श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 18 जुलाई को देश के पहले निजी रॉकेट 'विक्रम-1' की सफल लॉन्चिंग के साथ ही सतना के युवा एयरोस्पेस इंजीनियर रत्नेंद्र सिंह ने इतिहास रच दिया है। करीब साढ़े चार वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद उनका यह सपना साकार हुआ है। लॉन्चिंग के दौरान रॉकेट की दिशा, ऑर्बिट, एल्गोरिद्म और फ्लाइट डायनेमिक्स जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं को संभालने वाली गाइडेंस, नेविगेशन एंड कंट्रोल (GNC) टीम में रत्नेंद्र ने वर्ष 2022 से लगातार अहम जिम्मेदारी निभाई। रत्नेंद्र बताते हैं कि जब वे तीसरी कक्षा में थे, तब टीवी पर रॉकेट लॉन्चिंग देखकर और भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला से प्रेरणा पाकर उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र चुनने का संकल्प लिया था। उनके पिता चाहते थे कि वे यूपीएससी पास कर आईएएस बनें, लेकिन उन्होंने अपने सपने को प्राथमिकता देते हुए रेलवे की इंजीनियर नौकरी और निजी क्षेत्र के आकर्षक पैकेज ठुकरा दिए। आईआईएसटी (भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान), तिरुवनंतपुरम से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक करने के बाद वे स्काईरूट एयरोस्पेस से जुड़े, जहाँ वे वर्तमान में GNC एवं फ्लाइट डायनेमिक्स इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। सतना जिले के कोठरा गांव के रहने वाले रत्नेंद्र के पिता पुष्पेंद्र सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और माता ऋतु सिंह गृहिणी हैं। उनकी बहन शिल्पा सिंह आईटी क्षेत्र में हैं तथा इसी वर्ष उनका विवाह स्मृता सिंह से हुआ है। विक्रम-1 मिशन की सफलता के साथ भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नया इतिहास रचने में रत्नेंद्र के इस योगदान ने उन्हें पूरे सतना जिले के लिए प्रेरणा और गौरव का प्रतीक बना दिया है।
श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 18 जुलाई को देश के पहले निजी रॉकेट 'विक्रम-1' की सफल लॉन्चिंग के साथ ही सतना के युवा एयरोस्पेस इंजीनियर रत्नेंद्र सिंह ने इतिहास रच दिया है। करीब साढ़े चार वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद उनका यह सपना साकार हुआ है। लॉन्चिंग के दौरान रॉकेट की दिशा, ऑर्बिट, एल्गोरिद्म और फ्लाइट डायनेमिक्स जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं को संभालने वाली गाइडेंस, नेविगेशन एंड कंट्रोल (GNC) टीम में रत्नेंद्र ने वर्ष 2022 से लगातार अहम जिम्मेदारी निभाई। रत्नेंद्र बताते हैं कि जब वे तीसरी कक्षा में थे, तब टीवी पर रॉकेट लॉन्चिंग देखकर और भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला से प्रेरणा पाकर उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र चुनने का संकल्प लिया था। उनके पिता चाहते थे कि वे यूपीएससी पास कर आईएएस बनें, लेकिन उन्होंने अपने सपने को प्राथमिकता देते हुए रेलवे की इंजीनियर नौकरी और निजी क्षेत्र के आकर्षक पैकेज ठुकरा दिए। आईआईएसटी (भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान), तिरुवनंतपुरम से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक करने के बाद वे स्काईरूट एयरोस्पेस से जुड़े, जहाँ वे वर्तमान में GNC एवं फ्लाइट डायनेमिक्स इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। सतना जिले के कोठरा गांव के रहने वाले रत्नेंद्र के पिता पुष्पेंद्र सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और माता ऋतु सिंह गृहिणी हैं। उनकी बहन शिल्पा सिंह आईटी क्षेत्र में हैं तथा इसी वर्ष उनका विवाह स्मृता सिंह से हुआ है। विक्रम-1 मिशन की सफलता के साथ भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नया इतिहास रचने में रत्नेंद्र के इस योगदान ने उन्हें पूरे सतना जिले के लिए प्रेरणा और गौरव का प्रतीक बना दिया है।
- सतना शहर के थाना सिटी कोतवाली अंतर्गत धवारी महादेव रोड (वार्ड क्र. 31) में अदालती आदेश को दरकिनार कर बेखौफ अवैध निर्माण और बेदखली की कोशिश का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता रेखा शुक्ला (पति प्रवीण शुक्ला) का आरोप है कि न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य पर रोक यानी यथास्थिति का आदेश जारी किए जाने के बावजूद प्रतिवादी पक्ष सरेआम आदेश का उल्लंघन कर रहा है। यह विवाद मौजा धवारी पटवारी हल्का स्थित भूखण्ड क्र. 331/1/1 (रकबा 163 मीटर) की भूमि से जुड़ा है, जो रेखा शुक्ला को धारणाधिकार के तहत आवंटित है। प्राप्त अदालती दस्तावेज के अनुसार, वार्ड क्र. 31 निवासी अनावेदकगण सुदामा कुशवाहा, विष्णु कुशवाहा और रामनरेश कोल द्वारा उक्त भूमि पर जबरन कब्जा करने, बाउंड्री वॉल बनाने और विवाद पैदा करने की नीयत से निर्माण शुरू किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी (SDM), उपखण्ड रघुराजनगर (जिला सतना) ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 164 के तहत 22/03/2026 को प्रारंभिक एवं यथास्थिति आदेश जारी किया था। अदालत ने दोनों पक्षों को अवैध कब्जा तत्काल स्थगित करने और बाउंड्री वॉल का निर्माण रोकने का स्पष्ट निर्देश दिया था। पीड़िता का आरोप है कि अदालत का स्पष्ट आदेश होने और स्थानीय पुलिस को लिखित सूचना दिए जाने के बावजूद प्रतिवादी पक्ष के हौसले बुलंद हैं और पुलिस प्रशासन बेखबर बना हुआ है। प्रतिवादियों द्वारा आदेश की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए आवंटित भूमि पर अवैध रूप से तीन टीन शेड डाल दिए गए हैं। पीड़िता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि न्यायालय के आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाए, अवैध निर्माण को तुरंत हटवाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।1
- सतना जिले के बिरसिंहपुर क्षेत्र में एक युवती ने बृजेश प्रजापति नामक युवक पर शादी का झांसा देकर करीब दो वर्षों तक शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि बाद में उसे जानकारी मिली कि युवक पहले से शादीशुदा है। सच्चाई सामने आने के बाद पीड़िता ने शाहपुर थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी को हिरासत में ले लिया है। यह मामला पुलिस में दर्ज शिकायत पर आधारित है तथा आरोपों की पुष्टि न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगी।1
- चित्रकूट के कर्वी–पहाड़ी राजपुर मार्ग पर स्थित अशोह के तालाब के पास एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहाँ लोहे की छड़ ले जा रहे एक रिक्शे को पीछे से आ रही अर्टिगा कार ने जोरदार टक्कर मार दी। रिक्शा चालक के अनुसार, सुरक्षा के लिहाज से लोहे की छड़ों के पीछे लाल कपड़ा भी बांधा गया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार चालक चलते समय वाहन में कुछ ठीक करने के लिए नीचे झुक गया था, जिसके कारण उसका ध्यान सड़क से हट गया और यह दुर्घटना हो गई। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई और न ही कोई जनहानि हुई। हालांकि, कार की टक्कर से रिक्शा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और घटनास्थल पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। घटना के बाद वाहन चलाते समय सड़क पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित रखने का संदेश दिया गया है, क्योंकि जरा सी लापरवाही भी किसी बड़े हादसे का रूप ले सकती है।1
- सरकारी भर्ती परीक्षाओं, परीक्षा में देरी और पूरी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवा अपनी माँगों को लेकर लगातार आवाज़ उठा रहे हैं और भर्ती व्यवस्था के खिलाफ जमकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर अभ्यर्थियों के जुटान को देखते हुए मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है, वहीं विभिन्न समाचार चैनल भी इस पूरे घटनाक्रम की कवरेज में लगे हुए हैं।1
- श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 18 जुलाई को देश के पहले निजी रॉकेट 'विक्रम-1' की सफल लॉन्चिंग के साथ ही सतना के युवा एयरोस्पेस इंजीनियर रत्नेंद्र सिंह ने इतिहास रच दिया है। करीब साढ़े चार वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद उनका यह सपना साकार हुआ है। लॉन्चिंग के दौरान रॉकेट की दिशा, ऑर्बिट, एल्गोरिद्म और फ्लाइट डायनेमिक्स जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं को संभालने वाली गाइडेंस, नेविगेशन एंड कंट्रोल (GNC) टीम में रत्नेंद्र ने वर्ष 2022 से लगातार अहम जिम्मेदारी निभाई। रत्नेंद्र बताते हैं कि जब वे तीसरी कक्षा में थे, तब टीवी पर रॉकेट लॉन्चिंग देखकर और भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला से प्रेरणा पाकर उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र चुनने का संकल्प लिया था। उनके पिता चाहते थे कि वे यूपीएससी पास कर आईएएस बनें, लेकिन उन्होंने अपने सपने को प्राथमिकता देते हुए रेलवे की इंजीनियर नौकरी और निजी क्षेत्र के आकर्षक पैकेज ठुकरा दिए। आईआईएसटी (भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान), तिरुवनंतपुरम से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक करने के बाद वे स्काईरूट एयरोस्पेस से जुड़े, जहाँ वे वर्तमान में GNC एवं फ्लाइट डायनेमिक्स इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। सतना जिले के कोठरा गांव के रहने वाले रत्नेंद्र के पिता पुष्पेंद्र सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और माता ऋतु सिंह गृहिणी हैं। उनकी बहन शिल्पा सिंह आईटी क्षेत्र में हैं तथा इसी वर्ष उनका विवाह स्मृता सिंह से हुआ है। विक्रम-1 मिशन की सफलता के साथ भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नया इतिहास रचने में रत्नेंद्र के इस योगदान ने उन्हें पूरे सतना जिले के लिए प्रेरणा और गौरव का प्रतीक बना दिया है।1
- प्रदेशभर में चलाए जा रहे "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" अभियान के बीच रीवा के अमहिया थाना क्षेत्र से एक कथित मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी पर नशे की हालत में रहने और अभद्र व अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगा है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटना को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा बेहद तेज है। मामले के सामने आने के बाद अब निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है। मांग की जा रही है कि आरोप सही साबित होने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय ही नहीं, बल्कि वैधानिक कार्रवाई भी की जाए। फिलहाल सभी की निगाहें जांच और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।1
- पन्ना जिले के रेपुरा क्षेत्र से जुड़ा एक मामला सामने आया है।1