ओबरा सी परियोजना में हरे-भरे पेड़ों पर चली आरी VIP रोड पर 10 से अधिक पेड़ काटे जाने का आरोप, अनुमति पर उठे सवाल—‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के बीच हरियाली पर कुठाराघात? सोनभद्र ओबरा सी परियोजना के VIP रोड पर बाउंड्री के समीप हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है। आरोप है कि यहां 10 से अधिक पेड़ों को काट दिया गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन पेड़ों को काटने की अनुमति किस स्तर से दी गई? स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार और प्रशासन ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों के जरिए पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परियोजना क्षेत्र में खड़े हरे-भरे पेड़ों पर आरी चलने की शिकायत सामने आ रही है। पेड़ों की कटाई पर उठ रहे हैं कई बड़े सवाल ❓ क्या पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से विधिवत अनुमति ली गई थी? ❓ क्या ओबरा सी परियोजना के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी थी? ❓ यदि अनुमति नहीं ली गई, तो इतने पेड़ आखिर किसके आदेश पर काटे गए? ❓ कटे हुए पेड़ों की लकड़ी कहां गई और उसका रिकॉर्ड क्या है? ❓ क्या पूरे मामले की मौके पर जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी? मामले को लेकर मांग उठ रही है कि वन विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से स्थल का निरीक्षण कर पेड़ों की संख्या, प्रजाति, कटाई की अनुमति तथा लकड़ी के निस्तारण की जांच करें। यदि पेड़ों की कटाई नियमों के विपरीत पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। ‘एक पेड़ मां के नाम’… और दूसरी ओर पेड़ों पर आरी! सरकार पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए लगातार अभियान चला रही है। ऐसे में ओबरा सी परियोजना क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों की कटाई का आरोप कई गंभीर सवाल खड़े करता है। विकास जरूरी है, लेकिन क्या विकास की कीमत हरे-भरे पेड़ों को काटकर चुकाई जाएगी? स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी सोनभद्र और वन विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में कब तक जांच कर सच्चाई सामने लाता है और यदि पेड़ों की कटाई अवैध पाई जाती है तो दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
ओबरा सी परियोजना में हरे-भरे पेड़ों पर चली आरी VIP रोड पर 10 से अधिक पेड़ काटे जाने का आरोप, अनुमति पर उठे सवाल—‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के बीच हरियाली पर कुठाराघात? सोनभद्र ओबरा सी परियोजना के VIP रोड पर बाउंड्री के समीप हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है। आरोप है कि यहां 10 से अधिक पेड़ों को काट दिया गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन पेड़ों को काटने की अनुमति किस स्तर से दी गई? स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार और प्रशासन ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों के जरिए पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परियोजना क्षेत्र में खड़े हरे-भरे पेड़ों पर आरी चलने की शिकायत सामने आ रही है। पेड़ों की कटाई पर उठ रहे हैं कई बड़े सवाल ❓ क्या पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से विधिवत अनुमति ली गई थी? ❓ क्या ओबरा सी परियोजना के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी थी? ❓ यदि अनुमति नहीं ली गई, तो इतने पेड़ आखिर किसके आदेश पर काटे गए? ❓ कटे हुए पेड़ों की
लकड़ी कहां गई और उसका रिकॉर्ड क्या है? ❓ क्या पूरे मामले की मौके पर जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी? मामले को लेकर मांग उठ रही है कि वन विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से स्थल का निरीक्षण कर पेड़ों की संख्या, प्रजाति, कटाई की अनुमति तथा लकड़ी के निस्तारण की जांच करें। यदि पेड़ों की कटाई नियमों के विपरीत पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। ‘एक पेड़ मां के नाम’… और दूसरी ओर पेड़ों पर आरी! सरकार पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए लगातार अभियान चला रही है। ऐसे में ओबरा सी परियोजना क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों की कटाई का आरोप कई गंभीर सवाल खड़े करता है। विकास जरूरी है, लेकिन क्या विकास की कीमत हरे-भरे पेड़ों को काटकर चुकाई जाएगी? स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी सोनभद्र और वन विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में कब तक जांच कर सच्चाई सामने लाता है और यदि पेड़ों की कटाई अवैध पाई जाती है तो दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
- ओबरा सी परियोजना में हरे-भरे पेड़ों पर चली आरी VIP रोड पर 10 से अधिक पेड़ काटे जाने का आरोप, अनुमति पर उठे सवाल—‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के बीच हरियाली पर कुठाराघात? सोनभद्र ओबरा सी परियोजना के VIP रोड पर बाउंड्री के समीप हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है। आरोप है कि यहां 10 से अधिक पेड़ों को काट दिया गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन पेड़ों को काटने की अनुमति किस स्तर से दी गई? स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार और प्रशासन ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों के जरिए पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परियोजना क्षेत्र में खड़े हरे-भरे पेड़ों पर आरी चलने की शिकायत सामने आ रही है। पेड़ों की कटाई पर उठ रहे हैं कई बड़े सवाल ❓ क्या पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से विधिवत अनुमति ली गई थी? ❓ क्या ओबरा सी परियोजना के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी थी? ❓ यदि अनुमति नहीं ली गई, तो इतने पेड़ आखिर किसके आदेश पर काटे गए? ❓ कटे हुए पेड़ों की लकड़ी कहां गई और उसका रिकॉर्ड क्या है? ❓ क्या पूरे मामले की मौके पर जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी? मामले को लेकर मांग उठ रही है कि वन विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से स्थल का निरीक्षण कर पेड़ों की संख्या, प्रजाति, कटाई की अनुमति तथा लकड़ी के निस्तारण की जांच करें। यदि पेड़ों की कटाई नियमों के विपरीत पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। ‘एक पेड़ मां के नाम’… और दूसरी ओर पेड़ों पर आरी! सरकार पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए लगातार अभियान चला रही है। ऐसे में ओबरा सी परियोजना क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों की कटाई का आरोप कई गंभीर सवाल खड़े करता है। विकास जरूरी है, लेकिन क्या विकास की कीमत हरे-भरे पेड़ों को काटकर चुकाई जाएगी? स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी सोनभद्र और वन विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में कब तक जांच कर सच्चाई सामने लाता है और यदि पेड़ों की कटाई अवैध पाई जाती है तो दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।2
- अवधूत भगवान राम प्राथमिक विद्यालय रेणुकूट के बच्चों की सुंदर पहल पर्यावरण के प्रति जागरूकता आई बच्चों ने किया पौधरोपण, अपने बच्चों को वृक्ष लगाने के लिए जागरूक करे ,1
- दो किलोमीटर सड़क पर गड्ढों का राज, ग्रामीणों ने किया जोरदार प्रदर्शन दो किलोमीटर सड़क पर गड्ढों का राज, ग्रामीणों ने किया जोरदार प्रदर्शन रोड नहीं तो वोट नहीं” के नारों से गूंजा मुडिसेमर, तत्काल सड़क निर्माण की मांग विंढमगंज/सोनभद्र। विकासखंड दुद्धी के अंतर्गत ग्राम पंचायत मुडिसेमर की अम्बेडकर बस्ती एवं कुशवाहा बस्ती से होकर झारखंड बॉर्डर तक जाने वाली करीब दो किलोमीटर ग्रामीण सड़क बदहाल स्थिति में पहुंच गई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो जाने से नाराज दर्जनों ग्रामीणों ने रमेश चंद्र एडवोकेट के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन कर सड़क निर्माण की मांग की।मौके पर मौजूद रमेश चंद्र एडवोकेट ने कहा कि सरकार एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कर रही है, वहीं इस मार्ग की बीते करीब 10 वर्षों से मरम्मत नहीं होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सड़क की बदहाली से आमजन के साथ विद्यालय जाने वाले छात्र-छात्राओं को भी आवागमन में काफी दिक्कत होती है।ग्रामीण सुधीर पासवान ने कहा कि इस मार्ग के आसपास करीब सैकड़ों परिवार निवास करते हैं और प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं बच्चे इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। सड़क पर गड्ढों के कारण आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने “रोड नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाते हुए चेतावनी दी कि जल्द सड़क निर्माण नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उमाशंकर शर्मा ने कहा कि ग्राम प्रधान सहित कई जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को सड़क की समस्या के संबंध में कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बरसात के दिनों में सड़क के बड़े गड्ढों में करीब तीन से चार फीट तक पानी भर जाता है, जिससे राहगीरों के गिरकर चोटिल होने का खतरा बना रहता है।ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं प्रशासन से मांग की कि जनहित को देखते हुए सड़क की तत्काल मरम्मत कराकर आवागमन सुचारु कराया जाए।प्रदर्शन के दौरान कामेश्वर कुशवाहा, गुलाम मोहम्मद, मुन्नू हवाई, उमेश पासवान, पूरन पासवान, अशोक पासवान, संजय यादव, हृदय कुशवाहा, राजेंद्र हवाई, चंद्रिका साहू, मुन्नीलाल भारती, रामेश्वर कुशवाहा, गोपाल कुशवाहा, उदय कुशवाहा, राजकुमार कुशवाहा, प्रभु कुशवाहा, नंदलाल कुशवाहा, अनिल कुशवाहा, अमित यादव, मुरली यादव, कृष्णा पासवान, लाल बहादुर पासवान, सोनू कुशवाहा, पूर्व बीडीसी राजेश पाल, प्रमोद कुशवाहा, रंजन कुमार समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।1
- दुद्धी में गुरु माता रीना देवी के आवास पर पहुंचीं महामंडलेश्वर माँ किरन नंदगिरि, सनातन धर्म की एकता का दिया संदेश पूजा-अर्चना के बाद धर्म प्रचार एवं सनातन संस्कृति को मजबूत करने पर हुई चर्चा दुद्धी में गुरु माता रीना देवी के आवास पर पहुंचीं महामंडलेश्वर माँ किरन नंदगिरि, सनातन धर्म की एकता का दिया संदेश पूजा-अर्चना के बाद धर्म प्रचार एवं सनातन संस्कृति को मजबूत करने पर हुई चर्चा2
- विंध्य की प्राकृतिक पहचान हैं चार जलधाराएं , चचाई, क्योटी, पूर्वा और बहुती जलप्रपात -जहाँ चट्टानों से उतरता है प्रकृति का संगीत! सिंगरौली/रीवा विंध्य की धरती केवल अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैभव के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अद्भुत प्राकृतिक संपदा के लिए भी जानी जाती है। जिले के चचाई, क्योटी, पूर्वा और बहुती जलप्रपात प्रकृति की ऐसी अनमोल धरोहर हैं, जो बरसात के मौसम में अपने पूरे शबाब पर दिखाई देते हैं। चचाई जलप्रपात बीहड़(बीहर )नदी पर निर्मित यह जलप्रपात अपनी ऊंचाई और मनोरम प्राकृतिक दृश्य के लिए प्रसिद्ध है। वर्षा ऋतु में जब पानी चट्टानों से वेग के साथ नीचे गिरता है, तो आसपास का पूरा क्षेत्र जलधारा की गर्जना और धुंध से जीवंत हो उठता है। महाना नदी की जलधारा से निर्मित क्योटी जल प्रपात अपनी प्राकृतिक गहराई और विहंगम दृश्य के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऊंची चट्टानों के बीच गिरती जलधारा विंध्य के अनगढ़ सौंदर्य की अद्भुत तस्वीर प्रस्तुत करती है। टोंस (टमस) नदी से संबंधित यह जलप्रपात रीवा की प्राकृतिक सुंदरता का महत्वपूर्ण केंद्र है। बरसात में इसका विस्तृत जलप्रवाह और आसपास की हरियाली पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बन जाती है। वहीं बहुती जलप्रपात , सेलार (ओड्डा) नदी की विशाल जलधारा और ऊंची चट्टानों के कारण विंध्य क्षेत्र के प्रमुख प्राकृतिक आकर्षणों में शामिल है। मानसून में इसका स्वरूप बेहद भव्य हो जाता है और आसपास का वनांचल इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देता है। पर्यटन की अपार संभावनाएँ रीवा के ये चारों जलप्रपात केवल प्राकृतिक सौंदर्य के केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय पर्यटन, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास की बड़ी संभावनाएँ भी समेटे हुए हैं। आवश्यकता है कि इन स्थलों पर सुरक्षित पहुंच मार्ग, स्वच्छता, पर्यटक सुविधाएँ, सूचना केंद्र और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। चचाई, क्योटी, पूर्वा और बहुती ये सिर्फ जलप्रपात नहीं, बल्कि विंध्य की धरती पर प्रकृति द्वारा लिखी गई चार खूबसूरत इबारतें हैं, जिन्हें पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित किया जाना चाहिए। ..........1
- 🕯️ ब्रेकिंग | सोनभद्र बिल्ली मारकुंडी के खैरटिया में दिवंगत बसपा नेता एवं पूर्व विधायक उमाशंकर सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यकर्ताओं ने उनके संघर्ष, जनसेवा, पार्टी के प्रति निष्ठा और गरीबों-बेटियों के हित में किए कार्यों को याद किया। कार्यकर्ताओं ने उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। #Sonbhadra #BSP #UmashankarSingh #श्रद्धांजलि1