bharat News bulletin आप सबो केलिए कलाइगनर म्यूजियम का कुछ वीडियो संग्रह पेश कर रहा है l बीच का नाम मरीना क्यों रखा गया था? ई. एल्फिंस्टन 1881 में शहर के गवर्नर बनने के तुरंत बाद इस क्षेत्र में आए थे। उन्हें यह समुद्र तट देखते ही मोहित हो गया और उन्होंने इसके चारों ओर एक सैरगाह बनाने का आदेश दिया। उन्होंने इतालवी शब्द मरीना से इसका नाम 'मरीना' बीच रखा, जिसका अर्थ सैरगाह होता है। मरीना कौन थी? डोना मरीना, जिन्हें ला मालिनचे के नाम से भी जाना जाता है, 16वीं शताब्दी के आरंभिक काल में एज़्टेक साम्राज्य पर स्पेनिश विजय के दौरान एक महत्वपूर्ण हस्ती थीं। मालिनल्ली के रूप में जन्मीं मरीना के जीवन में तब एक नाटकीय मोड़ आया जब उनके पिता की मृत्यु के बाद उन्हें गुलामी में बेच दिया गया। मरीना के कितने बच्चे थे? उनके तीन बच्चे थे: एडवर्ड , एलेक्जेंड्रा और माइकल । मरीना किस लिए प्रसिद्ध है? मरीना लैम्ब्रिनी डायमेंडिस (/ˌdiːəmændɪs/ DEE-ə-MAN-diss; ग्रीक: Μαρίνα-Λαμπρινή Διαμάντη, रोमानीकृत: मरीना-लैम्प्रिनी डायमंती; जन्म 10 अक्टूबर 1985), मरीना (अक्सर सभी बड़े अक्षरों में शैलीबद्ध) और पहले स्टेज नाम मरीना एंड द डायमंड्स के नाम से जानी जाने वाली, एक वेल्श गायिका, गीतकार, कवि और रिकॉर्ड हैं...
bharat News bulletin आप सबो केलिए कलाइगनर म्यूजियम का कुछ वीडियो संग्रह पेश कर रहा है l बीच का नाम मरीना क्यों रखा गया था? ई. एल्फिंस्टन 1881 में शहर के गवर्नर बनने के तुरंत बाद इस क्षेत्र में आए थे। उन्हें यह समुद्र तट देखते ही मोहित हो गया और उन्होंने इसके चारों ओर एक सैरगाह बनाने का आदेश दिया। उन्होंने इतालवी शब्द मरीना से इसका नाम 'मरीना' बीच रखा, जिसका अर्थ सैरगाह होता है। मरीना कौन थी? डोना मरीना, जिन्हें ला मालिनचे के नाम से भी जाना जाता है, 16वीं शताब्दी के आरंभिक काल में एज़्टेक साम्राज्य पर स्पेनिश विजय के दौरान एक महत्वपूर्ण हस्ती थीं। मालिनल्ली के रूप में जन्मीं मरीना के जीवन में तब एक नाटकीय मोड़ आया जब उनके पिता की मृत्यु के बाद उन्हें गुलामी में बेच दिया गया। मरीना के कितने बच्चे थे? उनके तीन बच्चे थे: एडवर्ड , एलेक्जेंड्रा और माइकल । मरीना किस लिए प्रसिद्ध है? मरीना लैम्ब्रिनी डायमेंडिस (/ˌdiːəmændɪs/ DEE-ə-MAN-diss; ग्रीक: Μαρίνα-Λαμπρινή Διαμάντη, रोमानीकृत: मरीना-लैम्प्रिनी डायमंती; जन्म 10 अक्टूबर 1985), मरीना (अक्सर सभी बड़े अक्षरों में शैलीबद्ध) और पहले स्टेज नाम मरीना एंड द डायमंड्स के नाम से जानी जाने वाली, एक वेल्श गायिका, गीतकार, कवि और रिकॉर्ड हैं...
- गढ़वा के जटा गांव में जमीनी विवाद को लेकर आपस में दो परिवार के लोग उलझ गए दोनों तरफ से मार पीट शुरू हो गया सदर अस्पताल में भर्ती के बाद चल रहा है इलाज1
- किन्नरों का बधाई मांगने का एरिया (इलाका) पारंपरिक गुरु-चेला प्रथा और आपसी सहमति से निर्धारित होता है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह एक निश्चित क्षेत्र होता है, जहाँ का 'गुरु' (प्रमुख) अपने शिष्यों को बधाई मांगने के लिए बांटता है। इसमें कोई बाहरी या दूसरा समूह हस्तक्षेप नहीं करता। एरिया निर्धारण के मुख्य बिंदु: गुरु का अधिकार: क्षेत्र का बंटवारा उस इलाके के गुरु (या डेरे के मुखिया) द्वारा किया जाता है। परंपरा: यह व्यवस्था पुरानी परंपराओं पर आधारित है और इसे बदलना आम तौर पर मनाही है। विवाद और नियम: कई जगहों पर, मनमानी वसूली को रोकने के लिए ग्राम पंचायत या मोहल्ला कमेटी के साथ मिलकर 2100-5100 रुपये तक की बधाई (लाग) राशि भी तय की जाती है, ताकि आपसी विवाद न हो। बधाई के मौके: वे आमतौर पर शादी, बच्चे के जन्म और गृह प्रवेश जैसे मंगल अवसरों पर बधाई मांगने जाते हैं।1
- युद्ध विराम नहीं युद्ध पर पूर्ण विराम चाहता है ईरान... सीज़फायर के प्रस्ताव को ईरान ने खारिज किया, ईरान ने पूरी तरह जंग बंद करने की मांग की.. #Khabardar #IranUSConflict #Ceasefire #MiddleEastCrisis #NoCeasefire1
- रामनवमी के कुछ यादे किस तरह से राम भक्त के अंदर था जुनून1
- डंडई में पहली बार मनाया गया सरहुल पूजा महोत्सव,एसडीएम संजय कुमार रहे मुख्य अतिथि डंडई प्रखंड क्षेत्र के बैलाझखड़ा गांव के पिपरहवा टोला में शुक्रवार को पहली बार आदिवासी समाज के प्रमुख प्रकृतिक पर्व सरहुल पूजा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ प्रकृति की पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में गढ़वा अनुमंडल के एसडीएम संजय कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक सरना पूजा से हुई। आदिवासी युवक-युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में मांदर और नगाड़े की थाप पर सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण सरहुल के उल्लास से सराबोर हो गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि सरहुल पर्व प्रकृति और मानव के अटूट संबंध का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति की पूजा कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता मजबूत होती है। आगे कहा की यहां के युवाओं के प्रयास से सरहुल पूजा कार्यक्रम की शुरुआत प्रेरणादायक है। ये युवा अपनी संस्कृति अपनी समाज अपनी जड़ों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इनका कार्य काफी सराहनीय है। उन्होंने ग्रामीणों से शिक्षा, स्वच्छता और विकास योजनाओं से जुड़कर क्षेत्र के विकास में भागीदारी निभाने की अपील की। साथ ही प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिया। कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी एकता संघ, डंडई के तत्वावधान में किया गया। मौके पर मुखिया प्रतिनिधि महेश्वर राम भाजपा नेता सांसद प्रतिनिधि अलख निरंजन प्रसाद रामप्यारी सिंह तेज बहादुर सिंह चंद्रशेखर प्रसाद सुभाष चंद्र मेहता युवा समाजसेवी विवेकानंद कुशवाहा सहित अन्य गण मान्य व्यक्ति कार्यक्रम का हिस्सा बने । सरहुल पूजा कार्यक्रम को सफल बनाने में आदिवासी सरना विकास परिषद के सचिव मुख लाल उरांव कोषाध्यक्ष उमेश उरांव लवली उरांव मनोज उरांव सहित राकेश उरांव राजेश उरांव अभय सिंह विजय उरांव देव कुमार उरांव शनि उरांव नंदलाल उरांव सुरेंद्र सिंह मनोज सिंह मृत्युंजय सिंह सहित अन्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । इस मौके पर सुंदर देव यादव वीरेंद्र यादव शिक्षक अवकास कुमार डंडई थाना के ए एस आई मुनेश्वर राम विरोधी व श्रद्धालु उपस्थित थे ।1
- धुरकी बिलासपुर भीषण सड़क हादसा में 30 वर्षीय युवक कि मौत ,झारखंड गढ़वा सड़क हादसा,#accident ˈयुवक1
- mar pit1
- समाज में एक पत्नी का दूसरे पुरुष से संबंध बनाने के पीछे भावनात्मक असंतोष, शारीरिक अतृप्ति, या आपसी समझ की कमी जैसे कारण हो सकते हैं। यह अक्सर भरोसे की कमी, अकेलेपन, या नए अनुभवों की तलाश के कारण होता है। ऐसे मामले व्यक्तिगत असंतोष या अनसुलझे वैवाहिक मुद्दों के कारण समय-समय पर सामने आते रहते हैं। दूसरे पुरुष से संबंध बनाने के मुख्य कारण: भावात्मक और शारीरिक असंतोष: यदि पति-पत्नी के बीच प्यार, सम्मान, या शारीरिक संतुष्टि की कमी है, तो महिला भावनात्मक समर्थन या शारीरिक जरूरतों के लिए दूसरे पुरुष की ओर आकर्षित हो सकती है। धोखाधड़ी और अनबन: वैवाहिक जीवन में लगातार झगड़े, उपेक्षा, या साथी के साथ अस्वस्थ व्यवहार (abuse) के कारण भी रिश्ते में दरार आ सकती है। नए अनुभवों की तलाश: कुछ मामलों में, एकरसता से बचने या नए अनुभवों के लिए भी ऐसे संबंध बन सकते हैं। आर्थिक कारण: कुछ मामलों में, अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी महिलाएं गैर-पुरुष से संबंध बना सकती हैं। कब से बना रही है? यह कोई नई घटना नहीं है, यह व्यवहार जब से विवाह संस्था मौजूद है, तब से ही मौजूद हो सकता है। हालांकि, आधुनिक जीवनशैली, सोशल मीडिया, और बढ़ते हुए वैवाहिक कलह के कारण ऐसे मामलों का पता चलना अब अधिक आसान हो गया है। निष्कर्ष विवाह में विश्वास, आपसी समझ, और सम्मान की कमी ही इन संबंधों का मुख्य कारण बनती है। यह अक्सर व्यक्तिगत असंतोष और रिश्ते में आ रही दूरियों का नतीजा होता है।1