गोरखपुर में पिछले कुछ दिनों से हो रही बरसात ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है और शहर में हुए गंभीर जलभराव को लेकर सोशल मीडिया पर अधिकारियों की जमकर आलोचना हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी स्थिति नहीं देखने को मिली थी, जिसके कारण जलभराव से निपटने की तैयारियों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे। यहाँ तक कि सदर सांसद रविकिशन गोरखपुर शहर की तुलना स्पेन जैसे देश से कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पिछले दौरे पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि किसी भी परिस्थिति में जलभराव नहीं होना चाहिए, जिस पर अधिकारियों ने उन्हें पूरी तैयारी का भरोसा भी दिलाया था। लेकिन बारिश होते ही पूरा शहर जलमग्न हो गया और इस विफलता की गूंज लखनऊ तक पहुँचने के बाद अब अधिकारी चौबीसों घंटे सड़कों पर नजर आ रहे हैं। शहर में नालों और नालियों का बड़े पैमाने पर निर्माण तो हुआ है, लेकिन उनके स्लोप (ढलान) को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। स्लोप की जाँच के लिए काफी शोर-शराबे के साथ लिडार सर्वे कराया गया था और दो साल तक इस पर खूब चर्चा चली थी कि सभी नालियों का स्लोप इसी सर्वे के अनुसार दुरुस्त किया जाएगा। हालांकि, आज तक इस सर्वे का क्या उपयोग हुआ यह स्पष्ट नहीं है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी आज पूरा गोरखपुर पानी में डूब चुका है और अधिकारी अब भी इस समस्या का स्थाई समाधान तलाश रहे हैं।
गोरखपुर में पिछले कुछ दिनों से हो रही बरसात ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है और शहर में हुए गंभीर जलभराव को लेकर सोशल मीडिया पर अधिकारियों की जमकर आलोचना हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी स्थिति नहीं देखने को मिली थी, जिसके कारण जलभराव से निपटने की तैयारियों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे। यहाँ तक कि सदर सांसद रविकिशन गोरखपुर शहर की तुलना स्पेन जैसे देश से कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पिछले दौरे पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि किसी भी परिस्थिति में जलभराव नहीं होना चाहिए, जिस पर अधिकारियों ने उन्हें पूरी तैयारी का भरोसा भी दिलाया था। लेकिन बारिश होते ही पूरा शहर जलमग्न हो गया और इस विफलता की गूंज लखनऊ तक पहुँचने के बाद अब अधिकारी चौबीसों घंटे सड़कों पर नजर आ रहे हैं। शहर में नालों और नालियों का बड़े पैमाने पर निर्माण तो हुआ है, लेकिन उनके स्लोप (ढलान) को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। स्लोप की जाँच के लिए काफी शोर-शराबे के साथ लिडार सर्वे कराया गया था और दो साल तक इस पर खूब चर्चा चली थी कि सभी नालियों का स्लोप इसी सर्वे के अनुसार दुरुस्त किया जाएगा। हालांकि, आज तक इस सर्वे का क्या उपयोग हुआ यह स्पष्ट नहीं है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी आज पूरा गोरखपुर पानी में डूब चुका है और अधिकारी अब भी इस समस्या का स्थाई समाधान तलाश रहे हैं।
- संसद में संजय सिंह को पुलिस द्वारा खड़े होने से रोके जाने का मामला सामने आया है। संसद परिसर के भीतर पुलिसकर्मियों ने उन्हें खड़े होने से रोक दिया।1
- उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में तीन दिनों से नहर में फंसी एक गर्भवती गंगा डॉल्फिन को बचाने के लिए सोमवार को एक बड़ा रेस्क्यू अभियान चलाया गया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद इस गर्भवती डॉल्फिन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए वन विभाग, गोरखपुर पुलिस, सिंचाई विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर और विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर काम किया। डॉल्फिन को नहर से बाहर निकालने के बाद, उसे उसके प्राकृतिक आवास राप्ती नदी तक जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए भटहट से राजघाट तक करीब 52 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। पुलिस की कड़ी निगरानी में डॉल्फिन एम्बुलेंस बिना किसी रुकावट के सिर्फ 1 घंटे 5 मिनट में राप्ती नदी पहुंच गई, जहां उसे सुरक्षित छोड़ दिया गया। इस पूरे रेस्क्यू अभियान का संचालन उत्तर प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा बेमुरी और मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर बी.सी. ब्रह्मा के निर्देशन में किया गया। इस अभियान को सफल बनाने में गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर वन विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर, टीएसए फाउंडेशन इंडिया, सिंचाई विभाग और गोरखपुर पुलिस की टीमों ने मिलकर काम किया।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और उन पर हुई पुलिस की लाठीचार्ज व आंसू गैस की कार्रवाई के बीच तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं। बिना सबूत के किए जा रहे दावों को खारिज करते हुए सीधे तौर पर पूछा गया है कि "आँख खोलकर देखिए... क्या ये छात्र नहीं दिख रहे?"। लोगों से बिना सबूत के कोई राय न बनाने और केवल तथ्यों के आधार पर ही अपनी बात रखने की जोरदार अपील की जा रही है। इस पूरे मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भी उल्लेख किया गया है, जहाँ छात्रों के अधिकारों और उनके लिए न्याय की मांग को लेकर आवाज उठाई जा रही है।1
- कुशीनगर जिले के कसया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पोस्ट सिरसिया खोहिया (टोला खुरकुचनी) में सड़क सुधार और दोनों तरफ नाला बनाने की मांग की गई है। यहां सड़क की स्थिति को सुधारने और उसके दोनों ओर नाले का निर्माण कराने की बात कही गई है, ताकि लोगों को किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।1
- क्या आपने कभी मेट्रो में सफर करते समय वहां सुनाई देने वाली आवाज को ध्यान से सुना है? अगर हाँ, तो आज आप देख सकते हैं कि मेट्रो के भीतर गूंजने वाली यह आवाज आखिरकार किसकी है।1
- पार्लियामेंट मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। इस घटना को लेकर डिंपल यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। लाठीचार्ज की इस कार्रवाई के बाद से राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्म हो गया है।1
- उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला गया है। कार्यक्रम में वक्ता ने कड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि ये दोनों दल विकास, विरासत, गांव और गरीबों के विरोधी हैं। इसके साथ ही, उन्होंने इन दोनों दलों को किसानों, नौजवानों और महिलाओं का जन्मजात विरोधी भी करार दिया। वक्ता ने लोगों को आगाह किया कि देश और प्रदेश के विकास के लिए जनता को ऐसे राजनीतिक दलों से पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता है। वक्ता ने दावा किया कि उनकी पार्टी गांव, गरीब, किसान, नौजवान और महिलाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और जनकल्याणकारी योजनाओं को लगातार आगे बढ़ा रही है। उन्होंने जनता से विकास और सुशासन की नीतियों का खुलकर समर्थन करने की अपील की। इसके साथ ही, उन्होंने लोगों से राजनीतिक दलों के कार्यों और नीतियों का सही मूल्यांकन कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सजग भूमिका निभाने का आह्वान किया।1
- गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रवि किशन शुक्ल ने सोमवार को संसद भवन में भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट की। इस बैठक के दौरान सांसद ने गोरखपुर जनपद और पूर्वांचल से जुड़े रक्षा मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से सांसद रवि किशन ने गोरखपुर एयरपोर्ट के विस्तार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने रक्षा मंत्री को बताया कि लगातार बढ़ती यात्री संख्या, क्षेत्र के तीव्र आर्थिक विकास और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर हवाई संपर्क सुनिश्चित करने के लिए एयरपोर्ट का जल्द से जल्द विस्तार किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही, उन्होंने रक्षा मंत्रालय से संबंधित अन्य जनहित के विषयों और स्थानीय समस्याओं की ओर भी रक्षा मंत्री का ध्यान आकर्षित किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई तथा समुचित परीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जनहित से जुड़े इन विषयों पर सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का आश्वासन भी दिया है।1