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लखनऊ में एक दर्दनाक अग्निकांड हुआ, जिसमें कुछ बच्चों की दुखद मृत्यु हो गई। इस हृदयविदारक खबर की सूचना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अलीगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान मिली। खबर सुनते ही उन्होंने अपना अलीगढ़ दौरा बीच में ही रोक दिया और तत्काल लखनऊ के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री ने इस दुखद घटना पर पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि इस अग्निकांड के दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
M. Sharma
लखनऊ में एक दर्दनाक अग्निकांड हुआ, जिसमें कुछ बच्चों की दुखद मृत्यु हो गई। इस हृदयविदारक खबर की सूचना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अलीगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान मिली। खबर सुनते ही उन्होंने अपना अलीगढ़ दौरा बीच में ही रोक दिया और तत्काल लखनऊ के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री ने इस दुखद घटना पर पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि इस अग्निकांड के दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
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- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 22 जून 2026 को लखनऊ स्थित KGMU ट्रॉमा सेंटर का दौरा किया। इस दौरान, उन्होंने लखनऊ अग्निकांड में घायल हुए लोगों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और घटना पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। यह जानकारी उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पूर्णतः सत्य है।1
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आग लगने की घटना वाली जगह का दौरा किया। उन्होंने इस घटना को 'बहुत दुखद' बताया और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि, जैसा कि मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया है, इस पूरे मामले की गहन जांच की जाएगी और जो भी व्यक्ति जिम्मेदार पाया जाएगा, उसकी जवाबदेही तय की जाएगी।1
- आगरा की सदर तहसील में अधिवक्ता एवं दस्तावेज लेखक संग्रह समिति के बैनर तले अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं का ई-पंजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन आंदोलन और धरना प्रदर्शन लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। इस प्रदर्शन में सदर तहसील आगरा के परिसर में थाली और ताली बजाकर विरोध जताया गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि अगर ई-पंजीकरण को निजी क्षेत्र में सौंप दिया जाता है, तो इससे देश में 8 से 10 करोड़ लोग बेरोजगार हो जाएंगे। तहसील महासचिव अरविंद कुमार दुबे ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती, तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में वे सरकार को वोट नहीं देंगे।3
- लायंस क्लब आगरा आकाश की अंतिम कार्यकारिणी बैठक में नए सत्र 2026-27 के लिए पदाधिकारियों की घोषणा की गई है। इस बैठक में मुकेश गोयल को अध्यक्ष, संजय अग्रवाल को सचिव और नितिन अग्रवाल को कोषाध्यक्ष चुना गया। पदाधिकारियों के चुनाव के साथ-साथ, बैठक में वर्षभर की गतिविधियों की समीक्षा भी की गई और आगामी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। क्लब ने समाजसेवा और जनहित के कार्यों को भविष्य में और अधिक प्रभावी ढंग से करने का संकल्प लिया है।1
- लखनऊ में एक बिल्डिंग में भीषण अग्निकांड हुआ है, जिसकी चपेट में आकर मासूम बच्चे अंदर फंस गए हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए, डिप्टी सीएम तुरंत मौके पर पहुंचे हैं।1
- लखनऊ में एक दर्दनाक अग्निकांड हुआ, जिसमें कुछ बच्चों की दुखद मृत्यु हो गई। इस हृदयविदारक खबर की सूचना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अलीगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान मिली। खबर सुनते ही उन्होंने अपना अलीगढ़ दौरा बीच में ही रोक दिया और तत्काल लखनऊ के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री ने इस दुखद घटना पर पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि इस अग्निकांड के दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।1
- लखनऊ के अलीगंज में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना इस बात पर सोचने को मजबूर करती है कि बच्चों को शिक्षा देने वाले संस्थान किसी भी संभावित हादसे से निपटने के लिए कितने तैयार हैं और उनकी सुरक्षा प्रणाली कितनी मजबूत है। नियमों के अनुसार, बहुमंजिला इमारतों में संचालित कोचिंग संस्थानों के लिए फायर एनओसी, पर्याप्त अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी एग्जिट, चौड़ी सीढ़ियां, धुआं निकालने की व्यवस्था, अलार्म सिस्टम और नियमित मॉक ड्रिल जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य होनी चाहिए। हालांकि, यह एक बड़ा प्रश्न है कि क्या इन सुरक्षा मानकों का पालन ज़मीनी स्तर पर हो रहा है। यदि सैकड़ों छात्र एक ही रास्ते से आते-जाते हैं, खिड़कियों पर लोहे की जालियां लगी हों, बिजली के तारों का जाल बिछा हो, और आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का कोई वैकल्पिक रास्ता न हो, तो ऐसी लापरवाही किसी भी दिन एक बड़े और भयावह हादसे का कारण बन सकती है। इस संबंध में, माता-पिता का भी यह कर्तव्य है कि वे बच्चों का दाखिला कराते समय संस्थान के पास फायर एनओसी है या नहीं, इमरजेंसी एग्जिट मौजूद है या नहीं और सुरक्षा उपकरण काम कर रहे हैं या नहीं, इसकी पूरी जांच करें। प्रशासन की जिम्मेदारी केवल किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे समय-समय पर निरीक्षण करके यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो रहा है। क्योंकि यदि शिक्षा के ये मंदिर सुरक्षा के मानकों से समझौता करते हैं, तो किताबों के बीच बैठा बच्चों का भविष्य किसी भी क्षण हादसों की आग में झुलस सकता है, और बच्चों की जान से यह खिलवाड़ अब और नहीं होना चाहिए।4