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आजादी से अब तक पुल के इंतजार में माटीडाड़ गांव! शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन का संकट सिंगरौली - देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प दोहराया जा रहा है। विकास के बड़े-बड़े दावों, योजनाओं और नारों के बीच सिंगरौली जिले के ग्राम पंचायत डिग्गी के माटीडाड़ की तस्वीर इन दावों के सामने एक असहज सवाल खड़ा करती है कि क्या विकास की रोशनी अब भी उन गांवों तक नहीं पहुंची, जहां आज भी एक पुल जैसी बुनियादी जरूरत पूरी नहीं हो सकी है? आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष रतिभान साकेत ने माटीडाड़ गांव की समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गांव में 100 से अधिक परिवार निवास करते हैं, लेकिन पुल के अभाव में ग्रामीण वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बरसात के दिनों में नाला उफान पर आने के बाद गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ऐसे में स्कूली बच्चों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए आवागमन किसी चुनौती से कम नहीं रहता। यह समस्या महज सड़क और पुल की नहीं है। इसके पीछे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक जीवन और ग्रामीणों की सुरक्षा जैसे कई सवाल जुड़े हुए हैं। जिस रास्ते से बच्चे स्कूल पहुंचते हैं, वही रास्ता बरसात में बंद हो जाए तो शिक्षा का अधिकार कागज पर तो मौजूद रहता है, लेकिन जमीन पर उसका रास्ता रुक जाता है। किसी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए जब रास्ता ही सुरक्षित न हो तो सरकारी एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता भी सवालों के घेरे में आ जाती है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दिनों में नाला उफान पर आने से कई दिनों तक आवागमन बाधित रहता है। बीमारी की स्थिति में समय पर इलाज नहीं मिल पाना जीवन के लिए खतरा बन सकता है। ग्रामीणों की सामाजिक परेशानियां भी कम नहीं हैं। पुल नहीं होने के कारण गांव में शादी-ब्याह तक प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। बेटियों के परिवारों को जहां आवागमन की चिंता रहती है, वहीं वर पक्ष भी बरसात के मौसम में गांव तक पहुंचने को लेकर आशंकित रहता है। यदि बुनियादी ढांचे की कमी सामाजिक रिश्तों तक को प्रभावित करने लगे तो इसे महज एक विकास कार्य की देरी कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। माटीडाड़ में पुल निर्माण की मांग आज की नहीं है। रतिभान साकेत के अनुसार, 6 अक्टूबर 2022 को तत्कालीन कलेक्टर को आवेदन देकर इस समस्या से अवगत कराया गया था। इसके बाद जिला खनिज प्रतिष्ठान की ओर से लोक निर्माण विभाग को पत्र जारी कर ग्राम पंचायत डिग्गी के ग्राम माटीडाड़ में पुल निर्माण के लिए प्राक्कलन एवं सक्षम तकनीकी स्वीकृति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। यदि प्रशासनिक स्तर पर समस्या को स्वीकार करते हुए संबंधित विभाग को तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे, तो चार वर्ष बाद भी जमीन पर परिणाम क्यों नहीं दिखाई दे रहा है? यही वह सवाल है जिसका जवाब प्रशासन और संबंधित विभाग को देना चाहिए। किसी विकास कार्य की फाइल का आगे बढ़ना और उसका जमीन पर उतरना दो अलग-अलग बातें हैं। सरकारी कार्यालयों में पत्राचार, प्रस्ताव और स्वीकृति की प्रक्रिया तभी सार्थक है, जब उसका अंतिम परिणाम आम नागरिक को मिले। माटीडाड़ की स्थिति इसी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती है। लोकतंत्र में जनता केवल चुनाव के समय महत्वपूर्ण नहीं होती। चुनाव के बाद भी उसके सवालों और समस्याओं के प्रति जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बनी रहती है। यदि ग्रामीण वर्षों से पुल की मांग कर रहे हैं और बरसात में उनकी समस्या और गंभीर हो जाती है, तो यह जानना जरूरी है कि इस मांग को विधानसभा, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के स्तर पर कितनी गंभीरता से उठाया गया। रतिभान साकेत ने देवसर विधायक राजेंद्र मेश्राम पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान पुल निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में समस्या की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित पक्ष के जवाब से ही हो सकती है। लेकिन आरोप चाहे राजनीतिक हों या प्रशासनिक, मूल समस्या तो अपनी जगह मौजूद है। यही कारण है कि बहस को आरोप-प्रत्यारोप से आगे ले जाना होगा। सवाल यह नहीं होना चाहिए कि किस दल ने क्या कहा, बल्कि यह होना चाहिए कि माटीडाड़ के लोगों को पुल कब मिलेगा। आज देश डिजिटल इंडिया, विकसित भारत और 2047 के लक्ष्य की बात कर रहा है। यह लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब विकास की परिभाषा महानगरों और बड़े शहरों तक सीमित न रहकर दूरस्थ गांवों तक पहुंचे। विकसित भारत की तस्वीर केवल बड़े उद्योग, चौड़ी सड़कें और ऊंची इमारतें नहीं हैं। विकसित भारत की पहली तस्वीर वह गांव है, जहां बच्चे सुरक्षित स्कूल जा सकें, मरीज समय पर अस्पताल पहुंच सकें, गर्भवती महिला को एंबुलेंस मिल सके और बरसात किसी गांव को दुनिया से अलग न कर दे। माटीडाड़ की समस्या इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अकेले एक गांव की कहानी नहीं हो सकती। यदि जिले के अन्य गांव भी इसी तरह बुनियादी सुविधाओं के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, तो विकास की प्राथमिकताओं की समीक्षा जरूरी है। .........

4 hrs ago
user_Arvind Kumar Mishra
Arvind Kumar Mishra
Singrauli, Madhya Pradesh•
4 hrs ago
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आजादी से अब तक पुल के इंतजार में माटीडाड़ गांव! शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन का संकट सिंगरौली - देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प दोहराया जा रहा है। विकास के बड़े-बड़े दावों, योजनाओं और नारों के बीच सिंगरौली जिले के ग्राम पंचायत डिग्गी के माटीडाड़ की तस्वीर इन दावों के सामने एक असहज सवाल खड़ा करती है कि क्या विकास की रोशनी अब भी उन गांवों तक नहीं पहुंची, जहां आज भी एक पुल जैसी बुनियादी जरूरत पूरी नहीं हो सकी है? आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष रतिभान साकेत ने माटीडाड़ गांव की समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गांव में 100 से अधिक परिवार निवास करते हैं, लेकिन पुल के अभाव में ग्रामीण वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बरसात के दिनों में नाला उफान पर आने के बाद गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ऐसे में स्कूली बच्चों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए आवागमन किसी चुनौती से कम नहीं रहता। यह समस्या महज सड़क और पुल की नहीं है। इसके पीछे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक जीवन और ग्रामीणों की सुरक्षा जैसे कई सवाल जुड़े हुए हैं। जिस रास्ते से बच्चे स्कूल पहुंचते हैं, वही रास्ता बरसात में बंद हो जाए तो शिक्षा का अधिकार कागज पर तो मौजूद रहता है, लेकिन जमीन पर उसका रास्ता रुक जाता है। किसी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए जब रास्ता ही सुरक्षित न हो तो सरकारी एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता भी सवालों के घेरे में आ जाती है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दिनों में नाला उफान पर आने से कई दिनों तक आवागमन बाधित रहता है। बीमारी की स्थिति में समय पर इलाज नहीं मिल पाना जीवन के लिए खतरा बन सकता है। ग्रामीणों की सामाजिक परेशानियां भी कम नहीं हैं। पुल नहीं होने के कारण गांव में शादी-ब्याह तक प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। बेटियों के परिवारों को जहां आवागमन की चिंता रहती है, वहीं वर पक्ष भी बरसात के मौसम में गांव तक पहुंचने को लेकर आशंकित रहता है। यदि बुनियादी ढांचे की कमी सामाजिक रिश्तों तक को प्रभावित करने लगे तो इसे महज एक विकास कार्य की देरी कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। माटीडाड़ में पुल निर्माण की मांग आज की नहीं है। रतिभान साकेत के अनुसार, 6 अक्टूबर 2022 को तत्कालीन कलेक्टर को आवेदन देकर इस समस्या से अवगत कराया गया था। इसके बाद जिला खनिज प्रतिष्ठान की ओर से लोक

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निर्माण विभाग को पत्र जारी कर ग्राम पंचायत डिग्गी के ग्राम माटीडाड़ में पुल निर्माण के लिए प्राक्कलन एवं सक्षम तकनीकी स्वीकृति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। यदि प्रशासनिक स्तर पर समस्या को स्वीकार करते हुए संबंधित विभाग को तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे, तो चार वर्ष बाद भी जमीन पर परिणाम क्यों नहीं दिखाई दे रहा है? यही वह सवाल है जिसका जवाब प्रशासन और संबंधित विभाग को देना चाहिए। किसी विकास कार्य की फाइल का आगे बढ़ना और उसका जमीन पर उतरना दो अलग-अलग बातें हैं। सरकारी कार्यालयों में पत्राचार, प्रस्ताव और स्वीकृति की प्रक्रिया तभी सार्थक है, जब उसका अंतिम परिणाम आम नागरिक को मिले। माटीडाड़ की स्थिति इसी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती है। लोकतंत्र में जनता केवल चुनाव के समय महत्वपूर्ण नहीं होती। चुनाव के बाद भी उसके सवालों और समस्याओं के प्रति जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बनी रहती है। यदि ग्रामीण वर्षों से पुल की मांग कर रहे हैं और बरसात में उनकी समस्या और गंभीर हो जाती है, तो यह जानना जरूरी है कि इस मांग को विधानसभा, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के स्तर पर कितनी गंभीरता से उठाया गया। रतिभान साकेत ने देवसर विधायक राजेंद्र मेश्राम पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान पुल निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में समस्या की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित पक्ष के जवाब से ही हो सकती है। लेकिन आरोप चाहे राजनीतिक हों या प्रशासनिक, मूल समस्या तो अपनी जगह मौजूद है। यही कारण है कि बहस को आरोप-प्रत्यारोप से आगे ले जाना होगा। सवाल यह नहीं होना चाहिए कि किस दल ने क्या कहा, बल्कि यह होना चाहिए कि माटीडाड़ के लोगों को पुल कब मिलेगा। आज देश डिजिटल इंडिया, विकसित भारत और 2047 के लक्ष्य की बात कर रहा है। यह लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब विकास की परिभाषा महानगरों और बड़े शहरों तक सीमित न रहकर दूरस्थ गांवों तक पहुंचे। विकसित भारत की तस्वीर केवल बड़े उद्योग, चौड़ी सड़कें और ऊंची इमारतें नहीं हैं। विकसित भारत की पहली तस्वीर वह गांव है, जहां बच्चे सुरक्षित स्कूल जा सकें, मरीज समय पर अस्पताल पहुंच सकें, गर्भवती महिला को एंबुलेंस मिल सके और बरसात किसी गांव को दुनिया से अलग न कर दे। माटीडाड़ की समस्या इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अकेले एक गांव की कहानी नहीं हो सकती। यदि जिले के अन्य गांव भी इसी तरह बुनियादी सुविधाओं के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, तो विकास की प्राथमिकताओं की समीक्षा जरूरी है। .........

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    फायर ब्रिगेड से विधायक की गाड़ी धोने का वीडियो वायरल, विधायक ने मीडिया से चर्चा कर दी जानकारी
    user_Brijesh kumar
    Brijesh kumar
    सिंगरौली, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • मध्यप्रदेश में फार्मर आईडी के माध्यम से किसानों की सुविधाओं को डिजिटल और सरल बनाया जा रहा है। इससे कम कागजी कार्रवाई में बैंक लोन, फसल बीमा, खाद-बीज एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा : CM डॉ मोहन यादव
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    मध्यप्रदेश में फार्मर आईडी के माध्यम से किसानों की सुविधाओं को डिजिटल और सरल बनाया जा रहा है। इससे कम कागजी कार्रवाई में बैंक लोन, फसल बीमा, खाद-बीज एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा : CM डॉ मोहन यादव
    user_Amrendra Shukla पत्रकार
    Amrendra Shukla पत्रकार
    Local News Reporter सिंगरौली नगर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • देखिए अमिलिया से हनुमना जाने वाले पहाड़ की स्थिति 👊👊👊👊 सजमानी पहाड़ दास गया है👊
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    देखिए अमिलिया से हनुमना जाने वाले पहाड़ की स्थिति 👊👊👊👊
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    AMILIYA TIMES
    Local News Reporter सिहावल, सीधी, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • *बारावफात पर्व पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक सोनभद्र की सक्रियता, ओबरा क्षेत्र में पुलिस बल के साथ किया पैदल गश्त एवं सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा* *प्रेस नोट* *जनपद : सोनभद्र* *दिनांक : 26.08.2026* *बारावफात पर्व पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक सोनभद्र की सक्रियता, ओबरा क्षेत्र में पुलिस बल के साथ किया पैदल गश्त एवं सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा* बारावफात पर्व को सकुशल, शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री अभिषेक वर्मा द्वारा जनपद में सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था की तैयारियों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में आज दिनांक 26.08.2026 को पुलिस अधीक्षक सोनभद्र *श्री अभिषेक वर्मा* ने अपर पुलिस अधीक्षक नगर *श्री अनिल कुमार* एवं क्षेत्राधिकारी ओबरा *श्री प्रभात राय* के साथ थाना ओबरा क्षेत्रान्तर्गत पर्याप्त पुलिस बल के साथ सायंकालीन पैदल गश्त किया। पैदल गश्त के दौरान बाजार, प्रमुख चौराहों, संवेदनशील स्थलों एवं बारावफात जुलूस मार्ग का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया। इस दौरान आमजन, व्यापारियों एवं स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित कर शांति एवं आपसी भाईचारे के साथ पर्व मनाने की अपील की गई। पुलिस अधीक्षक द्वारा ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्क एवं मुस्तैद रहकर ड्यूटी करने, संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने, संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन चेकिंग करने तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही सोशल मीडिया पर भ्रामक अथवा आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों पर कड़ी निगरानी रखने एवं अफवाहों पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
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    *बारावफात पर्व पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक सोनभद्र की सक्रियता, ओबरा क्षेत्र में पुलिस बल के साथ किया पैदल गश्त एवं सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा*

*प्रेस नोट*
*जनपद : सोनभद्र* 
*दिनांक : 26.08.2026*
*बारावफात पर्व पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक सोनभद्र की सक्रियता, ओबरा क्षेत्र में पुलिस बल के साथ किया पैदल गश्त एवं सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा*
बारावफात पर्व को सकुशल, शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री अभिषेक वर्मा द्वारा जनपद में सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था की तैयारियों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है।
इसी क्रम में आज दिनांक 26.08.2026 को पुलिस अधीक्षक सोनभद्र *श्री अभिषेक वर्मा* ने अपर पुलिस अधीक्षक नगर *श्री अनिल कुमार* एवं क्षेत्राधिकारी ओबरा *श्री प्रभात राय* के साथ थाना ओबरा क्षेत्रान्तर्गत पर्याप्त पुलिस बल के साथ सायंकालीन पैदल गश्त किया।
पैदल गश्त के दौरान बाजार, प्रमुख चौराहों, संवेदनशील स्थलों एवं बारावफात जुलूस मार्ग का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया। इस दौरान आमजन, व्यापारियों एवं स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित कर शांति एवं आपसी भाईचारे के साथ पर्व मनाने की अपील की गई।
पुलिस अधीक्षक द्वारा ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्क एवं मुस्तैद रहकर ड्यूटी करने, संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने, संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन चेकिंग करने तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही सोशल मीडिया पर भ्रामक अथवा आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों पर कड़ी निगरानी रखने एवं अफवाहों पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
    user_कालचिंतन समाचार
    कालचिंतन समाचार
    Obra, Sonbhadra•
    2 hrs ago
  • 🚨 ब्रेकिंग: सोनभद्र 🎀 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने तैयार कीं राखियां रक्षाबंधन को लेकर करीब 150 समूहों की महिलाएं 20–30 हजार राखियां तैयार करने में जुटीं। अब तक 5 हजार से अधिक राखियां बन चुकी हैं। हिंदूवादी क्लस्टर की महिलाओं ने डीएम चर्चित गौड़ को राखी बांधकर सुरक्षा व सहयोग का संदेश दिया। डीएम ने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और महिलाओं के उत्पादों की ब्रांडिंग पर जोर दिया। #Sonbhadra #Rakhi #SelfHelpGroup #WomenEmpowerment
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    🚨 ब्रेकिंग: सोनभद्र
🎀 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने तैयार कीं राखियां
रक्षाबंधन को लेकर करीब 150 समूहों की महिलाएं 20–30 हजार राखियां तैयार करने में जुटीं। अब तक 5 हजार से अधिक राखियां बन चुकी हैं।
हिंदूवादी क्लस्टर की महिलाओं ने डीएम चर्चित गौड़ को राखी बांधकर सुरक्षा व सहयोग का संदेश दिया। डीएम ने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और महिलाओं के उत्पादों की ब्रांडिंग पर जोर दिया।
#Sonbhadra #Rakhi #SelfHelpGroup #WomenEmpowerment
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • नवनिर्मित पुलिया दो-तीन माह में ध्वस्त, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल सीधी जिले के जनपद पंचायत गोपद बनास अंतर्गत ग्राम पंचायत सारों में जोगीबहरा से चोकरीदह पहुंच मार्ग पर स्थित नवनिर्मित पुलिया बरसाती पानी के तेज बहाव में ध्वस्त हो गई। बताया जा रहा है कि यह पुलिया जून माह में पंचायत निधि से स्वीकृत होकर बनाई गई थी, लेकिन निर्माण के महज दो-तीन माह बाद ही अगस्त में क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिया के इतनी कम अवधि में टूट जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया के निर्माण में घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके चलते पहली ही बरसात में पुलिया बरसाती पानी का दबाव नहीं झेल सकी और क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिया के टूटने से जोगीबहरा और चोकरीदह के बीच आवागमन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि पुलिया का जल्द से जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि स्कूली बच्चों सहित आम लोगों को आवागमन में हो रही परेशानी से राहत मिल सके। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में कब तक जांच और कार्रवाई करता है।
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    नवनिर्मित पुलिया दो-तीन माह में ध्वस्त, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
सीधी जिले के जनपद पंचायत गोपद बनास अंतर्गत ग्राम पंचायत सारों में जोगीबहरा से चोकरीदह पहुंच मार्ग पर स्थित नवनिर्मित पुलिया बरसाती पानी के तेज बहाव में ध्वस्त हो गई। बताया जा रहा है कि यह पुलिया जून माह में पंचायत निधि से स्वीकृत होकर बनाई गई थी, लेकिन निर्माण के महज दो-तीन माह बाद ही अगस्त में क्षतिग्रस्त हो गई।
पुलिया के इतनी कम अवधि में टूट जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया के निर्माण में घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके चलते पहली ही बरसात में पुलिया बरसाती पानी का दबाव नहीं झेल सकी और क्षतिग्रस्त हो गई।
पुलिया के टूटने से जोगीबहरा और चोकरीदह के बीच आवागमन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों की मांग है कि पुलिया का जल्द से जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि स्कूली बच्चों सहित आम लोगों को आवागमन में हो रही परेशानी से राहत मिल सके। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में कब तक जांच और कार्रवाई करता है।
    user_Rajneesh Mauriya journalist
    Rajneesh Mauriya journalist
    Court reporter कुसमी, सीधी, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • जनपद सोनभद्र के घोरावल तहसील के ग्राम पंचायत भैसवार में भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के जिला अध्यक्ष बिरजू कुशवाहा 464 दिन से धरने पर बैठे हैं अभी तक जिलाधिकारी सोनभद्र द्वारा इस धरने का जांच पड़ताल नहीं किया गया डेढ़ साल पूरे होने वाले हैं कोई भी जिलाधिकारी धरने पर नहीं आ सका यहां के किसान बड़ा दुखित है जिला अध्यक्ष बिरजू कुशवाहा ने बताया कि आज तक जिलाधिकारी सोनभद्र ग्राम पंचायत भैसवार में धरना रथ किसानों का हाल-चाल लेने नहीं आए किसानों ने बड़ा आक्रोश है इस धरने में मौजूद रहे जिला सचिव संजय कुमार यादव सीताराम मनराज मौर्य नंदलाल मोर्य ओम प्रकाश गुप्ता रामप्रसाद आदि भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे
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    जनपद सोनभद्र के घोरावल तहसील के ग्राम पंचायत भैसवार में भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के जिला अध्यक्ष बिरजू कुशवाहा 464 दिन से धरने पर बैठे हैं
अभी तक जिलाधिकारी सोनभद्र द्वारा इस धरने का जांच पड़ताल नहीं किया गया डेढ़ साल पूरे होने वाले हैं कोई भी जिलाधिकारी धरने पर नहीं आ सका यहां के किसान बड़ा दुखित है जिला अध्यक्ष बिरजू कुशवाहा ने बताया कि आज तक जिलाधिकारी सोनभद्र ग्राम पंचायत भैसवार में धरना रथ किसानों का हाल-चाल लेने नहीं आए किसानों ने बड़ा आक्रोश है इस धरने में मौजूद रहे जिला सचिव संजय कुमार यादव सीताराम मनराज मौर्य नंदलाल मोर्य ओम प्रकाश गुप्ता रामप्रसाद  आदि भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे
    user_Brijesh kumar singh
    Brijesh kumar singh
    Court reporter घोरावल, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • सिंगरौली: जमीन की रजिस्ट्री के विवाद में दामाद ने की सास की हत्या। बरगवां पुलिस ने अंधी हत्या का किया खुलासा, गमछे से गला घोंटकर वारदात को दिया अंजाम सिंगरौली। बरगवां थाना पुलिस ने अंधी हत्या के मामले का खुलासा करते हुए आरोपी दामाद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार जमीन अपने नाम रजिस्ट्री नहीं किए जाने से नाराज आरोपी ने अपनी सास की गमछे से गला घोंटकर हत्या कर दी। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त गमछा भी जब्त कर लिया है।
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    सिंगरौली: जमीन की रजिस्ट्री के विवाद में दामाद ने की सास की हत्या।
बरगवां पुलिस ने अंधी हत्या का किया खुलासा, गमछे से गला घोंटकर वारदात को दिया अंजाम

सिंगरौली। बरगवां थाना पुलिस ने अंधी हत्या के मामले का खुलासा करते हुए आरोपी दामाद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार जमीन अपने नाम रजिस्ट्री नहीं किए जाने से नाराज आरोपी ने अपनी सास की गमछे से गला घोंटकर हत्या कर दी। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त गमछा भी जब्त कर लिया है।
    user_Amrendra Shukla पत्रकार
    Amrendra Shukla पत्रकार
    Local News Reporter सिंगरौली नगर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
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