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राजधानी दिल्ली में पानी के गंभीर संकट को लेकर जनता में हाहाकार मचा हुआ है, जिससे लोग अत्यधिक परेशान हैं। इस स्थिति के लिए 'चार इंजन की भाजपा सरकार' को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, वहीं जल बोर्ड के अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं। जनता का सवाल है कि पानी की कमी के बीच दिल्ली में 'चार इंजन की सरकार' कैसे चलेगी, जब लोग बेहाल हैं।
Vinod Rastogi
राजधानी दिल्ली में पानी के गंभीर संकट को लेकर जनता में हाहाकार मचा हुआ है, जिससे लोग अत्यधिक परेशान हैं। इस स्थिति के लिए 'चार इंजन की भाजपा सरकार' को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, वहीं जल बोर्ड के अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं। जनता का सवाल है कि पानी की कमी के बीच दिल्ली में 'चार इंजन की सरकार' कैसे चलेगी, जब लोग बेहाल हैं।
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- दूसरे INDO RUSSIAN एजुकेशन सम्मिट 2026 का नई दिल्ली में शुभारम्भ हो गया है।1
- दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना ने शालीमार बाग का दौरा किया और जनता को आश्वासन दिया है। यह आश्वासन 'घर बचाओ आंदोलन' के संबंध में दिया गया है, जो शालीमार बाग में चल रहा है। इस आंदोलन से जुड़ा एक नया अपडेट सामने आया है।1
- बिहार के भागलपुर जिले के कहलगाँव प्रखंड की कुरमा पंचायत में कम उम्र में हुए प्रेम संबंध का एक मामला सामने आया है, जहाँ एक लड़के ने लड़की के साथ दो साल तक शारीरिक संबंध बनाने के बाद उससे शादी करने से इनकार कर दिया है। यह पूरा प्रकरण अब रसलपुर थाना क्षेत्र में पहुँच गया है।1
- खड़कपुर गंगा पट्टी में निजी ज़मीन पर बनाए गए एक सरकारी नाले के निर्माण में भ्रष्टाचार का संकेत मिला है। यह नाला बहादुरपुर प्रखंड की हरपति पंचायत के गंगा पट्टी गांव में महावीर स्थान से लेकर घर तक बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस नाले का निर्माण सड़क से उठाया गया है और इसमें कोई नीचे का बेस नहीं बनाया गया है; इसे सीधे 'कारंजा' से उठाया गया है। निर्माण की इस गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि इस तरह का नाला कब तक टिकाऊ रहेगा।1
- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बेंगलुरु में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान इसकी जानकारी देते हुए कहा कि हाईकमान ने उन्हें इस्तीफा देने को कहा था, जिसके बाद उन्होंने आज इस्तीफा दे दिया। उनके अनुसार, अब अगले मुख्यमंत्री को अवसर मिलना चाहिए। इस दौरान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी उनके साथ मौजूद थे। सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत के सेक्रेटरी को अपना इस्तीफा सौंपा, क्योंकि गहलोत पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर हैं। नियमों के मुताबिक, राज्यपाल की अनुपस्थिति में भी मुख्यमंत्री राजभवन के अधिकारियों को लिखित इस्तीफा सौंप सकते हैं, जिसे राज्यपाल बाद में स्वीकार करते हैं। जब तक इस्तीफा मंजूर नहीं होता, निवर्तमान मुख्यमंत्री ही पद पर बने रहते हैं। इस्तीफा देने से पहले, सिद्धारमैया ने गुरुवार सुबह अपने आवास पर मंत्रियों के साथ एक नाश्ते की बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने अपने फैसले से सभी मंत्रियों को अवगत कराया। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए, जिसके बाद सिद्धारमैया ने उन्हें गले लगा लिया। कर्नाटक सरकार में मंत्री एचके पाटिल ने पुष्टि की कि बैठक में डीके शिवकुमार के नाम पर मुहर लगी और वह अगले मुख्यमंत्री होंगे। इस राजनीतिक फेरबदल के बाद कर्नाटक में तीन प्रमुख संभावनाएं जताई जा रही हैं। पहली, डीके शिवकुमार को शुक्रवार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जिसके बाद कांग्रेस उनके नेतृत्व में सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। दूसरी, जिस तरह बिहार में NDA ने पूर्व सीएम नीतीश के बेटे को नई सरकार में मंत्री बनाया था, उसी तरह सिद्धारमैया के बेटे को भी मंत्री पद मिल सकता है। तीसरी, मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की आशंका है, जिसमें लगभग 15 से 20 नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है और 35 मंत्रियों में से करीब 25 को हटाया जा सकता है। इसके साथ ही, दो उपमुख्यमंत्री भी संभव हैं, जिनमें एक पद किसी दलित चेहरे और दूसरा लिंगायत या ओबीसी नेता को मिल सकता है। कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री बदलने के पीछे तीन मुख्य वजहें बताई जा रही हैं। पहली, मई 2023 में चुनाव जीतने के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिस पर राहुल गांधी ने रोटेशनल सीएम फॉर्मूला तय किया था। अब सरकार के तीन साल पूरे होने वाले हैं, ऐसे में डीके शिवकुमार पर दबाव चरम पर था। दूसरी, सिद्धारमैया सरकार वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाला जैसे मामलों में घिर चुकी थी। तीसरी, पार्टी हाईकमान का मानना है कि समय रहते नेतृत्व बदलने से मंत्रियों के खिलाफ पैदा हो रही 'एंटी-इंकम्बेंसी' को खत्म किया जा सकता है।1
- आम आदमी को यह समझना होगा कि जब तक जनता है, तभी तक सरकार है, और सरकार जनता से ही चलती है, न कि जनता सरकार से। लोग अपना नुकसान क्यों करवा रहे हैं और अपने हकों के लिए आखिर कब लड़ेंगे? जब ये नेता वोट मांगने आते हैं, तब तो बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी जनता के साथ किया गया एक भी वादा पूरा नहीं किया है। सरकार हमेशा जनता के विपरीत काम करती है। आजकल तो हर चीज पर महंगाई इस कदर बढ़ाई जा रही है, जैसे सरकार के घर से सबके घरों में राशन भरा जाएगा। असल में, सरकार जनता को सिर्फ बेवकूफ बनाकर अपना फायदा करती है और फिर निकल जाती है।1
- दिल्ली के निवासियों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। बारिश के आगमन के साथ, लोगों ने इस बदले हुए मौसम का जमकर आनंद लिया।1
- राज्य में पुलिस ने एक कार्रवाई के तहत अचानक एक ट्रक को बीच सड़क पर रोककर उसकी तलाशी ली। इस तलाशी के दौरान, पुलिस को ट्रक के अंदर बने एक गुप्त तहखाने से ₹50 लाख रुपये की बड़ी नकदी मिली है। अब पुलिस इस पूरे मामले में आगे की जांच कर रही है।1
- लखनऊ की ऐतिहासिक टीले वाली मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाजियों ने नमाज अदा की। नमाज के बाद देश में खुशहाली, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए खास दुआएं मांगी गईं। यह पूरा आयोजन शांतिपूर्ण माहौल के बीच संपन्न हुआ, जिसमें अमन-चैन की कामना की गई। इस अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। लखनऊ के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और सुरक्षा पर विशेष नजर रखी गई। प्रशासन ने ड्रोन कैमरों के जरिए हर गतिविधि की निगरानी की। पुलिस के आलाधिकारी भारी फोर्स के साथ लगातार मुस्तैद रहे, वहीं सुरक्षा एजेंसियां भी नमाज के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए अलर्ट थीं।2