बसंत पंचमी पर मौसम की सौगात: गिरीपार में साढ़े तीन महीने बाद टूटा ड्राई स्पेल, बारिश-बर्फबारी से किसानों में लौटी उम्मीद तेज हवाओं के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात, निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश | फसलों को मिली संजीवनी | तापमान में भारी गिरावट, जनजीवन प्रभावित सिरमौर जिले के समूचे गिरीपार क्षेत्र में बसंत पंचमी का पावन पर्व इस बार किसानों और बागवानों के लिए नई उमंग और उत्साह लेकर आया है। लगभग 110 दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार क्षेत्र में साढ़े तीन महीने से चला आ रहा ड्राई स्पेल टूट गया, जिससे कृषि और बागवानी क्षेत्र में राहत की लहर दौड़ गई है। सुबह चार बजे से बदला मौसम का मिजाज आज तड़के करीब सुबह चार बजे से ऊंचाई वाले इलाकों में तेज हवाओं के साथ हिमपात शुरू हुआ, जबकि निचले क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है। अचानक बदले मौसम और तेज तूफान ने लोगों को हैरान कर दिया है। कई स्थानों पर तेज हवाओं और बारिश-बर्फबारी के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। सेब सहित बागवानी फसलों के लिए अमृत समान हरिपूरधार, नौहराधार, गहनोग, घोटाड़ी, ठंडीधार, बथाऊधार, बनालीधार, हाब्बन, ठारू देवठी मंझगाव सहित आसपास के क्षेत्रों में सुबह से लगातार हिमपात हो रहा है। वहीं अन्य निचले इलाकों में जारी बारिश सेब, नाशपाती, आडू, प्लम, खुमानी जैसी बागवानी फसलों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही है। लंबे समय से नमी की कमी के कारण बागवानी पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टलता नजर आ रहा है। खेतों में भी लौटी जान सिर्फ बागवानी ही नहीं, बल्कि लहसुन, मटर, आलू, गेहूं, जौ और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए भी यह बारिश और बर्फबारी वरदान साबित हो रही है। साढ़े तीन महीने के लंबे सूखे के चलते कई फसलें तबाही के कगार पर पहुंच गई थीं, लेकिन अब खेतों में फिर से हरियाली लौटने की उम्मीद जगी है। तापमान में गिरावट, बिजली आपूर्ति बाधित बारिश और बर्फबारी के चलते क्षेत्र में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ठंड बढ़ने से लोगों ने फिर से गर्म कपड़ों का सहारा ले लिया है। वहीं, मौसम की मार के चलते आज सुबह से ही क्षेत्र में बार-बार बिजली कट लग रहे हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों-बागवानों के चेहरे खिले बसंत पंचमी के दिन मिली इस प्राकृतिक सौगात से किसानों और बागवानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। लंबे समय बाद हुई वर्षा और बर्फबारी ने न सिर्फ खेतों और बागों को जीवनदान दिया है, बल्कि आने वाले कृषि और बागवानी सीजन को लेकर उम्मीदें भी मजबूत कर दी हैं। अगर सड़कों की बात करें तो राजगढ़ हाब्बन सड़क पर हाब्बन पालू तथा राजगढ़ नौहराधार सड़क पर चुरवाधार के पास सड़क पर हिमपात के कारण वाहन फिसल रहे हैं मौसम के तेवर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है । और लोगों से अपील कर रहा है कि वे अति आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकले और फिसलन वाले स्थानों पर अपने वाहन ना लें जाए ।
बसंत पंचमी पर मौसम की सौगात: गिरीपार में साढ़े तीन महीने बाद टूटा ड्राई स्पेल, बारिश-बर्फबारी से किसानों में लौटी उम्मीद तेज हवाओं के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात, निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश | फसलों को मिली संजीवनी | तापमान में भारी गिरावट, जनजीवन प्रभावित सिरमौर जिले के समूचे गिरीपार क्षेत्र में बसंत पंचमी का पावन पर्व इस बार किसानों और बागवानों के लिए नई उमंग और उत्साह लेकर आया है। लगभग 110 दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार क्षेत्र में साढ़े तीन महीने से चला आ रहा ड्राई स्पेल टूट गया, जिससे कृषि और बागवानी क्षेत्र में राहत की लहर दौड़ गई है। सुबह चार बजे से बदला मौसम का मिजाज आज तड़के करीब सुबह चार बजे से ऊंचाई वाले इलाकों में
तेज हवाओं के साथ हिमपात शुरू हुआ, जबकि निचले क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है। अचानक बदले मौसम और तेज तूफान ने लोगों को हैरान कर दिया है। कई स्थानों पर तेज हवाओं और बारिश-बर्फबारी के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। सेब सहित बागवानी फसलों के लिए अमृत समान हरिपूरधार, नौहराधार, गहनोग, घोटाड़ी, ठंडीधार, बथाऊधार, बनालीधार, हाब्बन, ठारू देवठी मंझगाव सहित आसपास के क्षेत्रों में सुबह से लगातार हिमपात हो रहा है। वहीं अन्य निचले इलाकों में जारी बारिश सेब, नाशपाती, आडू, प्लम, खुमानी जैसी बागवानी फसलों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही है। लंबे समय से नमी की कमी के कारण बागवानी पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टलता नजर आ रहा है। खेतों में
भी लौटी जान सिर्फ बागवानी ही नहीं, बल्कि लहसुन, मटर, आलू, गेहूं, जौ और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए भी यह बारिश और बर्फबारी वरदान साबित हो रही है। साढ़े तीन महीने के लंबे सूखे के चलते कई फसलें तबाही के कगार पर पहुंच गई थीं, लेकिन अब खेतों में फिर से हरियाली लौटने की उम्मीद जगी है। तापमान में गिरावट, बिजली आपूर्ति बाधित बारिश और बर्फबारी के चलते क्षेत्र में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ठंड बढ़ने से लोगों ने फिर से गर्म कपड़ों का सहारा ले लिया है। वहीं, मौसम की मार के चलते आज सुबह से ही क्षेत्र में बार-बार बिजली कट लग रहे हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों-बागवानों के चेहरे
खिले बसंत पंचमी के दिन मिली इस प्राकृतिक सौगात से किसानों और बागवानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। लंबे समय बाद हुई वर्षा और बर्फबारी ने न सिर्फ खेतों और बागों को जीवनदान दिया है, बल्कि आने वाले कृषि और बागवानी सीजन को लेकर उम्मीदें भी मजबूत कर दी हैं। अगर सड़कों की बात करें तो राजगढ़ हाब्बन सड़क पर हाब्बन पालू तथा राजगढ़ नौहराधार सड़क पर चुरवाधार के पास सड़क पर हिमपात के कारण वाहन फिसल रहे हैं मौसम के तेवर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है । और लोगों से अपील कर रहा है कि वे अति आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकले और फिसलन वाले स्थानों पर अपने वाहन ना लें जाए ।
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- सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भानुपल्ली-बेरी रेललाईन का कार्य जारी है। 2027 तक इस रेललाईन के कार्य को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के तहत प्रशासन की ओर से भी संबधित कंपनियों को कार्य करने को लेकर निर्देश दिए गए हैं। वहीं, भानुपल्ली-बेरी रेललाईन कार्य के तहत सोमवार को इस रेललाईन के तहत निर्माणाधीन आपाताकालीन टनल का ईटी-7 व ईटी-8 एस्केप टनल ब्रेकथ्रू हो गई। करीब साढ़े किलोमीटर लंबी टनल का 750 मीटर हिस्सा एक छोर से दूसरे छोर पर मिल गया। भानुपल्ली-बेरी रेललाईन के निर्माण कार्य में इस बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार रेल विकास निगम लिमिटेड के पैकेज नंबर-3 में एस्केप टनल ईटी-7 को ईटी-8 से सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया। यह कार्य निर्माण कंपनी मैक्सा इंफ्रा इंडिया लिमिटेड द्वारा पूरा किया गया। इस एस्केप टनल का कार्य गत अगस्त 2025 में शुरू हुआ था। करीब आठ माह बाद यह कार्य पूरा किया गया है। हालांकि अभी तक साढ़े छह किलोमीटर लंबी टनल का महज साढ़े सात सौ मीटर हिस्सा ही आपस में जुड़ा है। मेन टनल ब्रेकथ्रू होने के लिए अभी समय लगेगा। बताया जा रहा है कि यह एस्केप टनल करीब छह माह पहले भी तैयार हो सकती थी, लेकिन टनल पर आबादी होने के चलते सुरक्षा की दृष्टि से कार्य किया गया। ब्लास्टिंग को लेकर भी प्रतिबंध रहा। अन्य कारण भी इसमें सामने आए। लेकिन फिर भी कंपनी की ओर से प्रयास किए गए कि जल्द ही इन कार्य को पूरा किया जाए। कंपनी अधिकारियों की मानें तो यह साढ़े छह किलोमीटर लंबी टनल आपात परिस्थितियों के लिए बनाई जा रही है। मेन टनल के कार्य को लेकर अभी लंबा समय लग सकता है। लेकिन प्रारंभिक चरण में एस्केप टनल को आपस में जोड़ा गया है। इस निर्माण कार्य के तहत आगामी दो माह में अन्य टनल भी ब्रेकथ्रू करने का लक्ष्य कंपनी की ओर से निर्धारित किया गया है। उधर, एस्केप टनल ब्रेकथ्रू के उपलक्ष्य में परियोजना स्थल पर विधिवत पूजा अर्चना की गई। जिसका नेतृत्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर हितेश जायसवाल ने किया। इस मौके पर कंपनी के सीईओ विक्रम सिंह चौहान, जनरल मैनेजर मुरलीधर राव, प्रोजेक्ट सेफ्टी मैनेजर आलोक रौशन सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान कामगारों और कर्मचारियों में उत्साह का माहौल रहा। इस ब्रेकथ्रू से परियोजना के निर्माण कार्य में गति आने के साथ-साथ क्षेत्रीय रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है। बॉक्स: भानुपल्ली-बेरी रेललाईन कार्य के तहत सोमवार को निर्माणाधीन आपाताकालीन टनल का ईटी-7 व ईटी-8 एस्केप टनल ब्रेकथ्रू हो गई। करीब साढ़े किलोमीटर लंबी टनल का 750 मीटर हिस्सा एक छोर से दूसरे छोर पर मिल गया। जल्द ही इस टनल के कार्य को पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस एस्केप टनल को ब्रेकथ्रू करने में सभी अधिकारियों, कर्मचारियों के प्रयास सफल रहे हैं। हितेश जायसवाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर बॉक्स: बता दें कि भानुपल्ली-बेरी निर्माणाधीन रेलवे परियोजना के तहत निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने को लेकर कार्य जारी है। सुरंग, पुल, ट्रैक और अन्य निर्माण कार्य जारी हैं। 2027 के अंत तक इस कार्य को पूरा करने लक्ष्य रखा गया है। नैना देवी जी विधानसभा क्षेत्र के कोट तुन्नु से लेकर बिलासपुर सदर के भराड़ी तक रेलवे परियोजना निर्माणाधीन है।2
- Post by Dharamvir Singh2
- अगर आप भी मां शाकुंभरी देवी के दर्शन के लिए आ रहे हैं, तो ज़रा सेहत को लेकर हो जाइए सावधान।"1
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