“आखिर कौन हैं राकेश कुमार सिन्हा? झपहाँ डीह के जमीन विवाद में जिन पर लग रहे हैं गंभीर आरोप… मुजफ्फरपुर के झपहाँ डीह में करीब एक एकड़ 54 डिसमिल जमीन को लेकर चल रहे विवाद में दूसरे पक्ष के जनार्दन कुमार ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर गंभीर आरोप लगाए हैं। जनार्दन कुमार का दावा है कि यह जमीन उनके माता-पिता गजेंद्र प्रसाद और शशिकला देवी के नाम से है। उनका आरोप है कि राकेश कुमार सिन्हा ने कथित तौर पर भू माफियाओं के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस जमीन की बिक्री कर दी। जनार्दन कुमार के मुताबिक, जिस डीड के आधार पर जमीन पर दावा किया जा रहा है, वह वर्ष 1971-72 के आसपास की बताई जा रही है। उनका दावा है कि उस समय राकेश कुमार सिन्हा की उम्र करीब दो वर्ष थी। इसके बावजूद दस्तावेज में उन्हें नाबालिग नहीं दर्शाया गया।राकेश कुमार सिन्हा को 2 साल की उम्र में बिजनेस मैंन बताया गया है । उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। जनार्दन कुमार ने बताया कि वह तीन भाई हैं—सबसे बड़े त्रिभुवन कुमार, उसके बाद अमित प्रकाश और फिर जनार्दन कुमार। उनका कहना है कि वर्ष 1972 से उनके परिवार का इस जमीन पर कब्जा और खेती-बाड़ी होती आ रही है। उनका आरोप है कि मामले को लेकर कई बार अहियापुर थाना और सीओ कार्यालय में आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल कई हैं… आखिर कौन हैं राकेश कुमार सिन्हा, जिन पर ये गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं? जमीन विवाद में असली मालिकाना हक आखिर किसका है? आखिर एक ही जमीन पर दो-दो दावेदार कैसे सामने आए? और अगर जमीन एक ही है, तो दो-दो लोगों के नाम से रसीद कैसे कट रही है? ये ऐसे सवाल हैं, जो इस पूरे जमीन विवाद को और गंभीर बना रहे हैं। जनार्दन कुमार ने प्रशासन से जमीन के सभी दस्तावेजों की जांच कराकर निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय की मांग की है। हालांकि, अभी तक राकेश कुमार सिन्हा का पक्ष सामने नहीं आया है । प्रशासनिक जांच-पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि जमीन का वास्तविक मालिकाना हक किसका है और इस पूरे मामले की सच्चाई क्या है।
“आखिर कौन हैं राकेश कुमार सिन्हा? झपहाँ डीह के जमीन विवाद में जिन पर लग रहे हैं गंभीर आरोप… मुजफ्फरपुर के झपहाँ डीह में करीब एक एकड़ 54 डिसमिल जमीन को लेकर चल रहे विवाद में दूसरे पक्ष के जनार्दन कुमार ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर गंभीर आरोप लगाए हैं। जनार्दन कुमार का दावा है कि यह जमीन उनके माता-पिता गजेंद्र प्रसाद और शशिकला देवी के नाम से है। उनका आरोप है कि राकेश कुमार सिन्हा ने कथित तौर पर भू माफियाओं के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस जमीन की बिक्री कर दी। जनार्दन कुमार के मुताबिक, जिस डीड के आधार पर जमीन पर दावा किया जा रहा है, वह वर्ष 1971-72 के आसपास की बताई जा रही है। उनका दावा है कि उस समय राकेश कुमार सिन्हा की उम्र करीब दो वर्ष थी। इसके बावजूद दस्तावेज में उन्हें नाबालिग नहीं दर्शाया गया।राकेश कुमार सिन्हा को 2 साल की उम्र में बिजनेस मैंन बताया गया है । उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। जनार्दन कुमार ने बताया कि वह तीन भाई हैं—सबसे बड़े त्रिभुवन कुमार, उसके बाद अमित प्रकाश और फिर जनार्दन कुमार। उनका कहना है कि वर्ष 1972 से उनके परिवार का इस जमीन पर कब्जा और खेती-बाड़ी होती आ रही है। उनका आरोप है कि मामले को लेकर कई बार अहियापुर थाना और सीओ कार्यालय में आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल कई हैं… आखिर कौन हैं राकेश कुमार सिन्हा, जिन पर ये गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं? जमीन विवाद में असली मालिकाना हक आखिर किसका है? आखिर एक ही जमीन पर दो-दो दावेदार कैसे सामने आए? और अगर जमीन एक ही है, तो दो-दो लोगों के नाम से रसीद कैसे कट रही है? ये ऐसे सवाल हैं, जो इस पूरे जमीन विवाद को और गंभीर बना रहे हैं। जनार्दन कुमार ने प्रशासन से जमीन के सभी दस्तावेजों की जांच कराकर निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय की मांग की है। हालांकि, अभी तक राकेश कुमार सिन्हा का पक्ष सामने नहीं आया है । प्रशासनिक जांच-पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि जमीन का वास्तविक मालिकाना हक किसका है और इस पूरे मामले की सच्चाई क्या है।
- “आखिर कौन हैं राकेश कुमार सिन्हा? झपहाँ डीह के जमीन विवाद में जिन पर लग रहे हैं गंभीर आरोप… मुजफ्फरपुर के झपहाँ डीह में करीब एक एकड़ 54 डिसमिल जमीन को लेकर चल रहे विवाद में दूसरे पक्ष के जनार्दन कुमार ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर गंभीर आरोप लगाए हैं। जनार्दन कुमार का दावा है कि यह जमीन उनके माता-पिता गजेंद्र प्रसाद और शशिकला देवी के नाम से है। उनका आरोप है कि राकेश कुमार सिन्हा ने कथित तौर पर भू माफियाओं के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस जमीन की बिक्री कर दी। जनार्दन कुमार के मुताबिक, जिस डीड के आधार पर जमीन पर दावा किया जा रहा है, वह वर्ष 1971-72 के आसपास की बताई जा रही है। उनका दावा है कि उस समय राकेश कुमार सिन्हा की उम्र करीब दो वर्ष थी। इसके बावजूद दस्तावेज में उन्हें नाबालिग नहीं दर्शाया गया।राकेश कुमार सिन्हा को 2 साल की उम्र में बिजनेस मैंन बताया गया है । उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। जनार्दन कुमार ने बताया कि वह तीन भाई हैं—सबसे बड़े त्रिभुवन कुमार, उसके बाद अमित प्रकाश और फिर जनार्दन कुमार। उनका कहना है कि वर्ष 1972 से उनके परिवार का इस जमीन पर कब्जा और खेती-बाड़ी होती आ रही है। उनका आरोप है कि मामले को लेकर कई बार अहियापुर थाना और सीओ कार्यालय में आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल कई हैं… आखिर कौन हैं राकेश कुमार सिन्हा, जिन पर ये गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं? जमीन विवाद में असली मालिकाना हक आखिर किसका है? आखिर एक ही जमीन पर दो-दो दावेदार कैसे सामने आए? और अगर जमीन एक ही है, तो दो-दो लोगों के नाम से रसीद कैसे कट रही है? ये ऐसे सवाल हैं, जो इस पूरे जमीन विवाद को और गंभीर बना रहे हैं। जनार्दन कुमार ने प्रशासन से जमीन के सभी दस्तावेजों की जांच कराकर निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय की मांग की है। हालांकि, अभी तक राकेश कुमार सिन्हा का पक्ष सामने नहीं आया है । प्रशासनिक जांच-पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि जमीन का वास्तविक मालिकाना हक किसका है और इस पूरे मामले की सच्चाई क्या है।1
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- अबाबकरपुर पंचायत में लगा सहयोग शिविर, कुल 15 आवेदनो में से 7 का शीघ्र समाधान चेहराकलां प्रखंड की अबाबकरपुर पंचायत में मंगलवार को सहयोग शिविर लगाया गया। इसका मकसद ग्रामीणों की समस्याओं को तुरंत हल करना और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाना था। शिविर में पंचायत के कई गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। उन्होंने अलग-अलग विभागों से जुड़ी अपनी समस्याएं और आवेदन अधिकारियों को दिए। चेहराकलां के प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. मो. इस्माईल अंसारी ने बताया कि शिविर में कुल 15 आवेदन मिले। इनमें से 7 आवेदनों का तुरंत निपटारा कर दिया गया। बाकी बचे आवेदनों का भी जल्द ही समाधान किया जाएगा। इस शिविर में प्रखंड प्रशासन, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज विभाग, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग, आपूर्ति विभाग, श्रम संसाधन विभाग और जीविका जैसे कई विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी दिक्कतें बताईं। कई मामलों में मौके पर ही संबंधित विभाग के कर्मचारियों ने जरूरी जानकारी और समाधान उपलब्ध कराया। राजस्व विभाग के काउंटर पर लोगों ने जमीन से जुड़े मामलों, दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व कामों की जानकारी ली। समाज कल्याण विभाग ने वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन सहित दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में बताया। स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य संबंधी सलाह और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को कृषि योजनाओं, अनुदान, बीज और खेती से जुड़ी सरकारी सुविधाओं के बारे में बताया। इसके अलावा, आपूर्ति विभाग के काउंटर पर राशन कार्ड बनवाने, केवाईसी कराने और जन वितरण प्रणाली से जुड़ी समस्याएं सुनी गईं। बिजली विभाग के प्रतिनिधियों ने बिजली कनेक्शन, बिल और दूसरी बिजली संबंधी शिकायतें सुनीं। श्रम संसाधन विभाग और जीविका ने मजदूरों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। शिविर के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने, आवेदन लेने और संबंधित विभागों के जरिए उनके समाधान की प्रक्रिया शुरू करने पर खास जोर दिया गया। इस कार्यक्रम में चेहराकलां बीडीओ डॉ. मो. इस्माईल अंसारी, अंचल अधिकारी अनिल कुमार, राजस्व अधिकारी कुमार गौरव, कृषि पदाधिकारी शशि प्रकाश, कार्यक्रम पदाधिकारी प्रीति कुमारी सहित अन्य पदाधिकारी, स्वच्छता पर्यवेक्षक अरविंद कुमार, पंचायत प्रतिनिधि, विभागीय कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।3
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