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आम आदमी को यह समझना होगा कि जब तक जनता है, तभी तक सरकार है, और सरकार जनता से ही चलती है, न कि जनता सरकार से। लोग अपना नुकसान क्यों करवा रहे हैं और अपने हकों के लिए आखिर कब लड़ेंगे? जब ये नेता वोट मांगने आते हैं, तब तो बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी जनता के साथ किया गया एक भी वादा पूरा नहीं किया है। सरकार हमेशा जनता के विपरीत काम करती है। आजकल तो हर चीज पर महंगाई इस कदर बढ़ाई जा रही है, जैसे सरकार के घर से सबके घरों में राशन भरा जाएगा। असल में, सरकार जनता को सिर्फ बेवकूफ बनाकर अपना फायदा करती है और फिर निकल जाती है।

1 hr ago
user_Pooja mahwer
Pooja mahwer
Video Creator Delhi Cantonment, New Delhi•
1 hr ago

आम आदमी को यह समझना होगा कि जब तक जनता है, तभी तक सरकार है, और सरकार जनता से ही चलती है, न कि जनता सरकार से। लोग अपना नुकसान क्यों करवा रहे हैं और अपने हकों के लिए आखिर कब लड़ेंगे? जब ये नेता वोट मांगने आते हैं, तब तो बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी जनता के साथ किया गया एक भी वादा पूरा नहीं किया है। सरकार हमेशा जनता के विपरीत काम करती है। आजकल तो हर चीज पर महंगाई इस कदर बढ़ाई जा रही है, जैसे सरकार के घर से सबके घरों में राशन भरा जाएगा। असल में, सरकार जनता को सिर्फ बेवकूफ बनाकर अपना फायदा करती है और फिर निकल जाती है।

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  • आम आदमी को यह समझना होगा कि जब तक जनता है, तभी तक सरकार है, और सरकार जनता से ही चलती है, न कि जनता सरकार से। लोग अपना नुकसान क्यों करवा रहे हैं और अपने हकों के लिए आखिर कब लड़ेंगे? जब ये नेता वोट मांगने आते हैं, तब तो बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी जनता के साथ किया गया एक भी वादा पूरा नहीं किया है। सरकार हमेशा जनता के विपरीत काम करती है। आजकल तो हर चीज पर महंगाई इस कदर बढ़ाई जा रही है, जैसे सरकार के घर से सबके घरों में राशन भरा जाएगा। असल में, सरकार जनता को सिर्फ बेवकूफ बनाकर अपना फायदा करती है और फिर निकल जाती है।
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    आम आदमी को यह समझना होगा कि जब तक जनता है, तभी तक सरकार है, और सरकार जनता से ही चलती है, न कि जनता सरकार से। लोग अपना नुकसान क्यों करवा रहे हैं और अपने हकों के लिए आखिर कब लड़ेंगे?

जब ये नेता वोट मांगने आते हैं, तब तो बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी जनता के साथ किया गया एक भी वादा पूरा नहीं किया है। सरकार हमेशा जनता के विपरीत काम करती है। आजकल तो हर चीज पर महंगाई इस कदर बढ़ाई जा रही है, जैसे सरकार के घर से सबके घरों में राशन भरा जाएगा।

असल में, सरकार जनता को सिर्फ बेवकूफ बनाकर अपना फायदा करती है और फिर निकल जाती है।
    user_Pooja mahwer
    Pooja mahwer
    Video Creator Delhi Cantonment, New Delhi•
    1 hr ago
  • असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित हो गया है, जिसके बाद राज्य में कई महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं। इस नए कानून के तहत, द्विविवाह या बहुविवाह करने पर सात साल तक की कैद की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही, जानबूझकर 60 दिनों के भीतर शादी या तलाक का पंजीकरण न कराने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाने का भी नियम बनाया गया है। यूसीसी के अंतर्गत, लिव-इन रिलेशनशिप और शादी की उम्र को लेकर भी कई परिवर्तन किए गए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस कानून का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को अधिक सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना बताया है। हालांकि, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी समेत कई मुस्लिम नेताओं ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है। ओवैसी ने यूसीसी विधेयक की आलोचना करते हुए इसे मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने का "परोक्ष प्रयास" करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि इसके माध्यम से उत्तराधिकार, विरासत और तलाक जैसे मामलों में हिंदू सिद्धांतों को थोपा जा रहा है।
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    असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित हो गया है, जिसके बाद राज्य में कई महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं। इस नए कानून के तहत, द्विविवाह या बहुविवाह करने पर सात साल तक की कैद की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही, जानबूझकर 60 दिनों के भीतर शादी या तलाक का पंजीकरण न कराने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाने का भी नियम बनाया गया है। यूसीसी के अंतर्गत, लिव-इन रिलेशनशिप और शादी की उम्र को लेकर भी कई परिवर्तन किए गए हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस कानून का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को अधिक सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना बताया है। हालांकि, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी समेत कई मुस्लिम नेताओं ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है। ओवैसी ने यूसीसी विधेयक की आलोचना करते हुए इसे मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने का "परोक्ष प्रयास" करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि इसके माध्यम से उत्तराधिकार, विरासत और तलाक जैसे मामलों में हिंदू सिद्धांतों को थोपा जा रहा है।
    user_Sunita Jain
    Sunita Jain
    Vasant Vihar, New Delhi•
    1 hr ago
  • गुरुवार का दिन कर्नाटक की राजनीति में बड़े सियासी उलटफेर वाला हो सकता है, क्योंकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सीएम पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। राजधानी बेंगलुरु में मिलीजुली हलचल देखने को मिल रही है, जहाँ एक ओर सिद्धारमैया के समर्थक हैं तो दूसरी ओर डीके शिवकुमार के समर्थक उनकी संभावित ताजपोशी की तैयारियों में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया दोपहर करीब 3 बजे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, हालांकि सुबह 11 बजे इस्तीफा देने की चर्चा थी, लेकिन बाद में पता चला कि राज्यपाल बेंगलुरु में मौजूद नहीं हैं, जिसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। इसी बीच, सिद्धारमैया ने अपने आवास पर कैबिनेट मंत्रियों की एक अहम ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई, जिसमें उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा की। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी बेंगलुरु पहुँच गए और मुख्यमंत्री आवास पर सिद्धारमैया से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर एकजुटता का संदेश दिया। भावुक माहौल के बीच डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, और बैठक के दौरान उनकी आँखें नम हो गईं। नाश्ते की इस बैठक में इडली, वड़ा और चौ-चौ बाथ परोसा गया, लेकिन राजनीतिक संदेश को ज्यादा अहम माना गया। उधर, डीके शिवकुमार के आवास के बाहर भी हलचल बढ़ गई है, जहाँ बैरिकेडिंग की जा रही है और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। इससे अटकलें तेज हो गई हैं कि कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंप सकता है। कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा चल रही थी, और माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान ने सत्ता संतुलन और संगठनात्मक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बदलाव का यह फैसला किया है। फिलहाल, कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है, और पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं, सभी को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अगले कदम का इंतजार है।
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    गुरुवार का दिन कर्नाटक की राजनीति में बड़े सियासी उलटफेर वाला हो सकता है, क्योंकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सीएम पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। राजधानी बेंगलुरु में मिलीजुली हलचल देखने को मिल रही है, जहाँ एक ओर सिद्धारमैया के समर्थक हैं तो दूसरी ओर डीके शिवकुमार के समर्थक उनकी संभावित ताजपोशी की तैयारियों में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया दोपहर करीब 3 बजे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, हालांकि सुबह 11 बजे इस्तीफा देने की चर्चा थी, लेकिन बाद में पता चला कि राज्यपाल बेंगलुरु में मौजूद नहीं हैं, जिसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।

इसी बीच, सिद्धारमैया ने अपने आवास पर कैबिनेट मंत्रियों की एक अहम ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई, जिसमें उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा की। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी बेंगलुरु पहुँच गए और मुख्यमंत्री आवास पर सिद्धारमैया से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर एकजुटता का संदेश दिया। भावुक माहौल के बीच डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, और बैठक के दौरान उनकी आँखें नम हो गईं। नाश्ते की इस बैठक में इडली, वड़ा और चौ-चौ बाथ परोसा गया, लेकिन राजनीतिक संदेश को ज्यादा अहम माना गया।

उधर, डीके शिवकुमार के आवास के बाहर भी हलचल बढ़ गई है, जहाँ बैरिकेडिंग की जा रही है और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। इससे अटकलें तेज हो गई हैं कि कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंप सकता है। कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा चल रही थी, और माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान ने सत्ता संतुलन और संगठनात्मक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बदलाव का यह फैसला किया है। फिलहाल, कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है, और पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं, सभी को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अगले कदम का इंतजार है।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    3 hrs ago
  • दिल्ली में स्थित एक सैलून अब जिहादियों का अड्डा बन गया है। इस सैलून में एक हिन्दू लड़की को बंद कर कुछ किया जा रहा था।
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    दिल्ली में स्थित एक सैलून अब जिहादियों का अड्डा बन गया है। इस सैलून में एक हिन्दू लड़की को बंद कर कुछ किया जा रहा था।
    user_Ravi Kashyap
    Ravi Kashyap
    Video Creator साकेत, दक्षिण दिल्ली, दिल्ली•
    4 hrs ago
  • दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में एक मुस्लिम परिवार द्वारा हिंदू परिवार के साथ किए गए किसी कृत्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह जानने की इच्छा व्यक्त की जा रही है कि मुस्लिम परिवार ने हिंदू परिवार के साथ ऐसा क्यों किया।
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    दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में एक मुस्लिम परिवार द्वारा हिंदू परिवार के साथ किए गए किसी कृत्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह जानने की इच्छा व्यक्त की जा रही है कि मुस्लिम परिवार ने हिंदू परिवार के साथ ऐसा क्यों किया।
    user_VS NEWS 48 Delhi
    VS NEWS 48 Delhi
    Journalist करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    5 hrs ago
  • आज देशभर में बकरा ईद का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े इंतजाम किए गए हैं।
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    आज देशभर में बकरा ईद का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े इंतजाम किए गए हैं।
    user_SURENDRA KUMAR
    SURENDRA KUMAR
    चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    7 hrs ago
  • पोस्ट में इस बात पर गहरा सवाल उठाया गया है कि यह कैसा इंसाफ है जब कोई सच्चाई दिखा रहा हो और उस पर पर्दा डाला जा रहा हो। सवाल यह भी उठाया गया है कि किसी एक की वीडियो बंद करवा देने से क्या होगा, क्योंकि क्या बाकी जनता अंधी या बहरी है, जो कुछ भी नहीं समझती? पोस्ट के अनुसार, यह सब देखकर ऐसा लगता है कि अब बस यही देखना बाकी रह गया था, जिसका सीधा मतलब यह है कि सही का साथ मत दो और झूठ पर ही ज़िंदा रहो।
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    पोस्ट में इस बात पर गहरा सवाल उठाया गया है कि यह कैसा इंसाफ है जब कोई सच्चाई दिखा रहा हो और उस पर पर्दा डाला जा रहा हो। सवाल यह भी उठाया गया है कि किसी एक की वीडियो बंद करवा देने से क्या होगा, क्योंकि क्या बाकी जनता अंधी या बहरी है, जो कुछ भी नहीं समझती? पोस्ट के अनुसार, यह सब देखकर ऐसा लगता है कि अब बस यही देखना बाकी रह गया था, जिसका सीधा मतलब यह है कि सही का साथ मत दो और झूठ पर ही ज़िंदा रहो।
    user_Pooja mahwer
    Pooja mahwer
    Video Creator Delhi Cantonment, New Delhi•
    1 hr ago
  • अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के बंदर अब्बास शहर पर हमला किया है। बुधवार रात अमेरिकी सेना ने ईरान की तरफ से लॉन्च किए गए चार ड्रोन मार गिराए और बंदर अब्बास में एक ड्रोन कंट्रोल सेंटर को नष्ट कर दिया। यह इस महीने ईरान के अंदर अमेरिका का तीसरा हमला है। ईरानी मीडिया के अनुसार, शहर के पूर्वी हिस्से में तीन जोरदार धमाके सुने गए और कुछ देर के लिए एयर डिफेंस भी सक्रिय था। अमेरिका ने इस हमले को पूरी तरह से रक्षात्मक बताया है, जबकि ईरान इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार दे रहा है। बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ठीक पास स्थित है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है और ईरान यहीं से होर्मुज को नियंत्रित करता है। यहीं ईरानी नौसेना (IRGC नेवी) का मुख्य अड्डा भी है, जहाँ से ईरान एंटी-शिप मिसाइलें, ड्रोन, माइन्स और स्पीड बोट्स को आसानी से ऑपरेट कर सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, पांचवां ड्रोन लॉन्च होने ही वाला था जिसे रोकने के लिए कंट्रोल सेंटर पर हमला किया गया, जिसे अमेरिका "नपी-तुली रक्षात्मक कार्रवाई" बता रहा है जिसका मकसद युद्धविराम बनाए रखना है। इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया और एक F-35 फाइटर जेट को पीछे हटने पर मजबूर किया है, हालांकि अमेरिकी सेना ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। ईरानी मीडिया ने भी अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। मई महीने में अमेरिका ने ईरान पर तीन बड़े हमले किए हैं, जिनमें 7 मई को होर्मुज प्रांत में ठिकानों और खाड़ी में दो जहाजों पर हमला, तथा 25 मई को बंदर अब्बास में IRGC की माइन बिछाने वाली नावों और SAM साइट पर हमला शामिल है। अमेरिका के बार-बार बंदर अब्बास पर हमले करने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखना प्रमुख है ताकि ईरान इसे ब्लैकमेलिंग के हथियार के रूप में इस्तेमाल न कर सके और वैश्विक तेल व्यापार बाधित न हो। अमेरिका बंदर अब्बास से अमेरिकी जहाजों, बेस और सहयोगी देशों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों के खतरे को भी कम करना चाहता है, साथ ही IRGC की गतिविधियों पर लगाम कसना चाहता है जिसे वह एक आतंकवादी संगठन मानता है। इन हमलों को अमेरिका युद्धविराम को मजबूत करने की एक रक्षात्मक कार्रवाई भी बता रहा है। बंदर अब्बास सिर्फ एक सैन्य ठिकाना ही नहीं, बल्कि ईरान का प्रमुख वाणिज्यिक बंदरगाह और तेल निर्यात केंद्र भी है, जिससे अमेरिका इन हमलों के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता दोनों पर दबाव बना रहा है। वर्तमान में युद्धविराम लागू है, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। दोनों देश पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन छोटे टकराव जारी रह सकते हैं और अगर ईरान ने जवाबी हमले तेज किए तो पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग भड़क सकती है। अमेरिका का मुख्य ध्यान होर्मुज को खुला रखने पर है, जिसे ईरान अपनी संप्रभुता का मुद्दा मानता है।
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    अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के बंदर अब्बास शहर पर हमला किया है। बुधवार रात अमेरिकी सेना ने ईरान की तरफ से लॉन्च किए गए चार ड्रोन मार गिराए और बंदर अब्बास में एक ड्रोन कंट्रोल सेंटर को नष्ट कर दिया। यह इस महीने ईरान के अंदर अमेरिका का तीसरा हमला है। ईरानी मीडिया के अनुसार, शहर के पूर्वी हिस्से में तीन जोरदार धमाके सुने गए और कुछ देर के लिए एयर डिफेंस भी सक्रिय था। अमेरिका ने इस हमले को पूरी तरह से रक्षात्मक बताया है, जबकि ईरान इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार दे रहा है।

बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ठीक पास स्थित है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है और ईरान यहीं से होर्मुज को नियंत्रित करता है। यहीं ईरानी नौसेना (IRGC नेवी) का मुख्य अड्डा भी है, जहाँ से ईरान एंटी-शिप मिसाइलें, ड्रोन, माइन्स और स्पीड बोट्स को आसानी से ऑपरेट कर सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, पांचवां ड्रोन लॉन्च होने ही वाला था जिसे रोकने के लिए कंट्रोल सेंटर पर हमला किया गया, जिसे अमेरिका "नपी-तुली रक्षात्मक कार्रवाई" बता रहा है जिसका मकसद युद्धविराम बनाए रखना है।

इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया और एक F-35 फाइटर जेट को पीछे हटने पर मजबूर किया है, हालांकि अमेरिकी सेना ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। ईरानी मीडिया ने भी अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। मई महीने में अमेरिका ने ईरान पर तीन बड़े हमले किए हैं, जिनमें 7 मई को होर्मुज प्रांत में ठिकानों और खाड़ी में दो जहाजों पर हमला, तथा 25 मई को बंदर अब्बास में IRGC की माइन बिछाने वाली नावों और SAM साइट पर हमला शामिल है।

अमेरिका के बार-बार बंदर अब्बास पर हमले करने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखना प्रमुख है ताकि ईरान इसे ब्लैकमेलिंग के हथियार के रूप में इस्तेमाल न कर सके और वैश्विक तेल व्यापार बाधित न हो। अमेरिका बंदर अब्बास से अमेरिकी जहाजों, बेस और सहयोगी देशों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों के खतरे को भी कम करना चाहता है, साथ ही IRGC की गतिविधियों पर लगाम कसना चाहता है जिसे वह एक आतंकवादी संगठन मानता है। इन हमलों को अमेरिका युद्धविराम को मजबूत करने की एक रक्षात्मक कार्रवाई भी बता रहा है। बंदर अब्बास सिर्फ एक सैन्य ठिकाना ही नहीं, बल्कि ईरान का प्रमुख वाणिज्यिक बंदरगाह और तेल निर्यात केंद्र भी है, जिससे अमेरिका इन हमलों के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता दोनों पर दबाव बना रहा है। वर्तमान में युद्धविराम लागू है, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। दोनों देश पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन छोटे टकराव जारी रह सकते हैं और अगर ईरान ने जवाबी हमले तेज किए तो पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग भड़क सकती है। अमेरिका का मुख्य ध्यान होर्मुज को खुला रखने पर है, जिसे ईरान अपनी संप्रभुता का मुद्दा मानता है।
    user_Vipin Singh
    Vipin Singh
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    4 hrs ago
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