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ब्राह्मण समाज की आवाज: मऊगंज कलेक्ट्रेट में कलेक्टर को ज्ञापन
विंध्य वसुंधरा समाचार
ब्राह्मण समाज की आवाज: मऊगंज कलेक्ट्रेट में कलेक्टर को ज्ञापन
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- रीवा। जिला रीवा के मनगवां विधानसभा क्षेत्र में शासकीय जमीनों पर कथित अतिक्रमण और भू-माफियाओं की सक्रियता को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे ने कहा है कि “मनगवां विधानसभा आरक्षित जरूर है, लेकिन अनाथ नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान जनप्रतिनिधियों और राजस्व विभाग के मैदानी अमले की कथित मिलीभगत से स्कूल, अस्पताल, थाना परिसर सहित अन्य शासकीय संस्थाओं की कीमती जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रची जा रही है। कंप्यूटर खसरे में हेरफेर का आरोप श्री पांडे का कहना है कि कंप्यूटराइज्ड खसरा रिकॉर्ड में हेरफेर कर कई शासकीय और निजी संस्थाओं के नाम जानबूझकर गायब किए गए हैं, जिससे भू-माफियाओं को अवैध लाभ मिल रहा है। उन्होंने इसे योजनाबद्ध तरीके से सरकारी संपत्तियों को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश बताया। गढ़ थाना परिसर की भूमि पर संकट ताजा मामला गढ़ थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। संजय पांडे के अनुसार, गढ़ पटवारी हल्का की भूमि क्रमांक 77, जिसका कुल रकबा लगभग 1 एकड़ 62 डिसमिल है और जो बाजार के मध्य स्थित है, उसे भू-परिवर्तन के जरिए हड़पने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस भूमि के एक हिस्से में बालक हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित है, जबकि दूसरे हिस्से में पुराना थाना भवन एवं पुलिस क्वार्टर बने हुए हैं, जहां वर्तमान में भी पुलिसकर्मी निवासरत हैं। इसके बावजूद इस बहुमूल्य शासकीय जमीन के स्वरूप को बदलने की प्रक्रिया चिंता का विषय है। सत्ता और भू-माफियाओं के गठजोड़ का आरोप सामाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि रीवा शहर में सक्रिय रहे भू-माफिया अब प्रदेश की राजनीति के एक प्रमुख चेहरे के संरक्षण में ग्रामीण अंचलों की ओर रुख कर चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी शासकीय या सामाजिक संस्था की भूमि पर कब्जे का प्रयास किया गया, तो जनता चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में राजस्व न्यायालय से लेकर हाई कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल संजय पांडे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में शासकीय संस्थाएं अपनी ही भूमि बचाने के लिए प्रभावी पैरवी नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि भूमि परिवर्तन करने वालों के पास यह स्पष्ट आंकड़े तक नहीं हैं कि भविष्य में शासकीय कार्यालय और संस्थाएं कहां स्थापित की जाएंगी। यदि यही स्थिति बनी रही, तो रीवा जिला मुख्यालय जैसी अव्यवस्था आने वाले समय में ग्रामीण अंचलों में भी देखने को मिलेगी। इतिहास और जनचेतना का हवाला उन्होंने सत्ताधारी दल को मनगवां के गौरवशाली राजनीतिक इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि इस क्षेत्र ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई है और यहां के नेताओं ने कई बार भाजपा को संबल दिया है। उन्होंने कहा कि मनगवां का हर नागरिक जागरूक है और भू-माफियाओं के मंसूबों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या संज्ञान लेता है और शासकीय भूमियों के संरक्षण के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।4