार ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत भांप लिया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए और अपनी जान की परवाह किए बिना अदम्य साहस का परिचय दिया। हेड कांस्टेबल ने तत्परता से घिसट रहे यात्री को अपनी तरफ सुरक्षित खींचकर ट्रेन से अलग किया और उसकी जान बचा ली। हेड कांस्टेबल सुरजीत कुमार की इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई को देखकर प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों और आमजन ने उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। उल्लेखनीय है कि पुलिस महानिदेशक रेलवे (उ.प्र. लखनऊ), पुलिस महानिरीक्षक (रेलवे प्रयागराज), पुलिस अधीक्षक (रेलवे आगरा) और पुलिस उपाधीक्षक (रेलवे आगरा) के निर्देशों और पर्यवेक्षण में जीआरपी द्वारा रेलवे स्टेशनों एवं ट्रेनों में यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा के लिए लगातार सतर्कता बरती जा रही है। Head Constable Surjeet Kumar की इस मुस्तैदी ने पुलिस महकमे का मान बढ़ाया है।1
- गन्ना मिल विवाद पर फौजियों का आक्रोश, बोले—अब नहीं चलेंगे झूठे आश्वासन मथुरा में गन्ना मिल को लेकर विवाद लगातार गरमाता नजर आ रहा है। मिल को चालू कराने की मांग को लेकर फौजियों ने भी अपनी आवाज बुलंद की है। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रशासन और संबंधित जिम्मेदारों से मिल को जल्द शुरू कराने की मांग रखी। फौजियों का कहना है कि लंबे समय से किसानों और क्षेत्रीय लोगों को आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि “चाहे हमारे परिवारों को खत्म कर दो, लेकिन गन्ना मिल चालू कर दो—अब झूठे आश्वासन नहीं चलेंगे।” मामले को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। फौजियों ने मांग की है कि गन्ना मिल को जल्द से जल्द चालू कराया जाए, ताकि किसानों और क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके। #मथुरा #गन्नामिल #गन्नामिलविवाद #फौजियोंकीमांग #किसान #किसानोंकीआवाज #मथुरान्यूज #वायरलन्यूज #ब्रजकीआवाज #RPRNEWSTV #गन्नामिलचालूकरो1
- मथुरा का महाघोटाला: छाता तहसील में बैंक के नाम पर 'फर्जी कुर्की' कर हड़प ली किसान की पुश्तैनी जमीन, अब रसूखदार प्रधान दे रहे जान से मारने की धमकी!"1966 से काबिज किसान परिवार के साथ राजस्व कर्मियों और पूर्व प्रधान की बड़ी साठगांठ।कैनरा बैंक ने लिखित रूप में स्वीकारा— 'हमने कभी नहीं की जमीन कुर्क', जारी की एनओसी।एसडीएम की जांच आख्या में खुली पोल, बौखलाए वर्तमान प्रधान ज्ञान सिंह ने खेत पर बोला धावा, उखाड़ा बोर्ड।शेरगढ़ थाना पुलिस पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने और पीड़ितों को ही प्रताड़ित करने का संगीन आरोप।मथुरा/छाता:तहसील छाता के अंतर्गत ग्राम उजानी बांगर में एक ऐसा सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और शुचिता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। तत्कालीन तहसीलदार, लेखपाल और पूर्व प्रधान ने मिलकर एक सीधे-साधे किसान परिवार की पुश्तैनी जमीन को हड़पने के लिए बैंक लोन के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में 'फर्जी कुर्की' (420) दर्ज कर दी और जमीन को श्रेणी-3 (असामी) दिखाकर अपनों के नाम पट्टे काट दिए। अब इस महाघोटाले की पोल खुलने पर वर्तमान प्रधान और भू-माफिया पीड़ित परिवार पर जानलेवा हमला कर रहे हैं, जबकि स्थानीय शेरगढ़ पुलिस आंखें मूंदे बैठी है।बैंक ने कभी की ही नहीं कुर्की, 100% जालसाजी:पीड़ित किसान योगेश पुत्र स्वर्गीय भोगल ने सरकारी दस्तावेजों और कैनरा बैंक (शाखा शेरगढ़) की आधिकारिक एनओसी (बेबाकी प्रमाण पत्र) को सामने रखते हुए बताया कि उनके खसरा संख्या 364 व 386 की पुश्तैनी भूमि वर्ष 1966 (दादी स्व० अमीरा) के समय से उनके निरंतर भौतिक कब्जे में है [EfuY4X, RjG8rH]। इस पुश्तैनी भूमि का मुख्य मालिकाना हक का मुकदमा माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय (रिट याचिका संख्या 27019/2012) में विचाराधीन है [EfuY4X]। वर्ष 2007 में तत्कालीन प्रधान रामवीर ने राजस्व कर्मियों से सांठगांठ कर प्रार्थी के पिता द्वारा लिए गए लोन के नाम पर जमीन की 'फर्जी कुर्की' खतौनी पर दर्ज करवा दी और जमीन को निरस्त करवाकर अपनी भाभी, मौसी व चहेतों के नाम पट्टे काट दिए, जबकि कैनरा बैंक ने लिखित रूप में साफ किया है कि बैंक द्वारा ऐसी कोई कुर्की कभी की ही नहीं गई थी और पीड़ित परिवार का ऋण पूरी तरह चुकता हो चुका है [R8gH4U]। मजेदार बात यह है कि इस बंदरबांट में एक पट्टा खुद पीड़ित परिवार के नाम भी दर्ज है।एसडीएम की रिपोर्ट से बौखलाहट, रसूखदार प्रधान का हमला:हाल ही में जब इन पट्टाधारकों ने मेड़बंदी (धारा 24) के बहाने जमीन का कब्जा बदलने का प्रयास किया, तो उपजिलाधिकारी (SDM) व तहसीलदार छाता ने 17/18 अगस्त 2026 को लिखित संयुक्त आख्या जारी कर भू-माफियाओं के मुंह पर तमाचा जड़ दिया [RjG8rH]। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि "मौके पर किसी भी पक्ष को कोई कब्जा नहीं दिलाया गया है, शिकायतकर्ता (प्रधान पक्ष) का कथन पूरी तरह असत्य है और हाई कोर्ट के रहते कोई कार्रवाई संभव नहीं है।" [RjG8rH] इस सरकारी रिपोर्ट से पूरी तरह बौखलाकर वर्तमान प्रधान ज्ञान सिंह अपने पूरे परिवार, असामाजिक तत्वों और लाठी-डंडों से लैस गुंडों को लेकर पीड़ित के खेत पर घुस आया और वहां लगा मालिकाना हक का सरकारी सूचना बोर्ड उखाड़कर फेंक दिया। जब पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया, तो वर्तमान प्रधान ज्ञान सिंह व उसके गुंडों ने प्रार्थी के पूरे परिवार को घेरकर जान से मारने की सीधी धमकी दी।शेरगढ़ पुलिस के संरक्षण में फल-फूल रहे भू-माफिया:पीड़ित योगेश का आरोप है कि घटना के समय यूपी 112 पुलिस मौके पर आई थी, लेकिन उनके जाते ही प्रधानी के नशे में चूर दबंगों ने दोबारा बोर्ड उखाड़ दिया। जब पीड़ित परिवार नामजद F.I.R. दर्ज कराने थाना शेरगढ़ गया, तो पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, उल्टे पीड़ित परिवार को ही अपनी जमीन पर न जाने की धमकी देकर डराया-धमकाया। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो-टॉलरेंस' नीति पर भरोसा जताते हुए जिलाधिकारी (DM) और एसएसपी मथुरा से गुहार लगाई है कि इस संगठित भू-माफिया सिंडिकेट (पूर्व प्रधान रामवीर व वर्तमान प्रधान ज्ञान सिंह) के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 120-B के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज कर पीड़ित परिवार को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए।1
- दबंग के विरोध के चलते रास्ते का निर्माण अटका, बारिश में ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी मथुरा। छाता तहसील क्षेत्र के गांव करहेला में रास्ते की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक दबंग के विरोध के चलते रास्ते का निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। बारिश के मौसम में रास्ते पर कीचड़ और जलभराव होने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब रास्ते के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती है। वहीं, जलभराव और गंदगी के चलते बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में शादी-विवाह समेत अन्य जरूरी कार्यों के दौरान भी लोगों को इसी बदहाल रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कल्याण सिंह, बाबू, बिजेंद्र, राजेंद्र, मोहन, सुंदर, गिरधारी, रामकिशन, अजय सिंह, बच्चू, कंजर भज्जी वाली और दाऊजी सहित कई ग्रामीणों ने रास्ते की समस्या को लेकर संबंधित जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन से कई बार शिकायत की है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन करहेला गांव में जमीनी स्तर पर विकास की तस्वीर अलग नजर आ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर रास्ते की स्थिति का निरीक्षण कराने तथा जल्द से जल्द रास्ते का निर्माण कराए जाने की मांग की है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कब होता है और उन्हें बदहाल रास्ते से कब राहत मिलती है।4
- रूपवास_नगरपालिका_वार्ड 7 में 'बदलाव की आवाज युवा टीम' ने चलाया चुनाव जागरूकता अभियान : सफाई लाइट पानी की समस्या सबसेबड़ी- बोले वार्डवासी, रूपवास नगरपालिका के वार्ड नंबर 7 में निकाय चुनाव को लेकर "बदलाव की आवाज युवा टीम" ने नुक्कड़ सभा कर जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने वार्डवासियों से मिलकर उनकी समस्याएं जानीं। वार्डवासियों ने बताया कि क्षेत्र में सफाई व्यवस्था ठप है, स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हैं, पानी की निकासी नहीं हो रही और पेयजल की समस्या सबसे अधिक है। अधिकतर लोगों ने पूर्व पार्षद पर इन समस्याओं की ओर ध्यान न देने के आरोप लगाए। वहीं पूर्व प्रत्याशी के प्रतिनिधि का कहना था कि वार्ड में ऐसी कोई समस्या नहीं है। जागरूकता अभियान के दौरान जब भावी प्रत्याशी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो पूर्व पार्षद के प्रतिनिधि और समर्थकों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। इस कारण भावी प्रत्याशी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। भावी प्रत्याशी का इंटरव्यू जल्द ही प्रकाशित किया जाएगा। वार्ड 7 के वरिष्ठ लोगों ने कहा कि शोर और हंगामे से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूर्व पार्षद ने कितना विकास किया है।4