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गर्मी से बेहाल और बस न मिलने से परेशान कुछ महिलाओं ने एक कार्यक्रम में किसी का स्वागत किया। हालांकि, जिन महिलाओं ने यह स्वागत किया, उन्हें खुद नहीं पता था कि जिस व्यक्ति का नाम नितिन नबीन बताया जा रहा है, वे कौन हैं। इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह स्वागत उनकी अपनी इच्छा से था या फिर भीषण गर्मी और बस न मिलने की परेशानी के बीच यह केवल एक मजबूरी थी।
पत्रकार सुशील दिवाकर
गर्मी से बेहाल और बस न मिलने से परेशान कुछ महिलाओं ने एक कार्यक्रम में किसी का स्वागत किया। हालांकि, जिन महिलाओं ने यह स्वागत किया, उन्हें खुद नहीं पता था कि जिस व्यक्ति का नाम नितिन नबीन बताया जा रहा है, वे कौन हैं। इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह स्वागत उनकी अपनी इच्छा से था या फिर भीषण गर्मी और बस न मिलने की परेशानी के बीच यह केवल एक मजबूरी थी।
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