गरीबी की मार: “बच्चों को भूखा सुलाते हैं” — महंगाई और कम आय ने तोड़ी आम आदमी की कमर ★★★★★★★★★★★★★★★★★★ रिपोर्ट :- शशिकान्त व्हाट्सऐप :- 9621210326 ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ संडीला/हरदोई। देश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के दावों के बीच जमीनी हकीकत एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही है। एक निजी कर्मचारी की दर्दभरी जुबानी हालात की गंभीरता को बयां करती है। वह कहता है, “हम अपने बच्चों को भूखा सुलाते हैं, सीने से लगाकर लोरी सुनाते हैं ताकि उन्हें भूख का एहसास न हो।” महज 10 हजार रुपये की मामूली सैलरी में परिवार चलाना उसके लिए रोज़ की जंग बन चुका है। वहीं, एक मजदूर महिला की आपबीती व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। महिला का आरोप है कि पुलिस की मारपीट से वह बुरी तरह घायल हो गई। रोते हुए वह कहती है, “अगर काम पर नहीं जाएंगे तो घर में खाना कौन खिलाएगा? मेरे पास दवाई के भी पैसे नहीं हैं।” यह कहते-कहते वह फूट-फूटकर रोने लगती है। ये घटनाएं समाज के उस तबके की सच्चाई उजागर करती हैं, जो हर दिन संघर्ष कर रहा है, लेकिन उसकी आवाज़ अक्सर दबकर रह जाती है। महंगाई का बोझ: अगर एक सामान्य परिवार (हम दो—हमारे दो) के मासिक खर्च पर नजर डालें, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है— दूध: ₹1800 नाश्ता (सुबह-शाम): ₹1200 गैस सिलेंडर: ₹950 बिजली बिल: ₹1000 स्कूल फीस: ₹800 बच्चों की कॉपी-पेंसिल व अन्य खर्च: ₹1000 हरी सब्जियां: ₹500 आलू, प्याज, लहसुन: ₹1000 राशन (तेल, मसाले, चावल, दाल): ₹3000 आने-जाने का खर्च: ₹700 सामान्य बीमारी: ₹300 कुल अनुमानित खर्च: ₹12,250 प्रति माह इन आंकड़ों से साफ है कि एक सामान्य परिवार का खर्च 10-12 हजार रुपये से कहीं अधिक है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की आय इससे भी कम है। बढ़ती खाई पर सवाल: स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिकों और प्रभावशाली वर्ग के संरक्षण के चलते मजदूरों और गरीबों के अधिकारों का हनन हो रहा है। नतीजतन, अमीर और ज्यादा अमीर होता जा रहा है, जबकि गरीब और अधिक कमजोर होता जा रहा है। निष्कर्ष: देश की तरक्की के बड़े-बड़े दावों के बीच यह सवाल उठना लाजमी है कि आम आदमी को उसका हक आखिर कब मिलेगा? क्या व्यवस्था इस बढ़ती असमानता को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएगी, या फिर गरीब यूं ही दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करता रहेगा? महंगाई की मार से जनता परेशान...? आखिर जवाब कौन देगा?
गरीबी की मार: “बच्चों को भूखा सुलाते हैं” — महंगाई और कम आय ने तोड़ी आम आदमी की कमर ★★★★★★★★★★★★★★★★★★ रिपोर्ट :- शशिकान्त व्हाट्सऐप :- 9621210326 ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ संडीला/हरदोई। देश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के दावों के बीच जमीनी हकीकत एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही है। एक निजी कर्मचारी की दर्दभरी जुबानी हालात की गंभीरता को बयां करती है। वह कहता है, “हम अपने बच्चों को भूखा सुलाते हैं, सीने से लगाकर लोरी सुनाते हैं ताकि उन्हें भूख का एहसास न हो।” महज 10 हजार रुपये की मामूली सैलरी में परिवार चलाना उसके लिए रोज़ की जंग बन चुका है। वहीं, एक मजदूर महिला की आपबीती व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। महिला का आरोप है कि पुलिस की मारपीट से वह बुरी तरह घायल हो गई। रोते हुए वह कहती है, “अगर काम पर नहीं जाएंगे तो घर में खाना कौन खिलाएगा? मेरे पास दवाई के भी पैसे नहीं हैं।” यह कहते-कहते वह फूट-फूटकर रोने लगती है। ये घटनाएं समाज के उस तबके की सच्चाई उजागर करती हैं, जो हर दिन संघर्ष कर रहा है, लेकिन उसकी आवाज़ अक्सर दबकर रह जाती है। महंगाई का बोझ: अगर एक
सामान्य परिवार (हम दो—हमारे दो) के मासिक खर्च पर नजर डालें, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है— दूध: ₹1800 नाश्ता (सुबह-शाम): ₹1200 गैस सिलेंडर: ₹950 बिजली बिल: ₹1000 स्कूल फीस: ₹800 बच्चों की कॉपी-पेंसिल व अन्य खर्च: ₹1000 हरी सब्जियां: ₹500 आलू, प्याज, लहसुन: ₹1000 राशन (तेल, मसाले, चावल, दाल): ₹3000 आने-जाने का खर्च: ₹700 सामान्य बीमारी: ₹300 कुल अनुमानित खर्च: ₹12,250 प्रति माह इन आंकड़ों से साफ है कि एक सामान्य परिवार का खर्च 10-12 हजार रुपये से कहीं अधिक है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की आय इससे भी कम है। बढ़ती खाई पर सवाल: स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिकों और प्रभावशाली वर्ग के संरक्षण के चलते मजदूरों और गरीबों के अधिकारों का हनन हो रहा है। नतीजतन, अमीर और ज्यादा अमीर होता जा रहा है, जबकि गरीब और अधिक कमजोर होता जा रहा है। निष्कर्ष: देश की तरक्की के बड़े-बड़े दावों के बीच यह सवाल उठना लाजमी है कि आम आदमी को उसका हक आखिर कब मिलेगा? क्या व्यवस्था इस बढ़ती असमानता को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएगी, या फिर गरीब यूं ही दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करता रहेगा? महंगाई की मार से जनता परेशान...? आखिर जवाब कौन देगा?
- ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ मुजफ्फरनगर। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक VIP कार्यक्रम के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक दरोगा नशे की हालत में सड़क पर पड़े मिले। वीडियो में देखा जा सकता है कि दरोगा चौबे सिंह कथित तौर पर शराब के नशे में जमीन पर लेटे हुए हैं और ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे। इसी दौरान एक सिपाही उनसे कहता सुनाई देता है— “तुम खड़े कहां हो, पड़े हो”, जिस पर दरोगा जवाब देते हैं— “मुझे ये बताओ, मैं कहां पे खड़ा हूं।” इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दरोगा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान इस तरह की लापरवाही और अनुशासनहीनता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मामले की जांच भी कराई जा रही है। नोट :- हम इस वीडियो की और घटना की पुष्टि नही करते है, वायरल विडियो है।1
- Post by Anoopshukla1
- संविधान के रचियता डॉ0 भीमराव अंबेडकर जी की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई गईं cp maurya मानवी समय न्यूज़ हरदोई जनपद के संडीला नगर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती के अवसर पर भव्य एवं विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया। यह शोभायात्रा इमलियाबाग मैनचेस्टर मैदान से प्रारंभ होकर सदर बाजार होते हुए बेगमगंज में सम्पन्न हुई। शोभायात्रा के दौरान नगर के विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया। छोटा चौराहा पर हसन मक्की एवं समस्त सभासदों द्वारा स्वागत किया गया, वहीं किला मार्केट के पास पूर्व सभासद लताफत द्वारा भव्य स्वागत किया गया। गल्ला मंडी के पास उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष दिनेश सिंह, शुभम गुप्ता एवं अनुराग त्रिपाठी के नेतृत्व में शोभायात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में मनोज कुमार गौतम (अध्यक्ष), बबलू कुमार (सभासद उपाध्यक्ष), मनोज कुमार बौद्ध (महामंत्री), सरोज कुमार गौतम (कोषाध्यक्ष) सहित अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा सतीश कार्यक्रम सफल बनाने के लिए संडीला कोतवाली प्रभारी विद्यासागर पाल के नेतृत्व में इस कार्यक्रम सफल बनाने में पुलिस महकमा नजर आया भारतीय संविधान के निर्माता, भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती (14 अप्रैल 2026) पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। सामाजिक समानता, ज्ञान और सामाजिक न्याय के प्रतीक बाबासाहेब के विचार हमें एक सशक्त व समतावेशी भारत बनाने के लिए सदैव प्रेरित करते रहें।शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो! बाबासाहेब के इन महान विचारों के साथ अंबेडकर। आइए उनके आदर्शों को अपनाएं। समता, स्वतंत्रता एवं न्याय बंधुत्ता के प्रबल समर्थक डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को कोटि-कोटि नमन। संविधान निर्माता को सलाम, जिन्होंने हमें समानता का अधिकार दिया।समाज में न कोई छोटा है न कोई बड़ा है सभी एक समान है जैसा कि उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में लिखा है "We, the People of India" यानि कि हम सब पूरा समाज जिसमें हर वर्ग है सभी भारतीय है और एक समान है बाबासाहेब के विचारों का सार: सामाजिक समरसता और समानता। शिक्षा को नारी सशक्तिकरण का हथियार मानना। न्यायपूर्ण समाज का निर्माण । पुनः आप सभी को बाबा साहब डॉ.भीम राव अंबेडकर जयंती "जीवन लंबा नहीं, महान होना चाहिए।" - डॉ. भीमराव शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा वह दहाड़ेगा1
- Post by शुभम तिवारी भरावन हरदोई1
- अज्ञात कारणों से लगी आग में 2 बीघा गेहूं की फसल राख बांगरमऊ थाना क्षेत्र के गंजमुरादाबाद स्थित नवयुग स्कूल के समीप स्थित गेहूं की फसल में अज्ञात कारणों से आग लग गई।इसके चलते तीन किसानों की खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। आसपास के लोगों ने काफी मशक्त के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की।सफलता न मिलने पर दमकल विभाग को सूचना दी गई.मौके पर पहुंची दमकल विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया. किसान कोतवाली क्षेत्र के ग्राम फतेहपुर हमजा निवासी अब्दुल यामीन पुत्र उमराव अली,हसीन पुत्र हनीफ,रुकसाना पत्नी हनीफ, शरीफ़ पुत्र हनीफ आदि परिवारों का इकलौता यही सहारा था.18-18 बिस्वा जमीन में गेहूं की फसल बोई थी.जो अब जलकर स्वाहा हो चुकी हैं। सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और आग लगने के कारणों की जांच में जुट गई है। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि कामिल कुरैशी ने बताया कि वह संबंधित अधिकारियों को फोन कर मुआवजा दिलाने की मांग की है। वही हल्का लेखपाल ने नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट तहसील प्रशासन को सौंप दी है।2
- अंबेडकर जयंती पर सभासद रतीराम गौतम मंच पर थिरके,लोगों का दिल जीता, शाहाबाद हरदोई भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135 वीं जयंती के अवसर पर सम्पन्न हुए कार्यक्रम में सभासद रतीराम गौतम ने मंच पर नृत्य कर सभी को चकित कर दिया।बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद नगरिया में सैकड़ों लोगों ने रात को रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम “जय भीम” के नारों से रात भर गूंजता रहा। गांवों से भी बड़ी संख्या में लोगों महिलाओं और बच्चों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही।अम्बेडकर समिति के अध्यक्ष एवं सभासद रतीराम ने मंच पर जमकर डांस किया।जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो सका। इस अवसर पर रतीराम,रघुवीर चौधरी,रामचंद्र,अम्बेद,राजेश, वेदप्रकाश सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।1
- Post by Sandeep Pasi1
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