पूर्वी चंपारण के सिरहा पंचायत में पंचायत सचिव अमित कुमार पर ग्राम सभा की सूचना जनता को न देने और सिर्फ कोरम पूरा करने का गंभीर मामला सामने आया है। बिहार सरकार के निर्देशानुसार, जिलाधिकारी पूर्वी चंपारण ने हर ग्राम पंचायत में सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच ग्राम सभा आयोजित करने का आदेश दिया था। इस संबंध में, पंचायत सचिव अमित कुमार ने दावा किया कि वे सुबह 10 बजे से ही पंचायत भवन में मौजूद थे और वार्ड सदस्यों की बैठक हुई थी। हालांकि, सुबह से ही पंचायत भवन में मौजूद ग्रामीण जैसे जय गोविंद प्रसाद कुशवाहा और जय लाल सहनी सहित अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें ग्राम सभा की कोई जानकारी नहीं दी गई और वहां कोई मौजूद नहीं था। दैनिक सिरहा टाइम्स के संपादक रवि कुमार भार्गव ने भी पुष्टि की कि समाचार संकलन के लिए उन्होंने तीन बार पंचायत भवन का दौरा किया – पहली बार कोई नहीं मिला, 12 बजे दोबारा जाने पर भी कोई नहीं दिखा, और 1:19 बजे पहुंचने पर पंचायत भवन में ताला लगा पाया। ग्रामीणों ने भी पुष्टि की कि पंचायत भवन में कोई नहीं आया था, जिससे पंचायत सचिव के दावे पर सवाल उठते हैं। जनता के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पंचायत सचिव अमित कुमार ने अपने कर्तव्य में लापरवाही बरती है और जनता को ग्राम सभा की सूचना नहीं दी गई। संपादक रवि कुमार भार्गव ने पंचायत सचिव से अनुरोध किया कि वे किसी राजनीतिक दबाव या लालच में न आकर जनता को सरकार की योजनाओं और ग्राम सभा की सूचना समय पर दें, क्योंकि सरकार उन्हें जनता की सेवा के लिए वेतन देती है। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत सरकार भवन में आरपीएस (राइट टू पब्लिक सर्विसेज) काउंटर खोला गया है ताकि लोगों को जाति, आवासीय और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज बनवाने के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, लेकिन यहां भी कोई कर्मी मौजूद नहीं रहता। पंचायत सचिव द्वारा बैठक की जो तस्वीरें उपलब्ध कराई गईं, उन सभी पर 11:46 बजे का समय दर्शाया गया था। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बाद में जो तस्वीरें भेजीं, उनमें 11:30 और 11:47 जैसे अलग-अलग समय दिखे, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। संपादक के अनुसार, बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को विफल करने में पंचायत स्तर के कर्मचारी, पंचायत सचिव और आरपीएस कर्मी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इन कर्मचारियों को केवल अपने वेतन से मतलब होता है और वे पंचायत के विकास कार्यों में कोई रुचि नहीं लेते। आरोप है कि ये कर्मचारी अपने दलाल पाल रखे हैं और केवल हाजिरी लगाने के लिए आते हैं, जिसके बाद वे वापस चले जाते हैं और पंचायत भवन की ओर उनका रुख नहीं होता। यह सभी गंभीर जांच का विषय है, जिस पर उच्च अधिकारियों का ध्यान केंद्रित होना आवश्यक है। ऐसा प्रतीत होता है कि सिरहा पंचायत के पंचायत सचिव अमित कुमार को अपनी कार्यशैली में परिवर्तन करने की आवश्यकता है।
पूर्वी चंपारण के सिरहा पंचायत में पंचायत सचिव अमित कुमार पर ग्राम सभा की सूचना जनता को न देने और सिर्फ कोरम पूरा करने का गंभीर मामला सामने आया है। बिहार सरकार के निर्देशानुसार, जिलाधिकारी पूर्वी चंपारण ने हर ग्राम पंचायत में सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच ग्राम सभा आयोजित करने का आदेश दिया था। इस संबंध में, पंचायत सचिव अमित कुमार ने दावा किया कि वे सुबह 10 बजे से ही पंचायत भवन में मौजूद थे और वार्ड सदस्यों की बैठक हुई थी। हालांकि, सुबह से ही पंचायत भवन में मौजूद ग्रामीण जैसे जय गोविंद प्रसाद कुशवाहा और जय लाल सहनी सहित अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें ग्राम सभा की कोई जानकारी नहीं दी गई और वहां कोई मौजूद नहीं था। दैनिक सिरहा टाइम्स के संपादक रवि कुमार भार्गव ने भी पुष्टि की कि समाचार संकलन के लिए उन्होंने तीन बार पंचायत भवन का दौरा किया – पहली बार कोई नहीं मिला, 12 बजे दोबारा जाने पर भी कोई नहीं दिखा, और 1:19 बजे पहुंचने पर पंचायत भवन में ताला लगा पाया। ग्रामीणों ने भी पुष्टि की कि पंचायत भवन में कोई नहीं आया था, जिससे पंचायत सचिव के दावे पर सवाल उठते हैं। जनता के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पंचायत सचिव अमित कुमार ने अपने कर्तव्य में लापरवाही बरती है और जनता को ग्राम सभा की सूचना नहीं दी गई। संपादक रवि कुमार भार्गव ने पंचायत सचिव से अनुरोध किया कि वे किसी राजनीतिक दबाव या लालच में न आकर जनता को सरकार की योजनाओं और ग्राम सभा की सूचना समय पर दें, क्योंकि सरकार उन्हें जनता की सेवा के लिए वेतन देती है। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत सरकार भवन में आरपीएस (राइट टू पब्लिक सर्विसेज) काउंटर खोला गया है ताकि लोगों को जाति, आवासीय और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज बनवाने के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, लेकिन यहां भी कोई कर्मी मौजूद नहीं रहता। पंचायत सचिव द्वारा बैठक की जो तस्वीरें उपलब्ध कराई गईं, उन सभी पर 11:46 बजे का समय दर्शाया गया था। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बाद में जो तस्वीरें भेजीं, उनमें 11:30 और 11:47 जैसे अलग-अलग समय दिखे, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। संपादक के अनुसार, बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को विफल करने में पंचायत स्तर के कर्मचारी, पंचायत सचिव और आरपीएस कर्मी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इन कर्मचारियों को केवल अपने वेतन से मतलब होता है और वे पंचायत के विकास कार्यों में कोई रुचि नहीं लेते। आरोप है कि ये कर्मचारी अपने दलाल पाल रखे हैं और केवल हाजिरी लगाने के लिए आते हैं, जिसके बाद वे वापस चले जाते हैं और पंचायत भवन की ओर उनका रुख नहीं होता। यह सभी गंभीर जांच का विषय है, जिस पर उच्च अधिकारियों का ध्यान केंद्रित होना आवश्यक है। ऐसा प्रतीत होता है कि सिरहा पंचायत के पंचायत सचिव अमित कुमार को अपनी कार्यशैली में परिवर्तन करने की आवश्यकता है।
- दैनिक सिंह टाइम्स ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसे वीडियो की पुष्टि नहीं करती है, लेकिन श्री सुशील कुमार ठाकुर द्वारा दर्शाई जा रही बातों पर गहन समीक्षा की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में, दैनिक सिरहा टाइम्स शाखा मुजफ्फरपुर, बिहार के राज्य को-ऑर्डिनेटर श्री सुशील कुमार ठाकुर 28 जून 2026 को मुजफ्फरपुर जिले के बोचहा के एतवारपुर होते हुए हुसैनपुर गांव पहुँचे। उन्होंने अपने तरीके से वहाँ के सभी कार्यक्रमों को कैमरे में कैद किया और कुछ लोगों से पूछताछ भी की। श्री सुशील कुमार ठाकुर ने बताया कि वे बबुआ भगत के यहां आने की योजना बहुत दिनों से बना रहे थे, और आज जैसे-तैसे वहाँ पहुँच गए। उन्होंने यह भी कहा कि बबुआ भगत के पास जो भी व्यक्ति बीमारी, भूत-प्रेत, निःसंतानता या अन्य प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त होकर आते हैं, वे अपनी समस्या से निजात पाकर, ठीक-ठाक होकर अपने घर वापस जाते हैं। बबुआ भगत का नाम पूरे मुजफ्फरपुर में प्रचलित है और वे मीडिया पर भी छाए हुए हैं, जिसके कारण उनके यहां समस्या लेकर आने वालों की हमेशा भीड़ लगी रहती है। मौके पर मौजूद रामकुमार नामक एक व्यक्ति ने बताया कि वह अपनी समस्या लेकर आया है और निजात पाकर ही जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बबुआ भगत के दरबार में जितने भी लोग आते हैं, सभी ठीक होकर जाते हैं। रामकुमार ने बताया कि बाबा जी अभी पूजा में बैठे हैं, इसलिए उनसे कोई संवाद नहीं हो पाएगा, लेकिन वह दूसरे दिन साक्षात्कार लेने के लिए समय निकालकर आएंगे। सुशील कुमार ठाकुर ने व्यक्तिगत रूप से बताया कि वे बाबा बबुआ भगत महाराज जी को लगातार अपने स्वप्न में देखते आ रहे थे और उनकी एक बार दर्शन करने की गहरी दिलचस्पी थी, जो आज पूरी हो गई। दैनिक सिंह टाइम्स के राज्य कोऑर्डिनेटर श्री सुशील कुमार ठाकुर बबुआ भगत के दरबार में पहुंचे, जहां आने वाला हर पीड़ित व्यक्ति ठीक होकर अपने घर वापस जाता है।1
- DIG-DM के साथ एक रिटायर्ड जज बिलौटी पहुँचे हैं। यह दौरा एक माँ द्वारा प्रशासन पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद हुआ है। माँ ने अपने बेटे की मौत को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद से उनकी तबीयत भी बिगड़ गई है।1
- मोतिहारी के पिपराकोठी थाना क्षेत्र के मथुरापुर मठगोपाल इलाके में शहाबुद्दीन नाम के व्यक्ति का शव संदिग्ध अवस्था में पाया गया है।1
- बिहार के काँटी के एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में एसआई को मुहर्रम के दौरान अपनी सरकारी वर्दी पहने हुए तलवार से करतब दिखाते हुए स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।1
- मिली जानकारी के अनुसार, गांव में एक आर्केस्ट्रा आने वाला है। यह खबर एक स्थानीय रिपोर्टिंग के माध्यम से सामने आई है।1
- Post by Vinod Singh Rajput, shivhar News1
- बिहार के सिरहा पंचायत भवन परिसर में आयोजित जीविका दीदीयों की बैठक में अनुशासनहीनता का गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ जीविका के अधिकारी और कर्मचारियों पर दीदियों को अनुशासन का ज्ञान न सिखाने का आरोप लगा है। 'दैनिक सिरहा टाइम्स' के संपादक रवि कुमार भार्गव की रिपोर्ट के अनुसार, बुककीपर से लेकर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी संविदाकर्मी तक, सभी सरकार की महत्वाकांक्षी जीविका योजनाओं से 'खिलवाड़' कर रहे हैं। सिरहा पंचायत में जीविका भवन परिसर के पीपल के पेड़ के नीचे आयोजित मासिक बैठक में जीविका कर्मी बली नारायण साह संबंधित कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान, जब संपादक रवि कुमार भार्गव उनसे बातचीत करने पहुँचे, तो जीविका दीदियाँ बैठक से उठकर चली गईं। बली नारायण साह ने बताया कि इस समूह की सीएम गीता देवी के उकसाने पर अन्य सदस्य भी उठ गईं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रेस के आने और फोटो-वीडियो बनाने के डर से महिलाएँ बैठक छोड़कर भागी हैं। इस घटना के दौरान, एक व्यक्ति ने मोटरसाइकिल से आकर आरोप लगाया कि समूह की सीएम गीता देवी कहती हैं कि उनके ग्रुप में पैसा ही नहीं है। उस व्यक्ति ने यह भी बताया कि गीता देवी अपनी मनमर्जी से इस समूह का संचालन करती हैं। यह भी गौरतलब है कि बैठक 11 बजे दिन से आयोजित होनी थी, जबकि बुककीपर भरत प्रसाद कुशवाहा स्वयं लगभग 1:30 बजे बैठक में पहुँचे। रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि बिहार सरकार जीविका दीदियों के माध्यम से विकास कार्य पर भारी धन खर्च कर रही है, लेकिन जिन दीदियों को बैठक के अनुशासन का भी ज्ञान नहीं, वे पंचायत के विकास में अग्रणी भूमिका कैसे निभा पाएंगी। यह स्थिति जीविका कर्मियों और अधिकारियों द्वारा दिए गए प्रशिक्षण की 'पोल खोलती' है। गंभीर आरोप यह भी है कि जीविका सीएम द्वारा सदस्यों के नाम पर स्वयं राशि निकालकर रख ली जाती है। कटास में एक मुस्लिम महिला के साथ माधुरी देवी नामक जीविका सीएम द्वारा ऐसी ही एक घटना किए जाने की बात भी सुनने को मिली थी, जिसमें माधुरी देवी जानकारी देने में असमर्थ रही थीं। इन सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया है।1
- गाड़ी चलाने के दौरान वाहन के इंजन में कुछ समस्या उत्पन्न हो रही है, जिसमें इंजन के ऊपर उठने की बात कही गई है।1