Shuru
Apke Nagar Ki App…
दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में एक मुस्लिम परिवार द्वारा हिंदू परिवार के साथ किए गए किसी कृत्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह जानने की इच्छा व्यक्त की जा रही है कि मुस्लिम परिवार ने हिंदू परिवार के साथ ऐसा क्यों किया।
VS NEWS 48 Delhi
दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में एक मुस्लिम परिवार द्वारा हिंदू परिवार के साथ किए गए किसी कृत्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह जानने की इच्छा व्यक्त की जा रही है कि मुस्लिम परिवार ने हिंदू परिवार के साथ ऐसा क्यों किया।
More news from दिल्ली and nearby areas
- बकरा ईद के त्योहार के मद्देनज़र उत्तर-पूर्वी दिल्ली पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है, जिसके चलते इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। पुलिस कर्मी लगातार पैदल गश्त कर रहे हैं और पूरे इलाके की निगरानी कर रहे हैं।1
- बकरा ईद के अवसर पर उत्तरी पूर्वी दिल्ली जिले के डीसीपी राहुल अलवाल ने देर रात क्षेत्र में फ्लैग मार्च किया। इस दौरान उनके साथ सीलमपुर थाने की टीम और अन्य पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे। डीसीपी अलवाल ने यह फ्लैग मार्च सीलमपुर थाने के क्षेत्र और उत्तरी पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद इलाके में किया। फ्लैग मार्च के दौरान डीसीपी ने जनता से अपील की कि यदि उन्हें कुछ भी संदिग्ध नज़र आता है, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें। इसके अतिरिक्त, उन्होंने क्षेत्र की जनता को बकरा ईद की मुबारकबाद भी दी।1
- Available for Sale - Smartphone Brand : 1 Model : 1 Asking Price (₹) : 10000 City / Locality : 1 Device Category : Smartphone Variant (RAM / Storage) : 3GB / 64GB Body Condition : Like new Device Age : Less than 1 year Network Connectivity : 5G 11
- गुरुवार का दिन कर्नाटक की राजनीति में बड़े सियासी उलटफेर वाला हो सकता है, क्योंकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सीएम पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। राजधानी बेंगलुरु में मिलीजुली हलचल देखने को मिल रही है, जहाँ एक ओर सिद्धारमैया के समर्थक हैं तो दूसरी ओर डीके शिवकुमार के समर्थक उनकी संभावित ताजपोशी की तैयारियों में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया दोपहर करीब 3 बजे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, हालांकि सुबह 11 बजे इस्तीफा देने की चर्चा थी, लेकिन बाद में पता चला कि राज्यपाल बेंगलुरु में मौजूद नहीं हैं, जिसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। इसी बीच, सिद्धारमैया ने अपने आवास पर कैबिनेट मंत्रियों की एक अहम ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई, जिसमें उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा की। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी बेंगलुरु पहुँच गए और मुख्यमंत्री आवास पर सिद्धारमैया से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर एकजुटता का संदेश दिया। भावुक माहौल के बीच डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, और बैठक के दौरान उनकी आँखें नम हो गईं। नाश्ते की इस बैठक में इडली, वड़ा और चौ-चौ बाथ परोसा गया, लेकिन राजनीतिक संदेश को ज्यादा अहम माना गया। उधर, डीके शिवकुमार के आवास के बाहर भी हलचल बढ़ गई है, जहाँ बैरिकेडिंग की जा रही है और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। इससे अटकलें तेज हो गई हैं कि कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंप सकता है। कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा चल रही थी, और माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान ने सत्ता संतुलन और संगठनात्मक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बदलाव का यह फैसला किया है। फिलहाल, कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है, और पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं, सभी को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अगले कदम का इंतजार है।4
- दिल्ली की जामा मस्जिद पर आज बकरा ईद की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर मुबारकबाद दी। इसके साथ ही, भारतवर्ष के हर इलाके में ईद की रौनक देखने को मिल रही है। सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो दिल्ली के हर कोने में दिल्ली पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा देखी जा रही है।1
- दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में एक मुस्लिम परिवार द्वारा हिंदू परिवार के साथ किए गए किसी कृत्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह जानने की इच्छा व्यक्त की जा रही है कि मुस्लिम परिवार ने हिंदू परिवार के साथ ऐसा क्यों किया।1
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है, जिसके चलते बोर्ड बुरी तरह मुश्किल में फंस गया है। बोर्ड को इन गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।1
- अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के बंदर अब्बास शहर पर हमला किया है। बुधवार रात अमेरिकी सेना ने ईरान की तरफ से लॉन्च किए गए चार ड्रोन मार गिराए और बंदर अब्बास में एक ड्रोन कंट्रोल सेंटर को नष्ट कर दिया। यह इस महीने ईरान के अंदर अमेरिका का तीसरा हमला है। ईरानी मीडिया के अनुसार, शहर के पूर्वी हिस्से में तीन जोरदार धमाके सुने गए और कुछ देर के लिए एयर डिफेंस भी सक्रिय था। अमेरिका ने इस हमले को पूरी तरह से रक्षात्मक बताया है, जबकि ईरान इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार दे रहा है। बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ठीक पास स्थित है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है और ईरान यहीं से होर्मुज को नियंत्रित करता है। यहीं ईरानी नौसेना (IRGC नेवी) का मुख्य अड्डा भी है, जहाँ से ईरान एंटी-शिप मिसाइलें, ड्रोन, माइन्स और स्पीड बोट्स को आसानी से ऑपरेट कर सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, पांचवां ड्रोन लॉन्च होने ही वाला था जिसे रोकने के लिए कंट्रोल सेंटर पर हमला किया गया, जिसे अमेरिका "नपी-तुली रक्षात्मक कार्रवाई" बता रहा है जिसका मकसद युद्धविराम बनाए रखना है। इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया और एक F-35 फाइटर जेट को पीछे हटने पर मजबूर किया है, हालांकि अमेरिकी सेना ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। ईरानी मीडिया ने भी अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। मई महीने में अमेरिका ने ईरान पर तीन बड़े हमले किए हैं, जिनमें 7 मई को होर्मुज प्रांत में ठिकानों और खाड़ी में दो जहाजों पर हमला, तथा 25 मई को बंदर अब्बास में IRGC की माइन बिछाने वाली नावों और SAM साइट पर हमला शामिल है। अमेरिका के बार-बार बंदर अब्बास पर हमले करने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखना प्रमुख है ताकि ईरान इसे ब्लैकमेलिंग के हथियार के रूप में इस्तेमाल न कर सके और वैश्विक तेल व्यापार बाधित न हो। अमेरिका बंदर अब्बास से अमेरिकी जहाजों, बेस और सहयोगी देशों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों के खतरे को भी कम करना चाहता है, साथ ही IRGC की गतिविधियों पर लगाम कसना चाहता है जिसे वह एक आतंकवादी संगठन मानता है। इन हमलों को अमेरिका युद्धविराम को मजबूत करने की एक रक्षात्मक कार्रवाई भी बता रहा है। बंदर अब्बास सिर्फ एक सैन्य ठिकाना ही नहीं, बल्कि ईरान का प्रमुख वाणिज्यिक बंदरगाह और तेल निर्यात केंद्र भी है, जिससे अमेरिका इन हमलों के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता दोनों पर दबाव बना रहा है। वर्तमान में युद्धविराम लागू है, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। दोनों देश पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन छोटे टकराव जारी रह सकते हैं और अगर ईरान ने जवाबी हमले तेज किए तो पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग भड़क सकती है। अमेरिका का मुख्य ध्यान होर्मुज को खुला रखने पर है, जिसे ईरान अपनी संप्रभुता का मुद्दा मानता है।1