दिखावे के दौर में धर्म-आराधना भी बन रही प्रदर्शन का माध्यम- मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज उपवास में सम्मान की अपेक्षा नहीं, भावों की शुद्धि ही असली तप — मुनिश्री विधायक ने मुनि साध्य सागर से भेंट कर आशीर्वाद लिया दिखावे के दौर में धर्म-आराधना भी बन रही प्रदर्शन का माध्यम- मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज उपवास में सम्मान की अपेक्षा नहीं, भावों की शुद्धि ही असली तप — मुनिश्री विधायक ने मुनि साध्य सागर से भेंट कर आशीर्वाद लिया नेमीनगर साई कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजित वात्सल्य रत्नाकर मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने धर्मसभा में अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज का समय दिखावे का हो गया है और इसका प्रभाव धर्म- आराधना व तप- उपवास पर भी दिखाई देने लगा है। व्यक्ति उपवास तो करता है, लेकिन मन में क्लेश, क्रोध और अपेक्षाएं रखता है, ऐसे में उस उपवास का वास्तविक फल नहीं मिल पाता। मुनिश्री ने कहा कि सच्चा तप वही है जिसमें व्यक्ति धर्म-आराधना में मन लगाकर अपने भावों को शुद्ध करता है और अनावश्यक कार्यों से दूर रहता है। आजकल कई लोग एक-दूसरे को देखकर उपवास करते हैं।किसी ने तीन उपवास किए तो दूसरा उससे अधिक करने की होड़ में पांच उपवास कर लेता है। इस प्रकार की प्रतिस्पर्धा तपस्या नहीं, बल्कि दिखावा बन जाती है।उन्होंने बताया कि वास्तविक तप-साधना करने वाले के चेहरे पर एक अलग ही तेज और आभा दिखाई देती है। जिस प्रकार सोना अग्नि में तपकर और अधिक निखरता है, उसी प्रकार तप- साधना और उपवास से आत्मा के कर्म हल्के होते हैं और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। लेकिन जब उपवास केवल प्रदर्शन के लिए किया जाता है तो उसका आध्यात्मिक लाभ नहीं मिल पाता।मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने कहा कि उपवास करने पर सम्मान या प्रशंसा की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। जो साधक वास्तव में कर्मों की निर्जरा के लिए उपवास करता है, वह अपनी तपस्या को छिपाकर करता है, उसका प्रदर्शन नहीं करता। मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने कहा कि त्याग और तपस्या का मार्ग सादगी और आत्मसंयम का मार्ग है, इसमें दिखावा या प्रदर्शन का कोई स्थान नहीं है।उन्होंने कहा कि साधना समता भाव से की जानी चाहिए, विसमता और आक्रोश के साथ नहीं। यदि उपवास के दौरान व्यक्ति क्रोध करता है, घर में क्लेश करता है या कषायों को बढ़ाता है तो उपवास का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। उपवास का संदेश यही है कि मनुष्य अपने भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों को कम करे तथा अपने भावों को नियंत्रित रखे। मुनिश्री ने कहा कि थोड़ी साधना करें, लेकिन ऐसी करें जिससे नए कर्मों का बंधन न हो और पुराने कर्म क्षीण हों। साधना का वास्तविक उद्देश्य आत्मा को शुद्ध बनाना है। कई लोग किसी इच्छा की पूर्ति के लिए तप या उपवास करते हैं, जबकि इच्छा के लिए किया गया तप वास्तविक तप नहीं माना जाता और उससे कर्मों की निर्जरा भी नहीं होती।उन्होंने बताया कि जब तप बिना किसी स्वार्थ या इच्छा के किया जाता है तभी वह आत्मा के कल्याण का कारण बनता है। केवल अच्छा तप कर लेने से स्वर्ग की प्राप्ति नहीं होती, बल्कि परिणामों की शुद्धता से ही आत्मा ऊंचे लोकों की प्राप्ति करती है। धर्मसभा में मुनिश्री ने कहा कि जैन दर्शन को समझकर अपनाना चाहिए। वीतरागी साधुओं का समागम मिलना अत्यंत दुर्लभ होता है, इसलिए इस अवसर का सदुपयोग कर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। प्रतिमाएं केवल दिखावे के लिए नहीं ली जातीं, बल्कि यह संकल्प लेकर ली जाती हैं कि हमें भी भगवान के समान पवित्र और वीतरागी बनने का अवसर प्राप्त हो। अंत में उन्होंने कहा कि जो साधक निर्दोष भाव से साधना करता है उसकी कभी दुर्गति नहीं होती। भगवान की पूजा-अर्चना और भक्ति भाव के साथ किया गया उपवास अत्यंत फलदायी होता है। साधना का उद्देश्य कर्मों को बांधना नहीं, बल्कि उन्हें क्षय करना है। देश की सेवा करने का भाव रखें -साध्य सागर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर किला पर विराजित मुनिश्री साध्य सागर मुनिराज ने विधायक गोपालसिंह इंजीनियर को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आपके मन में अपने क्षेत्र ,प्रदेश के साथ-साथ देश की सेवा और देश के प्रति समर्पण के भाव रहना चाहिए। व्यक्ति को अच्छे भाव ही ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। चुनाव तक आप किसी एक दल के रहते हैं और चुनाव जीतने के पश्चात पूरी जनता के जनप्रतिनिधि बनते हैं।इसलिए बिना भेदभाव के सभी का काम करना चाहिए और विशेष कर दीन दुखियों पर अधिक ध्यान देकर उन्हें ऊपर उठाने का प्रयास करें।
दिखावे के दौर में धर्म-आराधना भी बन रही प्रदर्शन का माध्यम- मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज उपवास में सम्मान की अपेक्षा नहीं, भावों की शुद्धि ही असली तप — मुनिश्री विधायक ने मुनि साध्य सागर से भेंट कर आशीर्वाद लिया दिखावे के दौर में धर्म-आराधना भी बन रही प्रदर्शन का माध्यम- मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज उपवास में सम्मान की अपेक्षा नहीं, भावों की शुद्धि ही असली तप — मुनिश्री विधायक ने मुनि साध्य सागर से भेंट कर आशीर्वाद लिया नेमीनगर साई कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजित वात्सल्य रत्नाकर मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने धर्मसभा में अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज का समय दिखावे का हो गया है और इसका प्रभाव धर्म- आराधना व तप- उपवास पर भी दिखाई देने लगा है। व्यक्ति उपवास तो करता है, लेकिन मन में क्लेश, क्रोध और अपेक्षाएं रखता है, ऐसे में उस उपवास का वास्तविक फल नहीं मिल पाता। मुनिश्री ने कहा कि सच्चा तप वही है जिसमें व्यक्ति धर्म-आराधना में मन लगाकर अपने भावों को शुद्ध करता है और अनावश्यक कार्यों से दूर रहता है। आजकल कई लोग एक-दूसरे को देखकर उपवास करते हैं।किसी ने तीन उपवास किए तो दूसरा उससे अधिक करने की होड़ में पांच उपवास कर लेता है। इस प्रकार की प्रतिस्पर्धा तपस्या नहीं, बल्कि दिखावा बन जाती है।उन्होंने बताया कि वास्तविक तप-साधना करने वाले के चेहरे पर एक अलग ही तेज और आभा दिखाई देती है। जिस प्रकार सोना अग्नि में तपकर और अधिक निखरता है, उसी प्रकार तप- साधना और उपवास से आत्मा के कर्म हल्के होते हैं और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। लेकिन जब उपवास केवल प्रदर्शन के लिए किया जाता है तो उसका आध्यात्मिक लाभ नहीं मिल पाता।मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने कहा कि उपवास करने पर सम्मान या प्रशंसा की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। जो साधक वास्तव में कर्मों की निर्जरा के लिए उपवास करता है, वह अपनी तपस्या को छिपाकर करता है, उसका प्रदर्शन नहीं करता। मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने कहा कि त्याग और तपस्या का मार्ग सादगी और आत्मसंयम का मार्ग है, इसमें दिखावा या प्रदर्शन का कोई स्थान नहीं है।उन्होंने कहा कि साधना समता भाव से की जानी चाहिए, विसमता और आक्रोश के साथ नहीं। यदि उपवास के दौरान व्यक्ति क्रोध करता है, घर में क्लेश करता है या कषायों को बढ़ाता है तो उपवास का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। उपवास का संदेश यही है कि मनुष्य अपने भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों को कम करे तथा अपने भावों को नियंत्रित रखे। मुनिश्री ने कहा कि थोड़ी साधना करें, लेकिन ऐसी करें जिससे नए कर्मों का बंधन न हो और पुराने कर्म क्षीण हों। साधना का वास्तविक उद्देश्य आत्मा को शुद्ध बनाना है। कई लोग किसी इच्छा की पूर्ति के लिए तप या उपवास करते हैं, जबकि इच्छा के लिए किया गया तप वास्तविक तप नहीं माना जाता और उससे कर्मों की निर्जरा भी नहीं होती।उन्होंने बताया कि जब तप बिना किसी स्वार्थ या इच्छा के किया जाता है तभी वह आत्मा के कल्याण का कारण बनता है। केवल अच्छा तप कर लेने से स्वर्ग की प्राप्ति नहीं होती, बल्कि परिणामों की शुद्धता से ही आत्मा ऊंचे लोकों की प्राप्ति करती है। धर्मसभा में मुनिश्री ने कहा कि जैन दर्शन को समझकर अपनाना चाहिए। वीतरागी साधुओं का समागम मिलना अत्यंत दुर्लभ होता है, इसलिए इस अवसर का सदुपयोग कर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। प्रतिमाएं केवल दिखावे के लिए नहीं ली जातीं, बल्कि यह संकल्प लेकर ली जाती हैं कि हमें भी भगवान के समान पवित्र और वीतरागी बनने का अवसर प्राप्त हो। अंत में उन्होंने कहा कि जो साधक निर्दोष भाव से साधना करता है उसकी कभी दुर्गति नहीं होती। भगवान की पूजा-अर्चना और भक्ति भाव के साथ किया गया उपवास अत्यंत फलदायी होता है। साधना का उद्देश्य कर्मों को बांधना नहीं, बल्कि उन्हें क्षय करना है। देश की सेवा करने का भाव रखें -साध्य सागर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर किला पर विराजित मुनिश्री साध्य सागर मुनिराज ने विधायक गोपालसिंह इंजीनियर को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आपके मन में अपने क्षेत्र ,प्रदेश के साथ-साथ देश की सेवा और देश के प्रति समर्पण के भाव रहना चाहिए। व्यक्ति को अच्छे भाव ही ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। चुनाव तक आप किसी एक दल के रहते हैं और चुनाव जीतने के पश्चात पूरी जनता के जनप्रतिनिधि बनते हैं।इसलिए बिना भेदभाव के सभी का काम करना चाहिए और विशेष कर दीन दुखियों पर अधिक ध्यान देकर उन्हें ऊपर उठाने का प्रयास करें।
- आष्टा में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई गई शीतला सप्तमी आष्टा। नगर में शीतला सप्तमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं शीतला माता मंदिर पहुंचीं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने माता शीतला को बासोड़ा (ठंडा भोजन) का भोग अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला माता की पूजा करने से घर-परिवार को बीमारियों से रक्षा मिलती है। मंदिरों में महिलाओं की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से माता की पूजा-अर्चना की। शीतला सप्तमी के अवसर पर पूरे आष्टा नगर में धार्मिक वातावरण बना रहा।1
- Post by Sajid Pathan1
- सीहोर में 960 बच्चों का टीकाकरण: 107 गर्भवती महिलाओं की जांच; 70 बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगी हाथों की स्वच्छता के लिए सीहोर जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं और बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जिले की अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थाओं और शिविरों के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इन शिविरों को ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनसार हाल ही में आयोजित शिविमें शून्य से एक वर्ष तक की आयु के 700 बच्चों का टीकाकरण किया गया। वहीं एक वर्ष से अधिक आयु के 260 बच्चों को भी टीके लगाए गए। इसके अलावा 107 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच भी की गई। बालिकाओं को भी लगाई जा रही एचपीवी वैक्सीन स्वास्थ्य विभाग राष्ट्रीय ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 14 से 15 वर्ष की बालिकाओं को भी टीका लगा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक जिले में 70 बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन दी जा चुकी है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए अभियान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे गंभीर कैंसर है। इस बीमारी से बचाव के लिए भारत सरकार द्वारा देशभर में एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है, जो अगले तीन महीनों तक चलाया जाएगा।1
- कन्नौद क्षेत्र मे मजदूरों की कमी के चलते किसान एक ही मशीन से गेहु व भुसा निकाल रहे कन्नौद। इस समय अधिकांश किसान गेहूं चने की फसल निकालने में व्यस्त है ।मजदूरों के नहीं मिलने से किसानों ने अब ऐसी मशीनों का उपयोग करने लगा है कि यह भूसा ओर गेहूं दोनों एक साथ निकाल रही है। इसी साल यह मशीन बाजार में इस क्षेत्र में पहली बार आई है। प्रति एकड़ छह हजार रूपए में गेहूं ओर भूसा दोनों निकाल रही है।किसानों का कहना है कि यह मशीन मजदूरों की मजदूरी से भी सस्ता पड़ रहा है। मजदूर मिल भी नहीं रहे है। अब तो स्थिति यह है कि मजदूर काम करना ही नहीं चाहते ऐसे में यह मशीन किसानों के लिए रामबाण साबित हो गई है।किसान कमल जोनवाल, शिवप्रसाद राठौर, नीरज पटाक, नंदलाल जोनवाल, ने बताया कि इस बार गेहूं सभी किसानों के अच्छे निकल रहे है।अधिक उत्पादन से किसान खुश है। रात दिन जो किसान मेहनत करता है गेहूं का उत्पादन देखकर खुशी का ठिकाना नहीं है। पिछले साल यह उत्पादन बहुत अच्छा नहीं था ।1
- शुजालपुर सिटी थाना पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई करते हुए बाइक चोरी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ लिया। पूछताछ में अन्य वारदातों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।1
- सीहोर जिले के दोराहा के जलसा गार्डन में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कलीम पठान के नेतृत्व में रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम का किया गया आयोजन। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव कुणाल चौधरी, ब्लॉक अध्यक्ष श्यामपुर रामनारायण शर्मा, शमीम अहमद, जफर लाला, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सीहोर के अध्यक्ष घनश्याम यादव और पूर्व अध्यक्ष देवीपुरा देवीसिंह तंवर सहित कई कांग्रेस जन मौजूद रहे। इस दौरान सभी ने एक साथ बैठकर इफ्तार किया और गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया। वहीं इस मौके पर पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि “ना राम खतरे में हैं और ना अल्लाह खतरे में हैं, अगर खतरे में है तो इस देश की आम जनता है।” उन्होंने युवाओं से धर्म का चश्मा उतारकर किसानों और युवाओं के मुद्दों पर ध्यान देने की अपील भी की।5
- Post by Dharmendra Yogi1
- सीहोर के निपानिया खुर्द में खेत में लगी आगः 20 क्विंटल गेहूं जला, फायर ब्रिगेड ने पाया काबू निपानिया खुर्द में खेत में लगी आग सीहोर जिले के ग्राम निपानिया खुर्द में सोमवार दोपहर एक खेत में खड़ी गेहूं की फसल में आग लग गई। इस घटना में लगभग 20 क्विंटल गेहूं जलकर राख हो गया। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। इस आगजनी से सुरेश, सजन सिंह, हरिप्रसाद और कमल सिंह नामक ग्रामीणों को नुकसान हुआ है। फायर ब्रिगेड टीम के सदस्य शफीकखान ने बताया कि उन्हें निपानिया खुर्द में खेत में खड़ी गेहूं की फसल में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड टीम तत्काल मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।बताया गया है कि खेत में आग लगी देखकर ग्रामीणों ने पहले अपने स्तर पर भी आग बुझाने का प्रयास किया था। इसी दौरान उन्होंने फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी। फायर ब्रिगेड टीम ने ग्रामीणों की सहायता से आग पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया। आग लगने का कारण अभी ज्ञात नहीं हो सका है।1