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#गांव ढाना नरसान के सरकारी स्कूल में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के तत्वाधान में किया पौधारोपण #गांव ढाना नरसान के सरकारी स्कूल में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के तत्वाधान में किया पौधारोपण
DHAKAD HAI HARYANA
#गांव ढाना नरसान के सरकारी स्कूल में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के तत्वाधान में किया पौधारोपण #गांव ढाना नरसान के सरकारी स्कूल में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के तत्वाधान में किया पौधारोपण
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- हरियाणा पुलिस के एएसआई की बेटी का कॉमनवेल्थ गेम में गोल्डन पंच, 54 किलो भार वर्ग में जीता गोल्ड मेडल। हरियाणा पुलिस के एएसआई की बेटी का कॉमनवेल्थ गेम में गोल्डन पंच, 54 किलो भार वर्ग में जीता गोल्ड मेडल। कनाडा की कर लेते नल गार्डों के खिलाफ शानदार जीत पहली बार जीता गोल्ड मेडल,2024 में बीमारी के कारण नही जीत पाई मेडल,अब की उपलब्धि हासिल। मूल रूप से भिवानी के रहने वाली प्रीति पवार पिता के साथ कई वर्षों से रह रही रोहतक जिले के महम में कस्बे में, बॉक्सर चाचा से ली प्रेरणा। कोरोना के दौरान रात भर करती थी अभ्यास 5 साल में बाद में परिणाम कॉमनवेल्थ में जीता गोल्ड। भारतीय बॉक्सर प्रीति पवार खीर चूरमा और ड्राई फ्रूट के लड्डू की शौकीन मां और बहन ने कहा जमकर खिलाएंगे चूरमा। हरियाणा पुलिस में तैनात पिता सोमबीर ने कहा,मर मर कर जीते है खिलाड़ी,जीतोड़ करते है मेहनत। प्रीति पवार के चाचा भी रह चुके हैं बॉक्सर प्रीति ने चाचा से बॉक्सिंग के लिए ट्रेनिंग। कॉमनवेल्थ गेम में अब तक भारत के 6 गोल्ड मेडल,बेटियो ने मारी बाजी। खीर,चूरमा और ड्राई फ्रूट की शौकीन,व कोरोना काल में रात भर जागकर मेहनत करने वाली हरियाणा की बेटी ने एक बार फिर देश का नाम दुनिया में रोशन कर दिया है। रोहतक के महम में रहने वाली भारतीय बॉक्सर प्रीति पवार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 54 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया है। फाइनल मुकाबले में प्रीति ने कनाडा की मजबूत प्रतिद्वंद्वी को हराकर गोल्ड पर कब्जा जमाया। यह उनके करियर का पहला कॉमनवेल्थ गोल्ड है, जिसे हासिल करने के लिए उन्होंने वर्षों तक कड़ी मेहनत और संघर्ष किया। प्रीति पवार के गोल्ड मेडल लेने पर हरियाणा पुलिस के जवान पिता व मां और बहन के साथ पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है प्रीति मूल रूप से भिवानी की रहने वाली हैं, लेकिन उनके पिता हरियाणा पुलिस में एएसआई के पद पर तैनात हैं और परिवार कई वर्षों से रोहतक जिले के महम कस्बे में रह रहा है। प्रीति को बचपन से ही बॉक्सिंग का माहौल मिला। उनके चाचा भी बॉक्सर रह चुके हैं और उन्हीं से प्रेरणा लेकर प्रीति ने मुक्केबाजी की दुनिया में कदम रखा। चाचा ने शुरुआती दौर में उन्हें प्रशिक्षण भी दिया, जिसने उनकी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई।प्रीति की सफलता के पीछे कड़ी मेहनत की लंबी कहानी है। कोरोना काल के दौरान जब खेल गतिविधियां लगभग बंद थीं, तब भी उन्होंने रात-रात भर अभ्यास जारी रखा। लगातार पांच वर्षों की मेहनत और अनुशासन का ही परिणाम है कि आज उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वर्ष 2024 में बीमारी के कारण वह पदक जीतने से चूक गई थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इस बार गोल्ड जीतकर अपने सपने को साकार कर दिखाया। बेटी की इस ऐतिहासिक जीत से परिवार में जश्न का माहौल है। मां और बहन ने खुशी जताते हुए कहा कि प्रीति को खीर, चूरमा और ड्राई फ्रूट के लड्डू बेहद पसंद हैं, इसलिए घर पहुंचते ही उसका पसंदीदा खाना बनाकर जीत का जश्न मनाया जाएगा वहीं, पिता एएसआई सोमबीर ने कहा कि खिलाड़ी जीत यूं ही नहीं हासिल करते, बल्कि "मर-मर कर" मेहनत करते हैं और वर्षों की तपस्या के बाद यह मुकाम मिलता है। प्रीति की इस उपलब्धि के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के गोल्ड मेडल की संख्या छह हो गई है, जिनमें बेटियों का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है। एक बार फिर हरियाणा की बेटी ने साबित कर दिया कि मेहनत, हौसले और जुनून के दम पर दुनिया की कोई भी चुनौती जीती जा सकती है।1
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