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राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है और इसके लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। चुनावी हलचल के बीच राज्य में आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
Rakesh Kumar Swami
राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है और इसके लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। चुनावी हलचल के बीच राज्य में आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
More news from राजस्थान and nearby areas
- जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान छात्रों को खाना बांटने वाले जुनैद को 24 जुलाई की रात दिल्ली पुलिस उठाकर उत्तराखंड ले गई। पुलिस ने पूरी रात उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर रखा। अगली सुबह एक अधिकारी ने जुनैद से पूछताछ की कि उन्हें फंडिंग कहां से आती है और वे इतना खाना कैसे बांट रहे हैं। इसके बाद वे जुनैद को मसूरी में छोड़कर चले गए, जहां से जुनैद 25 जुलाई को कैब करके वापस दिल्ली आ गए।1
- जयपुर के राजविलास होटल के पास गोनर रोड पर स्थित भगवान विहार (पिन कोड 302031) में सड़कों का पूरी तरह अभाव है। पूरी कॉलोनी में एक भी सड़क नहीं बनी है और जगह-जगह बहुत सारा गंदा पानी जमा हो रहा है, जिससे लोग भारी परेशानी झेल रहे हैं। स्थानीय निवासियों में शासन और प्रशासन की इस उपेक्षा को लेकर गहरा रोष है। निवासियों का कहना है कि इस गंभीर स्थिति पर ना तो क्षेत्रीय पार्षद कोई ध्यान दे रहे हैं और ना ही विधायक कोई सुनवाई कर रहे हैं। सरकार की तरफ से भी कॉलोनी की इस बदहाली पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है।1
- जयपुर में पुलिस द्वारा सड़क किनारे खड़ी एक गाड़ी का चालान काटे जाने का मामला सामने आया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस अधिकारी द्वारा अपनाए गए नियमों और मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर किस नियम के तहत यह कार्रवाई की गई है। सड़क किनारे पार्क वाहनों पर हुई इस पुलिसिया कार्रवाई और इसके कानूनी पहलुओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।1
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष की प्रतिक्रिया सामने आई है।1
- बस्सी क्षेत्र स्थित पाटन लालपुरा के बूथ संख्या 111 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम के 136वें संस्करण का आयोजन किया गया। भाजपा पूर्वी मंडल बासखोह बस्सी के तहत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहाँ स्थानीय कार्यकर्ता और नागरिक प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने एकत्र हुए। इस दौरान भाजपा नेता चंद्र मोहन मीणा, महामंत्री रामनारायण शर्मा, महामंत्री कन्हैया लाल मीणा, बूथ अध्यक्ष रामस्वरूप शर्मा और सरपंच प्रतिनिधि नारायण मौजूद रहे। इनके अलावा रेवड शर्मा, रामजीलाल शर्मा, कल्याणसहाय मीणा, रामू मीणा, कन्हैया लाल शर्मा, मोहनलाल शर्मा, सागरमल मीणा, राधेश्याम शर्मा, बहादुर मीणा, भजनलाल शर्मा, महेश शर्मा, बनवारी लाल शर्मा, शिव सहाय शर्मा, विजय मीणा, सत्यनारायण मीणा, पवन शर्मा और चंद्र प्रकाश मीणा समेत काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।3
- बस्सी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पाटन लालपुरा के निवासी को जन्मदिन के अवसर पर ढेर सारी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी गई हैं।1
- राज्य सरकार के निर्देशानुसार दौसा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में 27 और 28 जुलाई को ग्रामीण सेवा शिविर अभियान के तहत फॉलो-अप शिविर आयोजित किए जाएंगे। अतिरिक्त जिला कलक्टर अरविंद शर्मा ने बताया कि इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य आमजन की समस्याओं का मौके पर ही समाधान करना है। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी पात्र व्यक्तियों को उपलब्ध कराया जाएगा। सोमवार, 27 जुलाई को बांदीकुई की भांवता-भांवती, बसवा की केसरीसिंह पुरा, सिकराय की दुब्बी व फर्राशपुरा, महवा की गहनोली, मंडावर की धौलखेड़ा, लालसोट की लाडपुरा व सवांसा तथा रामगढ़ पचवारा की कल्लावास ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर शिविरों का आयोजन होगा। इसी क्रम में मंगलवार, 28 जुलाई को दौसा की खैरवाल, बांदीकुई की रलावता, बसवा की पाड़ला, सिकराय की रामगढ़ व नाहरखोहरा, महवा की हड़िया, मंडावर की महुखुर्द, लालसोट की लाखनपुर और चौंडियावास, नांगल राजावतान की खवारावजी, रामगढ़ पचवारा की गांग्लायवास, लवाण की खानपुरा तथा सैंथल पंचायत समिति की सैंथल ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर शिविर आयोजित किए जाएंगे।1
- असम में बाढ़ का कहर जारी है, जहाँ अब तक 61 लोगों की जान जा चुकी है और 7 लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। राज्य के 856 से अधिक गांव अब भी पानी में डूबे हुए हैं। घर बह गए हैं और बेजुबान जानवरों की मौत हो गई है, जिससे लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। इसके अलावा 56,000 हेक्टेयर से ज़्यादा फसल बर्बाद हो चुकी है और 1.15 लाख से अधिक लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली है। प्रभावित क्षेत्रों में सेना, NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन लगातार राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं, लेकिन कई इलाकों तक सहायता पहुँचाना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस संकट की घड़ी में असम की पुकार पूरे देश तक पहुँचाने का आह्वान किया जा रहा है। अगर लोग आर्थिक मदद करने में असमर्थ हैं, तो कम से कम उनकी आवाज़ बन सकते हैं ताकि हर जगह यह सवाल पहुँचे कि क्या उनकी आवाज़ कोई सुनेगा।1