दसवें दिन भी नहीं टूटा यूजीसी विरोधी अनशन, पत्रकार वार्ता में छलका आक्रोश दिनांक 18 तारीख 1:00 आत्महत्या अवधेश उमरिया जिन्होंने बोला कि मैं आत्मा देखा करूंगा अगर मेरी मांग पूरी नहीं होती तो 💥*जिला कटनी से ज्योति तिवारी की खास खबर*💥। //6267641443//👈 अनशनकारियों ने कहा—मुद्दा किसी एक समाज का नहीं, सभी वर्गों के हित से जुड़ा; जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर जताई नाराजगी* अवधेश उरमलिया की घोषणा—18 सितंबर तक सरकार का प्रतिनिधि नहीं आया तो कलेक्ट्रेट के बाहर आत्मदाह करूंगा* कटनी। यूजीसी कानून के कथित दुरुपयोग और आरक्षण व्यवस्था के मूलभूत ढांचे में सुधार की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर चल रहा अनशन बुधवार को दसवें दिन भी जारी रहा। इसी क्रम में अनशनकारियों ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर आंदोलन की मांगों और अब तक शासन-प्रशासन की ओर से मिले प्रतिसाद को लेकर अपनी बात रखी। अनशनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी एक व्यक्ति या समाज के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिसमें सभी वर्गों के हित और अधिकार सुरक्षित रहें। पत्रकार वार्ता में अनशनकारियों ने कहा कि यूजीसी के कथित दुरुपयोग को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता है। उनका आरोप है कि कानून के तहत लगाए गए आरोपों का पर्याप्त सत्यापन किए बिना गिरफ्तारी जैसी स्थिति उत्पन्न होने से लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उन्होंने कहा कि जब देश में समानता और समान कानून की बात की जाती है, तब विभिन्न कानूनों के प्रावधानों और उनकी व्याख्या को लेकर भी स्पष्टता तथा व्यापक चर्चा जरूरी है। *'आरक्षण सुधार का मुद्दा सभी समाजों से जुड़ा'* अनशनकारियों ने कहा कि यूजीसी का विरोध अथवा आरक्षण व्यवस्था के मूलभूत ढांचे में सुधार की मांग को केवल सवर्ण समाज का मुद्दा समझना सही नहीं होगा। उनका कहना है कि आरक्षण व्यवस्था का प्रभाव समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ता है, इसलिए इस विषय पर व्यापक सामाजिक एवं संवैधानिक विमर्श होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग के अधिकारों को समाप्त करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की मांग करना है जिसमें सभी वर्गों के साथ न्याय हो। इसके लिए सरकार को संबंधित कानूनों और व्यवस्थाओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। *जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी* अनशनकारियों ने कहा कि आंदोलन को दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई विधायक या सांसद अनशन स्थल पर पहुंचकर उनकी बात सुनने नहीं आया। उन्होंने कहा कि उन्हें कम से कम यह आश्वासन मिलने की उम्मीद थी कि उनकी मांगों को संसद में चर्चा के लिए रखने अथवा पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। अनशनकारियों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की इस कथित उदासीनता से उनमें पीड़ा और निराशा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रतिनिधि अनशन स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से चर्चा करें और उनकी मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाएं। *18 सितंबर को आत्मदाह की चेतावनी* पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद के राष्ट्रीय महासचिव एवं अनशनकारी अवधेश उरमलिया ने कहा कि दस दिन बीत जाने के बाद भी उनकी मांगों को लेकर किसी विधायक या सांसद की ओर से पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि अब भी सरकार का कोई प्रतिनिधि अनशन स्थल पर नहीं पहुंचता है तो वे 18 सितंबर को कटनी कलेक्ट्रेट के बाहर आत्मदाह करने का कदम उठाएंगे। उरमलिया ने इस घोषणा के साथ कहा कि उनके द्वारा उठाए जाने वाले इस कदम की जिम्मेदारी स्थानीय जिला प्रशासन एवं स्थानीय सांसद की होगी। उनकी इस घोषणा के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी हो गई है। अनशनकारियों ने कहा कि वे सरकार से संवाद और अपनी मांगों पर चर्चा चाहते हैं। उन्होंने सरकार एवं जनप्रतिनिधियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए वार्ता की पहल करने तथा उनकी मांगों को उचित मंच पर रखने की मांग की है।
दसवें दिन भी नहीं टूटा यूजीसी विरोधी अनशन, पत्रकार वार्ता में छलका आक्रोश दिनांक 18 तारीख 1:00 आत्महत्या अवधेश उमरिया जिन्होंने बोला कि मैं आत्मा देखा करूंगा अगर मेरी मांग पूरी नहीं होती तो 💥*जिला कटनी से ज्योति तिवारी की खास खबर*💥। //6267641443//👈 अनशनकारियों ने कहा—मुद्दा किसी एक समाज का नहीं, सभी वर्गों के हित से जुड़ा; जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर जताई नाराजगी* अवधेश उरमलिया की घोषणा—18 सितंबर तक सरकार का प्रतिनिधि नहीं आया तो कलेक्ट्रेट के बाहर आत्मदाह करूंगा* कटनी। यूजीसी कानून के कथित दुरुपयोग और आरक्षण व्यवस्था के मूलभूत ढांचे में सुधार की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर चल रहा अनशन बुधवार को दसवें दिन भी जारी रहा। इसी क्रम में अनशनकारियों ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर आंदोलन की मांगों और अब तक शासन-प्रशासन की ओर से मिले प्रतिसाद को लेकर अपनी बात रखी। अनशनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी एक व्यक्ति या समाज के खिलाफ नहीं
है, बल्कि वे ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिसमें सभी वर्गों के हित और अधिकार सुरक्षित रहें। पत्रकार वार्ता में अनशनकारियों ने कहा कि यूजीसी के कथित दुरुपयोग को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता है। उनका आरोप है कि कानून के तहत लगाए गए आरोपों का पर्याप्त सत्यापन किए बिना गिरफ्तारी जैसी स्थिति उत्पन्न होने से लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उन्होंने कहा कि जब देश में समानता और समान कानून की बात की जाती है, तब विभिन्न कानूनों के प्रावधानों और उनकी व्याख्या को लेकर भी स्पष्टता तथा व्यापक चर्चा जरूरी है। *'आरक्षण सुधार का मुद्दा सभी समाजों से जुड़ा'* अनशनकारियों ने कहा कि यूजीसी का विरोध अथवा आरक्षण व्यवस्था के मूलभूत ढांचे में सुधार की मांग को केवल सवर्ण समाज का मुद्दा समझना सही नहीं होगा। उनका कहना है कि आरक्षण व्यवस्था का प्रभाव समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ता है, इसलिए इस विषय पर व्यापक
सामाजिक एवं संवैधानिक विमर्श होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग के अधिकारों को समाप्त करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की मांग करना है जिसमें सभी वर्गों के साथ न्याय हो। इसके लिए सरकार को संबंधित कानूनों और व्यवस्थाओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। *जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी* अनशनकारियों ने कहा कि आंदोलन को दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई विधायक या सांसद अनशन स्थल पर पहुंचकर उनकी बात सुनने नहीं आया। उन्होंने कहा कि उन्हें कम से कम यह आश्वासन मिलने की उम्मीद थी कि उनकी मांगों को संसद में चर्चा के लिए रखने अथवा पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। अनशनकारियों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की इस कथित उदासीनता से उनमें पीड़ा और निराशा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रतिनिधि अनशन स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से चर्चा करें और उनकी मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाएं। *18 सितंबर को आत्मदाह की चेतावनी* पत्रकार
वार्ता में अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद के राष्ट्रीय महासचिव एवं अनशनकारी अवधेश उरमलिया ने कहा कि दस दिन बीत जाने के बाद भी उनकी मांगों को लेकर किसी विधायक या सांसद की ओर से पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि अब भी सरकार का कोई प्रतिनिधि अनशन स्थल पर नहीं पहुंचता है तो वे 18 सितंबर को कटनी कलेक्ट्रेट के बाहर आत्मदाह करने का कदम उठाएंगे। उरमलिया ने इस घोषणा के साथ कहा कि उनके द्वारा उठाए जाने वाले इस कदम की जिम्मेदारी स्थानीय जिला प्रशासन एवं स्थानीय सांसद की होगी। उनकी इस घोषणा के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी हो गई है। अनशनकारियों ने कहा कि वे सरकार से संवाद और अपनी मांगों पर चर्चा चाहते हैं। उन्होंने सरकार एवं जनप्रतिनिधियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए वार्ता की पहल करने तथा उनकी मांगों को उचित मंच पर रखने की मांग की है।
- --- *🔴 कटनी में रेत माफिया बेखौफ, नियम-कानून की उड़ा रहे धज्जियां* *कटनी (MP):* कटनी जिले में अवैध रेत उत्खनन से छोटी-बड़ी नदियों का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर है। नेशनल पार्क से गुजरने वाली नदियों पर भी रेत माफिया बेखौफ उत्खनन कर वन्य प्राणियों का जीवन खतरे में डाल रहे हैं। *ताजा मामला - बरही तहसील क्षेत्र:* बांधवगढ़ नेशनल पार्क के जोन एरिया से निकलने वाली जीवनदायिनी *पिपही नदी* में बगैर अनुमति के सालों से रेत का उत्खनन चल रहा है। गांव के *दौलत मिश्रा, बहादुर सिंह, रमेश सिंह, रामजपाल सिंह, पवन चौधरी, गणेश मिश्रा, कुलजीत सिंह, पंकज सिंह* ने बताया कि बांधवगढ़ नेशनल पार्क की सीमा से निकलने वाली नदी से *LHP Merchant Pvt. Ltd.* द्वारा मनमाने तरीके से नदी के बीच धार से रेत निकाली जा रही है और बाजार में महंगे दामों पर बेची जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि रेत माफिया बगैर अनुमति लगभग *एक साल से* अवैध उत्खनन कर नदी के अस्तित्व को खत्म कर रहे हैं। रात भर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रेत का परिवहन होता है, जिससे सड़कों पर हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे ट्रैक्टर नदी के बीच से रेत लोड करके कीचड़ में फंसते हुए निकल रहे हैं। *ग्रामीणों की मांग:* जिम्मेदार अधिकारी रेत माफिया पर लगाम लगाने में नाकाम हैं, सरकार को राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जिले के मुखिया इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर नदियों और वन्य जीवों के साथ खिलवाड़ यूं ही चलता रहेगा। *एक्सप्रेस रिपोर्टर: मोहम्मद एजाज, कटनी* --- *🔴 कटनी में रेत माफिया बेखौफ, नियम-कानून की उड़ा रहे धज्जियां* *कटनी (MP):* कटनी जिले में अवैध रेत उत्खनन से छोटी-बड़ी नदियों का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर है। नेशनल पार्क से गुजरने वाली नदियों पर भी रेत माफिया बेखौफ उत्खनन कर वन्य प्राणियों का जीवन खतरे में डाल रहे हैं। *ताजा मामला - बरही तहसील क्षेत्र:* बांधवगढ़ नेशनल पार्क के जोन एरिया से निकलने वाली जीवनदायिनी *पिपही नदी* में बगैर अनुमति के सालों से रेत का उत्खनन चल रहा है। गांव के *दौलत मिश्रा, बहादुर सिंह, रमेश सिंह, रामजपाल सिंह, पवन चौधरी, गणेश मिश्रा, कुलजीत सिंह, पंकज सिंह* ने बताया कि बांधवगढ़ नेशनल पार्क की सीमा से निकलने वाली नदी से *LHP Merchant Pvt. Ltd.* द्वारा मनमाने तरीके से नदी के बीच धार से रेत निकाली जा रही है और बाजार में महंगे दामों पर बेची जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि रेत माफिया बगैर अनुमति लगभग *एक साल से* अवैध उत्खनन कर नदी के अस्तित्व को खत्म कर रहे हैं। रात भर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रेत का परिवहन होता है, जिससे सड़कों पर हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे ट्रैक्टर नदी के बीच से रेत लोड करके कीचड़ में फंसते हुए निकल रहे हैं। *ग्रामीणों की मांग:* जिम्मेदार अधिकारी रेत माफिया पर लगाम लगाने में नाकाम हैं, सरकार को राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जिले के मुखिया इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर नदियों और वन्य जीवों के साथ खिलवाड़ यूं ही चलता रहेगा। *एक्सप्रेस रिपोर्टर: मोहम्मद एजाज, कटनी*3
- पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें 70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें 70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी जबलपुर। जिस पिता ने कभी अपनी औलाद की जरूरतों के लिए मजदूरी की होगी, जिसने अपनी संतान को पालने के लिए जिंदगी के तमाम संघर्ष सहे होंगे, उसी पिता की जिंदगी का आखिरी पड़ाव रानीताल के एक डिवाइडर पर खत्म हो गया। 70 वर्षीय अशोक कुमार जैन का शव रानीताल बजरंग बली मंदिर के सामने डिवाइडर पर मिला। उनके पास उनकी बेटी अनीता कुमार जैन बैठी थी। आंखों में आंसू थे, सामने पिता का शव था और दिल में सिर्फ एक सवाल—काश, मैं अपने पिता के लिए कुछ कर पाती... अशोक कुमार की जिंदगी गरीबी और अभावों से घिरी रही। मजदूरी कर किसी तरह जीवन चलाया। पत्नी का साथ पहले ही छूट चुका था। बच्चे बड़े हुए तो अपने-अपने संसार में चले गए। बुढ़ापे में जब सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब आर्थिक तंगी ने उन्हें रानीताल में मांगकर जीवन गुजारने को मजबूर कर दिया। आखिरकार जिस सड़क किनारे वे जिंदगी के दिन काट रहे थे, वहीं उनकी जिंदगी की आखिरी सांस भी थम गई। राहगीरों ने देखा शव... पास बैठी थी बेटी रानीताल में डिवाइडर पर बुजुर्ग का शव देखकर राहगीरों ने सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जानकारी जुटाई तो शव की पहचान अशोक कुमार जैन के रूप में हुई। शव के पास उनकी बेटी अनीता बैठी थी। पिता को इस हालत में देखकर वह खुद को संभाल नहीं पा रही थी। सूचना मिलने पर गरीब नवाज कमेटी के सदस्य भी मौके पर पहुंचे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामने आने के बाद कमेटी ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। तीन बेटियां थीं... मगर अंतिम सफर में एक ही बेटी साथ थी अनीता ने बताया कि परिवार में बेटियां और बेटे हैं, लेकिन समय के साथ सभी अपने-अपने परिवारों में चले गए। उसकी दो बहनों की शादी संपन्न परिवारों में हुई। आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण पिता से उनका संपर्क कम हो गया। अनीता ने खुद अपनी पसंद से मध्यमवर्गीय बर्मन परिवार में विवाह किया। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उसने पिता से रिश्ता नहीं तोड़ा। शायद यही वजह थी कि पिता की मौत की खबर मिलते ही वह दौड़ी चली आई। लेकिन इस बार वह बेटी अपने पिता को बचाने नहीं, उन्हें आखिरी बार विदा करने आई थी। "जिस पिता ने मेरी हर जरूरत पूरी करने के लिए मेहनत की... आज मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पा रही" पिता के शव के पास बैठी अनीता की यह बात वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर गई। पिता की मौत का दुख तो था ही, लेकिन उससे बड़ा दर्द अपनी बेबसी का था। पिता के लिए बेटी की आंखों में आंसू थे, मगर जेब में अंतिम संस्कार का खर्च नहीं। डेढ़ साल की उम्र से शुरू हुआ था अनीता का संघर्ष अनीता ने बताया कि जब वह महज डेढ़ वर्ष की थी, तब गरीबी के कारण उसके मामा के परिवार ने उसे अपने घर से बाहर कर दिया था। बचपन से ही उसने अभाव देखे और संघर्ष के बीच जिंदगी गुजारी। शायद गरीबी ने दोनों—पिता और बेटी—को अलग-अलग उम्र में एक ही दर्द दिया था। फर्क सिर्फ इतना था कि पिता जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर थे और बेटी चाहकर भी उनके लिए बहुत कुछ नहीं कर पा रही थी। जब अपने कमजोर पड़े, समाज ने थामा हाथ अशोक कुमार के अंतिम संस्कार के लिए जब आर्थिक संकट सामने आया तो गरीब नवाज कमेटी आगे आई। कमेटी के सदस्यों ने शव को रानीताल मुक्ति धाम पहुंचाया और अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। बेटी अनीता ने नम आंखों से पिता को अंतिम विदाई दी। जिस पिता की जिंदगी अकेलेपन में गुजर गई, उनके अंतिम सफर में समाज का एक हाथ सहारा बन गया। एक डिवाइडर पर खत्म हुई जिंदगी... लेकिन कहानी छोड़ गई कई सवाल रानीताल का वह डिवाइडर अब सिर्फ सड़क का हिस्सा नहीं रह गया। वह एक ऐसे पिता की आखिरी कहानी का गवाह बन गया, जिसने गरीबी में जिंदगी काटी, बुढ़ापे में मांगकर गुजारा किया और आखिरकार सड़क किनारे दम तोड़ दिया। अशोक कुमार की मौत कई सवाल छोड़ गई है— क्या बुजुर्ग माता-पिता का सहारा उनकी आर्थिक स्थिति देखकर तय होगा? क्या गरीबी रिश्तों के बीच भी दीवार खड़ी कर देती है? और क्या ऐसे बेसहारा बुजुर्गों की पहचान समय रहते नहीं होनी चाहिए, ताकि उनका आखिरी वक्त सड़क किनारे अकेलेपन में न बीते? अशोक कुमार चले गए। बेटी ने अंतिम विदाई दे दी। गरीब नवाज कमेटी ने अंतिम सफर में साथ दिया। लेकिन रानीताल का वह डिवाइडर पीछे छोड़ गया एक ऐसा दर्द, जिसका जवाब शायद सिर्फ परिवार नहीं, पूरे समाज को तलाशना होगा।1
- रैपुरा _ग्राम बघवार कला में 7 दिवसीय रामधुन कार्यक्रम प्रारंभ1
- गुप्ता ऑटो एजेंसी में श्रद्धाभाव से हुई भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा अर्चना *गुप्ता आटो एजेंसी में श्रद्धाभाव से हुई भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना* *विशाल भंडारा में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद* मध्य प्रदेश उमरिया* - *निर्माण, सृजन और शिल्पकला के देवता भगवान विश्वकर्मा की जयंती समूचे जिले में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न प्रतिष्ठानों, गैरिजों एवं संस्थानों में भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मशीनों, औजारों और उपकरणों का पूजन किया गया।जिला मुख्यालय स्थित खलेसर नाका के समीप गुप्ता आटो एजेंसी में भी प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान विश्वकर्मा जयंती श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। एजेंसी के संचालक सूर्यप्रकाश गुप्ता द्वारा गैरिज परिसर में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कराई गई। पंडित द्वारा मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इसके बाद आरती, हवन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपादित हुए*,*पूजन कार्यक्रम में एजेंसी के संचालक सूर्यप्रकाश गुप्ता के साथ स्वप्निल गुप्ता एवं सिद्धार्थ गुप्ता सहित परिवारजन और कर्मचारी शामिल हुए। धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात विशाल भंडारा का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।ज्ञात हो कि परंपरा के साथ औजारों का पूजन विश्वकर्मा जयंती पर कारीगरों एवं तकनीकी कार्य से जुड़े लोगों द्वारा अपने कार्यस्थल पर औजारों और मशीनों का पूजन किया जाता है। इसी परंपरा के तहत गुप्ता आटो एजेंसी में भी कार्य में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा की गई। पूरे आयोजन के दौरान परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा*।1
- माई की रसोई संचालक धीरज पाण्डेय के नेतृत्व में धूमधाम से मनाया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन माई की रसोई संचालक धीरज पाण्डेय के नेतृत्व में धूमधाम से मनाया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मैहर। माई की रसोई के संचालक श्री धीरज पाण्डेय जी के नेतृत्व में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन उत्साह, हर्षोल्लास एवं सेवा भावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में सामाजिक सहभागिता के साथ विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मैहर भाजपा जिलाध्यक्ष श्री कमलेश सुहाने जी, श्री नितिन ताम्रकार जी एवं कटरा बाजार व्यापारी संघ के पदाधिकारियों व सदस्यों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान केक काटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन मनाया गया। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं तथा प्रधानमंत्री जी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। इसके साथ ही जरूरतमंदों को भोजन वितरित कर सेवा कार्य किया गया। श्री धीरज पाण्डेय जी ने कहा कि जन्मदिन जैसे अवसरों को सामाजिक सेवा एवं जनसहभागिता से जोड़ना समाज में सकारात्मक संदेश देता है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों में उत्साह और उल्लास का माहौल रहा। 📰 SNT News Pinch — Digital Media News Channel ✍️ संवाददाता: सत्यनारायण तिवारी1
- खबर हम देग चित्रकूट न्यूज चैनल संपादक अरुण कुमार शर्मा खास खबर बड़ी खबर आवारा कुत्तों से अनोखा विरोध - अधिकारी के केबिन में छोड़े 5 कुत्ते, टेबल पर रखी नोटों की माला लोग आवारा कुत्तों से परेशान है और उससे भी ज़्यादा स्वयंभू पशु प्रेमियों से। आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान युवा सेना के जिला प्रमुख विक्रम रंधावे ने निफाड नगर पंचायत में अनोखा प्रदर्शन किया। आरोप है कि शिकायतों के बाद भी प्रशासन निष्क्रिय है। नाराज कार्यकर्ताओं ने मुख्याधिकारी धीरज भामरे के केबिन में 4-5 आवारा कुत्ते छोड़ दिए और विरोध में उनकी टेबल पर नोटों की माला रख दी। इनका कहना है कि पूरे शहर और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या बहुत बढ़ गई है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ये कुत्ते कई नागरिकों को काट चुके हैं. बार-बार शिकायतें और लिखित आवेदन देने के बावजूद प्रशासन ने इस समस्या पर अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है। बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों की घटनाएं बढ़ने से लोगों में रोष है।1
- ब्रेकिंग - देवराकला के सरकारी स्कूल की जर्जर हालत, भ्रष्टाचार का आरोप देवराकला (कटनी) - देवराकला स्थित ओम संकुल संगठन - शासकीय कन्या शाला की इमारत आज जर्जर स्थिति में पहुंच गई है। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि पंचायत द्वारा बनाई गई ये इमारत आज तक हेडमास्टर को हैंडओवर ही नहीं की गई। क्या है मामला: - बच्चियों के लिए बना था ये स्कूल भवन, जो कन्या शाला की बाउंड्री के अंदर ही है। - पंचायत ने निर्माण कराया लेकिन आज तक सुपुर्द नहीं किया। - कमरों की हालत इतनी खराब है कि बैठने लायक भी नहीं। - स्कूल का मैदान देखिए - चारों तरफ कचरा, झाड़-झंखाड़, साफ-सफाई के नाम पर सिर्फ पैसा निकाला जा रहा है। - जनशिक्षक और संकुल प्राचार्य ने भी आवाज नहीं उठाई। 🔴 ब्रेकिंग - देवराकला के सरकारी स्कूल की जर्जर हालत, भ्रष्टाचार का आरोप देवराकला (कटनी) - देवराकला स्थित ओम संकुल संगठन - शासकीय कन्या शाला की इमारत आज जर्जर स्थिति में पहुंच गई है। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि पंचायत द्वारा बनाई गई ये इमारत आज तक हेडमास्टर को हैंडओवर ही नहीं की गई। क्या है मामला: - बच्चियों के लिए बना था ये स्कूल भवन, जो कन्या शाला की बाउंड्री के अंदर ही है। - पंचायत ने निर्माण कराया लेकिन आज तक सुपुर्द नहीं किया। - कमरों की हालत इतनी खराब है कि बैठने लायक भी नहीं। - स्कूल का मैदान देखिए - चारों तरफ कचरा, झाड़-झंखाड़, साफ-सफाई के नाम पर सिर्फ पैसा निकाला जा रहा है। - जनशिक्षक और संकुल प्राचार्य ने भी आवाज नहीं उठाई। स्थानीय लोगों का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि देवराकला पंचायत में लगातार भ्रष्टाचार हो रहा है। विकास कार्यों के नाम पर लीपापोती और ज्यादा बिल बनाए जा रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी आज तक कोई जांच नहीं हुई। मांग: शासन से अनुरोध है कि देवराकला की सभी सरकारी स्कूल बिल्डिंगों की जांच हो। जिन ठेकेदारों ने घटिया निर्माण किया है उनसे पैसा वसूल कर नई बिल्डिंग बनाई जाए ताकि बच्चियां सुरक्षित पढ़ सकें। कैमरामैन: पूरन लाल दुबे, MSSO स्वयंसेवक, देवराकला, कटनी स्थान: ओम संकुल संगठन, देवराकला2
- क्यूँ लगे राजस्व विभाग मुर्दाबाद के नारे 📍मैहर आम आदमी पार्टी प्रदेश सह सचिव उमेश चौधरी ☝️ क्यूँ लगे राजस्व विभाग मुर्दाबाद के नारे 📍मैहर आम आदमी पार्टी प्रदेश सह सचिव उमेश चौधरी ☝️1
- रीवा: गर्भवती और नवजात की मौत मामले में लेडी डॉक्टर की सेवा समाप्त, 15 दिन से अनशन पर बैठे पीड़िता के पिता को पुलिस ने उठाया रीवा (मध्य भारत न्यूज): रीवा के संजय गांधी अस्पताल में हुई गर्भवती महिला कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में 21 दिन बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया गया है। श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय ने लेडी डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त कर दी है। दूसरी ओर, अपनी बेटी और नवजात नाती को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सिरमौर चौराहे पर बीते 15 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे कल्पना के पिता रामशरण मिश्रा को बुधवार को पुलिस और प्रशासन की टीम ने धरना स्थल से जबरन हटा दिया। 15 दिन से अनशन पर थे पिता, बिगड़ी तबियत रामशरण मिश्रा लगातार 15 दिनों से सिरमौर चौराहे पर अनशन पर बैठे थे, जिससे उनकी सेहत काफी बिगड़ गई थी। बुधवार को पुलिस-प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर धरना स्थल खाली कराया और उन्हें अपने साथ ले गई। तहसीलदार शिवशंकर शुक्ला ने बताया कि सिरमौर चौराहा अत्यधिक व्यस्त क्षेत्र है, जहां लंबे समय से जारी धरने के कारण यातायात और कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही थी, इसलिए यह कदम उठाया गया। परिजनों और कांग्रेस का कड़ा विरोध पुलिस कार्रवाई के बाद परिजनों और कांग्रेस नेताओं ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि एक पिता जो अपनी बेटी और नवजात को न्याय दिलाने के लिए अनशन कर रहा था, उसकी मांग सुनने के बजाय उसे ही जबरन हटा दिया गया। वहीं परिजनों का कहना है कि सिर्फ एक डॉक्टर पर कार्रवाई से न्याय नहीं मिलेगा; मामले में लापरवाही बरतने वाले सभी जिम्मेदारों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर आपराधिक प्रकरण चलाया जाना चाहिए। 25 अगस्त को भर्ती, 26 की रात हुई थी मौत कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए 25 अगस्त को संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 26 अगस्त की रात प्रसव के दौरान उसकी और नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। डिलीवरी से पहले अस्पताल से कल्पना का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह परिजनों से मदद की गुहार लगा रही थी। वीडियो वायरल होने के बाद मामला पूरे प्रदेश में गूंज उठा था। डॉक्टर की सेवा समाप्ति का आदेश श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ विभागीय जांच पहले से लंबित थी। वर्ष 2023 में मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों से मरीजों को निजी नर्सिंग होम भेजने के आरोपों की जांच के बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी, जिसके तहत अब उनकी सेवा समाप्त की गई है। मामले में अब तक हुई कार्रवाई: दो नर्सिंग स्टाफ निलंबित: लापरवाही सामने आने पर शुरुआत में दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया। डॉक्टरों पर गाज: ड्यूटी डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल और डॉ. निधि पांडे को निलंबित किया गया था। अधीक्षक हटाए गए, डीन का तबादला: संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाया गया, जबकि मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल का तबादला सतना मेडिकल कॉलेज कर दिया गया। भोपाल से विशेष टीम: मामले की जांच के लिए भोपाल से आई विशेष टीम ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पीड़ित परिजनों के बयान दर्ज किए हैं।1