अम्बेडकर पार्क की जमीन पर अवैध कब्जा.. ग्रामसभा मंझरिया गंगा फर्जी दस्तावेजों के सहारे फर्जी दलित बन दलीत के पट्टे की जमीन का बैनामा , एसडीएम से हुई शिकायत राजस्व कर्मियों के मिली भगत का भी लगा आरोप डीएम की अनुमति के बिना अनुसूचित जाति की पट्टे की भूमि फर्जी दलित बनकर कराया बैनामा अब कर रहा अंबेडकर पार्क की आरक्षित भूमि पर कब्जा ; अवैध निर्माण रोकने की उठी मांग। MYogiAdityanath UP Police Santkabirnagar Police #संतकबीरनगर। तहसील खलीलाबाद के ग्राम मंझरिया गंगा में अनुसूचित जाति के पट्टे की भूमि को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। नैनीडीहा निवासी एवं वर्तमान में मंझरिया गंगा में रह रहे अरविन्द कुमार यादव ने समाधान दिवस में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) खलीलाबाद को शिकायती पत्र देकर पट्टे की जमीन पर कथित फर्जीवाड़े, अवैध बैनामे, अवैध कब्जे और निर्माण की शिकायत करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम मंझरिया गंगा स्थित गाटा संख्या 360 सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के रामचेत पुत्र रामबली को पट्टे पर आवंटित की गई थी। बाद में यह भूमि अनुसूचित जाति की महिला बासमती देवी के नाम चली गई। आरोप है कि बासमती देवी ने सक्षम प्राधिकारी यानी जिलाधिकारी की अनुमति के बिना तथा कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लेकर स्वयं को अनुसूचित जाति का पात्र दर्शाते हुए इस भूमि का बैनामा गैर अनुसूचित जाति के व्यक्ति दलेश्वर चौधरी पुत्र सुरजू चौधरी के पक्ष में करा दिया। अरविन्द यादव का कहना है कि नियमानुसार अनुसूचित जाति के पट्टे की भूमि का हस्तांतरण निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। उनका आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर किया गया यह बैनामा न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि सरकार के साथ गंभीर धोखाधड़ी का मामला भी है। शिकायत में दावा किया गया है कि इस प्रकार का हस्तांतरण होने के कारण भूमि ग्राम समाज की श्रेणी में आ चुकी है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विवादित गाटा संख्या 360 पर वर्तमान में तेजी से निर्माण कार्य कराया जा रहा है और भूमि की मूल प्रकृति बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से यह निर्माण कार्य जारी है, जबकि पूरे मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले से दी जा चुकी है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इसी गाटा संख्या में 0.124 हेक्टेयर भूमि अंबेडकर पार्क के लिए आरक्षित है। आरोप है कि इस आरक्षित भूमि पर भी कब्जा कर निर्माण करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही निर्माण के दौरान शिकायतकर्ता की निजी भूमि पर भी अतिक्रमण किए जाने का आरोप लगाया गया है। अरविन्द यादव का कहना है कि कथित फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब इसी गाटा संख्या से लीलावती पत्नी रामहुजूर के पक्ष में भी कुछ भूमि का बैनामा किया गया। उनका आरोप है कि पूरे मामले के दस्तावेज संबंधित राजस्व अधिकारियों को उपलब्ध कराने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई और निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है। शिकायतकर्ता ने कानूनगो सहित कुछ स्थानीय अधिकारियों और पुलिस कर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। समाधान दिवस में दिए गए प्रार्थना पत्र के माध्यम से अरविन्द यादव ने एसडीएम से मांग की है कि गाटा संख्या 360 पर चल रहे कथित अवैध निर्माण को तत्काल प्रभाव से रुकवाया जाए, पूरे प्रकरण की राजस्व एवं प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अम्बेडकर पार्क की जमीन पर अवैध कब्जा.. ग्रामसभा मंझरिया गंगा फर्जी दस्तावेजों के सहारे फर्जी दलित बन दलीत के पट्टे की जमीन का बैनामा , एसडीएम से हुई शिकायत राजस्व कर्मियों के मिली भगत का भी लगा आरोप डीएम की अनुमति के बिना अनुसूचित जाति की पट्टे की भूमि फर्जी दलित बनकर कराया बैनामा अब कर रहा अंबेडकर पार्क की आरक्षित भूमि पर कब्जा ; अवैध निर्माण रोकने की उठी मांग। MYogiAdityanath UP Police Santkabirnagar Police #संतकबीरनगर। तहसील खलीलाबाद के ग्राम मंझरिया गंगा में अनुसूचित जाति के पट्टे की भूमि को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। नैनीडीहा निवासी एवं वर्तमान में मंझरिया गंगा में रह रहे अरविन्द कुमार यादव ने समाधान दिवस में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) खलीलाबाद को शिकायती पत्र देकर पट्टे की जमीन पर कथित फर्जीवाड़े, अवैध बैनामे, अवैध कब्जे और निर्माण की शिकायत करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम मंझरिया गंगा स्थित गाटा संख्या 360 सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के रामचेत पुत्र रामबली को पट्टे पर आवंटित की गई थी। बाद में यह भूमि अनुसूचित जाति की महिला बासमती देवी के नाम चली गई। आरोप है कि बासमती देवी ने सक्षम प्राधिकारी यानी जिलाधिकारी की अनुमति के बिना तथा कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लेकर स्वयं को अनुसूचित जाति का पात्र दर्शाते हुए इस भूमि का बैनामा गैर अनुसूचित जाति के व्यक्ति दलेश्वर चौधरी पुत्र सुरजू चौधरी के पक्ष में करा दिया। अरविन्द यादव का कहना है कि नियमानुसार अनुसूचित जाति के पट्टे की भूमि का हस्तांतरण निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। उनका आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर किया गया यह बैनामा न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि सरकार के साथ गंभीर धोखाधड़ी का मामला भी है। शिकायत में दावा किया गया है कि इस प्रकार का हस्तांतरण होने के कारण भूमि ग्राम समाज की श्रेणी में आ चुकी है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विवादित गाटा संख्या 360 पर वर्तमान में तेजी से निर्माण कार्य कराया जा रहा है और भूमि की मूल प्रकृति बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से यह निर्माण कार्य जारी है, जबकि पूरे मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले से दी जा चुकी है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इसी गाटा संख्या में 0.124 हेक्टेयर भूमि अंबेडकर पार्क के लिए आरक्षित है। आरोप है कि इस आरक्षित भूमि पर भी कब्जा कर निर्माण करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही निर्माण के दौरान शिकायतकर्ता की निजी भूमि पर भी अतिक्रमण किए जाने का आरोप लगाया गया है। अरविन्द यादव का कहना है कि कथित फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब इसी गाटा संख्या से लीलावती पत्नी रामहुजूर के पक्ष में भी कुछ भूमि का बैनामा किया गया। उनका आरोप है कि पूरे मामले के दस्तावेज संबंधित राजस्व अधिकारियों को उपलब्ध कराने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई और निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है। शिकायतकर्ता ने कानूनगो सहित कुछ स्थानीय अधिकारियों और पुलिस कर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। समाधान दिवस में दिए गए प्रार्थना पत्र के माध्यम से अरविन्द यादव ने एसडीएम से मांग की है कि गाटा संख्या 360 पर चल रहे कथित अवैध निर्माण को तत्काल प्रभाव से रुकवाया जाए, पूरे प्रकरण की राजस्व एवं प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
- 🤼♂️स्वस्थ रहो,मस्त रहो 🤼♀️👍1
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- कैम्पियरगंज तहसील दिवस: डीएम-एसएसपी की सख्ती, लंबित मामलों पर जवाबदेही तय भूमि विवाद, अतिक्रमण व पुलिस प्रकरणों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश, लापरवाही पर चेतावनी गोरखपुर :- कैम्पियरगंज तहसील में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी दीपक मीणा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कोस्तुभ ने सख्त रुख अपनाते हुए जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण पर जोर दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लंबित शिकायतों को लेकर संबंधित विभाग सीधे जवाबदेह होंगे और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई तय है। समाधान दिवस में बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादियों ने भूमि विवाद, अवैध कब्जा, पैमाइश, अतिक्रमण, रास्ता अवरोध, मारपीट, धमकी और पुलिस निष्क्रियता जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े प्रकरण रखे। कई शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्रों पर कार्रवाई नहीं हुई, जिससे विवाद बढ़ते जा रहे हैं। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि समाधान दिवस में आने वाली शिकायतें ‘प्राथमिक श्रेणी’ में ली जाएं और उनका निस्तारण तय समय सीमा में अनिवार्य रूप से किया जाए। भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों पर डीएम ने उपजिलाधिकारी और राजस्व टीम को निर्देश दिया कि पैमाइश और सीमांकन के मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मौके पर जाकर माप कर स्पष्ट रिपोर्ट तैयार की जाए, जिसमें कब्जे की स्थिति, सीमांकन और विवाद के बिंदु साफ-साफ अंकित हों। अधूरी या भ्रामक रिपोर्ट देने वाले कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कोस्तुभ ने पुलिस से संबंधित शिकायतों की सुनवाई करते हुए थाना स्तर की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जमीन कब्जा, मारपीट, धमकी और आपसी विवाद के मामलों में पुलिस की तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है। संबंधित थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया कि हर शिकायत पर मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष जांच करें और पीड़ित पक्ष को सुरक्षा उपलब्ध कराएं। साथ ही, लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर उनकी साप्ताहिक समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए। अतिक्रमण के मामलों पर प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई। डीएम ने कहा कि सार्वजनिक मार्ग, नाली, खलिहान और अन्य सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा हटाया जाए। इसके लिए राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाने के निर्देश दिए गए, ताकि विवादों का स्थायी समाधान हो सके। समाधान दिवस में कई प्रकरण ऐसे भी सामने आए, जिनमें सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने, पेंशन, आवास, राशन कार्ड और अन्य सुविधाओं में देरी की शिकायत की गई। डीएम ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि पात्र लाभार्थियों की सूची का पुनः सत्यापन कर जल्द से जल्द लाभ दिलाया जाए। किसी भी स्तर पर अनावश्यक बाधा या देरी पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों का निस्तारण मौके पर संभव है, उन्हें तत्काल हल किया जाए। शेष मामलों को निर्धारित समयसीमा में निपटाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। डीएम ने कहा कि समाधान दिवस के प्रकरणों की मॉनिटरिंग व्यक्तिगत स्तर पर की जाएगी। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी कैम्पियरगंज, क्षेत्राधिकारी कैम्पियरगंज, नायब तहसीलदार, प्रभारी निरीक्षक कैम्पियरगंज सहित राजस्व, पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे फील्ड में जाकर समस्याओं का समाधान करें और किसी भी शिकायत को लंबित न रखें। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने दोहराया कि शासन की मंशा के अनुरूप आमजन को त्वरित न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है। वहीं एसएसपी डॉ. कोस्तुभ ने कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन कड़ी निगरानी और प्रशासनिक सख्ती के बीच संपन्न हुआ, जिसमें अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब शिकायतों के निस्तारण में देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।2
- महुडर गांव में खूनी संघर्ष: 29 जुलाई की शाम हुए विवाद में एक पक्ष की 8 महिलाओं के सिर पर आईं गंभीर चोटें, बुजुर्ग महिला का हाथ टूटा। अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती: पुरानी बस्ती पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल, गंभीर चोटों को भी मामूली धाराओं में दबाने का आरोप महुडर गांव में खूनी संघर्ष: 29 जुलाई की शाम हुए विवाद में एक पक्ष की 8 महिलाओं के सिर पर आईं गंभीर चोटें, बुजुर्ग महिला का हाथ टूटा। तहरीर बदलवाने का गंभीर आरोप: पीड़िताओं का दावा, थाने पर पुलिस ने दबाव बनाकर बदलवाई तहरीर और संगीन मामले को किया हल्का। तहसील समाधान दिवस में पहुंचा पीड़िताओं का दर्द: न्याय की गुहार लगाते हुए मुकदमा अपराध संख्या 148/26 में BNS की धारा 109 बढ़ाने की उठी जोरदार मांग। बस्ती: जनपद के पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर खासे चर्चा और सवालों के घेरे में है। यहां न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचने वाले फरियादियों को शायद यह नहीं पता होगा कि खाकी के दरबार में न्याय की परिभाषा अब दर्द और सबूतों की गंभीरता से नहीं, बल्कि शायद किसी और पैमाने पर तय होती है। ताजा मामला थाना क्षेत्र के महुडर गांव का है, जहां जमीन विवाद के खूनी संघर्ष में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन पुलिस की मेहरबानी से संगीन मामले को महज मामूली धाराओं में दर्ज कर खानापूर्ति कर ली गई। क्या है पूरा मामला? बीती 29 जुलाई को शाम 4:00 बजे महुडर गांव में जमीन के विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। यह मारपीट इतनी उग्र थी कि इसमें एक पक्ष की 8 महिलाओं के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि एक बुजुर्ग महिला का हाथ तक टूट गया। खून से लथपथ और दर्द से कराहती ये महिलाएं जब न्याय की आस लेकर पुरानी बस्ती थाने पहुंचीं, तो पुलिस का रवैया देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़िताओं का सीधा आरोप है कि थाने पर उनसे जबरन तहरीर बदलवाई गई और इतनी भीषण मारपीट व गंभीर चोटों के बावजूद पुलिस ने मुकदमे को महज मामूली धाराओं में दर्ज कर आरोपियों को बचाने का खुला रास्ता तैयार कर दिया। तहसील समाधान दिवस में गूंजा दर्द, न्याय की गुहार थानों से नाउम्मीद होने के बाद पीड़ित महिलाएं अपनी टूटी हड्डियों और सिर पर लगे गंभीर जख्मों को लेकर तहसील समाधान दिवस पहुंचीं। वहां उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी आपबीती सुनाई और न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित पक्ष की साफ और दो टूक मांग है कि मुकदमा अपराध संख्या 148/26 में महज औपचारिकता निभाने वाली धाराओं के बजाय भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (प्रयास या ऐसी चोट जो मृत्यु का कारण बन सके) जैसी गंभीर धाराएं बढ़ाई जाएं, ताकि आरोपियों को उनके किए की सही सजा मिल सके। तीखा सवाल: क्या खाकी के लिए इंसानियत के दर्द के कोई मायने नहीं? यह घटना पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर एक बड़ा और गंभीर सवालिया निशान लगाती है— क्या पुरानी बस्ती थाने की पुलिस किसी बड़े दबाव में काम कर रही है? क्या एक बुजुर्ग महिला का हाथ टूटना और 8 महिलाओं के सिर फटना पुलिस की नजर में 'मामूली बात' है? अगर थाने की चौखट पर ही फरियादियों की तहरीर बदलवाकर उनके जख्मों का मजाक उड़ाया जाएगा, तो आम जनता कानून और न्याय व्यवस्था पर कैसे भरोसा करेगी? जिले के उच्चाधिकारियों को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। महुडर गांव के इस प्रकरण में लिप्त लापरवाह पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और मुकदमे में तत्काल गंभीर धाराएं जोड़कर पीड़िताओं को वास्तविक न्याय दिलाया जाना चाहिए, ताकि खाकी की वर्दी पर लगे इस दाग को धोया जा सके।1