अध्यापक संयुक्त मोर्चा ने टेट के खिलाफ खोला मोर्चा, चरणबद्ध दे रहे ज्ञापन शाजापुर - अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश ने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट का विरोध करने के लिए ब्लॉक स्तर से लेकर जिला एवं राज्य स्तर तक चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई गई है। इसी के तहत शाजापुर जिले में भी 8 अप्रैल 2026 को सैकड़ो की संख्या में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले जिले के अध्यापक शिक्षक कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर शाजापुर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि शासन शीघ्र ही रिव्यू पिटीशन दायर करके शिक्षकों को टेट के तनाव से मुक्त करवाएं। विदित हो कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का हवाला देते हुए 1 सितंबर 2025 को सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि जिन शिक्षकों ने टेट, टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट उत्तीर्ण नहीं की है उन सभी की टेट परीक्षा ली जावे। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल मध्यप्रदेश द्वारा 2 मार्च 2026 को एक आदेश जारी करके सूचना निकाल दी गई है कि 2 वर्ष की समय सीमा में सभी शिक्षकों को टेट परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। जो परीक्षा में शामिल नहीं होंगे या अनुत्तीर्ण हो जाएंगे उन्हें शासन अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर पद से हटाने का काम करेगा। प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों के संयुक्त मोर्चे का तर्क है कि जो शिक्षक 2009 के पूर्व भर्ती हुए थे वे सभी शासन के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार समस्त शर्तों एवं अहर्ताओं को पूर्ण करके सेवा में आए थे। जिनको शासकीय विद्यालयों में सफलतम सेवा देते हुए 20 से 30 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और अब उन्हें इतनी लंबी अवधि की सेवा के बाद 2009 में बने शिक्षा के अधिकार अधिनियम को लागू करना पूर्णतः असंवैधानिक एवं मानसिक ठेस पहुंचाने वाला लग रहा है। इसी कारण पूरे मध्यप्रदेश में 8 अप्रैल 2026 को जिला मुख्यालय पर ज्ञापन सौंपे गए हैं। 8 अप्रैल को शाजापुर में ज्ञापन सौंपने के बाद अब अगले चरण में 11 अप्रैल को शाजापुर जिले के चारों ब्लॉकों शाजापुर, कालापीपल, शुजालपुर तथा मोहन बड़ोदिया में ज्ञापन सौपने की तैयारी सभी अध्यापक एवं उनके संगठन करने में लगे हुए हैं। 8 अप्रैल 2026 के ज्ञापन में आत्माराम गुर्जर, आनंद नागर, दिनेश कुमार मंडलोई, नरेंद्रसिंह राजपूत, उदय सिंह मालवीय, गोरेलाल सूर्यवंशी, मनोहर सिंह यादव,जाय शर्मा,गौरव सक्सेना, सुनीता भिलाला, सरिता तिवारी,शिवम नेमा, राजेंद्र चौधरी, तूफान सिंह, राजाराम कराडा़,खुमान सिंह मेवाडा, ललित तिवारी,उषा मालवीय, जय सोनी, चंद्रकला राठौर, , प्रतिभा शुक्ला,प्रीति, प्रेमलता कटारिया, मुरारीलाल सोनानिया, सुरेंद्र चावड़ा, त्रिभुवन सिंह राठौर, महेंद्र सिंह सोनानिया, चंदर सिंह वर्मा, अरविंद सिंह सोनानिया, मुकेश बरसैय्या, बृज लता वर्मा, विद्या सोनानिया, कल्पना देशपांडे, मीना चाहर, सीमा गौतम,प्रीति उपाध्याय, ओम प्रकाश मेवाड़ा, एजाज मोहम्मद, भारती जोशी, ममता वर्मा, जसवंत सिंह बेस, नीतू सक्सेना, ताहिरा बानो आदि उपस्थित थे।
अध्यापक संयुक्त मोर्चा ने टेट के खिलाफ खोला मोर्चा, चरणबद्ध दे रहे ज्ञापन शाजापुर - अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश ने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट का विरोध करने के लिए ब्लॉक स्तर से लेकर जिला एवं राज्य स्तर तक चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई गई है। इसी के तहत शाजापुर जिले में भी 8 अप्रैल 2026 को सैकड़ो की संख्या में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले जिले के अध्यापक शिक्षक कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर शाजापुर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि शासन शीघ्र ही रिव्यू पिटीशन दायर करके शिक्षकों को टेट के तनाव से मुक्त करवाएं। विदित हो कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का हवाला देते हुए 1 सितंबर 2025 को सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि जिन शिक्षकों ने टेट, टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट उत्तीर्ण नहीं की है उन सभी की टेट परीक्षा ली जावे। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल मध्यप्रदेश द्वारा 2 मार्च 2026 को एक आदेश जारी करके सूचना निकाल दी गई है कि 2 वर्ष की समय सीमा में सभी शिक्षकों को टेट परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। जो परीक्षा में शामिल नहीं होंगे या अनुत्तीर्ण हो जाएंगे उन्हें शासन अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर पद से हटाने का काम करेगा। प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों के संयुक्त मोर्चे का तर्क है कि जो शिक्षक 2009 के पूर्व भर्ती हुए थे वे सभी शासन के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार समस्त शर्तों एवं अहर्ताओं को पूर्ण करके सेवा में आए थे। जिनको शासकीय विद्यालयों में सफलतम सेवा देते हुए 20 से 30 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और अब उन्हें इतनी लंबी अवधि की सेवा के बाद 2009 में बने शिक्षा के अधिकार अधिनियम को लागू करना पूर्णतः असंवैधानिक एवं मानसिक ठेस पहुंचाने वाला लग रहा है। इसी कारण पूरे मध्यप्रदेश में 8 अप्रैल 2026 को जिला मुख्यालय पर ज्ञापन सौंपे गए हैं। 8 अप्रैल को शाजापुर में ज्ञापन सौंपने के बाद अब अगले चरण में 11 अप्रैल को शाजापुर जिले के चारों ब्लॉकों शाजापुर, कालापीपल, शुजालपुर तथा मोहन बड़ोदिया में ज्ञापन सौपने की तैयारी सभी अध्यापक एवं उनके संगठन करने में लगे हुए हैं। 8 अप्रैल 2026 के ज्ञापन में आत्माराम गुर्जर, आनंद नागर, दिनेश कुमार मंडलोई, नरेंद्रसिंह राजपूत, उदय सिंह मालवीय, गोरेलाल सूर्यवंशी, मनोहर सिंह यादव,जाय शर्मा,गौरव सक्सेना, सुनीता भिलाला, सरिता तिवारी,शिवम नेमा, राजेंद्र चौधरी, तूफान सिंह, राजाराम कराडा़,खुमान सिंह मेवाडा, ललित तिवारी,उषा मालवीय, जय सोनी, चंद्रकला राठौर, , प्रतिभा शुक्ला,प्रीति, प्रेमलता कटारिया, मुरारीलाल सोनानिया, सुरेंद्र चावड़ा, त्रिभुवन सिंह राठौर, महेंद्र सिंह सोनानिया, चंदर सिंह वर्मा, अरविंद सिंह सोनानिया, मुकेश बरसैय्या, बृज लता वर्मा, विद्या सोनानिया, कल्पना देशपांडे, मीना चाहर, सीमा गौतम,प्रीति उपाध्याय, ओम प्रकाश मेवाड़ा, एजाज मोहम्मद, भारती जोशी, ममता वर्मा, जसवंत सिंह बेस, नीतू सक्सेना, ताहिरा बानो आदि उपस्थित थे।
- शाजापुर - अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश ने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट का विरोध करने के लिए ब्लॉक स्तर से लेकर जिला एवं राज्य स्तर तक चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई गई है। इसी के तहत शाजापुर जिले में भी 8 अप्रैल 2026 को सैकड़ो की संख्या में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले जिले के अध्यापक शिक्षक कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर शाजापुर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि शासन शीघ्र ही रिव्यू पिटीशन दायर करके शिक्षकों को टेट के तनाव से मुक्त करवाएं। विदित हो कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का हवाला देते हुए 1 सितंबर 2025 को सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि जिन शिक्षकों ने टेट, टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट उत्तीर्ण नहीं की है उन सभी की टेट परीक्षा ली जावे। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल मध्यप्रदेश द्वारा 2 मार्च 2026 को एक आदेश जारी करके सूचना निकाल दी गई है कि 2 वर्ष की समय सीमा में सभी शिक्षकों को टेट परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। जो परीक्षा में शामिल नहीं होंगे या अनुत्तीर्ण हो जाएंगे उन्हें शासन अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर पद से हटाने का काम करेगा। प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों के संयुक्त मोर्चे का तर्क है कि जो शिक्षक 2009 के पूर्व भर्ती हुए थे वे सभी शासन के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार समस्त शर्तों एवं अहर्ताओं को पूर्ण करके सेवा में आए थे। जिनको शासकीय विद्यालयों में सफलतम सेवा देते हुए 20 से 30 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और अब उन्हें इतनी लंबी अवधि की सेवा के बाद 2009 में बने शिक्षा के अधिकार अधिनियम को लागू करना पूर्णतः असंवैधानिक एवं मानसिक ठेस पहुंचाने वाला लग रहा है। इसी कारण पूरे मध्यप्रदेश में 8 अप्रैल 2026 को जिला मुख्यालय पर ज्ञापन सौंपे गए हैं। 8 अप्रैल को शाजापुर में ज्ञापन सौंपने के बाद अब अगले चरण में 11 अप्रैल को शाजापुर जिले के चारों ब्लॉकों शाजापुर, कालापीपल, शुजालपुर तथा मोहन बड़ोदिया में ज्ञापन सौपने की तैयारी सभी अध्यापक एवं उनके संगठन करने में लगे हुए हैं। 8 अप्रैल 2026 के ज्ञापन में आत्माराम गुर्जर, आनंद नागर, दिनेश कुमार मंडलोई, नरेंद्रसिंह राजपूत, उदय सिंह मालवीय, गोरेलाल सूर्यवंशी, मनोहर सिंह यादव,जाय शर्मा,गौरव सक्सेना, सुनीता भिलाला, सरिता तिवारी,शिवम नेमा, राजेंद्र चौधरी, तूफान सिंह, राजाराम कराडा़,खुमान सिंह मेवाडा, ललित तिवारी,उषा मालवीय, जय सोनी, चंद्रकला राठौर, , प्रतिभा शुक्ला,प्रीति, प्रेमलता कटारिया, मुरारीलाल सोनानिया, सुरेंद्र चावड़ा, त्रिभुवन सिंह राठौर, महेंद्र सिंह सोनानिया, चंदर सिंह वर्मा, अरविंद सिंह सोनानिया, मुकेश बरसैय्या, बृज लता वर्मा, विद्या सोनानिया, कल्पना देशपांडे, मीना चाहर, सीमा गौतम,प्रीति उपाध्याय, ओम प्रकाश मेवाड़ा, एजाज मोहम्मद, भारती जोशी, ममता वर्मा, जसवंत सिंह बेस, नीतू सक्सेना, ताहिरा बानो आदि उपस्थित थे।1
- छत पर खेलते मासूम की दर्दनाक मौत, घर में मचा कोहराम खेल-खेल में हुई एक लापरवाही ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली। घर की छत पर खेलते वक्त बच्चे का अचानक संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर पड़ा। परिजन दौड़ते हुए उसे अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने बचाने की हर कोशिश के बाद भी उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। यह हादसा बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है—छत, बालकनी और ऊंचाई वाले स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है, इसकी एक और दर्दनाक याद दिला गया है।1
- दतिया:दतिया में कोतवाली थाना अंतर्गत स्थित पंडा की नारिया गोंडा मोहल्ला में फायरिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भाजपा नेता प्रतिपाल मांझी उर्फ छोटू खुलेआम फायरिंग करता नजर आया। वहीं उनका साथी बंटी खान नशे में धुत होकर गाली-गलौज और धमकियां देता सुनाई दिया। घटना का वीडियो भी चर्चा में है। हैरानी की बात यह है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने अभी तक मामला दर्ज नहीं किया। जिससे कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।1
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