बच्चों के भविष्य से खिलवाड़? फुलकाहा स्कूल में लैब भवन निर्माण में अनियमितता का आरोप, लागत बताने से इनकार रंजीत ठाकुर। नरपतगंज प्रखंड के सरस्वती विद्या निकेतन कुन-कुन देवी उच्च विद्यालय, फुलकाहा में भारत सरकार की योजना के तहत निर्माणाधीन लैब भवन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने भवन निर्माण में कथित तौर पर भारी अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल हो रही लोहे की छड़, गिट्टी, बालू और सीमेंट के मिश्रण की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, जिस लैब भवन का निर्माण विद्यार्थियों को बेहतर एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है, उसके निर्माण में ही गुणवत्ता से कथित समझौता किया जा रहा है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। योजना बोर्ड तक नहीं लगाया गया निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर योजना की कुल लागत, कार्य अवधि, निर्माण एजेंसी, संवेदक और तकनीकी पदाधिकारी से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि निर्माण कार्य में पारदर्शिता बनी रहे। ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इस लैब भवन के निर्माण की कुल लागत कितनी है और निर्माण कार्य किस एजेंसी या संवेदक के माध्यम से कराया जा रहा है? आरोप है कि संबंधित लोगों से जानकारी मांगने के बावजूद लागत और योजना से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं बताई जा रही है। शिक्षा विभाग के जेई अमित कुमार ने जानकारी देने से किया इनकार मामले को लेकर शिक्षा विभाग के जेई अमित कुमार से निर्माण कार्य की लागत, गुणवत्ता और योजना से संबंधित जानकारी लेने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों के आरोप और निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं होने के संबंध में पूछे जाने पर जेई अमित कुमार ने मामले में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इससे ग्रामीणों के बीच निर्माण कार्य की पारदर्शिता को लेकर सवाल और गहरा गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों से निर्माण कार्य की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच के साथ-साथ योजना की स्वीकृत राशि, प्राक्कलन और निर्माण मानकों की भी जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यह महज एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों बच्चों के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य में किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की शिकायत और निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों के बाद शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन मामले की जांच कराता है या नहीं।
बच्चों के भविष्य से खिलवाड़? फुलकाहा स्कूल में लैब भवन निर्माण में अनियमितता का आरोप, लागत बताने से इनकार रंजीत ठाकुर। नरपतगंज प्रखंड के सरस्वती विद्या निकेतन कुन-कुन देवी उच्च विद्यालय, फुलकाहा में भारत सरकार की योजना के तहत निर्माणाधीन लैब भवन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने भवन निर्माण में कथित तौर पर भारी अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल हो रही लोहे की छड़, गिट्टी, बालू और सीमेंट के मिश्रण की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, जिस लैब भवन का निर्माण विद्यार्थियों को बेहतर एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है, उसके निर्माण में ही गुणवत्ता से कथित समझौता किया जा रहा है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। योजना बोर्ड तक नहीं लगाया गया निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर योजना की कुल लागत, कार्य अवधि, निर्माण एजेंसी, संवेदक और तकनीकी पदाधिकारी से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि निर्माण कार्य में पारदर्शिता बनी रहे। ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इस लैब भवन के निर्माण की कुल लागत कितनी है और निर्माण कार्य किस एजेंसी या संवेदक के माध्यम से कराया जा रहा है? आरोप है कि संबंधित लोगों से जानकारी मांगने के बावजूद लागत और योजना से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं बताई जा रही है। शिक्षा विभाग के जेई अमित कुमार ने जानकारी देने से किया इनकार मामले को लेकर शिक्षा विभाग के जेई अमित कुमार से निर्माण कार्य की लागत, गुणवत्ता और योजना से संबंधित जानकारी लेने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों के आरोप और निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं होने के संबंध में पूछे जाने पर जेई अमित कुमार ने मामले में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इससे ग्रामीणों के बीच निर्माण कार्य की पारदर्शिता को लेकर सवाल और गहरा गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों से निर्माण कार्य की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच के साथ-साथ योजना की स्वीकृत राशि, प्राक्कलन और निर्माण मानकों की भी जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यह महज एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों बच्चों के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य में किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की शिकायत और निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों के बाद शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन मामले की जांच कराता है या नहीं।
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