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गढ़वा जमीनी विवाद के बाद खूनी खेल शुरू कई लोग हुए घायल सदर अस्पताल में भर्ती गढ़वा के जटा गांव में जमीनी विवाद को लेकर आपस में दो परिवार के लोग उलझ गए दोनों तरफ से मार पीट शुरू हो गया सदर अस्पताल में भर्ती के बाद चल रहा है इलाज

2 hrs ago
user_Green Line News, Md Mostaque
Green Line News, Md Mostaque
पत्रकार गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
2 hrs ago

गढ़वा जमीनी विवाद के बाद खूनी खेल शुरू कई लोग हुए घायल सदर अस्पताल में भर्ती गढ़वा के जटा गांव में जमीनी विवाद को लेकर आपस में दो परिवार के लोग उलझ गए दोनों तरफ से मार पीट शुरू हो गया सदर अस्पताल में भर्ती के बाद चल रहा है इलाज

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  • गढ़वा के जटा गांव में जमीनी विवाद को लेकर आपस में दो परिवार के लोग उलझ गए दोनों तरफ से मार पीट शुरू हो गया सदर अस्पताल में भर्ती के बाद चल रहा है इलाज
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    गढ़वा के जटा गांव में जमीनी विवाद को लेकर आपस में दो परिवार के लोग उलझ गए दोनों तरफ से मार पीट शुरू हो गया सदर अस्पताल में भर्ती के बाद चल रहा है इलाज
    user_Green Line News, Md Mostaque
    Green Line News, Md Mostaque
    पत्रकार गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • किन्नरों का बधाई मांगने का एरिया (इलाका) पारंपरिक गुरु-चेला प्रथा और आपसी सहमति से निर्धारित होता है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह एक निश्चित क्षेत्र होता है, जहाँ का 'गुरु' (प्रमुख) अपने शिष्यों को बधाई मांगने के लिए बांटता है। इसमें कोई बाहरी या दूसरा समूह हस्तक्षेप नहीं करता।  एरिया निर्धारण के मुख्य बिंदु: गुरु का अधिकार: क्षेत्र का बंटवारा उस इलाके के गुरु (या डेरे के मुखिया) द्वारा किया जाता है। परंपरा: यह व्यवस्था पुरानी परंपराओं पर आधारित है और इसे बदलना आम तौर पर मनाही है। विवाद और नियम: कई जगहों पर, मनमानी वसूली को रोकने के लिए ग्राम पंचायत या मोहल्ला कमेटी के साथ मिलकर 2100-5100 रुपये तक की बधाई (लाग) राशि भी तय की जाती है, ताकि आपसी विवाद न हो। बधाई के मौके: वे आमतौर पर शादी, बच्चे के जन्म और गृह प्रवेश जैसे मंगल अवसरों पर बधाई मांगने जाते हैं।
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    किन्नरों का बधाई मांगने का एरिया (इलाका) पारंपरिक गुरु-चेला प्रथा और आपसी सहमति से निर्धारित होता है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह एक निश्चित क्षेत्र होता है, जहाँ का 'गुरु' (प्रमुख) अपने शिष्यों को बधाई मांगने के लिए बांटता है। इसमें कोई बाहरी या दूसरा समूह हस्तक्षेप नहीं करता। 
एरिया निर्धारण के मुख्य बिंदु:
गुरु का अधिकार: क्षेत्र का बंटवारा उस इलाके के गुरु (या डेरे के मुखिया) द्वारा किया जाता है।
परंपरा: यह व्यवस्था पुरानी परंपराओं पर आधारित है और इसे बदलना आम तौर पर मनाही है।
विवाद और नियम: कई जगहों पर, मनमानी वसूली को रोकने के लिए ग्राम पंचायत या मोहल्ला कमेटी के साथ मिलकर 2100-5100 रुपये तक की बधाई (लाग) राशि भी तय की जाती है, ताकि आपसी विवाद न हो।
बधाई के मौके: वे आमतौर पर शादी, बच्चे के जन्म और गृह प्रवेश जैसे मंगल अवसरों पर बधाई मांगने जाते हैं।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    3 hrs ago
  • युद्ध विराम नहीं युद्ध पर पूर्ण विराम चाहता है ईरान... सीज़फायर के प्रस्ताव को ईरान ने खारिज किया, ईरान ने पूरी तरह जंग बंद करने की मांग की.. #Khabardar #IranUSConflict #Ceasefire #MiddleEastCrisis #NoCeasefire
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    युद्ध विराम नहीं युद्ध पर पूर्ण विराम चाहता है ईरान...
सीज़फायर के प्रस्ताव को ईरान ने खारिज किया, ईरान ने पूरी तरह जंग बंद करने की मांग की..
#Khabardar #IranUSConflict #Ceasefire #MiddleEastCrisis #NoCeasefire
    user_Anit tiwary
    Anit tiwary
    Electrician गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    11 hrs ago
  • रामनवमी के कुछ यादे किस तरह से राम भक्त के अंदर था जुनून
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    रामनवमी के कुछ यादे किस तरह से राम भक्त के अंदर था जुनून
    user_Active line News
    Active line News
    Court reporter गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    18 hrs ago
  • डंडई में पहली बार मनाया गया सरहुल पूजा महोत्सव,एसडीएम संजय कुमार रहे मुख्य अतिथि डंडई प्रखंड क्षेत्र के बैलाझखड़ा गांव के पिपरहवा टोला में शुक्रवार को पहली बार आदिवासी समाज के प्रमुख प्रकृतिक पर्व सरहुल पूजा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ प्रकृति की पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में गढ़वा अनुमंडल के एसडीएम संजय कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक सरना पूजा से हुई। आदिवासी युवक-युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में मांदर और नगाड़े की थाप पर सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण सरहुल के उल्लास से सराबोर हो गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि सरहुल पर्व प्रकृति और मानव के अटूट संबंध का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति की पूजा कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता मजबूत होती है। आगे कहा की यहां के युवाओं के प्रयास से सरहुल पूजा कार्यक्रम की शुरुआत प्रेरणादायक है। ये युवा अपनी संस्कृति अपनी समाज अपनी जड़ों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इनका कार्य काफी सराहनीय है। उन्होंने ग्रामीणों से शिक्षा, स्वच्छता और विकास योजनाओं से जुड़कर क्षेत्र के विकास में भागीदारी निभाने की अपील की। साथ ही प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिया। कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी एकता संघ, डंडई के तत्वावधान में किया गया। मौके पर मुखिया प्रतिनिधि महेश्वर राम भाजपा नेता सांसद प्रतिनिधि अलख निरंजन प्रसाद रामप्यारी सिंह तेज बहादुर सिंह चंद्रशेखर प्रसाद सुभाष चंद्र मेहता युवा समाजसेवी विवेकानंद कुशवाहा सहित अन्य गण मान्य व्यक्ति कार्यक्रम का हिस्सा बने । सरहुल पूजा कार्यक्रम को सफल बनाने में आदिवासी सरना विकास परिषद के सचिव मुख लाल उरांव कोषाध्यक्ष उमेश उरांव लवली उरांव मनोज उरांव सहित राकेश उरांव राजेश उरांव अभय सिंह विजय उरांव देव कुमार उरांव शनि उरांव नंदलाल उरांव सुरेंद्र सिंह मनोज सिंह मृत्युंजय सिंह सहित अन्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । इस मौके पर सुंदर देव यादव वीरेंद्र यादव शिक्षक अवकास कुमार डंडई थाना के ए एस आई मुनेश्वर राम विरोधी व श्रद्धालु उपस्थित थे ।
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    डंडई में पहली बार मनाया गया सरहुल पूजा महोत्सव,एसडीएम संजय कुमार रहे मुख्य अतिथि
डंडई प्रखंड क्षेत्र के बैलाझखड़ा गांव के पिपरहवा टोला में शुक्रवार को पहली बार आदिवासी समाज के प्रमुख प्रकृतिक पर्व सरहुल पूजा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ प्रकृति की पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में गढ़वा अनुमंडल के एसडीएम संजय कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक सरना पूजा से हुई। आदिवासी युवक-युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में मांदर और नगाड़े की थाप पर सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण सरहुल के उल्लास से सराबोर हो गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि सरहुल पर्व प्रकृति और मानव के अटूट संबंध का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति की पूजा कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता मजबूत होती है। आगे कहा की यहां के युवाओं के प्रयास से  सरहुल पूजा कार्यक्रम की शुरुआत प्रेरणादायक है। ये युवा अपनी संस्कृति अपनी समाज अपनी जड़ों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इनका कार्य काफी सराहनीय है। उन्होंने ग्रामीणों से शिक्षा, स्वच्छता और विकास योजनाओं से जुड़कर क्षेत्र के विकास में भागीदारी निभाने की अपील की। साथ ही प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिया। कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी एकता संघ, डंडई के तत्वावधान में किया गया। मौके पर मुखिया प्रतिनिधि महेश्वर राम भाजपा नेता सांसद प्रतिनिधि अलख निरंजन प्रसाद रामप्यारी सिंह तेज बहादुर सिंह चंद्रशेखर प्रसाद सुभाष चंद्र मेहता युवा समाजसेवी विवेकानंद कुशवाहा सहित अन्य गण मान्य व्यक्ति  कार्यक्रम का हिस्सा बने ।  सरहुल पूजा कार्यक्रम को सफल बनाने में आदिवासी सरना विकास परिषद के सचिव मुख लाल उरांव कोषाध्यक्ष उमेश उरांव लवली उरांव मनोज उरांव सहित राकेश उरांव राजेश उरांव अभय सिंह विजय उरांव देव कुमार उरांव शनि उरांव नंदलाल उरांव सुरेंद्र सिंह मनोज सिंह मृत्युंजय सिंह सहित अन्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । इस मौके पर सुंदर देव यादव वीरेंद्र यादव शिक्षक अवकास कुमार डंडई थाना के  ए एस आई मुनेश्वर राम विरोधी व श्रद्धालु उपस्थित थे ।
    user_दैनिक भास्कर डंडई
    दैनिक भास्कर डंडई
    स्थानीय समाचार रिपोर्टर दंदई, गढ़वा, झारखंड•
    17 hrs ago
  • गढ़वा जिला में चल रहा है देह व्यापार का काला धंधा, गढ़वा के तीन होटल को किया गया सीज, फोटो के अंदर पाए गए 14 जोड़ा नाबालीक लड़के, लड़कियां।🚫⚠️📍
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    गढ़वा जिला में चल रहा है देह व्यापार का काला धंधा, गढ़वा के तीन होटल को किया गया सीज,
फोटो के अंदर पाए गए 14 जोड़ा नाबालीक  लड़के, लड़कियां।🚫⚠️📍
    user_Mera aawaj aapke sath
    Mera aawaj aapke sath
    धुरकी, गढ़वा, झारखंड•
    1 hr ago
  • धुरकी बिलासपुर भीषण सड़क हादसा में 30 वर्षीय युवक कि मौत ,झारखंड गढ़वा सड़क हादसा,#accident‍ ˈयुवक
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    धुरकी बिलासपुर भीषण सड़क हादसा में 30 वर्षीय युवक कि मौत ,झारखंड गढ़वा सड़क हादसा,#accident‍ ˈयुवक
    user_Men of jharkhand
    Men of jharkhand
    Court reporter धुरकी, गढ़वा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • समाज में एक पत्नी का दूसरे पुरुष से संबंध बनाने के पीछे भावनात्मक असंतोष, शारीरिक अतृप्ति, या आपसी समझ की कमी जैसे कारण हो सकते हैं। यह अक्सर भरोसे की कमी, अकेलेपन, या नए अनुभवों की तलाश के कारण होता है। ऐसे मामले व्यक्तिगत असंतोष या अनसुलझे वैवाहिक मुद्दों के कारण समय-समय पर सामने आते रहते हैं।  दूसरे पुरुष से संबंध बनाने के मुख्य कारण: भावात्मक और शारीरिक असंतोष: यदि पति-पत्नी के बीच प्यार, सम्मान, या शारीरिक संतुष्टि की कमी है, तो महिला भावनात्मक समर्थन या शारीरिक जरूरतों के लिए दूसरे पुरुष की ओर आकर्षित हो सकती है। धोखाधड़ी और अनबन: वैवाहिक जीवन में लगातार झगड़े, उपेक्षा, या साथी के साथ अस्वस्थ व्यवहार (abuse) के कारण भी रिश्ते में दरार आ सकती है। नए अनुभवों की तलाश: कुछ मामलों में, एकरसता से बचने या नए अनुभवों के लिए भी ऐसे संबंध बन सकते हैं। आर्थिक कारण: कुछ मामलों में, अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी महिलाएं गैर-पुरुष से संबंध बना सकती हैं।  कब से बना रही है? यह कोई नई घटना नहीं है, यह व्यवहार जब से विवाह संस्था मौजूद है, तब से ही मौजूद हो सकता है। हालांकि, आधुनिक जीवनशैली, सोशल मीडिया, और बढ़ते हुए वैवाहिक कलह के कारण ऐसे मामलों का पता चलना अब अधिक आसान हो गया है।  निष्कर्ष विवाह में विश्वास, आपसी समझ, और सम्मान की कमी ही इन संबंधों का मुख्य कारण बनती है। यह अक्सर व्यक्तिगत असंतोष और रिश्ते में आ रही दूरियों का नतीजा होता है।
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    समाज में एक पत्नी का दूसरे पुरुष से संबंध बनाने के पीछे भावनात्मक असंतोष, शारीरिक अतृप्ति, या आपसी समझ की कमी जैसे कारण हो सकते हैं। यह अक्सर भरोसे की कमी, अकेलेपन, या नए अनुभवों की तलाश के कारण होता है। ऐसे मामले व्यक्तिगत असंतोष या अनसुलझे वैवाहिक मुद्दों के कारण समय-समय पर सामने आते रहते हैं। 
दूसरे पुरुष से संबंध बनाने के मुख्य कारण:
भावात्मक और शारीरिक असंतोष: यदि पति-पत्नी के बीच प्यार, सम्मान, या शारीरिक संतुष्टि की कमी है, तो महिला भावनात्मक समर्थन या शारीरिक जरूरतों के लिए दूसरे पुरुष की ओर आकर्षित हो सकती है।
धोखाधड़ी और अनबन: वैवाहिक जीवन में लगातार झगड़े, उपेक्षा, या साथी के साथ अस्वस्थ व्यवहार (abuse) के कारण भी रिश्ते में दरार आ सकती है।
नए अनुभवों की तलाश: कुछ मामलों में, एकरसता से बचने या नए अनुभवों के लिए भी ऐसे संबंध बन सकते हैं।
आर्थिक कारण: कुछ मामलों में, अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी महिलाएं गैर-पुरुष से संबंध बना सकती हैं। 
कब से बना रही है?
यह कोई नई घटना नहीं है, यह व्यवहार जब से विवाह संस्था मौजूद है, तब से ही मौजूद हो सकता है। हालांकि, आधुनिक जीवनशैली, सोशल मीडिया, और बढ़ते हुए वैवाहिक कलह के कारण ऐसे मामलों का पता चलना अब अधिक आसान हो गया है। 
निष्कर्ष
विवाह में विश्वास, आपसी समझ, और सम्मान की कमी ही इन संबंधों का मुख्य कारण बनती है। यह अक्सर व्यक्तिगत असंतोष और रिश्ते में आ रही दूरियों का नतीजा होता है।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    3 hrs ago
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