दरभंगा में ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूसे मोहम्मदी निकाला गया। किलाघाट से निकला जुलूस नारे तकबीर और नारे रिसालत की गूंज के बीच शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए वापस मदरसा हमीदिया पहुंचा। हजारों की संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। जुलूस सुबह 7:39 बजे मदरसा हमीदिया किलाघाट से शुरू हुआ। नीम चौक, उर्दू बाजार, रहमखां, करमगंज, दारूभट्टी चौक और रहमगंज होते हुए खान चौक पहुंचा। यहां विभिन्न मोहल्लों के जुलूस भी इसमें शामिल हुए। इसके बाद जुलूस मौलागंज, मिर्जापुर, दरभंगा टावर और मशरफ बाजार होते हुए किलाघाट पहुंचा, जहां सलाम और दुआ के बाद समापन हुआ। दरभंगा में ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूसे मोहम्मदी निकाला गया। किलाघाट से निकला जुलूस नारे तकबीर और नारे रिसालत की गूंज के बीच शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए वापस मदरसा हमीदिया पहुंचा। हजारों की संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। जुलूस सुबह 7:39 बजे मदरसा हमीदिया किलाघाट से शुरू हुआ। नीम चौक, उर्दू बाजार, रहमखां, करमगंज, दारूभट्टी चौक और रहमगंज होते हुए खान चौक पहुंचा। यहां विभिन्न मोहल्लों के जुलूस भी इसमें शामिल हुए। इसके बाद जुलूस मौलागंज, मिर्जापुर, दरभंगा टावर और मशरफ बाजार होते हुए किलाघाट पहुंचा, जहां सलाम और दुआ के बाद समापन हुआ। जुलूस में बच्चे, बुजुर्ग और युवा हाथों में झंडे लिए शामिल हुए। जगह-जगह लोगों ने पानी, चाय और तबर्रुक का इंतजाम किया। जिला प्रशासन और शांति समिति की टीम भी जुलूस की निगरानी करती नजर आई। आयोजकों के अनुसार, 12 रबीउल अव्वल के मौके पर हर साल यह जुलूस निकाला जाता है। इस दौरान मिलाद, कुरानखानी और जरूरतमंदों को भोजन कराने जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। एंकर आउट: जुलूसे मोहम्मदी के जरिए लोगों ने पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के अमन, शांति, भाईचारे और मोहब्बत के संदेश को याद किया।
दरभंगा में ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूसे मोहम्मदी निकाला गया। किलाघाट से निकला जुलूस नारे तकबीर और नारे रिसालत की गूंज के बीच शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए वापस मदरसा हमीदिया पहुंचा। हजारों की संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। जुलूस सुबह 7:39 बजे मदरसा हमीदिया किलाघाट से शुरू हुआ। नीम चौक, उर्दू बाजार, रहमखां, करमगंज, दारूभट्टी चौक और रहमगंज होते हुए खान चौक पहुंचा। यहां विभिन्न मोहल्लों के जुलूस भी इसमें शामिल हुए। इसके बाद जुलूस मौलागंज, मिर्जापुर, दरभंगा टावर और मशरफ बाजार होते हुए किलाघाट पहुंचा, जहां सलाम और दुआ के बाद समापन हुआ। दरभंगा में ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूसे मोहम्मदी निकाला गया। किलाघाट से निकला जुलूस नारे तकबीर और नारे रिसालत की गूंज के बीच शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए वापस मदरसा हमीदिया पहुंचा। हजारों की संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। जुलूस सुबह 7:39 बजे मदरसा हमीदिया किलाघाट से शुरू हुआ। नीम चौक, उर्दू बाजार, रहमखां, करमगंज, दारूभट्टी चौक और रहमगंज होते हुए खान चौक पहुंचा। यहां विभिन्न मोहल्लों के जुलूस भी इसमें शामिल हुए। इसके बाद जुलूस मौलागंज, मिर्जापुर, दरभंगा टावर और मशरफ बाजार होते हुए किलाघाट पहुंचा, जहां सलाम और दुआ के बाद समापन हुआ। जुलूस में बच्चे, बुजुर्ग और युवा हाथों में झंडे लिए शामिल हुए। जगह-जगह लोगों ने पानी, चाय और तबर्रुक का इंतजाम किया। जिला प्रशासन और शांति समिति की टीम भी जुलूस की निगरानी करती नजर आई। आयोजकों के अनुसार, 12 रबीउल अव्वल के मौके पर हर साल यह जुलूस निकाला जाता है। इस दौरान मिलाद, कुरानखानी और जरूरतमंदों को भोजन कराने जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। एंकर आउट: जुलूसे मोहम्मदी के जरिए लोगों ने पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के अमन, शांति, भाईचारे और मोहब्बत के संदेश को याद किया।
- दरभंगा में ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूसे मोहम्मदी निकाला गया। किलाघाट से निकला जुलूस नारे तकबीर और नारे रिसालत की गूंज के बीच शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए वापस मदरसा हमीदिया पहुंचा। हजारों की संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। जुलूस सुबह 7:39 बजे मदरसा हमीदिया किलाघाट से शुरू हुआ। नीम चौक, उर्दू बाजार, रहमखां, करमगंज, दारूभट्टी चौक और रहमगंज होते हुए खान चौक पहुंचा। यहां विभिन्न मोहल्लों के जुलूस भी इसमें शामिल हुए। इसके बाद जुलूस मौलागंज, मिर्जापुर, दरभंगा टावर और मशरफ बाजार होते हुए किलाघाट पहुंचा, जहां सलाम और दुआ के बाद समापन हुआ। दरभंगा में ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूसे मोहम्मदी निकाला गया। किलाघाट से निकला जुलूस नारे तकबीर और नारे रिसालत की गूंज के बीच शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए वापस मदरसा हमीदिया पहुंचा। हजारों की संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। जुलूस सुबह 7:39 बजे मदरसा हमीदिया किलाघाट से शुरू हुआ। नीम चौक, उर्दू बाजार, रहमखां, करमगंज, दारूभट्टी चौक और रहमगंज होते हुए खान चौक पहुंचा। यहां विभिन्न मोहल्लों के जुलूस भी इसमें शामिल हुए। इसके बाद जुलूस मौलागंज, मिर्जापुर, दरभंगा टावर और मशरफ बाजार होते हुए किलाघाट पहुंचा, जहां सलाम और दुआ के बाद समापन हुआ। जुलूस में बच्चे, बुजुर्ग और युवा हाथों में झंडे लिए शामिल हुए। जगह-जगह लोगों ने पानी, चाय और तबर्रुक का इंतजाम किया। जिला प्रशासन और शांति समिति की टीम भी जुलूस की निगरानी करती नजर आई। आयोजकों के अनुसार, 12 रबीउल अव्वल के मौके पर हर साल यह जुलूस निकाला जाता है। इस दौरान मिलाद, कुरानखानी और जरूरतमंदों को भोजन कराने जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। एंकर आउट: जुलूसे मोहम्मदी के जरिए लोगों ने पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के अमन, शांति, भाईचारे और मोहब्बत के संदेश को याद किया।1
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- स्वतंत्रता सेनानी के बेटे 2 साल से लगा रहे हैं चक्कर नहीं मिल रहा है न्याय बिहार के दरभंगा जिला के बहादुर प्रखंड के भरतपुर निवासी जिनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे उनके पुत्र राजेश पासवान जिन्हें सरकार द्वारा जमीन का पर्चा भी दिया गया था और जिसका साक्षी भी उनके पास मौजूद है 2 साल से करते थे बाहर में मजदूरी भरोसे पर दे दिए थे जमीन जब उन्हें पता चला कि मेरे जमीन पर कोई कब्जा कर उसे बिक्री कर रहा है तो वह अपने गांव आए और 2 साल से सभी जगह आवेदक रजिस्ट्री ऑफिस हो या अंचलाधिकारी या थाना के पास लेकिन अभी तक उन्हें नहीं मिल रहा है जमीन पर लग गया है 144 आखिर क्या सरकार द्वारा दिया गया जमीन का पर्चा फर्ज है यह एक बहुत बड़ा सवाल उठता है और कहा जाता है कि अगर कोई से मदद करेगा या इसे अगर ऐसी बात रहेगी तो उसे जान से मारने की धमकी भी कहीं जा रही है उन्होंने मीडिया से बात करते हुए अपनी दास्तान सुनाएं इसे आप भी देखिए और इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें क्या आखिर इस देश में लोकतंत्र खतरे में है क्या एक स्वतंत्र सेनानी के बेटे जो मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं उनके साथ ऐसा होना सही है आपकी क्या प्रतिक्रिया है उसे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इसे इतना शेयर करें ताकि देश के हर जगह हर कोने तक किया फैल सके और उन्हें न्याय मिले आपकी क्या प्रतिक्रिया हमें जरूर बताएं अगर आपके आसपास कोई घटना दुर्घटना की जानकारी हो तो हमारे दिए गए नंबर पर जरूर संपर्क करें 75499079571
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- नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त 2026 को ग्लेशियर/चट्टान टूटने और भूकंपीय हलचल के कारण भोटेकोशी, त्रिशूली और ल्हांदे नदियों में भीषण (अचानक बाढ़) आया है। नुकसान की स्थिति: जान-माल की क्षति: 95 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और कई सौ लोग लापता हैं। लापता लोग: लगभग 380+ पर्यटक (जिनमें 100 से अधिक भारतीय शामिल हैं) और दर्जनों स्थानीय व सुरक्षाकर्मी लापता हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर: 19 से अधिक पुल, सड़कों के कई किलोमीटर हिस्से और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (बिजली परियोजनाएं) बह गए हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। भारत पर असर: बिहार और यूपी में अलर्ट: नेपाल से आ रही नदियों (जैसे गंडक, कोशी और त्रिशूली) का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण बिहार के 6 सीमावर्ती जिलों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। निकासी कार्य: बिहार प्रशासन ने निचले इलाकों से करीब 5,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। राहत और मदद: भारत सरकार ने वायुसेना (C-17 और C-130J विमानों) के ज़रिए नेपाल में तुरंत 10 टन राहत सामग्री, दवाएं और बचाव टीमें भेजी हैं।1