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छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बमनोरा में ₹25 लाख की लागत से बन रहे सामुदायिक भवन के निर्माण में भारी लापरवाही और अनियमितताएं सामने आई हैं। निर्माण स्थल पर मजदूरों की जान जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा है। यहां काम करने वाले मजदूर बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और सुरक्षा जूतों के ही ऊंचाई पर काम करने को मजबूर हैं। निर्माण कार्य के लिए बांस-बल्ली के कामचलाऊ और बेहद असुरक्षित मचान का उपयोग किया जा रहा है, जो कभी भी गिर सकता है। इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भवन निर्माण में बेहद घटिया ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और चिनाई भी टेढ़ी-मेढ़ी हो रही है। आरोप है कि टेंडर में स्वीकृत रेट की जगह बेहद घटिया स्तर के मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती और टिकाऊपन खतरे में पड़ गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे निर्माण के दौरान जिम्मेदार तकनीकी अमला और ठेकेदार मौके से नदारद हैं, जिससे पूरा काम बिना किसी जांच और निगरानी के पूरी तरह 'भगवान भरोसे' चल रहा है। इस बदहाली को लेकर ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत से पुरजोर मांग की है कि तत्काल इस साइट का निरीक्षण कर निर्माण कार्य को रुकवाया जाए। इसके साथ ही, निर्माण में इस्तेमाल हो रहे मटेरियल, माप पुस्तिका और अब तक हुए भुगतान का कड़ाई से परीक्षण कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने मजदूरों को अनिवार्य रूप से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई है।

3 hrs ago
user_मध्य प्रदेश श्रमजीवी संदीप सिंह घोष
मध्य प्रदेश श्रमजीवी संदीप सिंह घोष
Ghuwara, Chhatarpur•
3 hrs ago

छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बमनोरा में ₹25 लाख की लागत से बन रहे सामुदायिक भवन के निर्माण में भारी लापरवाही और अनियमितताएं सामने आई हैं। निर्माण स्थल पर मजदूरों की जान जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा है। यहां काम करने वाले मजदूर बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और सुरक्षा जूतों के ही ऊंचाई पर काम करने को मजबूर हैं। निर्माण

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कार्य के लिए बांस-बल्ली के कामचलाऊ और बेहद असुरक्षित मचान का उपयोग किया जा रहा है, जो कभी भी गिर सकता है। इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भवन निर्माण में बेहद घटिया ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और चिनाई भी टेढ़ी-मेढ़ी हो रही है। आरोप है कि टेंडर में स्वीकृत रेट की जगह बेहद घटिया स्तर

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के मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती और टिकाऊपन खतरे में पड़ गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे निर्माण के दौरान जिम्मेदार तकनीकी अमला और ठेकेदार मौके से नदारद हैं, जिससे पूरा काम बिना किसी जांच और निगरानी के पूरी तरह 'भगवान भरोसे' चल रहा है। इस बदहाली को लेकर ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने

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जिला प्रशासन और जनपद पंचायत से पुरजोर मांग की है कि तत्काल इस साइट का निरीक्षण कर निर्माण कार्य को रुकवाया जाए। इसके साथ ही, निर्माण में इस्तेमाल हो रहे मटेरियल, माप पुस्तिका और अब तक हुए भुगतान का कड़ाई से परीक्षण कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने मजदूरों को अनिवार्य रूप से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई है।

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  • मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा नशामुक्ति के उद्देश्य से 15 जुलाई से 30 जुलाई तक "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत छतरपुर पुलिस द्वारा जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को नशे के गंभीर दुष्प्रभावों से अवगत कराना और उन्हें नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना है। अभियान के चौथे दिन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आदित्य पटले के मार्गदर्शन में जिले के झुग्गी-झोपड़ी इलाकों और चिन्हित हॉटस्पॉट स्थानों पर विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के दौरान लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बताकर इससे दूर रहने की अपील की गई। इसके साथ ही, नशे के आदी हो चुके व्यक्तियों और उनके परिजनों को नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की जानकारी दी गई और उन्हें नशामुक्त जीवन जीने की शपथ दिलाई गई। सामाजिक न्याय विभाग के सहयोग से नशे की लत से प्रभावित लोगों को परामर्श और जरूरी चिकित्सीय सहायता मुहैया कराने के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई। नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिए छतरपुर पुलिस आने वाले दिनों में भी पूरे जिले में विभिन्न माध्यमों से इस प्रकार के व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।
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    मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा नशामुक्ति के उद्देश्य से 15 जुलाई से 30 जुलाई तक "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत छतरपुर पुलिस द्वारा जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को नशे के गंभीर दुष्प्रभावों से अवगत कराना और उन्हें नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

अभियान के चौथे दिन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आदित्य पटले के मार्गदर्शन में जिले के झुग्गी-झोपड़ी इलाकों और चिन्हित हॉटस्पॉट स्थानों पर विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के दौरान लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बताकर इससे दूर रहने की अपील की गई। इसके साथ ही, नशे के आदी हो चुके व्यक्तियों और उनके परिजनों को नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की जानकारी दी गई और उन्हें नशामुक्त जीवन जीने की शपथ दिलाई गई। सामाजिक न्याय विभाग के सहयोग से नशे की लत से प्रभावित लोगों को परामर्श और जरूरी चिकित्सीय सहायता मुहैया कराने के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई।

नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिए छतरपुर पुलिस आने वाले दिनों में भी पूरे जिले में विभिन्न माध्यमों से इस प्रकार के व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।
    user_चंद्रकांत भोले लोधी
    चंद्रकांत भोले लोधी
    Social Media Manager घुवारा, छतरपुर, मध्य प्रदेश•
    8 min ago
  • मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के हेलीकॉप्टर में बैठने के लिए राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार के दौड़ लगाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, कार्यक्रम खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री को खजुराहो के लिए रवाना होना था। इस दौरान राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार काफिले में पीछे रह गए थे, जिसके कारण वे हेलीकॉप्टर तक पहुंचने के लिए तेजी से दौड़ते हुए नजर आए।
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    मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के हेलीकॉप्टर में बैठने के लिए राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार के दौड़ लगाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, कार्यक्रम खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री को खजुराहो के लिए रवाना होना था। इस दौरान राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार काफिले में पीछे रह गए थे, जिसके कारण वे हेलीकॉप्टर तक पहुंचने के लिए तेजी से दौड़ते हुए नजर आए।
    user_रिपोर्टधर्मेंद्र सिंह लोधी
    रिपोर्टधर्मेंद्र सिंह लोधी
    बलदेवगढ़, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • ललितपुर जनपद के मड़ावरा कस्बे में स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक द्वारा आईटीआई के एक छात्र के खाते से निकासी पर रोक लगा दी गई है। इसके चलते पीड़ित छात्र अपनी छात्रवृत्ति का पैसा नहीं निकाल पा रहा है, जिससे उसकी पढ़ाई बाधित हो रही है। तहसील क्षेत्र के ग्राम लिधौरा निवासी छात्र ब्रजेश (पुत्र परमसिंह) ने इस संबंध में मड़ावरा के उपजिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। ब्रजेश का कस्बा स्थित बैंक शाखा में बचत खाता संचालित है, जिसमें शासन द्वारा उसकी छात्रवृत्ति भेजी गई थी, लेकिन बैंक प्रबंधन ने उसकी निकासी रोक दी। जब पीड़ित छात्र ने इस मामले में बैंक अधिकारियों से बात की, तो उसे बताया गया कि उसके पिता ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से कर्ज लिया हुआ है, इसलिए उसकी छात्रवृत्ति का पैसा उस कर्ज की अदायगी में समायोजित किया जाएगा। पीड़ित छात्र का कहना है कि बैंक खाते से पैसा नहीं निकलने के कारण वह अपनी ट्यूशन फीस और जरूरी किताबें नहीं खरीद पा रहा है, जिससे उसकी पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
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    ललितपुर जनपद के मड़ावरा कस्बे में स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक द्वारा आईटीआई के एक छात्र के खाते से निकासी पर रोक लगा दी गई है। इसके चलते पीड़ित छात्र अपनी छात्रवृत्ति का पैसा नहीं निकाल पा रहा है, जिससे उसकी पढ़ाई बाधित हो रही है। तहसील क्षेत्र के ग्राम लिधौरा निवासी छात्र ब्रजेश (पुत्र परमसिंह) ने इस संबंध में मड़ावरा के उपजिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। ब्रजेश का कस्बा स्थित बैंक शाखा में बचत खाता संचालित है, जिसमें शासन द्वारा उसकी छात्रवृत्ति भेजी गई थी, लेकिन बैंक प्रबंधन ने उसकी निकासी रोक दी।

जब पीड़ित छात्र ने इस मामले में बैंक अधिकारियों से बात की, तो उसे बताया गया कि उसके पिता ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से कर्ज लिया हुआ है, इसलिए उसकी छात्रवृत्ति का पैसा उस कर्ज की अदायगी में समायोजित किया जाएगा। पीड़ित छात्र का कहना है कि बैंक खाते से पैसा नहीं निकलने के कारण वह अपनी ट्यूशन फीस और जरूरी किताबें नहीं खरीद पा रहा है, जिससे उसकी पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
    user_IMRAN KHAN
    IMRAN KHAN
    Social Media Manager मड़ावरा, ललितपुर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • टीकमगढ़ वन मण्डल के सब रेंज दिगौडा के अंतर्गत आने वाले बिजरावन, कौंडिया और बरेठी बीट में वन विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 10 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में वन विभाग की टीम ने यह सफलता हासिल की। इस वन भूमि पर कुछ अतिक्रमणकारियों द्वारा रात के अंधेरे में चोरी-छिपे जुताई करके अवैध रूप से फसल बो दी गई थी। मामले की जानकारी मिलने पर कार्रवाई करते हुए वन विभाग की टीम ने जेसीबी मशीन की सहायता से बारी बागड़ को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। इसके बाद विभाग द्वारा उक्त खेत में कटीली प्रजाति के बीजों की बुवाई कर दी गई है। विभाग ने वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले सुखराम, लक्ष्मन, प्रभु, कनई, खरगा, गनेश, गोकुल और सुरेश के विरुद्ध कार्रवाई की है। इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली वन विभाग की टीम में डिप्टी रेंजर मनोहर सिंह घोष और शहीद खान सहित अन्य वनकर्मी मुख्य रूप से शामिल रहे।
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    टीकमगढ़ वन मण्डल के सब रेंज दिगौडा के अंतर्गत आने वाले बिजरावन, कौंडिया और बरेठी बीट में वन विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 10 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में वन विभाग की टीम ने यह सफलता हासिल की।

इस वन भूमि पर कुछ अतिक्रमणकारियों द्वारा रात के अंधेरे में चोरी-छिपे जुताई करके अवैध रूप से फसल बो दी गई थी। मामले की जानकारी मिलने पर कार्रवाई करते हुए वन विभाग की टीम ने जेसीबी मशीन की सहायता से बारी बागड़ को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। इसके बाद विभाग द्वारा उक्त खेत में कटीली प्रजाति के बीजों की बुवाई कर दी गई है।

विभाग ने वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले सुखराम, लक्ष्मन, प्रभु, कनई, खरगा, गनेश, गोकुल और सुरेश के विरुद्ध कार्रवाई की है। इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली वन विभाग की टीम में डिप्टी रेंजर मनोहर सिंह घोष और शहीद खान सहित अन्य वनकर्मी मुख्य रूप से शामिल रहे।
    user_ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)
    ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)
    पत्रकार टीकमगढ़, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बमनोरा में ₹25 लाख की लागत से बन रहे सामुदायिक भवन के निर्माण में भारी लापरवाही और अनियमितताएं सामने आई हैं। निर्माण स्थल पर मजदूरों की जान जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा है। यहां काम करने वाले मजदूर बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और सुरक्षा जूतों के ही ऊंचाई पर काम करने को मजबूर हैं। निर्माण कार्य के लिए बांस-बल्ली के कामचलाऊ और बेहद असुरक्षित मचान का उपयोग किया जा रहा है, जो कभी भी गिर सकता है। इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भवन निर्माण में बेहद घटिया ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और चिनाई भी टेढ़ी-मेढ़ी हो रही है। आरोप है कि टेंडर में स्वीकृत रेट की जगह बेहद घटिया स्तर के मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती और टिकाऊपन खतरे में पड़ गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे निर्माण के दौरान जिम्मेदार तकनीकी अमला और ठेकेदार मौके से नदारद हैं, जिससे पूरा काम बिना किसी जांच और निगरानी के पूरी तरह 'भगवान भरोसे' चल रहा है। इस बदहाली को लेकर ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत से पुरजोर मांग की है कि तत्काल इस साइट का निरीक्षण कर निर्माण कार्य को रुकवाया जाए। इसके साथ ही, निर्माण में इस्तेमाल हो रहे मटेरियल, माप पुस्तिका और अब तक हुए भुगतान का कड़ाई से परीक्षण कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने मजदूरों को अनिवार्य रूप से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई है।
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    छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बमनोरा में ₹25 लाख की लागत से बन रहे सामुदायिक भवन के निर्माण में भारी लापरवाही और अनियमितताएं सामने आई हैं। निर्माण स्थल पर मजदूरों की जान जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा है। यहां काम करने वाले मजदूर बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और सुरक्षा जूतों के ही ऊंचाई पर काम करने को मजबूर हैं। निर्माण कार्य के लिए बांस-बल्ली के कामचलाऊ और बेहद असुरक्षित मचान का उपयोग किया जा रहा है, जो कभी भी गिर सकता है।

इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भवन निर्माण में बेहद घटिया ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और चिनाई भी टेढ़ी-मेढ़ी हो रही है। आरोप है कि टेंडर में स्वीकृत रेट की जगह बेहद घटिया स्तर के मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती और टिकाऊपन खतरे में पड़ गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे निर्माण के दौरान जिम्मेदार तकनीकी अमला और ठेकेदार मौके से नदारद हैं, जिससे पूरा काम बिना किसी जांच और निगरानी के पूरी तरह 'भगवान भरोसे' चल रहा है।

इस बदहाली को लेकर ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत से पुरजोर मांग की है कि तत्काल इस साइट का निरीक्षण कर निर्माण कार्य को रुकवाया जाए। इसके साथ ही, निर्माण में इस्तेमाल हो रहे मटेरियल, माप पुस्तिका और अब तक हुए भुगतान का कड़ाई से परीक्षण कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने मजदूरों को अनिवार्य रूप से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई है।
    user_मध्य प्रदेश श्रमजीवी संदीप सिंह घोष
    मध्य प्रदेश श्रमजीवी संदीप सिंह घोष
    Ghuwara, Chhatarpur•
    3 hrs ago
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