अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के बंदर अब्बास शहर पर हमला किया है। बुधवार रात अमेरिकी सेना ने ईरान की तरफ से लॉन्च किए गए चार ड्रोन मार गिराए और बंदर अब्बास में एक ड्रोन कंट्रोल सेंटर को नष्ट कर दिया। यह इस महीने ईरान के अंदर अमेरिका का तीसरा हमला है। ईरानी मीडिया के अनुसार, शहर के पूर्वी हिस्से में तीन जोरदार धमाके सुने गए और कुछ देर के लिए एयर डिफेंस भी सक्रिय था। अमेरिका ने इस हमले को पूरी तरह से रक्षात्मक बताया है, जबकि ईरान इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार दे रहा है। बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ठीक पास स्थित है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है और ईरान यहीं से होर्मुज को नियंत्रित करता है। यहीं ईरानी नौसेना (IRGC नेवी) का मुख्य अड्डा भी है, जहाँ से ईरान एंटी-शिप मिसाइलें, ड्रोन, माइन्स और स्पीड बोट्स को आसानी से ऑपरेट कर सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, पांचवां ड्रोन लॉन्च होने ही वाला था जिसे रोकने के लिए कंट्रोल सेंटर पर हमला किया गया, जिसे अमेरिका "नपी-तुली रक्षात्मक कार्रवाई" बता रहा है जिसका मकसद युद्धविराम बनाए रखना है। इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया और एक F-35 फाइटर जेट को पीछे हटने पर मजबूर किया है, हालांकि अमेरिकी सेना ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। ईरानी मीडिया ने भी अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। मई महीने में अमेरिका ने ईरान पर तीन बड़े हमले किए हैं, जिनमें 7 मई को होर्मुज प्रांत में ठिकानों और खाड़ी में दो जहाजों पर हमला, तथा 25 मई को बंदर अब्बास में IRGC की माइन बिछाने वाली नावों और SAM साइट पर हमला शामिल है। अमेरिका के बार-बार बंदर अब्बास पर हमले करने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखना प्रमुख है ताकि ईरान इसे ब्लैकमेलिंग के हथियार के रूप में इस्तेमाल न कर सके और वैश्विक तेल व्यापार बाधित न हो। अमेरिका बंदर अब्बास से अमेरिकी जहाजों, बेस और सहयोगी देशों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों के खतरे को भी कम करना चाहता है, साथ ही IRGC की गतिविधियों पर लगाम कसना चाहता है जिसे वह एक आतंकवादी संगठन मानता है। इन हमलों को अमेरिका युद्धविराम को मजबूत करने की एक रक्षात्मक कार्रवाई भी बता रहा है। बंदर अब्बास सिर्फ एक सैन्य ठिकाना ही नहीं, बल्कि ईरान का प्रमुख वाणिज्यिक बंदरगाह और तेल निर्यात केंद्र भी है, जिससे अमेरिका इन हमलों के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता दोनों पर दबाव बना रहा है। वर्तमान में युद्धविराम लागू है, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। दोनों देश पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन छोटे टकराव जारी रह सकते हैं और अगर ईरान ने जवाबी हमले तेज किए तो पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग भड़क सकती है। अमेरिका का मुख्य ध्यान होर्मुज को खुला रखने पर है, जिसे ईरान अपनी संप्रभुता का मुद्दा मानता है।
अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के बंदर अब्बास शहर पर हमला किया है। बुधवार रात अमेरिकी सेना ने ईरान की तरफ से लॉन्च किए गए चार ड्रोन मार गिराए और बंदर अब्बास में एक ड्रोन कंट्रोल सेंटर को नष्ट कर दिया। यह इस महीने ईरान के अंदर अमेरिका का तीसरा हमला है। ईरानी मीडिया के अनुसार, शहर के पूर्वी हिस्से में तीन जोरदार धमाके सुने गए और कुछ देर के लिए एयर डिफेंस भी सक्रिय था। अमेरिका ने इस हमले को पूरी तरह से रक्षात्मक बताया है, जबकि ईरान इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार दे रहा है। बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ठीक पास स्थित है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है और ईरान यहीं से होर्मुज को नियंत्रित करता है। यहीं ईरानी नौसेना (IRGC नेवी) का मुख्य अड्डा भी है, जहाँ से ईरान एंटी-शिप मिसाइलें, ड्रोन, माइन्स और स्पीड बोट्स को आसानी से ऑपरेट कर सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, पांचवां ड्रोन लॉन्च होने ही वाला था जिसे रोकने के लिए कंट्रोल सेंटर पर हमला किया गया, जिसे अमेरिका "नपी-तुली रक्षात्मक कार्रवाई" बता रहा है जिसका मकसद युद्धविराम बनाए रखना है। इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया और एक F-35 फाइटर जेट को पीछे हटने पर मजबूर किया है, हालांकि अमेरिकी सेना ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। ईरानी मीडिया ने भी अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। मई महीने में अमेरिका ने ईरान पर तीन बड़े हमले किए हैं, जिनमें 7 मई को होर्मुज प्रांत में ठिकानों और खाड़ी में दो जहाजों पर हमला, तथा 25 मई को बंदर अब्बास में IRGC की माइन बिछाने वाली नावों और SAM साइट पर हमला शामिल है। अमेरिका के बार-बार बंदर अब्बास पर हमले करने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखना प्रमुख है ताकि ईरान इसे ब्लैकमेलिंग के हथियार के रूप में इस्तेमाल न कर सके और वैश्विक तेल व्यापार बाधित न हो। अमेरिका बंदर अब्बास से अमेरिकी जहाजों, बेस और सहयोगी देशों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों के खतरे को भी कम करना चाहता है, साथ ही IRGC की गतिविधियों पर लगाम कसना चाहता है जिसे वह एक आतंकवादी संगठन मानता है। इन हमलों को अमेरिका युद्धविराम को मजबूत करने की एक रक्षात्मक कार्रवाई भी बता रहा है। बंदर अब्बास सिर्फ एक सैन्य ठिकाना ही नहीं, बल्कि ईरान का प्रमुख वाणिज्यिक बंदरगाह और तेल निर्यात केंद्र भी है, जिससे अमेरिका इन हमलों के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता दोनों पर दबाव बना रहा है। वर्तमान में युद्धविराम लागू है, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। दोनों देश पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन छोटे टकराव जारी रह सकते हैं और अगर ईरान ने जवाबी हमले तेज किए तो पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग भड़क सकती है। अमेरिका का मुख्य ध्यान होर्मुज को खुला रखने पर है, जिसे ईरान अपनी संप्रभुता का मुद्दा मानता है।
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है, जिसके चलते बोर्ड बुरी तरह मुश्किल में फंस गया है। बोर्ड को इन गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।1
- Meta ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसके तहत उसके सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के लिए नए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान पेश किए गए हैं। इस ऐलान का सीधा असर दुनिया भर के यूजर्स पर पड़ेगा, जिसमें भारत भी शामिल है। कंपनी अब अपने ऐप्स के लिए 'प्लस वर्जन' लॉन्च कर रही है, जिसके ज़रिए पैसे देने वाले यूजर्स को विशेष टूल्स और कस्टमाइजेशन फीचर्स मिलेंगे, जो मुफ्त वर्जन में उपलब्ध नहीं होंगे। Meta के इस कदम का मुख्य उद्देश्य अपनी कमाई बढ़ाना है और कंपनी अब सिर्फ विज्ञापन से मिलने वाले रेवेन्यू पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी का लक्ष्य है कि यूजर्स प्रीमियम फीचर्स, बेहतर अनुभव और अधिक ऑडियंस तक पहुँचने के लिए हर महीने भुगतान करें, जिससे रेवेन्यू जनरेट करने का एक नया तरीका मिल सके। इन नए प्लान्स के तहत, इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस की मासिक कीमत 3.99 डॉलर (लगभग 387 रुपये) तय की गई है, जबकि वॉट्सऐप प्लस की मासिक कीमत 2.99 डॉलर (लगभग 290 रुपये) होगी। हालांकि, Meta ने अभी भारत के लिए इन प्लान्स की कीमतों का ऐलान नहीं किया है। टेकक्रंच की रिपोर्ट के अनुसार, वॉट्सऐप प्लस सब्सक्राइबर्स को कई दमदार फीचर्स मिलेंगे, जिनमें मैसेजिंग के बेहतर पर्सनलाइजेशन पर खास ज़ोर रहेगा। इसमें कस्टम थीम, अनोखी रिंगटोन, प्रीमियम स्टिकर्स और अधिक चैट्स को पिन करने की सुविधा शामिल है। वहीं, इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस सब्सक्राइबर्स को भी कई उन्नत फीचर्स मिलेंगे। इंस्टाग्राम प्लस यूजर्स आसानी से देख पाएंगे कि उनकी स्टोरी कितनी बार दोबारा देखी गई है, साथ ही वे 'क्लोज फ्रेंड्स' फीचर से आगे बढ़कर असीमित स्टोरी ऑडियंस लिस्ट बना सकेंगे। उन्हें व्यूअर्स लिस्ट में दिखे बिना स्टोरी का प्रीव्यू देखने, स्टोरी को 24 घंटे से अधिक समय तक दिखाने और हर हफ़्ते एक स्टोरी को स्पॉटलाइट करने का विकल्प भी मिलेगा ताकि उसे ज़्यादा विजिबिलिटी मिल सके। एक और खास फीचर यह है कि यूजर्स अपनी स्टोरी की व्यूअर्स लिस्ट में यह सर्च कर सकेंगे कि कौन उनकी स्टोरी देख रहा है।1
- दिल्ली में एक स्कूल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वह आतंकवादियों का अड्डा बन गया है। दावा किया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों को बचपन से ही आतंकवादी शिक्षा दे रहा है। इसके साथ ही, आरोप है कि अब दिल्ली के इस स्कूल में आतंकवादी जिहादी महिला शिक्षकों की भर्ती की जा रही है।1
- दिल्ली के रोहिणी इलाके में हिंदू परिवारों के शोषण का मामला सामने आया है। बताया गया है कि इस क्षेत्र में हिंदू परिवारों का उत्पीड़न हो रहा है।1
- कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में 26 और 27 मई को दो दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भाजपा महिला नेता गुंजन गुप्ता और आचार्य शिवम विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहे।1
- Post by BCHANDEL1
- एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि जिहादी गाय और भैंस की हड्डियों का इस्तेमाल करके मोती की मालाएँ बना रहे हैं, जिन्हें वे खुलेआम बाज़ारों में बेच रहे हैं। पोस्ट में हिन्दुओं को इस कथित 'हड्डी जिहाद' से सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है, इसे हिन्दुओं की आस्था पर सीधा हमला बताया गया है। चेतावनी में यह भी कहा गया है कि यदि हिन्दू समाज ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो उनका धर्म खतरे में पड़ जाएगा।1
- दिल्ली के बुद्ध विहार इलाके में दो परिवारों के बीच हुए विवाद ने एक गंभीर तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले एक हिंदू परिवार ने मुस्लिम परिवार पर धमकी देने, दबाव बनाने और मारपीट करने जैसे गंभीर इल्जाम लगाए हैं। पीड़ित परिवार का दावा है कि लगातार विवाद और डर के माहौल के कारण उनका इलाके में रहना बेहद मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस विवाद के बाद इलाके में भारी हंगामा हुआ, जिसके चलते पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालना पड़ा। पीड़ित परिवार यह भी आरोप लगा रहा है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे उनमें डर और नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। घटना के बाद, इलाके में बने तनावपूर्ण हालात को देखते हुए पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। वहीं, प्रशासन ने बताया है कि मामले की जांच चल रही है और दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर बहस तेज हो गई है, हालांकि पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में इससे पहले भी सांप्रदायिक तनाव से जुड़े मामलों में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठते रहे हैं।1
- एक संदेश में लोगों से अपील की गई है कि यदि सरकारी स्कूलों में छात्रों को दूध नहीं मिल रहा है, तो इसकी जानकारी दी जाए। संदेश में कहा गया है कि सूचना मिलने पर वे स्वयं वीडियो बनाकर इसे पोस्ट करेंगे और इस मुद्दे पर समर्थन करेंगे। इसके साथ ही, उन सभी लोगों से पूछा गया है जो उनकी पोस्ट और वीडियो देखते हैं, कि क्या उनके बच्चों को भी स्कूलों में दूध दिया जा रहा है या नहीं।1