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“पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है, क्या मुस्लिम महिलायें आधी आबादी में नहीं आतीं? - माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
Dinesh yadav
“पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है, क्या मुस्लिम महिलायें आधी आबादी में नहीं आतीं? - माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
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- Post by Dinesh yadav1
- अजीत मिश्रा (खोजी) विशेष रिपोर्ट: राजधानी में 'हनी ट्रैप' का खौफनाक खेल, खाकी की मुस्तैदी से बेनकाब हुआ गिरोह! ब्यूरो रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश (लखनऊ) सफेदपोशों का काला खेल: पत्रकारिता और समाजसेवा की आड़ में चल रहा था उगाही का साम्राज्य। ठाकुरगंज पुलिस की बड़ी कामयाबी: फर्जी 'मसीहाओं' के दबाव को ठुकरा कर बेनकाब किया हनी ट्रैप गिरोह। योगी राज में जीरो टॉलरेंस: नाबालिग से दरिंदगी और ब्लैकमेलिंग करने वाली आतिका पर POCSO के तहत शिकंजा। फर्जी वीडियो बनाम पुख्ता सबूत: कैमरे में कैद हुई 25 लाख की रंगदारी, अब सलाखों के पीछे होगा गिरोह। लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का ठाकुरगंज इलाका इन दिनों एक ऐसी साजिश का गवाह बना है, जिसने रिश्तों और इंसानियत दोनों को शर्मसार कर दिया है। एक तरफ 16 साल का मासूम नाबालिग लड़का और दूसरी तरफ उसे अपनी जाल में फंसाकर फरार होने वाली शातिर महिला—यह मामला महज एक 'फरार' होने की कहानी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'हनी ट्रैप' और उगाही (Extortion) के काले साम्राज्य का पर्दाफाश है। साजिश का चेहरा: आतिका सिद्दीकी और उसका सिंडिकेट पुलिस की गहन जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी महिला आतिका सिद्दीकी पर अब POCSO (पास्को), दुष्कर्म और रंगदारी जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हो चुका है। पुलिस के मुताबिक, यह कोई अकेली महिला का कृत्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा गिरोह काम कर रहा है। डिजिटल साक्ष्यों का मायाजाल और पुलिस की चुनौतियां जांच में यह बात भी उभरकर सामने आई है कि गिरोह न केवल शारीरिक रूप से बल्कि डिजिटल स्पेस में भी बेहद सक्रिय था। नाबालिग को विश्वास में लेने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया गया और फिर उन्हीं चैट्स और वीडियो को हथियार बनाकर ब्लैकमेलिंग शुरू की गई। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, 'हनी ट्रैप' के ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर 'साइकोलॉजिकल मैनिपुलेशन' का सहारा लेते हैं, जिससे पीड़ित और उसका परिवार लोक-लाज के डर से पुलिस के पास जाने में हिचकिचाता है। तथाकथित 'चौथे स्तंभ' पर दाग इस मामले ने उन स्वयंभू पत्रकारों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगा दिया है, जो यूट्यूब और फेसबुक जैसे पोर्टल्स के जरिए गिरोह को 'कवर' दे रहे थे। सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब इन तथाकथित पत्रकारों के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उगाही की रकम का कितना हिस्सा इन 'रक्षक' बने 'भक्षकों' की जेब में जा रहा था। कानूनी शिकंजा: सख्त धाराओं का प्रावधान पुलिस प्रशासन ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। दर्ज की गई धाराओं के तहत गिरोह के सदस्यों को कड़ी सजा मिलना तय माना जा रहा है: POCSO एक्ट: चूंकि पीड़ित नाबालिग है, इसलिए पास्को की धाराएं आरोपियों के लिए जमानत की राह मुश्किल कर देंगी। गैंगस्टर एक्ट की संभावना: गिरोह के संगठित स्वरूप को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में इन पर 'गैंगस्टर एक्ट' के तहत भी कार्रवाई हो सकती है, जिससे इनकी अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की कुर्की की जा सके। सामाजिक सरोकार: क्या कहते हैं विशेषज्ञ? मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोर उम्र के बच्चों को ऐसे गिरोह आसानी से निशाना बनाते हैं क्योंकि इस उम्र में वे भावनात्मक रूप से अस्थिर होते हैं। "अभिभावकों को अपने बच्चों की डिजिटल गतिविधियों और अचानक आए व्यवहारिक बदलावों पर नजर रखने की सख्त जरूरत है। संवाद ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे बच्चों को ऐसे जाल में फंसने से बचाया जा सकता है।" राजधानी के लिए एक चेतावनी लखनऊ के ठाकुरगंज की यह घटना महज एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राजधानी के सभ्य समाज के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। यह दिखाती है कि कैसे अपराधी अब तकनीक और फेक प्रोपेगेंडा का इस्तेमाल कर कानून को चुनौती दे रहे हैं। मुख्यमंत्री की 'अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश' की नीति के तहत, अब जनता की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या वे सफेदपोश मददगार भी सलाखों के पीछे जाएंगे जो इस काले खेल के असली सूत्रधार हैं? लखनऊ पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस तरह के ब्लैकमेल या हनी ट्रैप का शिकार होता है, तो वह डरे बिना सामने आए। आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्य बातें: 25 लाख की डिमांड और 'कैमरा' गवाही: पीड़ित मां का आरोप है कि गिरोह के सदस्य उनसे 25 लाख रुपये की मोटी रकम मांग रहे थे। ताज्जुब की बात यह है कि यह पूरी सौदेबाजी और रंगदारी मांगने का खेल कैमरे में भी कैद हो चुका है, जो अब पुलिस के पास अहम सबूत है। फर्जी 'मसीहा' और तथाकथित पत्रकार: इस मामले का सबसे वीभत्स पहलू यह है कि इस गिरोह को कुछ फर्जी सामाजिक कार्यकर्ता और तथाकथित पत्रकार संरक्षण दे रहे हैं। ये लोग सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो वायरल कर पुलिस पर दबाव बनाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे। योगी सरकार और पुलिस की कार्रवाई: पीड़ित मां ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि महिला द्वारा पहले लगाए गए तमाम आरोप पूरी तरह आधारहीन और फर्जी थे। इसी के बाद पुलिस ने शिकंजा कसते हुए आतिका और उसके मददगारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समीक्षात्मक नजरिया (Critical View): क्या समाज में अब अपराधी इतने निडर हो गए हैं कि वे कानून के रक्षकों (पुलिस) को ही सोशल मीडिया के जरिए डराने का प्रयास करेंगे? 'पत्रकारिता' और 'समाजसेवा' जैसे पवित्र शब्दों की आड़ में हनी ट्रैप का धंधा चलाने वाले इन सफेदपोश अपराधियों पर कठोरतम कार्रवाई समय की मांग है। बड़ा सवाल: आखिर कब तक फर्जी वीडियो और सोशल मीडिया ट्रायल के जरिए सच को दबाने की कोशिश होती रहेगी? फिलहाल, आतिका सिद्दीकी और उसका पूरा गिरोह पुलिस की रडार पर है। लखनऊ पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही 'हनी ट्रैप' का यह पूरा सिंडिकेट सलाखों के पीछे होगा। ब्यूरो रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश न्याय की आस, सच का साथ।1
- 🙏👍1
- Post by Ramjeet Verma1
- उप्र में101से 30 अप्रैल 26 तक विशेष संचारी रोग निवारण अभियान चल रहा है जिसमें की अनेक मच्छरों से मलेरिया आदि से यदि बुखार आए तो तुरंत अपने नजदीकी जिला अस्पताल में इलाज करवाये ।।।।।। ।।आज सुबह टाइम्स टीम।।। रिपोर्टिंग Lal Chand Soni।।। लखनऊ ।।।1
- राशन में मिला कंकड़ पत्थर जनता को बनाया जा रहा है बेवकूफ जनता के साथ किया जा रहा है फ्रॉड 💙💙🇮🇳🇮🇳2
- अयोध्या जिले में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा हाईस्कूल में विद्यार्थियों ने मारी बाजी गरीब किसान मोहन कुमार दूबे के पुत्र अप्रमेय दूबे द्वारा हाईस्कूल सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में 95प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपने माता पिता व परिवार के चेहरे पर खुशियां बिखेरी ग्रामीण इलाके से प्रतिभा शाली छात्र द्वारा ज्योति पब्लिक स्कूल बीकापुर अयोध्या से शिक्षा ग्रहण कर परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक लाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया इंजीनियर बनकर देश व समाज की सेवा करना चाहता है अप्रमेय दूबे,परीक्षा फल घोषित होने के बाद परीक्षाफल की जानकारी होते ही परिजनों द्वारा अप्रमेय दूबे को फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया गया और मिठाई खिलाकर उत्साह वर्धन किया गया,उत्साह वर्धन करने वालों में पिता मोहन दूबे,माता पुष्पा, राजीव दूबे एडवोकेट,पति,पत्नी, व बहन शामिल रही,शिक्षा व परीक्षाफल के बारे में अप्रमेय दूबे,माता पुष्पा व पिता मोहन कुमार दूबे द्वारा जानकारी दी गई।1
- अजीत मिश्रा (खोजी) "गैस एजेंसी या दलालों का अड्डा? कलवारी में सिस्टम पंगु, जनता बेहाल!" एजेंसी या 'भ्रष्टाचार का अड्डा'? बस्ती में भरत सरल गैस एजेंसी का काला खेल बेनकाब! उज्ज्वला के अरमानों पर पानी फेरता कलवारी का 'गैस सिंडिकेट', प्रशासन आखिर मौन क्यों? धूप में जलती जनता, दफ्तर में सोते अधिकारी: कलवारी में गैस के लिए हाहाकार! "गैस चाहिए तो दलाल लाओ!" – भरत सरल गैस एजेंसी की खुली मनमानी। बस्ती मंडल की शर्मनाक तस्वीर: धूप में बिलखते बच्चे और सिलेंडर के लिए तरसती मां! दलाली के चक्रव्यूह में फंसी कलवारी की जनता, क्या डीएम बस्ती करेंगे एक्शन? ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश दिनांक: 16 अप्रैल, 2026 स्थान: कलवारी, बस्ती कलवारी (बस्ती): एक तरफ सरकार 'उज्ज्वला' के दम पर गरीबों के चूल्हे जलाने का दम भरती है, तो दूसरी तरफ बस्ती जिले के कलवारी स्थित 'भरत सरल गैस एजेंसी' में यह दम घुटता नजर आ रहा है। यहाँ अव्यवस्था का आलम यह है कि गरीब जनता सुबह की पहली किरण के साथ ही लाइन में लग जाती है, लेकिन शाम ढलने तक उनके हाथ लगती है तो सिर्फ मायूसी और पसीना। धूप में जलती जनता, दलालों की चाँदी! भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में घंटों भूखे-प्यासे खड़े उपभोक्ताओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है। स्थानीय लोगों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि एजेंसी के भीतर 'दलाल राज' हावी है। आम आदमी जो कतार में खड़ा है, उसे "स्टॉक खत्म" का बोर्ड दिखा दिया जाता है, जबकि पिछले दरवाजे से दलाल बेखौफ होकर सिलेंडर पार कर रहे हैं। बड़ा सवाल: क्या गैस एजेंसी के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना यह 'काला खेल' मुमकिन है? आखिर क्यों गरीब के हक पर डाका डालने वाले इन दलालों पर नकेल नहीं कसी जा रही? प्रशासन की चुप्पी पर खड़े होते सवाल जनता का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन नतीजा 'सिफर' रहा। ऐसा लगता है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे या उग्र प्रदर्शन का इंतजार कर रहे हैं।मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं: अघोषित वेटिंग: सुबह से शाम तक लाइन लगवाने के पीछे की मंशा क्या है? दलाल सक्रियता: दलालों को प्राथमिकता और आम जनता को दुत्कार क्यों? सुविधाओं का अभाव: क्या एजेंसी परिसर में पीने के पानी या छाँव की कोई व्यवस्था है? पसीने से लथपथ बुजुर्ग और बिलखते बच्चे: यह कैसी व्यवस्था? अप्रैल की इस झुलसा देने वाली गर्मी में, जहाँ पारा 40 डिग्री के पार जा रहा है, वहाँ कलवारी की सड़कों पर लगी यह लंबी कतार प्रशासन की नाकामी की गवाही दे रही है। इस लाइन में कोई 70 साल का बुजुर्ग अपनी लाठी टेक कर खड़ा है, तो कोई महिला अपने दूधमुंहे बच्चे को आंचल में छिपाए घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रही है। लेकिन विडंबना देखिए, घंटों के इस 'अग्निपरीक्षा' के बाद भी जब उपभोक्ता काउंटर तक पहुँचता है, तो उसे सर्द जवाब मिलता है— "गैस खत्म हो गई है, कल आना।" दलाली का 'नेक्सस': पर्दे के पीछे का काला सच स्थानीय लोगों का आरोप है कि एजेंसी के भीतर एक समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है। पहुंच वाले 'खास' लोग: कतार में लगे गरीब को जो सिलेंडर 'नसीब' नहीं हो रहा, वही सिलेंडर दलालों के जरिए ऊंचे दामों पर कालाबाजारी के लिए पिछले दरवाजे से निकाल दिया जाता है। मिलीभगत का खेल: सूत्रों की मानें तो एजेंसी प्रबंधन और स्थानीय दलालों के बीच एक गहरा गठजोड़ है। दलाल बीच में आकर न केवल कतार तोड़ते हैं, बल्कि गैस की कृत्रिम किल्लत पैदा करके आम जनता को परेशान करते हैं ताकि वे मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर सिलेंडर खरीदें। सरकारी दावों की उड़ी धज्जियाँ एक तरफ देश के प्रधानमंत्री 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) की बात करते हैं, डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन कलवारी की इस एजेंसी पर आकर सारे दावे दम तोड़ देते हैं। यहाँ न तो पानी की व्यवस्था है, न बैठने का कोई शेड, और न ही कतार को व्यवस्थित करने के लिए कोई सुरक्षाकर्मी। उपभोक्ता यहाँ इंसान नहीं, बल्कि भेड़-बकरियों की तरह हांक दिए जाते हैं। प्रशासनिक मौन: क्या रसूखदारों के आगे नतमस्तक है विभाग? हैरानी की बात यह है कि दिनदहाड़े हो रही इस लूट और अव्यवस्था की जानकारी स्थानीय पुलिस और रसद विभाग (Supply Department) को भी है, फिर भी उनकी 'रहस्यमयी चुप्पी' कई सवाल खड़े करती है। क्या अधिकारियों को जनता की तकलीफें नजर नहीं आतीं? क्या जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाएगी? गरीबों के हक का निवाला छीनने वाली इस एजेंसी का लाइसेंस आखिर रद्द क्यों नहीं किया जाता? अब आर-पार की लड़ाई! भरत सरल गैस एजेंसी के बाहर जमा हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटों के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और दलालों के प्रवेश पर प्रतिबंध नहीं लगा, तो वे तहसील मुख्यालय का घेराव करेंगे। बस्ती जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के आला अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागें। भरत सरल गैस एजेंसी के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं। अगर जल्द ही इन 'सफेदपोश' दलालों और लापरवाह एजेंसी संचालकों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो आक्रोशित जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।2